गैस की श्यानता क्या है, परिभाषा तथा श्यानता-गुणांक का सूत्र ज्ञात कीजिए | Viscosity of Gas in Hindi

श्यानता की परिभाषा

“किसी द्रव तत्त्व के उस गुण को जिसके कारण बहते हुए द्रव तत्त्व की समीपवर्ती परतों के बीच के सापेक्ष गति का विरोध होता है। तो इसे ‘श्यानता (Viscosity in Hindi)’ कहते हैं।”

गैस की श्यानता क्या है

किसी गैस की श्यानता के लिए अणुगति सिद्धांत के आधार पर सूत्र ज्ञात करने के लिए पार्श्व चित्र में दर्शाया गया है।
तथा जिसमें गैसीय पदार्थ का फलक RySx धारा रेखीय प्रवाह से प्रवाहरत है। माना यदि फलक RySx के समांतर गैस की तीन क्रमागत परतें क्रमशः M, N व O प्रवाहित हो रही हैं। जिनके बीच की दूरियां ‘λ’ हैं, जहां λ गैस का माध्य-मुक्त-पथ है। अतः गैस के अणु पर्त M व O से चलकर पर्त N को पार करते हैं। तथा जब ये अणु पर्त N पर टकराते हैं, तो इस पर्त में अणुओं को संवेग प्रदान करते हैं। जैसे कि चित्र में दिखाया गया है।

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गैस की श्यानता
गैस की श्यानता

माना यदि अनियमित गति करने वाले अणुओं के लिए सभी दिशाएं समान रूप से संभव हैं। अतः तीन परस्पर लंबवत् अक्षों में से प्रत्येक अक्ष के समांतर गति करने वाले अणुओं की औसत संख्या कुल अणुओं की संख्या का एक-तिहाई होगी। अतः इनमें से आधे अणु (अर्थात् 1/6) धनात्मक दिशा में तथा आधे अणु (अर्थात् 1/6) ऋणात्मक दिशा में गति करेंगे।
इस प्रकार किसी भी एक दिशा में गति करने वाले अणुओं की संख्या कुल अणुओं की संख्या का 1/6 भाग हैं।
अर्थात् इसे इस प्रकार भी कह सकते हैं। कि यदि बर्तन के अंदर अणु 6 प्रमाणिक दिशाओं (तीन अक्षों की दो संभव दिशाओं) में भ्रमण गति कर सकते हैं। क्योंकि प्रत्येक अक्ष के अनुदिश दो दिशाएं होती हैं एक धन व दूसरी ऋण। अतः इन 6 दिशाओं में से किसी एक दिशा में चलने वाले अणुओं की औसत संख्या, कुल अणुओं की संख्या का 1/6 होती है।
अतः M से N की ओर या O से N की ओर जाने वाले अणुओं की संख्या, अणुओं की कुल संख्या का 1/6 होता है।
माना N पर अणुओं का वेग v है, तो परत O के अणुओं का वेग
= (v – λ \frac{dV}{dZ} )

(चूंकि यहां \frac{dV}{dZ} = दूरी के साथ वेग परिवर्तन की दर है)
तथा परत M के अणुओं का वेग
= (v + λ \frac{dV}{dZ} )

अतः अब यदि M से N की ओर जाने वाले तथा O से N की ओर जाने वाले अणु टक्कर किए बिना ही N तक पहुंच जाते हैं। वे सभी अणु जो प्रति सेकण्ड M अथवा O से टक्कर किए बिना N तक पहुंच जाते हैं, तथा ऊपर से या नीचे से ऊर्ध्वाधर गति करते हुए आते हैं।
माना गैस के प्रति एकांक आयतन में अणुओं की संख्या ‘n’ और उनका औसत वेग \overline{c} है, तो परतों M और O से चलकर परत N के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर पहुंचने वाले अणुओं की संख्या = \frac{n \overline{c}}{6}
अतः यदि M से चलकर N के प्रति एकांक क्षेत्रफल में प्रति सेकंड गुजरने वाले अणुओं द्वारा M को प्रदान किया गया संवेग
= \frac{1}{6} mn \overline{c} (v + λ \frac{dV}{dZ} ) …..(1)

