कोणीय संवेग तथा बल आघूर्ण में संबंध | Angular Momentum and Torque in Hindi

कोणीय संवेग (Angular Momentum in Hindi)

माना यदि किसी कण के रेखीय संवेग के किसी बिंदु के सापेक्ष आघूर्ण को उस कण का कोणीय संवेग कहते हैं इसे \overrightarrow{J} से प्रदर्शित करते हैं अर्थात्
\overrightarrow{J} = \overrightarrow{r} × \overrightarrow{P} = \overrightarrow{r} × m \overrightarrow{v} ….(1)

बल-आघूर्ण (Torque in Hindi)

माना किसी बिन्दु पर कार्यरत बल \overrightarrow{F} के किसी बिन्दु के सापेक्ष आघूर्ण को बल-आघूर्ण कहते हैं। तथा इसे \overrightarrow{ι} से व्यक्त करते हैं। अर्थात्

\overrightarrow{ι} = \overrightarrow{r} × \overrightarrow{F} ….(2)

कोणीय संवेग और बल आघूर्ण में सम्बन्ध

समीकरण (1) का अवकलन करने पर,
\frac{d \overrightarrow{J}}{dt} = \frac{d}{dt} ( \overrightarrow{r} × \overrightarrow{P} )
या \frac{d \overrightarrow{J}}{dt} = ( \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} × \overrightarrow{P} ) + ( \overrightarrow{r} × \frac{d \overrightarrow{P}}{dt} )
अर्थात्
\frac{d \overrightarrow{J}}{dt} = ( \overrightarrow{v} × m \overrightarrow{v} ) + ( \overrightarrow{r} × \frac{d \overrightarrow{P}}{dt} )

लेकिन \overrightarrow{v} × m \overrightarrow{v} दो समान्तर वेक्टरों का वेक्टर गुणन हैं। अतः यह शून्य हैं। इस प्रकार,

\frac{d \overrightarrow{J}}{dt} = 0 + ( \overrightarrow{r} × \frac{d \overrightarrow{P}}{dt} )

चूंकि न्यूटन के गति के द्वितीय नियम से, संवेग परिवर्तन की दर \frac{d \overrightarrow{P}}{dt} तथा बल \overrightarrow{F} के बराबर होती है। अतः
\frac{d \overrightarrow{J}}{dt} = \overrightarrow{r} × \overrightarrow{F}

अर्थात् परिभाषा से, किसी बल के किसी बिंदु के सापेक्ष आघूर्ण को बल-आघूर्ण कहते हैं। तथा इसे \overrightarrow{ι} से प्रदर्शित करते हैं।तब
\overrightarrow{r} × \overrightarrow{F} = \overrightarrow{ι}
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ \frac{d \overrightarrow{J}}{dt} = \overrightarrow{ι} } ….(3)

इस प्रकार, स्पष्ट है कि किसी कण के कोणीय संवेग परिवर्तन की दर, उस कण पर कार्यरत बल-आघूर्ण के बराबर होती है।
“यही बल-आघूर्ण तथा कोणीय संवेग के बीच संबंध है।”

n-कणों के समुदाय के लिए कोणीय संवेग

माना यदि n-कणों के निकाय का किसी स्थिर बिन्दु के सापेक्ष कण का सम्पूर्ण कोणीय संवेग, उसके द्रव्यमान केन्द्र के उस बिन्दु के सापेक्ष कोणीय संवेग के पदों में ज्ञात कर सकते हैं।

n-कणों के समुदाय के लिए कोणीय संवेग
कोणीय संवेग तथा बल आघूर्ण में संबंध

माना कि n-कणों के किसी निकाय के द्रव्यमान केन्द्र (C.M.) का मूलबिन्दु ‘O’ के सापेक्ष स्थिति वेक्टर \overrightarrow{R_{cm}} है। तथा द्रव्यमान mk के किसी कण k का C.M. के सापेक्ष स्थित वेक्टर
\overrightarrow{r} है। तब कण k का मूलबिन्दु के सापेक्ष स्थिति वेक्टर-
\overrightarrow{r_k} = \overrightarrow{r_{ck}} + \overrightarrow{R_{cm}} …(1)

इसी प्रकार यदि द्रव्यमान केंद्र का वेग \overrightarrow{V_{cm}} तथा द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष k वें कण का वेग \overrightarrow{V_{ck}} लें, तो

