काका कालेलकर : जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली व उपलब्धियां | Kaka kalelkar

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको “काका कालेलकर का जीवन परिचय” (Kaka kalelkar biography in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं। इसमें हम आपको काका कालेलकर का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएं, भाषा शैली तथा साहित्य में क्या स्थान रहा था और काका कालेलकर का भारत को स्वतंत्रता दिलाने में उनका क्या योगदान रहा था। तथा उनकी उपलब्धियां क्या थी, को विस्तार पूर्वक सरल भाषा में बताएंगे, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

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काका कालेलकर का संक्षिप्त परिचय

विद्यार्थी ध्यान दें कि इसमें हमने काका कालेलकर की जीवनी के बारे में संक्षेप में एक सारणी के माध्यम से समझाया है।
काका कालेलकर की जीवनी –

समान्य नामदत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर
अन्य नामकाका साहब, आचार्य कालेलकर
जन्मतिथि01 दिसंबर, 1885 ई.
जन्म स्थानमहाराष्ट्र के सतारा जिले में
मृत्युतिथि21 अगस्त, 1981 ई.
मृत्यु स्थाननई दिल्ली (भारत)
पिता का नामश्री बालकृष्ण कालेलकर
व्यवसायलेखक, पत्रकारिता, स्वतंत्रता सेनानी
प्रसिद्धिस्वतंत्रता संग्राम के सक्रिय कार्यकर्ता
साहित्य युगशुक्ल एवं शुक्लोत्तर युग के लेखक
पुरस्कारपद्मभूषण, गांधी पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार
संपादन‘राष्ट्रमत’ (मराठी पत्रिका)
भाषासरल, बोधगम्य, प्रवाहयुक्त खड़ीबोली
शैलीविवेचनात्मक, वर्णनात्मक, व्यंग्यात्मक
प्रमुख रचनाएंबापू की झांकियां, लोकमाता, सर्वोदय, यात्रा, उस पार के पड़ोसी, हिमालय प्रवास, जीवन काव्य।
हिंदी साहित्य में स्थानदक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार-प्रसार में विशिष्ट योगदान

आचार्य काका कालेलकर एक महान राष्ट्रभाषा के अश्रांत प्रचारक, उच्चकोटि के विद्वान और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के निर्भीक सेनानी एवं अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे।

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काका कालेलकर का जीवन परिचय

काका कालेलकर, जिनका पूरा नाम दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर था। ये एक प्रख्यात भारतीय समाज सुधारक, शिक्षाविद् और स्वतंत्रता सेनानी के कार्यकर्ता थे। उनका जन्म 1 दिसंबर, 1885 ई. में महाराष्ट्र के सतारा जिले के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री बालकृष्ण कालेलकर जो एक कोषाधिकारी थे। आचार्य कालेलकर एक बड़े प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति थे। मराठी इनकी मातृभाषा थी, लेकिन इसके अतिरिक्त काका कालेलकर जी ने हिंदी, गुजराती, बांग्ला, अंग्रेजी, संस्कृत आदि भाषाओं पर स्वाध्याय से ही अच्छा अध्ययन प्राप्त कर लिया था।

इसके बाद, आचार्य कालेलकर ने मुंबई विश्वविद्यालय से बी० ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की और फिर वे बड़ौदा के ‘गंगानाथ भारतीय सार्वजनिक विद्यालय’ के आचार्य पद पर नियुक्त हो गए थे। इनकी कार्य पद्धति, उदात्त विचार और मधुर व्यवहार को देखकर इन्हें “काका” का विशेषण दिया गया था।

काका कालेलकर
काका कालेलकर का जीवन परिचय

आचार्य काका कालेलकर ने साबरमती आश्रम में प्रधानाध्यापक और तदनन्तर गुजरात विद्यापीठ में अध्यापक कार्य भी किया। और फिर ये दिल्ली आकर ‘हिंदी प्रचार सभा’ का कार्य देखने लगे। जिन राष्ट्रीय नेताओं तथा महापुरुषों ने राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार कार्य में विशेष उत्सुकता दिखाई थी उनकी पहली श्रेणी में काका कालेलकर का नाम आता है। इन्होंने राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रचार को राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत माना और जब काका साहब को महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर एवं पुरुषोत्तमदास टंडन जी के संपर्क में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

तब गांधी जी के नेतृत्व में जितने भी आंदोलन हुए काका कालेलकर ने सभी में भाग लिया और कई बार जेल भी गए। सन् 1930 ई. में पुना के यरवदा जेल में काका साहब ने गांधी जी के साथ काफी समय बिताया। महात्मा गांधी के नेतृत्व से इनका हिंदी के प्रति प्रेम और भी जागृत हुआ।
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा में सन् 1938 ई. के अधिवेशन में भाषण करते हुए आचार्य कालेलकर ने कहा था- “हमारी राष्ट्रभाषा प्रचार एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है।” हिंदी के अलावा गुजराती में भी इन्होंने सतुत्य कार्य किया। काका साहब ने ‘राष्ट्रमत’ नामक मराठी पत्रिका का संपादन भी किया था।