यहां ‘m’ गैस के प्रत्येक अणु का द्रव्यमान है।
अर्थात् इतना संवेग पर्त M से प्रति सेकेंड पर्त N के प्रति एकांक क्षेत्रफल को ऊर्ध्वाधर नीचे की दिशा में स्थानांतरित होता है।
अतः इस प्रकार उन अणुओं द्वारा N पर लगाया गया संवेग, जो कि पर्त O से प्रति सेकंड में पर्त N के प्रति एकांक क्षेत्रफल को जाते है
= \frac{1}{6} mn \overline{c} (v – λ \frac{dV}{dZ} ) …..(2)

अतः प्रति सेकंड नीचे की ओर जाने वाला कुल संवेग (अर्थात् पर्त N का प्राप्त कुल संवेग)
= \frac{1}{6} mn \overline{c} (v + λ \frac{dV}{dZ} ) – \frac{1}{6} mn \overline{c} (v – λ \frac{dV}{dZ} )
= \frac{1}{3} mn \overline{c} λ.( \frac{dV}{dZ} ) …..(3)

अतः समीकरण (3) से परत N के एकांक क्षेत्रफल से प्राप्त संवेग परिवर्तन की दर प्रकट होती है, जोकि “स्पर्श-रेखीय श्यान बल” के बराबर है।

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गैस की श्यानता-गुणांक का सूत्र

श्यानता गुणांक की परिभाषा के अनुसार, “श्यानता गुणांक (η), स्पर्श-रेखीय प्रतिबल तथा वेग प्रवणता की निष्पत्ति के बराबर होता है।” अर्थात्
η = स्पर्श-रेखीय प्रतिबल/वेग प्रवणता
अतः समीकरण (3) से,
η = \frac{\frac{1}{3}mn \overline{c}λ.(\frac{dV}{dZ})}{( \frac{dV}{dZ})}
अर्थात्
η = \frac{1}{3} mn \overline{c} λ ….(4)

परंतु किसी गैस का माध्य-मुक्त-पथ, λ = \frac{1}{\sqrt{2}πσ^2n}
यहां ‘σ’ गैस के अणु का व्यास है। अतः
η = \frac{1}{3} mn \overline{c} \frac{1}{ \sqrt{2}πσ^2n}
या \footnotesize \boxed{ η = \frac{m \overline{c}}{3 \sqrt{2}πσ^2} } ….(5)

अतः “इस प्रकार इसे गैस की श्यानता गुणांक के लिए अभीष्ट व्यंजक (सूत्र) कहलाता है।”
चूंकि समीकरण (5) में ‘n’ नहीं है, अतः “गैस की श्यानता η दाब पर निर्भर नहीं करती। इस समीकरण से यह भी पता चलता है कि गैस की श्यानता η अणुओं की औसत चाल \overline{c} के अनुक्रमानुपाती है। परंतु अणुओं की औसत चाल, गैस के परम ताप के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होती है। अतः गैस की श्यानता भी परम ताप के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होती है।”

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Note – दिखाइए कि ताप बढ़ने पर द्रव की श्यानता पर क्या प्रभाव पड़ता है।

ताप बढ़ने पर द्रव की श्यानता

जैसा कि हम जानते हैं यदि “ताप के बढ़ने पर द्रव की श्यानता घटती है। जबकि दाब के बढ़ने पर द्रव की श्यानता बढ़ती है। अतः गैस की श्यानता भी बढ़ती है।”

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q.1 श्यानता किसे कहते हैं ? अभिगमन घटना के आधार पर श्यानता की व्याख्या कीजिए तथा श्यानता गुणांक के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए ?
Q.2 अणुगति सिद्धांत के आधार पर श्यानता की व्याख्या कीजिए ? तथा किसी गैस के लिए श्यानता गुणांक का सूत्र ज्ञात कीजिए ? तथा दिखाइए कि यह गैस के दाब पर निर्भर नहीं करता और परम ताप के वर्गमूल के अनुक्रमानुपाती होता है ?
Q.3 ज्ञात कीजिए कि ताप बढ़ने पर द्रव की श्यानता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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