उदय शंकर भट्ट – जीवन परिचय, साहित्यिक, रचनाएं, भाषा शैली, साहित्य में स्थान

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हमने “उदय शंकर भट्ट का जीवन परिचय” (Uday Shankar Bhatt biography in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है। इसमें हमने उदयशंकर भट्ट का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएं एवं कृतियां, एकांकी, कविता, भाषा शैली व साहित्य में स्थान और उदय शंकर भट्ट की एकांकी को भी विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि आप परीक्षाओं में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, इसमें हमने उदय शंकर भट्ट जी के जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए हैं, तो आप इस लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

इसे भी पढ़ें… सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

विषय-सूची show

उदय शंकर भट्ट का संक्षिप्त परिचय

तो दोस्तों इस लेख में हमने भट्ट जी की जीवनी के बारे में संक्षेप में एक सारणी के माध्यम से समझाया है।
उदय शंकर भट्ट की जीवनी –

नामउदयशंकर भट्ट
जन्म03 अगस्त, 1898 ई. में
जन्म स्थानउत्तर प्रदेश के इटावा जिले में
मृत्यु22 फरवरी, 1966 ई. में
पिता का नामपं. मेहताफतेह शंकर भट्ट
पैशाएकांकीकार, नाटककार, कवि, लेखक, निदेशक
आन्दोलनस्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका
निदेशकआकाशवाणी में परामर्शदाता, निदेशक, प्रोड्यूसर रहे।
साहित्य कालआधुनिक काल
लेखन विधाएकांकी, नाटक, उपन्यास, कविता
भाषासरल, प्रवाहपूर्ण एवं बोधगम्य भाषा
शैलीव्याख्यात्मक शैली
प्रमुख रचनाएंनए मेहमान, समस्या का अंत, अभिनव एकांकी, परदे के पीछे, चार एकांकी, मानसी, राका, विक्रमादित्य, सागर विजय, अन्तहीन अन्त, नया समाज, तक्षशिला, अमृत और विष आदि।
हिंदी साहित्य में स्थानआधुनिक हिंदी एकांकीकारों में महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट स्थान

उदय शंकर भट्ट का जीवन परिचय

आधुनिक हिंदी एकांकीकारों में सुविख्यात साहित्यकार उदयशंकर भट्ट जी का जन्म 03 अगस्त, सन् 1898 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित इनके ननिहाल में हुआ था। इनके पूर्वज गुजरात के निवासी थे और वहां से आकर उत्तर प्रदेश में रहने लगे थे। भट्ट जी का ननिहाल पारिवारिक रूप से शिक्षा, भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशेष रूचि प्रदर्शित करता था। भट्ट जी के पिता का नाम पण्डित मेहताफतेह शंकर भट्ट था तथा इनकी माता का नाम हमें ज्ञात नहीं है। बचपन से ही भट्ट जी में साहित्यिक अभिरुचि उत्पन्न हो गई थी। सन् 1913 ई. में जब उदय शंकर भट्ट जी मात्र 14 वर्ष की अवस्था में ही थे, तभी इनके माता-पिता का देहावसान हो गया था।

उदय शंकर भट्ट
उदय शंकर भट्ट का जीवन परिचय

उदय शंकर भट्ट जी ने बचपन में ही अपने ननिहाल में रहकर संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी की शिक्षा प्राप्त की। तथा अपने माता-पिता की मृत्यु के बाद ये वाराणसी चले गए, वहां पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक (बी०ए०) की उपाधि प्राप्त करने के उपरांत इन्होंने पंजाब से “शास्त्री” और कोलकाता से “काव्यतीर्थ” की उपाधि भी प्राप्त की। सन् 1923 ई. में जीविका की खोज में ये लाहौर चले गए और वहां एक विद्यालय में हिंदी और संस्कृत का अध्यापन कार्य करते रहे।

उदय शंकर भट्ट जी ने भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और सन् 1947 ई. में देश विभाजन के उपरांत भट्ट जी लाहौर छोड़कर दिल्ली चले आए। यहीं पर इन्होंने आकाशवाणी में परामर्शदाता एवं निदेशक के रूप में दीर्घकाल तक सेवाएं अर्पित की। नागपुर और जयपुर आकाशवाणी में भी इन्होंने प्रोड्यूसर के पद पर कार्य किया। सेवा निवृत्त होने के बाद भट्ट जी स्वतंत्र रूप से एकांकी, नाटक, उपन्यास, कहानी और आलोचना आदि विधाओं पर लेखनी करते रहे। 22 फरवरी, सन् 1966 ईस्वी को इस महान् साहित्यकार का निधन हो गया था।

