अमेरिकी क्रांति, NCERT सार संग्रह | American Revolution in Hindi

हेलो दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको संक्षिप्त इतिहास NCERT सार संग्रह “महेश कुमार वर्णवाल” Book का अध्याय “अमेरिकी क्रांति” (American Revolution in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। इसमें हम आपको अमेरिका की क्रांति कब और क्यों हुई? एवं अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के तीन प्रमुख कारणों की विवेचना को विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाएंगे, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें।

अमेरिकी क्रांति

  • 16वीं सदी के प्रारंभ में यूरोप के देशों ने अमेरिका में अपने उपनिवेश स्थापित करने आरंभ कर दिए थे।
  • उत्तरी अमेरिका में फ्रांस, हॉलैंड, स्पेन और इंग्लैण्ड ने अपने-अपने उपनिवेश स्थापित किए।
  • 18वीं सदी में अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों को उत्तरी अमेरिका और कनाडा के पूर्वी तट से खदेड़ दिया। उन्होंने डच लोगों से न्यू नीदरलैंड नाम का प्रदेश पहले ही ले लिया था। उन्होंने उस प्रदेश का नाम परिवर्तित कर न्यूयॉर्क रख दिया।

अमेरिका में अंग्रेजों के उपनिवेश

  • 18वीं सदी के मध्य में उत्तरी अमेरिका के अटलांटिक महासागर वाले तट के निकट अंग्रेजों के 13 उपनिवेश थे।
  • भूमिहीन किसान, धार्मिक स्वतंत्रता चाहने वाले व्यक्ति, व्यापारी और मुनाफाखोर व्यक्ति इन उपनिवेशों में जाकर बस गए थे।
  • इस जनसंख्या में सबसे अधिक स्वतंत्र किसान थे। वहाँ ऊन, पटसन और चमड़े के उद्योगों का प्रारंभ हो गया था।
  • उत्तरी उपनिवेशों के निवासियों का मुख्य व्यवसाय मछली पकड़ना और जहाज बनाना था।
    🔺प्रत्येक उपनिवेश में एक विधान सभा थी, जिसके सदस्य विशेष योग्यता प्राप्त मतदाताओं द्वारा चुने जाते थे।
  • ये सभाएँ स्थानीय मामलों के बारे में कानून बनाती और कर लगाती थीं, किन्तु वे उस देश की सरकार के अधीन थी जिनके वे उपनिवेश थे।

अमेरिकी स्वाधीनता युद्ध के कारण

  • अमेरिका के उपनिवेशों की अप्रसन्नता का मुख्य कारण आर्थिक मामलों में ब्रिटेन की औपनिवेशिक नीति थी।
  • इंग्लैण्ड की नीतियों ने अमेरिकी उपनिवेशों को अपनी स्वयं की अर्थव्यवस्था विकसित करने के लिए प्रोत्साहन नहीं दिया।
  • इन उपनिवेशों की कुछ वस्तुओं जैसे- तम्बाकू, कपास और चीनी का निर्यात केवल ब्रिटेन में किया जा सकता था। अन्य स्थानों से इन उपनिवेशों में जाने वाली वस्तुओं पर अत्यधिक तट कर लगाया जाता था। उपनिवेशों को लोहा और सूती कपड़ा जैसे उद्योगों को आरंभ करने की मनाही थी।
  • अंग्रेजों ने उपनिवेशवासियों को पश्चिम की ओर नए प्रदेशों में बहने पर प्रतिबंध लगाकर अप्रसन्न कर दिया था।
  • कुलीन अंग्रेज अमेरिका में भूमि खरीद कर किसानों से लगान वसूल करते थे।
  • सन् 1765 में ब्रिटेन की संसद ने स्टांप पेपर एक्ट पारित किया, जिसके अंतर्गत उपनिवेशवासियों को सभी व्यापारिक सौदों पर कर देना पड़ता था।
  • इस कानून से उपनिवेशों में प्रबल विरोध की भावना जाग उठी और उपनिवेशवासियों ने ब्रिटेन से आने वाली सभी वस्तुओं का बहिष्कार करने का निश्चय किया।
  • अमेरिका के क्रांतिकारियों को 17वीं सदी के इंग्लैण्ड के दार्शनिकों के विचारों से बहुत प्रेरणा मिली थी।
    🔺लॉक, हैरिंग्टन, मिल्टन आदि दर्शनिकों का मत था कि मनुष्य के कुछ मौलिक अधिकार हैं, जिनकी अवहेलना करने का अधिकार किसी भी सरकार को नहीं है।

