क्षरण विधि द्वारा उच्च प्रतिरोध का मापन किस प्रकार किया जाता है | Leakage Method in Hindi

क्षरण विधि द्वारा उच्च प्रतिरोध का मापन

माना किसी वैद्युत परिपथ में एक संधारित्र C तथा एक प्रतिरोध R, श्रेणीक्रम में लगे हैं। यदि हम संधारित्र को आवेशित करके पुनः विसर्जित करें, तो विसर्जन का समय, परिपथ के प्रतिरोध पर निर्भर करता है यदि प्रतिरोध R ‘उच्चतम’ है, तो ‘समय-नियतांक’ C-R का मान अधिक होगा तथा संधारित्र का विसर्जन धीरे-धीरे होगा। इस तथ्य की सहायता से मैगा-ओम की कोटि के उच्च प्रतिरोध R नापे जा सकते हैं।

सिद्धांत (principal)

यदि किसी संधारित्र की धारिता C है और इसे q0 आवेश से आवेशित करने के बाद एक प्रतिरोध R में t सेकंड तक विसर्जित किया जाता है, तब t सेकंड के बाद संधारित्र पर शेष रहने वाला आवेश
q = q0e-(t/CR) या q0/q = e+(t/CR)
या loge q0/q = +t/CR
या R = \frac{t}{C log_e q_0/q}
या R = \frac{t}{2.3026 C log_{10} q_0/q} …(1)

यदि हम प्रयोग द्वारा q0/q का मान ज्ञात कर लें, तो प्रतिरोध R के मान का परिकलन किया जा सकता है।

q0/q का निर्धारण (विधि)

उच्च प्रतिरोध मापने के लिए आवश्यक परिपथ चित्र में दर्शाया गया है इसमें एक संधारित्र C, बैटरी E, प्रक्षेप धारामापी (B G.) तथा उच्च प्रतिरोध R लगा होता है। नोट यहां प्रतिरोध R का मान ज्ञात करना है।

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क्षरण विधि द्वारा उच्च प्रतिरोध का मापन
क्षरण विधि द्वारा उच्च प्रतिरोध का मापन

अर्थात् प्रयोग करने के लिए पहले कुंजी K1 को दबाते हैं। इससे संधारित्र C आवेशित हो जाता है अब K1 को छोड़ देते हैं तथा तुरन्त K2 को दबा देते हैं। इससे संधारित्र का प्रक्षेप धारामापी में विसर्जन होता है। यदि धारामापी का प्रथम प्रक्षेप θ हो, तो
q0 ∝ θ0
अतः कुंजी K1 को दबाकर संधारित्र को फिर से आवेशित करते हैं। अब कुंजी K1 को छोड़ देते हैं तथा एक निश्चित समय t के लिए कुंजी K3 को दबाकर संधारित्र के आवेश को उच्च प्रतिरोध R के द्वारा ‘लीक’ कराते हैं। तथा t सेकंड के लीकेज के पश्चात K3 को छोड़ देते हैं तथा K2 को दबाकर संधारित्र पर बचे आवेश को धारामापी में विसर्जित कराते हैं। यदि अब धारामापी का प्रथम प्रक्षेप θ है, तो
q ∝ θ इसलिए q0/q = θ0
q0/q के इस मान को समीकरण (1) में रखने पर,
R = \frac{t}{2.3026 C log_{10} θ_0/θ} …(2)
t और log100/θ) के बीच एक ग्राफ खींचते हैं, जो कि एक सरल रेखा आता है। सरल रेखा की प्रवणता से t/log100/θ) का मध्यमान प्राप्त होता है अतः समीकरण (2) में C और t/log100/θ) के मान रखकर R ज्ञात किया जा सकता है।

परावैद्युत में से लीकेज के कारण संशोधन

उपर्युक्त प्रयोग में यह संभव है कि संधारित्र का परावैद्युत पूर्ण अचालक न हो, जिससे इसमें होकर कुछ आवेश लीक कर जाता है। इसको टेस्ट करने के लिए कुंजी K1 को दबाकर संधारित्र को आवेशित करते हैं तथा तुरन्त ही धारामापी में विसर्जित कराके धारामापी का प्रथम प्रक्षेप θ0 नोट कर लेते हैं। अब पुनः संधारित्र को आवेशित करते हैं। तथा कुंजी K1 को छोड़ देते हैं, चूंकि अभी कुंजी K2 को दबाया नहीं गया है। लेकिन लगभग 1 मिनट के लिए आवेशित संधारित्र ऐसे ही छोड़ दिया जाता है। अब K2 को दबाकर संधारित्र को धारामापी में विसर्जित कराते हैं। अब यदि प्रथम प्रक्षेप θ0 से कम है तो स्पष्ट है कि एक मिनट में संधारित्र का कुछ आवेश परावैद्युत में से होकर लीक हो गया। यदि संधारित्र को परावैद्युत में t’ सेकंड तक लीक कराने के बाद प्रथम प्रक्षेप θ प्राप्त हो, तो परावैद्युत का प्रतिरोध
R’ = \frac{t'}{2.3026 C log_{10} θ_0/θ'} …(3)
स्पष्ट है कि प्रयोग के प्रथम भाग में ज्ञात किया गया प्रतिरोध R, परावैद्युत के प्रतिरोध R’ तथा उसके समांतर क्रम में जुड़े उच्च प्रतिरोध के तुल्य होगा। अतः यदि समांतर में जुड़ें उच्च प्रतिरोध का वास्तविक मान R1 है, तो
\frac{1}{R} = \frac{1}{R'} + \frac{1}{R_1}
अथवा \frac{1}{R_1} = \frac{1}{R} \frac{1}{R'}
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ R_1 = \frac{RR'}{R' - R} } …(4)

अतः “क्षरण विधि द्वारा निम्न प्रतिरोध का मापन संभव नहीं है।” क्योंकि निम्न प्रतिरोधों के लिए समय नियतांक C-R का मान कम होगा, अतः संधारित्र C का प्रतिरोध R में विसर्जन इतना तेज गति से होगा कि समय t का यथार्थ मापन किया जाना संभव नहीं होगा।

Note – क्षरण विधि से सम्बन्धित प्रशन पूछें जाते हैं –
Q.1 क्षरण विधि द्वारा उच्च प्रतिरोध मापने की विधि का वर्णन कीजिए। प्रयुक्त सूत्र का निगमन कीजिए। यह विधि निम्न प्रतिरोध मापने के लिए उपयुक्त क्यों नहीं है?
Q.2 क्षरण विधि से उच्च प्रतिरोध का मापन की विधि का वर्णन कीजिए। उपयोग में लाए गए सूत्र का निगमन कीजिए। यह विधि निम्न प्रतिरोध मापने के लिए उपयुक्त क्यों होती है?

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