पढ़ें… सेठ गोविंद दास का जीवन परिचय, साहित्यिक अवदान, रचनाएं एवं एकांकी

पढ़ें… उपेन्द्रनाथ अश्क का जीवन परिचय, साहित्यिक अवदान, रचनाएं एवं एकांकी

उदय शंकर भट्ट का साहित्यिक परिचय

बहुमुखी प्रतिभा से परिपूर्ण भट्ट जी का साहित्यिक जीवन काव्य-संग्रह से आरंभ हुआ। सन् 1922 ई. से इन्होंने नाटकों की रचना प्रारंभ की और आजीवन नाट्य-सृजन में लगे रहें। भट्ट जी ने एकांकी विधा को भी एक नई दिशा प्रदान की। रंगमंच एवं रेडियों-प्रसारण दोनों ही क्षेत्रों में इन्होंने एकांकी सफल सिद्ध हुए हैं। किसी भी समस्या को जीवन्त रूप में प्रस्तुत कर देना भट्ट जी के एकांकियों की सर्वप्रमुख विशेषता है। भट्ट जी के नाट्य-कला देश कि साहित्यिक प्रगति के साथ-साथ नया मोड़ लेती रही है।

उदय शंकर भट्ट जी का प्रथम एकांकी-संग्रह “अभिनव एकांकी” के नाम से सन् 1940 ई. में प्रकाशित हुआ था। इसके पश्चात् इन्होंने सामाजिक, ऐतिहासिक, पौराणिक, मनोवैज्ञानिक इत्यादि अनेक विषयों पर एकांकियों की रचना की, जिनमें ‘समस्या का अंत’, ‘परदे के पीछे’, ‘अभिनव एकांकी’, ‘अस्तोदय’, ‘धूपशिखा’, ‘वापसी’, ‘चार एकांकी’ इत्यादि इनके प्रतिनिधि एकांकी-संग्रह माने जाते हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी उदय शंकर भट्ट जी ने नाटक, कविता तथा उपन्यासों की भी रचना की है।

पढ़ें… केदारनाथ अग्रवाल का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

उदय शंकर भट्ट का साहित्यिक अवदान

भट्ट जी ने पौराणिक, समस्या-प्रधान, हास्य-प्रधान, प्रतीकात्मक एवं सामाजिक समस्याओं से संबंधित एकांकियों की रचना की है। इन्होंने वैदिक काल से लेकर वर्तमान काल तक कि भारतीय जीवन धारा की संवेदना को चित्रित करने का प्रयास किया गया है। भट्ट जी की रचनाओं में विभिन्न समस्याओं को जीवन्त रूप से उजागर किया गया है। युग की प्रवृत्तियों और सामाजिक परिवर्तनों से इन्होंने सदैव संगति बनाए रखी है।

उदय शंकर भट्ट की प्रमुख रचनाएं

भट्ट जी की प्रमुख रचनाएं एवं कृतियां कुछ इस प्रकार से हैं – मानसी, राका, नए मेहमान, समस्या का अन्त, परदे के पीछे, विक्रमादित्य, सागर विजय, अंतहीन अंत, नया समाज, अभिनव एकांकी, चार एकांकी, तक्षशिला, अमृत और विष, धूपशिखा, वापसी एवं अन्त्योदय आदि इनकी प्रमुख कृतियां हैं।

उदय शंकर भट्ट की एकांकी

  • नए मेहमान
  • समस्या का अन्त
  • परदे के पीछे
  • अभिनव एकांकी
  • अन्तोदय
  • चार एकांकी
  • धूपशिखा
  • वापसी
  • आज का आदमी
  • आदिम युग
  • स्त्री का हृदय
  • लोक परलोक
  • अंधकार और प्रकाश
  • दस हजार एकांकी
  • अस्तोदय ।

उदय शंकर भट्ट के नाटक

  • विक्रमादित्य
  • दाहर
  • सिंह पल
  • मुक्तिबोध
  • शंका विजय
  • अम्बा
  • सागर विजय
  • कमला
  • अंतहीन अंत
  • नया समाज
  • पार्वती
  • कालिदास
  • तुलसीदास
  • विद्रोहिणी अम्बा
  • विश्वामित्र
  • राधा
  • मत्स्यगंधा
  • अशोक बन बंदिनी
  • विक्रमोर्वशीय
  • अश्वत्थामा
  • गुरु द्रोणा का अंतर्निरीक्षण
  • नहुष निपात
  • एकला चलो रे
  • क्रांतिकारी
  • तीन नाटक ।