मैसाचुसेट्स की सभा

  • सब उपनिवेशों को एक समान समस्याओं पर विचार करने के लिए मैसाचुसेट्स उपनिवेश के नेताओं ने अन्य उपनिवेशों से उनके प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया।
  • वे सब इस बात पर सहमत हुए और उन्होंने इस बात की घोषणा की कि ब्रिटेन को संसद को उन पर कर लगाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह नारा बुलंद किया, प्रतिनिधित्व के बिना कोई कर नहीं। उन्होंने ब्रिटेन की वस्तुओं का आयात प्रतिबन्धित करने की धमकी दी।
  • संसद ने उपनिवेश में आने वाली उपभोक्ता वस्तुओं पर कर लगाया। इन वस्तुओं में कागज, शीशा, चाय और रोगन मुख्य थी।
  • उपनिवेशों ने फिर आपत्ति की और कहा, कि केवल हमारे राज्य को विधान सभाओं को ही हम पर कर लगाकर धन एकत्र करने का अधिकार है।
  • ब्रिटेन की सरकार ने इस योजना को समाप्त कर दिया। किन्तु उसे कर लगाने का अधिकार है, यह दिखाने के लिए चाय पर लगने वाला कर नहीं हटाया।

बोस्टन की चाय-पार्टी

  • लॉर्ड नॉर्थ की सरकार ने उपनिवेशों की एकता को तोड़ने के लिए टाउन शेड अधिनियम, 1767 के तहत चाय को छोड़कर लगाए गए सभी करों को वापस ले लिया।
  • 5 मार्च, 1770 को चाय के मुद्दे पर बोस्टन बंदरगाह (जो मैसाचुसेट्‌स राज्य में अवस्थित है) में आंदोलनकारियों और ब्रिटिश सेना के मध्य संघर्ष आरंभ हो गया, जिसमें 5 लोग मारे गये और 6 घायल हो गये। यह घटना बोस्टन कांड (Boston Massacre) के नाम से जानी गई।
  • सरकार ईस्ट इंडिया कंपनी के चाय के अत्यधिक भंडार को उपनिवेशों में भेजकर बेचना चाहती थी। इन्हीं कारणों से सरकार ने बोस्टन बंदरगाह पर चाय से भरा हुआ एक जहान भेजा।
    🔺सैम्युअल एडम्स के नेतृत्व वाले आंदोलन कारियों ने चाय की सभी 340 पेटियों को उठाकर समुद्र में फेंक दिया। इतिहास में इस घटना को बोस्टन की टी-पार्टी (Boston Tea Party) के नाम से जाना जाता है।
अमेरिकी क्रांति
अमेरिकी क्रांति

फिलाडेल्फिया का सम्मेलन और स्वतंत्रता की घोषणा

  • अमेरिका के सभी 13 उपनिवेशों के प्रतिनिधि 1774 ई. में फिलाडेल्फिया में हुए प्रथम महाद्वीपीय सम्मेलन में शामिल हुए। इस सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने ब्रिटेन के राजा से अपील की कि उद्योगों और व्यापार पर जो प्रतिबंध इंग्लैण्ड की सरकार में लगा रखे हैं, उन्हें तुरंत हटा दिया जाए और उपनिवेशों के निवासियों की सहमति के बिना कोई कर नहीं लगाए जाएं।
  • ब्रिटेन के राजा ने उनके इस कार्य को विद्रोह घोषित कर दिया और दमन करने के लिए सेना को आदेश दिया।
  • उपनिवेशों ने एक स्थानीय सेना भर्ती करके अपनी सैनिक सुरक्षा की योजना बनाई। इसके पश्चात् सन् 1775 में क्रांति का प्रथम युद्ध प्रारम्भ हो गया।
  • इस युद्ध में उपनिवेशों की नागरिक सैनिक टुकड़ी ने ब्रिटेन के एक हजार सिपाहियों का सफलतापूर्वक मुकाबला किया।
    🔺द्वितीय महाद्वीपीय सम्मेलन 4 जुलाई, 1776 को हुआ जिसमें स्वतंत्रता की घोषणा को स्वीकार किया गया।

