गैसों का गतिक ताप, वायुमण्डल में गैसें तथा बहु-परमाणुक क्या होते हैं | टिप्पणी लिखिए

लघु उत्तरीय प्रशन

प्रशन – पृथ्वी की अपेक्षा ऊपरी वायुमण्डल में गैस गतिक ताप कहीं ऊंचा है। परन्तु फिर भी वहां काफी ठण्ड होती है, क्यों ?

गैस का गतिक ताप

वायु में गैस का गतिक ताप ऊपरी वायुमण्डल में 1000k की कोटि का होता है, परन्तु फिर भी वहां अधिक ठण्ड का अनुभव होता है। तथा गैस के गतिक ताप की वजह से प्रति एकांक अणु की औसत गतिज ऊर्जा ( \frac{3}{kT} ) पृथ्वी की तुलना में काफी अधिक होती है। लेकिन ऊपरी वायुमण्डल का अणु घनत्व बहुत कम होता है। जिससे प्रति एकांक आयतन में अणुओं की संख्या पृथ्वी की अपेक्षा बहुत कम होती है। अतः प्रति एकांक आयतन में अणुओं के स्थानान्तरण की मूल गतिज ऊर्जा बहुत कम होती है। अर्थात् (यद्यपि प्रति अणु की स्थानान्तरण गतिज ऊर्जा बहुत अधिक है। तथा गतिक ताप यही स्थानान्तरण गतिज ऊर्जा की माप है।)
इस प्रकार ऊपरी वायुमण्डल में प्रति एकांक आयतन में ऊष्मा की मात्रा अर्थात् ऊष्मा घनत्व बहुत कम होने के कारण वहां ठण्ड का अनुभव अधिक होता है। क्योंकि ऊष्मा संवेदना त्वचा द्वारा अवशोषित ऊष्मा पर निर्भर करती है।

पढ़ें… ब्राउनियन गति क्या है? आइंस्टीन की व्याख्या कीजिए। (Brownian Motion in Hindi)

पढ़ें… प्रशीतित्र क्या है? प्रशीतलन चक्र क्या होता है? कार्यगुणांक और दक्षता में संबंध (Refrigerator in Hindi)

प्रशन – पृथ्वी के वायुमण्डल में भारी गैसें; जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन अनिवार्य रूप से होती है जबकि हाइड्रोजन नहीं, क्यों ?

वायुमण्डल में गैसें

पृथ्वी के वायुमण्डल में भारी गैसें; जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन इत्यादि अनिवार्यता होती हैं। जबकि हाइड्रोजन नहीं। इसका कारण यह है कि हाइड्रोजन की वर्ग-माध्य-मूल चाल ऑक्सीजन व नाइट्रोजन की अपेक्षा अधिक होती है। क्योंकि हाइड्रोजन गैस ऑक्सीजन व नाइट्रोजन गैसों की तुलना में बहुत हल्की होती है। चूंकि वर्ग-माध्य-मूल चाल परम ताप के वर्गमूल के पलायन वेग से अधिक हो जाती है। तथा परम ताप हाइड्रोजन के अणुओं का पलायन कर जाते हैं।

प्रशन – बहु परमाणुक गैस के अणुओं पर परमाणुओं की उपस्थिति किस प्रकार अपना महत्व रखती है ?