उदय शंकर भट्ट के उपन्यास

  • वह जो मैंने देखा
  • नए मोड़
  • सागर लहरें और मनुष्य
  • लोक-परलोक
  • शेष-अशेष
  • दो-अध्याय ।

उदय शंकर भट्ट की कविता (काव्य-संग्रह)

  • मानसी
  • राका
  • तक्षशिला
  • विसर्जन
  • अमृत और विष
  • इत्यादि
  • युगदीप
  • यथार्थ और कल्पना
  • विजयपथ
  • अन्तर्दर्शन: तीन चित्र
  • मुझमें जो शेष है ।

उदय शंकर भट्ट की भाषा शैली

भट्ट जी ने अपने साहित्य सृजन में सरल, स्थिर व प्रवाहपूर्ण बोधगम्य भाषा का प्रयोग किया है। भाव व पात्रों के अनुसार उनकी भाषा का रूप बदलता रहता है। इनकी भाषा में उर्दू के शब्दों का बाहुल्य है, जैसे- ओफ, फायदा, बेहद, हर्ष इत्यादि। संस्कृत शब्दावली का प्रयोग यत्र-तत्र दिखाई पड़ता है, जैसे- गृहस्थ, सुसंस्कृति, निर्दई इत्यादि। संवाद सरल व छोटे-छोटे वाक्यों वाले हैं। भट्ट जी की लेखन-शैली की एक विशेषता प्रश्नों के माध्यम से भावाभिव्यक्ति है, जैसे- क्या छत तुम्हारे लिए है? कहो तो मैं कहूं? क्या फायदा? इत्यादि। कहीं-कहीं वाक्य सूक्ति का-सा आभास कराते हैं। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि भट्ट जी की भाषा सरल, सहज, बोधगम्य व शैली व्याख्यात्मक है।

उदय शंकर भट्ट का साहित्य में स्थान

भट्ट जी एक सफल नाटककार व एकांकीकार के रूप में अपनी विशिष्ट छवि बनाने वाले प्रख्यात साहित्यकार हैं। इन्होंने आधुनिक युग के अनुरूप चरित्र-सृष्टियों की रचना की है। इनके एकांकी रंगमंचीय होने तथा जीवन की मौलिक समस्याओं से संबंधित होने के कारण मर्मस्पर्शी हैं।
आधुनिक हिन्दी एकांकीकारों में भट्ट जी का एक महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट स्थान है। हिन्दी एकांकी साहित्य इनके योगदान को सदैव याद रखेगा।

पढ़ें… नागार्जुन का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

पढ़ें… रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय एवं रचनाएं

FAQs. उदय शंकर भट्ट जी के जीवन से जुड़े प्रश्न उत्तर

1. उदयशंकर भट्ट का जन्म कब हुआ था?

उदय शंकर भट्ट का जन्म 03 अगस्त, सन् 1898 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में स्थित इनके ननिहाल में हुआ था।

2. सागर विजय किसका नाटक है?

“सागर विजय” नाटक के रचनाकार उदय शंकर भट्ट जी हैं। 1976 ई. में यह नाटक लिखा गया, इसके प्रमुख पात्र हैं- प्रियंवदा, चन्द्रगुप्त, कालिदास, सौमित्र आदि। उदयशंकर भट्ट के नाटक हैं- मुक्तिदूत, विक्रमादित्य, चन्द्रगुप्त मौर्य, राधा, सागर विजय आदि।

3. उदय शंकर भट्ट का कौन सा एकांकी आपके पाठ्यक्रम में है?

“उदय शंकर भट्ट का “नए मेहमान” नामक एकांकी-संग्रह आपके पाठ्यक्रम में है।”
इसके अलावा इनके एकांकी-संग्रह– नए मेहमान, समस्या का अंत, अंधकार और प्रकाश, अन्तोदय, चार एकांकी, परदे के पीछे, लोक-परलोक, अभिनव एकांकी, धूपशिखा, वापसी आदि। काव्य संग्रह– मानसी, विसर्जन, तक्षशिला, अमृत और विष, इत्यादि, यथार्थ और कल्पना, युगदीप, विजयपथ आदि।

4. अंधकार और प्रकाश एकांकी के रचनाकार हैं?

“उदय शंकर भट्ट” अंधकार और प्रकाश नामक एकांकी-संग्रह के रचयिता हैं।

5. सागर लहरें और मनुष्य किसका उपन्यास है?

सागर लहरें और मनुष्य “उदय शंकर भट्ट” जी द्वारा रचित उपन्यास है।

6. उदय शंकर भट्ट की मृत्यु कब हुई थी?

उदय शंकर भट्ट की मृत्यु 22 फरवरी, सन् 1966 ईस्वी में हुई थी।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *