ऊर्जा समविभाजन का नियम क्या है | Law of Equipartition of Energy in Hindi

ऊर्जा समविभाजन का नियम

इस नियम का प्रतिपादन सर्वप्रथम मैक्सवेल ने किया था। अतः इस नियम के अनुसार, ” किसी ऐसे गतिक निकाय, जो कि बहुत से कणों मिलकर बना हो, कि समस्त गतिज ऊर्जा, निकाय की सभी स्वातंत्र्य कोटियों में समान रूप से वितरित होती है।” तो इस नियम को ‘ ऊर्जा का समविभाजन का नियम ‘ कहते हैं।
हम जानते हैं कि आदर्श गैस के एक अणु की औसत स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा \frac{3kT}{2} होती है। यहां k बोल्टे्जमैन नियतांक है। तथा T गैस का परमताप है। चूंकि गैस की स्थानान्तरीय गति के लिए 3 स्वातंत्र्य कोटियाॅं होती है। अतः इस प्रकार आदर्श गैस के अणु की प्रत्येक स्वातंत्र्य कोटि के लिए औसत स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा \frac{1}{3} ( \frac{3kT}{2} ) = \frac{kT}{2} होगी।
बोल्ट्जमैन ने सिद्ध किया कि यह नियम घूर्णन तथा कम्पन की गतिज ऊर्जाओं के लिए भी सत्य हैं। तथा प्रत्येक घूर्णन तथा कम्पन की स्वितंत्र्य कोटि के लिए गतिज ऊर्जा \frac{1}{2} kT ही होती है। इस प्रकार एसी गैस जिसके प्रत्येक अणु की कुल स्वातंत्र्य कोठियां ‘ f ‘ है। अतः उसके प्रत्येक अणु की कुल औसत गतिज ऊर्जा \frac{1}{2} fkT होगी।
ऊर्जा-समविभाजन का नियम कमरे के ताप पर तथा इससे ऊपर प्रयुक्त किया जा सकता है। परंतु अत्यंत निम्न तापों पर जहां गैस द्रवित होने वाली होती है। यह नियम सत्य नहीं पाया जाता है।

आदर्श गैस की विशिष्ट ऊष्मा की निष्पत्ति

माना कि आदर्श गैस के 1 ग्राम अणु का परमताप T है। इसमें N अणु है, जहां N आवोगाद्रो संख्या है। चूंकि गैस ‘आदर्श’ है, अतः गैस की समस्त आंतरिक ऊर्जा (U), इसके अणुओं की कुल गतिज ऊर्जा होगी, अर्थात्
U = N × एक अणु की औसत गतिज ऊर्जा

f स्वातंत्र्य कोटियों के अणु की औसत गतिज ऊर्जा \frac{1}{2} fkT होगी। अतः
U = N × \frac{1}{2} fkT
या U = \frac{1}{2} fkT …..(1)

यहां R (= Nk), गैस का सार्वत्रिक स्थिरांक है।
उपर्युक्त समीकरण (1) का अवकलन करने पर,
\frac{dU}{dT} = \frac{1}{2} fR ……(2)

माना कि गैस का आयतन स्थिर रखकर उसके ताप में dT वृद्धि की जाती है। यदि स्थिर आयतन पर गैस की आण्विक विशिष्ट ऊष्मा Cv हो, तो इस प्रक्रम में गैस को दी गई ऊष्मा dQ = Cv . dT होगी, तथा कोई बाह्य कार्य नहीं किया जाएगा। (चूंकि dV = 0, अतः P.dV = 0) ।
अतः ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम dU = dQ – dW से
dU = Cv . dT
या Cv = \frac{dU}{dT}

अतः समीकरण (2) से,
Cv = \frac{1}{2} fR …..(3)

यदि स्थिर दाब पर गैस की आण्विक विशिष्ट ऊष्मा Cp हो, तो मेयर के सूत्र से,
Cp – Cv = R या Cp = Cv + R

अतः समीकरण (3) से Cv का मान रखने पर,
Cp = \frac{1}{2} fR + R
या Cp = ( \frac{1}{2} f + 1)R …..(4)

अतः आदर्श गैस की दो विशिष्ट ऊष्माओं की निष्पत्ति –
γ = \frac{C_p}{C_v} = \frac{ (\frac{1}{2} f + 1)R}{ \frac{1}{2} fR}
या γ = \frac{ \frac{1}{2} f + 1}{ \frac{1}{2} f}

