अमरकांत – जीवन परिचय, साहित्यिक, रचनाएं, भाषा शैली एवं साहित्य में स्थान

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हमने “अमरकांत का जीवन परिचय” (Amarkantak biography in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है। इसमें हमने अमरकान्त का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएं एवं कृतियां, भाषा शैली एवं साहित्य में स्थान और अमरकान्त किस युग के कवि हैं को भी विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि आप परीक्षाओं में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकें। इसके अलावा इसमें हमने अमरकान्तजी के जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर भी दिए हैं, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

अमरकांत का जीवन परिचय

हिन्दी कथा साहित्य में मुंशी प्रेमचन्द जी के बाद यथार्थवादी काव्य धारा के प्रमुख कहानीकार के रूप में श्री अमरकान्त जी को जाना जाता हैं। इनका वास्तविक नाम ‘श्रीराम वर्मा’ है। इनका जन्म 01 जुलाई, सन् 1925 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में नगरा के पास भगमलपुर नामक ग्राम में हुआ। इनके पिता का नाम श्री सीताराम वर्मा एवं माता का नाम श्रीमती अनंती देवी था।

अमरकान्त जी ने गवर्नमेंट हाईस्कूल, बलिया से हाईस्कूल की शिक्षा पायी। कुछ समय तक इन्होंने गोरखपुर और इलाहाबाद में इंटरमीडिएट की पढ़ाई की, जो 1942 के स्वाधीनता संग्राम में शामिल होने से अधूरी रह गयी, और अंततः सन् 1946 ई० में सतीशचंद्र कॉलेज बलिया से इंटरमीडिएट किया। इन्होंने सन् 1947 ई० में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी० ए० किया और सन् 1948 ई० में आगरा के दैनिक पत्र ‘सैनिक’ के संपादकीय विभाग में नौकरी कर ली। आगरा में ही ये ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ में शामिल हुए और वहीं से कहानी लेखन की शुरुआत की। बाद में ये दैनिक ‘अमृत पत्रिका’ इलाहाबाद, दैनिक ‘भारत’ इलाहाबाद, मासिक पत्रिका ‘कहानी’ इलाहाबाद तथा ‘मनोरमा’ इलाहाबाद के भी संपादकीय विभागों से सम्बद्ध रहे। इनकी प्रथम कहानी, ‘बाबू’ आगरा के सैनिक पत्र में छपी तथा एक वर्ष बाद ‘इण्टरव्यू’ कहानी का प्रकाशन हुआ। अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में इनकी कहानी ‘डिप्टी कलक्टरी’ पुरस्कृत हुई थी। इन्हें कथा लेखन के लिए ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ भी प्राप्त हो चुका है। 17 फरवरी, सन् 2014 ईस्वी को इलाहाबाद में इनका देहावसान हो गया।

अमरकांत की प्रमुख रचनाएं

अमरकान्तजी ने कहानी, उपन्यास, संस्मरण और बाल-साहित्य आदि में अपनी लेखनी चलाई है, इनकी प्रमुख रचनाएँ कुछ इस प्रकार से हैं—

  1. कहानी-संग्रह — जिन्दगी और जोंक, देश के लोग, मौत का नगर, मित्र मिलन, कुहासा, तूफान, कला प्रेमी, प्रतिनिधि कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, एक धनी व्यक्ति का बयान, सुख और दुख के साथ, जाँच और बच्चे, औरत के क्रोध, अमरकान्त की सम्पूर्ण कहानियाँ (दो खंडों में) आदि।
  2. उपन्यास — सूखा पत्ता, काले-उजले दिन, कंटीली राह के फूल, ग्राम सेविका, पराई डाल का पंछी, सुखजीवी, बीच की दीवार, दीवार और आँगन, पांडे की पतोह, आकाश पक्षी, इन्हीं हथियारों से, विदा की रात, लहरे आदि।
  3. संस्मरण — कुछ दे – कुछ बातें, दोस्ती आदि।
  4. बाल-साहित्य — वानर सेना, झगरू लाल का फैसला, मंगरी, दो ही बच्चे, खूंटा में दाल है, नेऊर भाई, सुग्गी चाची का गाँव, बाबू का फैसला आदि।
  5. कहानियां — इन्टरव्यू, डिप्टी कलक्टरी, हत्यारे, दोपहर का भोजन, गगन बिहारी, घुड़सवार, छिपकली, लड़का-लडकी आदि इनकी श्रेष्ठ कहानियाँ हैं।