आचार्य काका कालेलकर ने शान्ति-निकेतन में अध्यापक, साबरमती आश्रम में प्रधानाध्यापक और बड़ौदा में राष्ट्रीय शाला के आचार्य पद पर भी कार्य किया। गांधी जी की मृत्यु के बाद उनकी स्मृति के निर्मित ‘गांधी संग्रहालय’ के पहले संचालक भी रहे थे। काका साहब संविधान सभा के सदस्य भी रहे। तथा सन् 1952 ई. से सन् 1957 ई. तक राज्यसभा के सदस्य तथा अनेक आयोगों के अध्यक्ष भी रहे। भारत सरकार ने इन्हें “पद्मभूषण” और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति ने “गांधी पुरस्कार” से भी सम्मानित किया था। 21 अगस्त, 1981 ई. को काका कालेलकर जी का स्वर्गवास हो गया था।

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काका कालेलकर का साहित्यिक परिचय

हिंदी साहित्य में काका साहब के योगदान की चर्चा करते हुए डॉ. राजेश्वर प्रसाद चतुर्वेदी ने लिखा है कि काका कालेलकर बहुभाषी होने पर भी वे मुख्य रूप से हिंदी और उसमें भी साहित्यिक हिंदी के पक्षधर थे। इनकी साहित्यिक भाषा में सरलता, भावुकता तथा ओज का अद्भुत संगम है। चित्रमयता तो इतनी है कि प्रायः आलोचक इनके गध को पधमय-गध की संज्ञा प्रदान करते हैं।

काका कालेलकर ने हिंदी साहित्य में निबंध, जीवनी, संस्मरण, यात्रावृत आदि गद्य विधाओं के रूप में उपलब्ध होता है। इन्होंने हिंदी एवं गुजराती में तो अनेक रचनाओं का सृजन किया और साथ ही हिंदी भाषा में अपनी अनेक गुजराती रचनाओं का अनुवाद भी किया। इनकी रचनाओं पर अनेक राष्ट्रीय नेताओं एवं साहित्यिकारों का प्रभाव परिलक्षित होता है। तत्कालीन समस्याओं पर भी काका साहब ने अनेक सशक्त रचनाओं का सृजन किया। काका कालेलकर जी की रचनाओं में भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयामों की झलक दिखाई देती है।

काका कालेलकर की रचनाएं

आचार्य कालेलकर जी की प्रमुख रचनाएं एवं कृतियां इस प्रकार हैं –
निबंध संग्रह – जीवन साहित्य, जीवन का काव्य एवं सर्वोदय।
यात्रावृत्तांत – हिमालय प्रवास, यात्रा, उस पार के पड़ोसी एवं लोकमाता।
संस्मरण – बापू की झांकियां ।
आत्मकथा – जीवन लीला एवं सर्वोदय ।
इसके अलावा काका कालेलकर ने अनेक पुस्तकें भी लिखी हैं। उनमें कुछ इस प्रकार हैं – भारत-दर्शन, जीवन-संस्कृति, स्वामी-रामतीर्थी, राष्ट्रभाषा हिंदी का मिशन आदि।

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काका कालेलकर की भाषा शैली

काका साहब की भाषा शुद्ध खड़ीबोली है उसमें प्रवाह, ओज तथा अकुशलता है। काका साहब अनेक भाषाओं के ज्ञानी थे। इसलिए इनकी भाषा में हिंदी, अंग्रेजी, फारसी, गुजराती एवं मराठी गुण भी मिलते हैं। इनकी भाषा में मुहावरों एवं लोकोक्तियों का भी प्रयोग किया गया है। भाषा में प्रसंग के अनुसार ओज गुण भी शामिल होते हैं।

काका कालेलकर जी की शैली विषय और प्रसंग के अनुरूप काका साहब ने विवेचनात्मक, आत्मकथात्मक, व्यंग्यात्मक, परिचयात्मक, वर्णनात्मक आदि शैलियों का प्रयोग किया गया है। अतः इस प्रकार प्रसंग एवं विषय के अनुरूप इनकी भाषा शैली बहुत ही सजीव, सरल एवं प्रभावपूर्ण है।

काका कालेलकर की उपलब्धियां

  • भारत सरकार ने काका कालेलकर को सन् 1964 ई. में पद्मभूषण की उपाधि से सम्मानित किया था।
  • सन् 1965 ई. में काका कालेलकर को गुजराती भाषा में लिखी पुस्तक ‘व्यवस्था पुस्तक’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
  • सन् 1969 ई. में काका कालेलकर को पद्म-विभूषण की उपाधि से भी सम्मानित किया था।
  • सन् 1971 ई. में काका कालेलकर को साहित्यिक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में साहित्य अकादमी फेलोशिप भी दी गई थी।
  • सन् 1985 ई. में काका कालेलकर के सम्मान में एक स्मारकीय डाक टिकट की भी शुरुआत की गई थी।

FAQs. काका कालेलकर जी से संबंधित प्रश्न उत्तर

1. काका कालेलकर का जन्म कब और कहां हुआ था?

काका कालेलकर का जन्म 1 दिसंबर 1885 ई. में महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था।

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2. काका कालेलकर की मृत्यु कब और कहां हुई थी?

काका कालेलकर की मृत्यु 21 अगस्त 1981 ई. को नई दिल्ली, भारत में हुई थी।

3. काका कालेलकर के पिता का क्या नाम है?

काका कालेलकर के पिता का नाम श्री बालकृष्ण कालेलकर है।

4. काका कालेलकर की मातृभाषा क्या थी?

काका कालेलकर की मातृभाषा मराठी थी।

5. काका कालेलकर को कौन कौन सा पुरस्कार मिला?

काका कालेलकर को पद्मभूषण, पद्मविभूषण, गांधी पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार इत्यादि पुरस्कार मिले थे।

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