गैसों का अणुगति सिद्धांत क्या है | Kinetic Theory of Gases in Hind

गैसों का अणुगति सिद्धांत

इस सिद्धांत के अनुसार, वायु या गैस में अनेक अति सूक्ष्म कण पाए जाते हैं। जिन्हें ‘ अणु ‘ कहते हैं। एक शुद्ध गैस के सारे अणु एक – ही जैसे होते हैं। तथा गैस में इन अणुओं के बीच की पारस्परिक दूरी बहुत अधिक होती है। अतः गैस में अधिकांश खाली स्थान होता है। जिसमें गैस के अणु सभी दिशाओं में तीव्र सरल रेखीय गति करते रहते हैं, तथा गति के दौरान गैस के अणु आपस में बर्तन की दीवार से टकराते रहते हैं। जिससे उनकी चाल और गति की दिशा परिवर्तित होती रहती है। अतः इस गति के सिद्धांत को ” गैसों का अणुगति सिद्धांत ” कहते हैं।

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गैस का दाब क्या है

किसी बर्तन में भरी गैस का दाब गैस के गतिशील अणुओं द्वारा बर्तन की दीवार पर लगातार टक्करें मारने के कारण उत्पन्न होता है। दीवार से टकराने पर, अणु का संवेग परिवर्तित होता है। अतः न्यूटन के गति विषयक नियमानुसार, चूंकि बर्तन की दीवार से टकराने वाले अणु असंख्य है। अतः दीवार पर एक स्थायी बल आरोपित रहता है। यह बल दीवार के संवेग परिवर्तन की दर के बराबर होता है। तथा दीवार के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित बल को ही ” गैस का दाब ” कहा जाता है।

अणुगति सिद्धांत की मूल अभिगृहीतियाॅं

अणुगति सिद्धांत के अनुसार,

  1. प्रत्येक गैस अति सूक्ष्म कणों से मिलकर बनी होती है। जिन्हें अणु कहते हैं। सभी अणु ‘ दृढ़ ‘ तथा ‘ अतिसूक्ष्म ‘ होते हैं। इन्हें सूक्ष्म ठोस गोला माना जा सकता है।
  2. अणुओं का आकार अतिसूक्ष्म होता है, जिससे अणुओं का आयतन, गैस के आयतन की तुलना में नगण्य होता है।
  3. अणुओं के बीच परस्पर आकर्षण बल शून्य होता है। अतः अणु दो टक्करों के बीच नियत चाल से सीधी रेखा में चलते हैं। जब यह अणु परस्पर या बर्तन की दीवार से टकराते हैं। तो इनकी गति की दिशा बदल जाती है।
  4. सभी टक्करें पूर्णतः प्रत्यास्थ होती हैं। अर्थात् गतिज ऊर्जा नियत रहती है।
  5. दो अणुओं की टक्कर में लगा समय, दो उत्तरोत्तर टक्करों के बीच लगने वाले समय की तुलना में नगण्य होता है।
  6. बर्तन के भीतर गैस के सभी अणु, सभी संभव दिशाओं में सभी संभव चालों से निरंतर गतिशील रहते हैं। तथा वे परस्पर बर्तन की दीवारों से टकराते रहते हैं। चूंकि गैस में अणुओं की संख्या बहुतायत में है, अतः संपूर्ण बर्तन में अणुओं का वितरण समान रहता है।
  7. चूंकि अणुओं का द्रव्यमान नगण्य तथा चाल अत्यधिक है, अतः अणुओं की गति पर गुरुत्वाकर्षण बल का प्रभाव नहीं होता है।

आदर्श गैस के दाब के लिए व्यंजक

माना कि आदर्श गैस की एक निश्चित मात्रा एक घनाकार बर्तन में भरी है। जिसकी दीवारें पूर्णतः प्रत्यास्थ है। तथा प्रत्येक भुजा की लंबाई ‘ l ‘ है। माना कि गैस के प्रत्येक अणु का द्रव्यमान ‘m’ तथा गैस में कुल अणुओं की संख्या ‘n’ है। गैस के अणु सभी संभव दिशाओं में निरंतर गति करते रहते हैं। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

आदर्श गैस का दाब
आदर्श गैस का दाब

माना कि गैस के किसी एक अणु का वेग ‘v’ है, तथा इस वेग के X-अक्ष, Y-अक्ष तथा Z-अक्ष के समांतर घटक क्रमशः a, b तथा c हैं। तब,

v2 = a2 + b2 + c2 …..(1)

माना कि यह अणु दीवार N1 की और (जो कि X-अक्ष के अभिलम्बवत् तल में है), a वेग से जा रहा है। N1 से टकराने पर अणु का वेग a से बदलकर (-a) हो जाता है। (चूंकि प्रत्यास्थ टक्कर में वेग का परिमाण ना बदल कर केवल दिशा ही बदलती है।) अतः X-अक्ष के अनुदिश एक टक्कर में अणु का संवेग परिवर्तन –
= अंतिम संवेग – प्रारंभिक संवेग
= ma – (- ma)
= 2ma