स्वतंत्रता का युद्ध

  • जॉर्ज वाशिंगटन को अमेरिका की सेनाओं का सेनापति नियुक्त किया गया। प्रारंभिक लड़ाइयाँ बोस्टन के आस-पास लड़ी गई। तथ ब्रिटेन ने कुछ सेना कनाडा भेजी ताकि वह वहाँ से दक्षिण की ओर बढ़कर ब्रिटेन की दूसरी सेना से मिल सके और इस प्रकार अमेरिका को दो भागों में विभाजित कर सके।
  • इंग्लैण्ड के एक सेनापत्ति ने इस योजना को कार्यान्वित करने में कुछ भूल कर दी जैसे ही ब्रिटिश सेनाएँ दक्षिण की ओर बढ़ीं, अमेरिकी सेनाओं ने उनका सामना किया और उन्हें हरा दिया।
  • अप्रशिक्षित स्थानीन अमेरिकी सेना की प्रशिक्षित ब्रिटिश सेना पर विजय बड़े महत्व की बात थी। इससे अमेरिका के निवासियों में बहुत आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ।
  • फ्रांस की सरकार ने सेना, खाद्य सामग्री और धन भेजकर उपनिवेशों की सहायता करने का निश्चय किया। ब्रिटेन, फ्रांस का पुराना शत्रु था, इसलिए उसे परेशान करना फ्रांस का मुख्य उद्देश्य था।
  • ब्रिटेन के अन्य शत्रुओं स्पेन और हॉलैंड ने भी ब्रिटेन के विरुद्ध शीघ्र युद्ध छेड़ दिया। ब्रिटेन में भी अशांति फैल रही थी, आयरलैंड में विद्रोह का डर था। संसद में कुछ नेता उपनिवेशवासियों के विरुद्ध हो रहे युद्ध का विरोध कर रहे थे।
  • अन्ततः यह युद्ध 1781 ई. में तब समाप्त हुआ, जब ब्रिटेन के सेनापति लॉर्ड कार्नवालिस (जो बाद में भारत का गवर्नर जनरल बना) ने आत्मसमर्पण कर दिया।
  • दो वर्ष बाद सन् 1783 में पेरिस की संधि पर हस्ताक्षर हुए। इस संधि के द्वारा ब्रिटेन ने अपने 13 भूतपूर्व उपनिवेशों की स्वतंत्रता स्वीकार कर ली।

अमेरिका का संविधान

  • जब स्वतंत्रता का युद्ध प्रारंभ हुआ उस समय सभी 13 उपनिवेश एक दूसरे से अलग थे। उनमें से प्रत्येक को अपनी अलग सेना, अलग सीमाएँ, तटकर और वित्त व्यवस्था थी, किंतु वे इंग्लैण्ड के विरुद्ध संगतित हो गए थे, क्योंकि उसको सभी शत्रु मानते थे।
  • सन् 1781 में उन्होंने एक योजना के अंतर्गत संयुक्त राज्य अमेरिका के नाम से राष्ट्रीय सरकार बनाने का निश्चय किया।
  • एक नया संविधान बनाने के लिए एक संवैधानिक सम्मेलन फिलाडेल्फिया में बुलाया गया। नया संविधान सन् 1789 में लागू हुआ। इस प्रकार अमेरिका में गणतंत्र राज्य की स्थापना को गई। अमेरिका के संविधान में संघ पद्धति स्वीकार की गई, जिसके अंतर्गत शक्तियों का विभाजन संघीय (केन्द्रीय) सरकार और राज्य सरकारों के बीच किया गया।
    🔺अमेरिका के नागरिकों को अनेक अधिकार दे दिए गए। उनमें सबसे प्रमुख अधिकार है- भाषण, प्रकाशन (प्रेस) और धर्म की स्वतंत्रता तथा कानून के अनुसार न्याय प्राप्त करने का अधिकार।
  • संविधान के बनते ही संयुक्त राज्य अमेरिका संसार के इतिहास में एक राष्ट्र के रूप में प्रकट हुआ। इतिहास में यह पहला लिखित गणतान्त्रिक संविधान था, जो वर्तमान समय में भी चल रहा है।

अमेरिका की क्रांति का महत्व

  • सब मनुष्यों की समानता और उनके ऐसे अधिकार, जिनको उनसे कोई छीन नहीं सकता, इन दो तथ्यों का समावेश स्वतंत्रता की घोषणा में किया गया था।
  • यूरोप 19वीं सदी के प्रायः सभी क्रांतिकारियों को इससे प्रेरणा मिली। मध्य और दक्षिणी अमेरिका में भी स्पेन और पुर्तगाल के उपनिवेशों को इससे विद्रोह करने और स्वतंत्रता प्राप्त करने का प्रोत्साहन मिला।
  • अमेरिका की क्रांति की मुख्य उपलब्धि गणतंत्र की स्थापना थी, परंतु यह गणतंत्र लोकतांत्रिक नहीं था। इसमें बहुत कम व्यक्तियों को मताधिकार दिया गया था। काले लोगों (दास) को, जो अधिकतर दास थे, अमेरिका के रेड इंडियनों (मूल निकासी) और महिलाओं को मतदान का अधिकार नहीं था।
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