\overrightarrow{V_k} = \overrightarrow{V_{ck}} + \overrightarrow{V_{cm}} …(2)

अब यदि मूलबिन्दु ‘O’ के सापेक्ष n-कणों के निकाय के लिए कण का कोणीय संवेग–
\overrightarrow{J} = Σ \overrightarrow{r_k} × \overrightarrow{P_k} …(3)
या
\overrightarrow{J} \overrightarrow{r_k} × (mk \overrightarrow{V_k} )
या
\overrightarrow{J} =Σmk ( \overrightarrow{r_k} × \overrightarrow{V_k} ) ….(4)

समीकरण (1) व (2) से क्रमशः \overrightarrow{r_k} तथा \overrightarrow{V_k} के मानों को समीकरण (4) में रखने पर,
\overrightarrow{J} =Σmk [( \overrightarrow{r_{ck}} + \overrightarrow{R_{cm}} ) × ( \overrightarrow{V_{ck}} + \overrightarrow{V_{cm}} )]
या
\overrightarrow{J} =Σmk( \overrightarrow{r_{ck}} × \overrightarrow{V_{ck}} ) +Σmk( \overrightarrow{r_{ck}} × \overrightarrow{V_{cm}} ) +Σmk( \overrightarrow{R_{cm}} × \overrightarrow{V_{ck}} ) +Σmk( \overrightarrow{R_{cm}} × \overrightarrow{V_{cm}} ) …..(5)
या
\overrightarrow{J} =Σmk( \overrightarrow{r_{ck}} × \overrightarrow{V_{ck}} ) + (Σmk \overrightarrow{r_{ck}} ) × \overrightarrow{V_{cm}} + \overrightarrow{R_{cm}} × (Σmk \overrightarrow{V_{ck}} ) + M( \overrightarrow{R_{cm}} × \overrightarrow{V_{cm}} ) …..(6)
{चूंकि Σmk = M (कुल द्रव्यमान)}

इसे भी पढ़ें.. गैलीलियन रूपान्तरण समीकरण

चूंकि द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष n-कणों के निकाय के कणों का कुल रेखीय संवेग शुन्य होता है। अतः Σmk \overrightarrow{V_{ck}} = 0 तथा द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष सभी द्रव्यमानों का आघूर्ण शून्य होता हैं। अतः Σmk \overrightarrow{r_{ck}} = 0 हैं।
अतः समीकरण (6) से,
\overrightarrow{J} = Σmk( \overrightarrow{r_{ck}} × \overrightarrow{V_{ck}} ) + \overrightarrow{R_{cm}} × (M \overrightarrow{V_{cm}} ) ….(7)

यहां Σmk( \overrightarrow{r_{ck}} × \overrightarrow{V_{ck}} ) = \overrightarrow{J_{cm}}
(चूंकि C.M. के सापेक्ष कोणीय संवेग)
तथा
M \overrightarrow{V_{cm}} = \overrightarrow{P}

यदि n- कणों के समुदाय के लिए कण का मूलबिन्दु के सापेक्ष रेखीय संवेग

अतः समीकरण (7) से,

\overrightarrow{J} = \overrightarrow{J_{cm}} + \overrightarrow{R_{cm}} × \overrightarrow{P} …..(8)

अतः समीकरण स्पष्ट है कि “एक कण निकाय का कोणीय संवेग \overrightarrow{J} तथा द्रव्यमान केन्द्र के परितः निकाय का कोणीय संवेग कहलाता हैं।”

सम्बन्धित प्रशन
Q.1 कोणीय संवेग तथा बल-आघूर्ण को परिभाषित कीजिए? तथा द्रव्यमान केन्द्र के परितः निकाय के कोणीय संवेग के लिए सुत्र ज्ञात कीजिए?
Q.2 कोणीय संवेग तथा बल–आघूर्ण में सम्बन्ध ज्ञात करों ? सिद्ध कीजिए कि एक कण निकाय का कोणीय संवेग ( \overrightarrow{J} ) निम्नानुसार व्यक्त किया जा सकता है –
\overrightarrow{J} = \overrightarrow{J_{cm}} + \overrightarrow{R_{cm}} × \overrightarrow{P} , जहां प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं?

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