गैसों के अणुगति सिद्धांत से ताप की गतिज व्याख्या कीजिए | Kinetic Interpretation of Temperature in Hindi

ताप की गतिज व्याख्या

गैसों के अणुगति सिद्धांत के आधार पर ताप की गतिक व्याख्या, को मैक्सवेल ने गैसों की गतिज सिद्धांत के आधार पर, यह सिद्ध किया है, कि “आदर्श गैस के अणुओं की औसत स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा गैस के परम ताप के अनुक्रमानुपाती होती है।” अतः इसी परिणाम को ही “ताप की गतिज व्याख्या” कहते हैं।

माना यदि गैस के किसी 1 ग्राम अणु पर विचार करते हैं। जिसका परम ताप T व आयतन V है। तथा 1 ग्राम अणु गैस में अणुओं की संख्या M (आवोगाद्रो संख्या) है। माना की गैस के एक अणु का द्रव्यमान m है। तथा अणुओं का वर्ग-माध्य-वेग \overline{c^2} है, तब अणुगति सिद्धांत के अनुसार, गैस का दाब होगा ।
p = \frac{1}{3} \frac{mN}{V} \overline{c^2}
या
pV = \frac{2}{3} N ( \frac{1}{2} m \overline{c^2} ) …..(1)

परंतु ( \frac{1}{2} m \overline{c^2} ) किसी अणु की औसत स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा है। अतः ताप गतिज व्याख्या के अनुसार, यह परम ताप T के अनुक्रमानुपाती होती है अर्थात्
\frac{1}{2} m \overline{c^2} ∝ T
अथवा

\frac{1}{2} m \overline{c^2} = α T ….(2)

जहां α एक नियतांक है। अतः समीकरण (1) में \frac{1}{2} m \overline{c^2} का मान रखने पर,
pV = \frac{2}{3} N (α T)

तथा इस समीकरण की तुलना आदर्श गैस के समीकरण pV = RT से करने पर,
\frac{2}{3} Nα = R
अथवा
α = \frac{2}{3} \frac{R}{N}
या α = \frac{2}{3} k

जहां \frac{R}{N} = k वॉल्टजमैन नियतांक है। अतः α का मान समीकरण (2) में रखने पर,

\footnotesize \boxed{ \frac{1}{2} m \overline{c^2} = \frac{3}{2} kT}

अर्थात् इस प्रकार, आदर्श गैस के एक अणु की स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा \frac{3}{2} kT है। अतः स्पष्ट होता है, कि यह गैस के अणु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती है। अर्थात् दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं, कि “एक ही ताप पर, भिन्न-भिन्न गैसों के लिए प्रति अणु की औसत गतिज ऊर्जा एक ही होती है तथा यह गैस के परम ताप के अनुक्रमानुपाती होती हैं।”
यदि हम एक ही ताप पर दो या दो से अधिक भिन्न-भिन्न गैसों को आपस में मिला दो तो उनके अणुओं के बीच ऊर्जा का आदान-प्रदान नहीं होगा । और गैस तापीय अवस्था में कहलाएगी।
तो समीकरण (3) में T = 0 रखने पर,
\overline{c^2} = 0

अर्थात् ताप की गतिज व्याख्या के अनुसार, “परम शून्य वह ताप होता है। जिस पर गैस के समस्त अणुओं की गति शून्य हो जाती है।” वास्तविकता में यह सत्य नहीं है। क्योंकि परम ताप पर भी अणुओं में कुछ ऊर्जा होती है। जिसे ‘शून्य-बिन्दु-ऊर्जा’ कहते हैं।

और पढ़ें… गैसों का अणुगति सिद्धांत क्या है? (Kinetic Theory of Gases in Hind)

Note – ऊपरी वायुमण्डल में गैस गतिक ताप 1000K की कोठी का है, किन्तु फिर भी यहां काफी ठण्ड है। इस विरोधाभास की व्याख्या कीजिए?

ऊपरी वायुमण्डल में ठण्ड की व्याख्या

ऊपरी वायुमण्डल में गैस गतिक ताप 1000K की कोटि का होता है। अतः पृथ्वी की तुलना में ऊपरी वायुमण्डल में गैस के प्रति अणु की औसत गतिज ऊर्जा \frac{3}{2} kT का मान काफी अधिक होता है। परन्तु ऊपरी वायुमण्डल का घनत्व बहुत कम होता है, अर्थात् प्रति एकांक आयतन में अणुओं की संख्या पृथ्वी की अपेक्षा बहुत कम होती है। अतः प्रति एकांक आयतन में अणुओं की कुल स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा भी बहुत कम होती है। अर्थात् प्रति एकांक आयतन में ऊष्मा की कुल मात्रा बहुत कम होती है। इसी कारण वायुमण्डल में ठण्ड अनुभव होती है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 गैसों के अणुगति सिद्धांत के अनुसार ताप की गतिक व्याख्या कीजिए तथा गैस के अणु की औसत स्थानान्तरीय गतिज ऊर्जा की गणना कीजिए?
Q. 2गैसों के अणुगति सिद्धांत के लिए ताप की गतिज व्याख्या कीजिए ?

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