अमरकांत का साहित्यिक परिचय

आजादी के बाद के हिंदी कथा साहित्य के महत्त्वपूर्ण कथाकार अमरकान्त जी की कहानियों में मध्यवर्ग, विशेषकर निम्न मध्यवर्ग के जीवनानुभवों और जिजीविषा का बेहद प्रभावशाली और अंतरंग चित्रण मिलता है। अक्सर सपाट नजर आनेवाले कथनों में भी ये अपने जीवंत मानवीय संस्पर्श के कारण अनोखी आभा पैदा कर देते हैं। अमरकान्तजी नयी कहानी आंदोलन के एक प्रसिद्ध कहानीकार हैं। इन्होंने अपनी कहानियों में शहरी और ग्रामीण जीवन का सच्चा चित्रण किया है। ये खासतौर पर मध्यवर्ग के जीवन की वास्तविकता और विसंगतियों को दर्शाने वाले कहानीकार हैं। आजकल के समाज में फैली अमानवीयता, हृदयहीनता, पाखंड, आडंबर आदि को इन्होंने अपनी कहानियों का आधार बनाया है। वर्तमान के सामाजिक जीवन और उसके अनुभवों को अमरकान्तजी ने वास्तविक ढंग से उजागर किया है। इनकी शैली की सरलता और भाषा की सजीवता पाठकों को अपनी और खींचती है। आंचलिक मुहावरों और शब्दों के प्रयोग से उनकी कहानियों में जीवंतता आती है। अमरकांत की कहानियों के शिल्प में पाठकों को चमत्कृत करने का प्रयास नहीं है। ये जीवन की कथा उसी माध्यम से कहते हैं, जिस माध्यम से जीवन चलता है।

अमरकांत की भाषा शैली

अमरकान्त जी की कथाशैली सामाजिक व्यंग्यपरक सरल और सहज है, उसमें किसी प्रकार कोई दुराव छिपाव वक्रता अथवा ‘फैशन’ नहीं है। अमरकान्तजी के व्यक्तित्व की तरह इनकी भाषा में भी एक खास किस्म का फक्कड़पन है। लोकजीवन के मुहावरों और देशज शब्दों के प्रयोग से इनकी भाषा में एक ऐसी चमक पैदा हो जाती है जो पाठकों को निजी लोक में ले जाती है। इनकी कहानियों की भाषा बोधगम्य सरस तथा प्रवाहमयी है जिसमें सादगी है। इनकी कहानियाँ करुणामयी मूलक होती है। पत्थर की तरह ठोस और कंक्रीट की तरह शक्तिसम्पन्न कहा जा सकता है। ‘जिन्दगी और जोंक’ इनकी प्रसिद्ध कहानी है, जिसने यथार्थवादी कहानी की परम्परा को नये स्तर पर लाकर खड़ा किया है।

अमरकांत जी के पुरस्कार एवं सम्मान

अमरकान्त जी को कथा साहित्य के लिए ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा इन्हें ‘सोवियत लैंड नेहरू’ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश संस्थान की ओर से भी इन्हें पुरस्कृत किया गया है।

अमरकांत जी का साहित्य में स्थान

हिन्दी कथा साहित्य में प्रेमचन्द के बाद यथार्थवादी धारा के प्रमुख कहानीकार के रूप में अमरकान्त जाने जाते हैं। नये कहानीकारों में अमरकान्त जी का विशेष महत्त्वपूर्ण स्थान है।

अमरकांत की कहानी की विशेषताएं

अमरकान्तजी की प्रस्तुत कहानी ‘बहादुर’ में मँझोले शहर के नौकर की लालसा वाले एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में काम करनेवाले बहादुर की कहानी है एक नेपाली गँवई गोरखे की। परिवार का नौकरी-पेशा मुखिया तटस्थ स्वर में बहादुर के आने और अपने स्वच्छंद निश्छल स्वभाव की आत्मीयता के साथ नौकर के रूप में अपनी सेवाएँ देने के बाद एक दिन स्वभाव की उसी स्वच्छंदता के साथ हर हृदय में एक कसकती अंतर्व्यथा देकर चले जाने की कहानी कहता है। लेखक घर के भीतर और बाहर के यथार्थ को बिना बनाई-सँवारी सहज परिपक्व भाषा में पूरी कहानी बयान करता है। हिंदी कहानी में एक नये नायक का यह कहानी प्रतिष्ठित करती है।

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