अतः एक टक्कर में दीवार N1 को अणु द्वारा हस्तांतरित संवेग = 2a है। यह अणु N1 टकराकर वापस लौटता है। तथा ‘ l ‘ दूरी तय करके पुनः सामने वाली दीवार N2 से टकराकर वापस लौटता है। तथा फिर से l दूरी तय करके N1 से टकराता है। इस प्रकार अणु N1 से दुबारा टकराने से पहले वेग a से चलकर 2l दूरी तय करता है।

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अतः दीवार N1 पर दो उत्तरोत्तर टक्करों के बीच का समय = \frac{2l}{a}
तथा दीवार N1 पर 1 सेकंड में टक्करों की संख्या = \frac{a}{2l}
अतः 1 सेकंड में N1 को हस्तांतरित करने में कुल संवेग –
= 2ma . \frac{a}{2l}
= \frac{m}{l} . a2 ……(2)

अतः अणु द्वारा N1 पर आरोपित बल = \frac{m}{l} . a2 …..(3)

तथा इस प्रकार, गैस के सभी अणुओं द्वारा N1 पर आरोपित बल –
F = \frac{m}{l} (a21 + a22 + ….+ a2n) …..(4)

यहां a1, a2, …., an क्रमशः अणु 1, 2, …, n के वेग के x-घटक है।
तथा गैस के सभी अणुओं द्वारा N1 पर आरोपित दाब –
Px = \frac{F}{l^2}
या Px = \frac{m}{l^3} (a21 + a22 + …. + a2n)
या Px = \frac{mn}{V} [ \frac{a^2_1 + a^2_2 + …. + a^2_n}{n} ]
तो, Px = \frac{mn}{V} . \overline{a^2} ……(5)

यहां V = l3 गैस (या घन) का आयतन तथा \overline{a^2_n} अणुओं के लिए a2 का औसत मान है। अतः इसी प्रकार, Y-अक्ष के लम्बवत् तथा Z-अक्ष के लम्बवत् दीवारों पर गैस के अणुओं द्वारा लगाए गए दाब क्रमशः ,

Py = \frac{mn}{V} . \overline{b^2} …..(6)
और

Pz = \frac{mn}{V} . \overline{c^2} …..(7)

अतः चूंकि समीकरण v2 = a2 + b2 + c2 प्रत्येक अणु के लिए सत्य है। अतः सभी अणुओं के लिए उनके औसत मानों के लिए भी सत्य होगा, अर्थात्
\overline{v^2} = \overline{a^2} + \overline{b^2} + \overline{c^2} …..(8)

अर्थात् घन की सभी दीवारों पर दाब बराबर लिया जा सकता है। तथा (माना) यदि Px = Py = Pz = P यदि दाब के लिए उपर्युक्त व्यंजकों को जोड़ने पर,

3P = \frac{mn}{V} . \overline{a^2} + \frac{mn}{V} . \overline{b^2} + \frac{mn}{V} . \overline{c^2} …..(9)
अथवा

P = \frac{1}{3} \frac{mn}{V} .( \overline{a^2} + \overline{b^2} + \overline{c^2} )
अतः समीकरण (8) से इनका मान रखने पर,

\footnotesize \boxed{ P = \frac{1}{3} \frac{mn}{V} . \overline{v^2} } …..(10)

अतः “यही आदर्श गैस के दाब के लिए अभीष्ट व्यंजक है।”
यहां vrms = \sqrt{ \overline{v^2}} = वर्ग – माध्य – मूल – चाल तथा \frac{mn}{V} गैस का घनत्व = ρ को समीकरण (10) में रखने पर,
अतः गैस का दाब –
P = \frac{1}{3} ρ v2rms .…(11)

इसलिए,
vrms = \sqrt{ \frac{3P}{ρ}} …(12)
अब,

\footnotesize \boxed{ P = \frac{1}{3} ρ \overline{v^2} }
अतः
P = \frac{2}{3} ( \frac{1}{2} ρ \overline{v^2} )

लेकिन, E = \frac{1}{2} ρ \overline{v^2} प्रति एकांक आयतन गैस की गतिज ऊर्जा हैं। –
इसलिए,

\footnotesize \boxed{ P = \frac{2}{3} E } …(13)

अर्थात् समीकरण से स्पष्ट है कि आदर्श गैस का दाब, उसके प्रति एकांक आयतन में अणुओं की गतिज ऊर्जा का दो – तिहाई होता है। “

Note – सम्बन्धित प्रश्न
Q.1 आदर्श गैस के अणुगति सिद्धांत की मूल अभिगृहीतियाॅं लिखिए तथा इसके आधार पर आदर्श गैस के दाब के लिए व्यंजक का निगमन कीजिए ?
Q.2 सिद्ध करो कि P = \frac{1}{3} ρ \overline{v^2} , जहां ρ = गैस का घनत्व, \overline{v^2} = वर्ग – माध्य – वेग तथा P = गैस का दाब है ?
Q.3 सिद्ध करो कि गैस द्वारा बर्तन की दीवार पर लगाया गया दाब, प्रति एकांक आयतन गैस की गतिज ऊर्जा का दो – तिहाई होता है ?
Q.4 गैसों के अणुगति सिद्धांत की मूल संकल्पनाएं लिखिए तथा इसकी सहायता से एक आदर्श गैस द्वारा बर्तन की दीवारों पर आरोपित दाब (P) का मान ज्ञात कीजिए ?

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