बहु-परमाणुक क्या हैं

अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, गैस अत्यन्त सूक्ष्म कणों (जैसे अणु) से मिलकर बनती है। वास्तव में ये अणु संरचना रहित कणों की भाॅंति नहीं होते। यह अणु एक या अधिक परमाणुओं से मिलकर बनते हैं। वह गैस जिसके प्रत्येक अणु में केवल एक परमाणु होता है, ‘एक-परमाणुक गैस‘ कहलाती है, जैसे- पारे की वाष्प, हीलियम व आर्गन इत्यादि। वे गैसें जिनके अणुओं की रचना दो परमाणुओं से मिलकर होती है। उन्हें ‘द्वि-परमाणुक गैस‘ कहलाती है, जैसे- नाइट्रोजन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन इत्यादि। इसी प्रकार, यदि गैस के अणुओं की रचना दो से अधिक परमाणुओं द्वारा होती है, तो उनको ‘बहु-परमाणुक गैसें‘ कहा जाता है, जैसे जल वाष्प।
अणुगति सिद्धान्त के अनुसार, प्रत्येक गैस के अणु (चाहे गैस एक-परमाणुक, द्वि-परमाणुक अथवा बहु-परमाणुक हो) सदैव स्थानान्तरीय गति करते रहते हैं। अतः उनमें स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा होती है।
स्थानान्तरीय गति के साथ-साथ अणु किसी अक्ष के परितः घूर्णन गति भी कर सकते हैं। इस प्रकार उनमें घूर्णन गतिज ऊर्जा भी हो सकती है।

और पढ़ें.. गैसों के अणुगति सिद्धांत से ताप की गतिज व्याख्या

प्रशन – स्थिर ताप पर किसी गैस के निश्चित द्रव्यमान का आयतन घटाने पर उसका दाब बढ़ता है। अणुगति सिद्धान्त के आधार पर इसकी व्याख्या कीजिए ?

अणुगति सिद्धान्त

के अनुसार, गैस, अणुओं से मिलकर बनी है। जो नियमित गति करते रहते हैं। गैस द्वारा दाब, उसके अणुओं द्वारा बर्तन की दीवारों से संघट्ट (या टक्कर) के फलस्वरूप आरोपित होता है, क्योंकि प्रत्येक टक्कर में वे दीवार को संवेग प्रदान करते हैं। तथा ताप स्थिर रहने पर अणुओं की माध्य चाल समान रहती है। अब आयतन घटाने पर एक अणु द्वारा दीवार पर दो क्रमिक टक्करों के बीच तय की गई दूरी घटती है। जिससे दीवार पर प्रति सेकण्ड एक अणु के टक्करों की संख्या बढ़ती है। अतः प्रति सेकण्ड दीवार को प्रदान किया गया संवेग बढ़ता है। जिससे गैस का बढ़ता है।

प्रशन – एक बॉक्स में किसी गैस के n अणु हैं। यदि बॉक्स में अणुओं की संख्या 2n कर दी जाए, तो बताओ कि निम्नलिखित पर क्या प्रभाव पड़ेगा-
(1) गैस का दाब, (2) गैस की कुल गतिज ऊर्जा, (3) गैस के अणुओं की वर्ग माध्य मूल चाल।

  • गैस का दाब दोगुना हो जाएगा, क्योंकि P = \frac{1}{3} mn \frac{ \overline{v^2}}{V} अर्थात् P ∝ n ।
  • गैस की कुल गतिज ऊर्जा दोगुनी हो जाएगी, क्योंकि E = \frac{1}{2} mn \overline{v^2} अर्थात् E ∝ n ।
  • गैस के अणुओं की वर्ग माध्य मूल चाल नहीं बदलेगी, क्योंकि vrms = \sqrt{ \frac{3RT}{M}} अर्थात् वर्ग माध्य मूल चाल, अणुओं की संख्या पर निर्भर नहीं करती है।

प्रशन – दिए गए ताप पर हाइड्रोजन गैस की ऊष्मा चालकता सबसे अधिक क्यों होती है ?

हाइड्रोजन गैस की ऊष्मा-चालकता

क्योंकि ऊष्मा चालकता गुणांक K किसी गैस के अणु के द्रव्यमान m के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है। (K ∝ \frac{1}{ \sqrt{m}} ) और हाइड्रोजन गैस के अणु का द्रव्यमान सबसे कम होता है।

प्रशन – रेफ्रिजरेटर किसे कहते हैं ?

रेफ्रिजरेटर (Refrigerator in Hindi)

यह एक ऐसी युक्ति है जो निम्न ताप से ऊष्मा लेकर उच्च ताप पर ऊष्मा देती है, जबकि बाह्य स्त्रोत द्वारा कार्य किया जाता है, तो इसे ‘रेफ्रिजरेटर‘ कहते हैं।

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