अतः \footnotesize \boxed{ γ = 1 + \frac{2}{f}} …..(5)

और पढ़ें… डाल्टन का आंशिक दाब का नियम

एक-परमाणुक गैसों के लिए ‘γ’ (γ for moneatomic gas in Hindi)

चूंकि एक-परमाणुक गैस के अणुओं की केवल 3 स्थानान्तरीय स्वातंत्र्य कोटियाॅं होती है, (अर्थात् f = 3 रखने पर), अतः

Cv = \frac{1}{2} fR = \frac{3}{2} R = 1.5 R
Cp = ( \frac{1}{2} f + 1)R = \frac{5}{2} R = 2.5 R
तथा
γ = 1 + \frac{2}{f} = 1 + \frac{2}{3} = \frac{5}{3} = 1.67 …..(6)

सभी अक्रिय और अन्य एक-परमाणुक गैसों के लिए Cv, Cp व γ के प्रायोगिक मान, इस सैद्धांतिक मानों के लगभग बराबर आते हैं।

द्वि-परमाणुक गैसों के लिए ‘γ’ (γ for diatomic gas in Hindi)

चूंकि द्वि-परमाणुक गैस के अणुओं की कुल स्वातंत्र्य कोटियाॅं 5 है। (स्थानांतरण की 3, घूर्णन गति की 2 तथा कम्पन ऊर्जा नगण्य मानकर) (अर्थात् f = 5 रखने पर) अतः

Cv = \frac{1}{2} fR = \frac{5}{2} R = 2.5 R
Cp = ( \frac{1}{2} f + 1)R = \frac{7}{2} R = 3.5 R
तथा
γ = 1 + \frac{2}{f} = 1 + \frac{2}{5} = \frac{7}{5} = 1.4 …..(7)

अधिकतर द्वि-परमाणुक गैसों के लिए Cv, Cp व γ के प्रायोगिक मान, इन सैद्धांतिक मानों से भिन्न प्राप्त होते हैं। इसका कारण उपर्युक्त गणना में परमाणुओं के कम्पन उर्जा का माना नगण्य मान लेने पर होता है।

त्रि-परमाणुक गैसों के लिए ‘γ’ (γ for triatomic gas in Hindi)

त्रि-परमाणुक गैस के अणुओं की कुल स्वातंत्र्य कोटियाॅं 6 है। (स्थानांतरण की 3, घूर्णन की 3 तथा कम्पन ऊर्जा नगण्य मानकर), (अर्थात् f = 6) अतः

Cv = \frac{1}{2} fR = \frac{6}{2} R = 3 R
Cp = ( \frac{1}{2} f + 1)R = \frac{8}{2} R = 4 R
तथा
γ = 1 + \frac{2}{f} = 1 + \frac{2}{6} = \frac{4}{3} = 1.33 …..(8)

त्रि-परमाणुक गैसों के लिए Cv, Cp व γ के प्रायोगिक मान, इन सैद्धांतिक मानों से बिल्कुल भिन्न प्राप्त होता है। इसका कारण उपर्युक्त गणना में परमाणुओं की कम्पन ऊर्जा को नगण्य माना जाता है। द्वि-परमाणुक और त्रि-परमाणुक अणुओं के परमाणुओं की कम्पन ऊर्जा सम्मिलित करके उपर्युक्त सिद्धांत में उपरोक्त संशोधन किया गया है। अणुगति सिद्धांत द्वारा विशिष्ट ऊष्मा में ताप के साथ परिवर्तन होने का स्पष्टीकरण न मिल सका। विशिष्ट ऊष्मा के क्वांटम सिद्धांत के आधार पर उसकी व्याख्या की गई । अणुगति सिद्धांत की मुख्य बात यह है। कि इससे ज्ञात होता है। कि γ का मान से कम और 1.67 से अधिक नहीं हो सकता है। जो कि सत्य है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 ऊर्जा के समविभाजन नियम से आप क्या समझते हैं सिद्ध करो कि आदर्श गैस के लिए जिसके अणु की स्वतंत्र्य कोटि f है।
γ = \frac{C_p}{C_v} = 1 + \frac{2}{f}
इससे एक परमाणुक गैस, द्वि-परमाणु गैस और त्रि-परमाणुक गैस के लिए γ का मान प्राप्त कीजिए ?

Share This Post

One thought on “ऊर्जा समविभाजन का नियम क्या है | Law of Equipartition of Energy in Hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *