घूर्णन गति के समीकरण क्या है | Equation of Rotational Motion in Hindi

घूर्णन गति क्या है

जब कोई पिण्ड किसी स्थिर अक्ष के परितः इस प्रकार गति करता है कि पिण्ड का प्रत्येक कण वृत्तीय पथ पर चल रहा हो तथा समस्त वृत्तों के केन्द्र उस अक्ष पर हों, तो उसकी गति को “घूर्णन गति” (rotational motion in Hindi) कहते हैं।

घूर्णन गति के समीकरण

यदि नियत कोणीय त्वरण के अंतर्गत कण की घूर्णन गति के समीकरण यदि किसी अक्ष के सापेक्ष घूर्णन गति कर रहे तो कण का प्रारंभिक कोणीय वेग ω0 कोणीय त्वरण α तथा t समय बाद कोणीय वेग ω व कोणीय विस्थापन θ है, तो गति के तीन समीकरण इस प्रकार होंगे।

1.प्रथम समीकरण -: माना कोई पिण्ड एक स्थिर अक्ष के परितः नियत कोणीय त्वरण α के अन्तर्गत घूम रहा है। माना किसी क्षण t = 0 पर पिंड का कोणीय वेग ω0 है तथा t समय पश्चात् बढ़कर ω हो जाता है। तब,
ω = ω0 + αt

उपपत्ति – कोणीय त्वरण की परिभाषा से,
α = \frac{dω}{dt}
यहां dω पिण्ड का अनन्त सूक्ष्म समयान्तराल dt में अनन्त सूक्ष्म कोणीय वेग परिवर्तन है। इससे
dω = α dt

किसी क्षण t = 0 पर पिण्ड का कोणीय वेग ω0 है तथा t समय पश्चात् बढ़कर ω हो जाता है। अतः उपरोक्त समीकरण का सीमाओं ω = ω0 से ω = ω तथा t = 0 से t = t के बीच समाकलन करने पर,
\int^{ω}_{ω_0} dω = \int^t_0 α dt अथवा [ ω ]ωω0 = α [ t ]t0
अथवा
ω – ω0 = α(t – 0)
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ ω = ω_0 + α t } …(1)

इसे भी पढ़ें.. दृढ़ पिण्ड क्या है, स्थानान्तरीय व घूर्णन गति को समझाइए।

2.द्वितीय समीकरण -: माना किसी पिण्ड का प्रारम्भिक कोणीय वेग ω0 है। तथा यह किसी निश्चित अक्ष के परितः नियत कोणीय त्वरण α से घूम रहा है, तब समय t के पश्चात् पिण्ड द्वारा तय किया गया कोणीय विस्थापन
θ = ω0 t + \frac{1}{2} αt2

उपपत्ति – कोणीय वेग की परिभाषा से,
ω = \frac{dθ}{dt}
यहां dθ पिण्ड का अनन्त सूक्ष्म समयान्तराल dt में अनन्त सूक्ष्म कोणीय विस्थापन है। इससे
dθ = ω dt
समीकरण (1) से ω का मान रखने पर,
dθ = ω0 dt + αt dt

माना कि प्रारम्भ में क्षण t = 0 पर पिण्ड की कोणीय स्थिति 0 है तथा t समय में पिण्ड θ कोण से घूम जाता है, तब उपरोक्त समीकरण का सीमाओं θ = 0 से θ = θ तथा t = 0 से t = t के बीच समाकलन करने पर,
\int^θ_0 dθ = \int^t_0 ω0 dt + \int^t_0 αt dt
[ θ ]θ0 = ω0[ t ]t0 + α[ \frac{t^2}{2} ]t0
अथवा
(θ – 0) = ω0(t – 0) + α( \frac{t^2}{2} – 0)
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ θ = ω_0t + \frac{1}{2} αt^2 } …(2)

3.तृतीय समीकरण -: t का मान t = \frac{(ω - ω_0)}{α} समीकरण (2) में रखने पर,

θ = \frac{ω_0 (ω - ω_0)}{α} + \frac{1}{2} α ( \frac{ω - ω_0}{α} )2
अथवा
2αθ = 2ωω0 + 2ω20 + ω2 – ω20 – 2ωω0
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ ω^2 = ω^2_0 + 2αθ } …(3)

यही दृढ़ पिण्ड की “घूर्णन गति के समीकरण” हैं। अथवा इन्हें “न्यूटन के गति के समीकरण” भी कहते हैं।

घूर्णन गति एवं जड़त्व आघूर्ण

न्यूटन की गति के नियम घूर्णन गति में भी लागू होते हैं। अतः प्रथम नियम या जड़त्व के नियम के अनुसार, कोई भी वस्तु अपनी घूर्णन अवस्था को स्वतः नहीं बदल सकती है। अर्थात् यदि कोई वस्तु किसी घूर्णन अक्ष के परितः स्थिर है, तो वह स्थिर ही रहेगी और यदि वह किसी घूर्णन अक्ष के परितः एक नियत कोणीय चाल से घूम रही है, तो उस अक्ष के परितः उसी कोणीय चाल से घूमती रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल-आघूर्ण लगाकर उसकी वर्तमान अवस्था में परिवर्तन न किया जाए अर्थात् किसी वस्तु की घूर्णन अवस्था में परिवर्तन के लिए बाह्य बल-आघूर्ण की आवश्यकता होती है। अथवा प्रत्येक वस्तु अपनी घूर्णन अवस्था को स्वतः बदलने के लिए असमर्थ है। घूर्णन गति में, वस्तु की इस असमर्थता की माप को ही जड़त्व-आघूर्ण अथवा घूर्णन जड़त्व कहते हैं। घूर्णन गति में, वस्तु के जड़त्व की माप को जड़त्व-आघूर्ण कहते हैं।

पढ़ें… जड़त्व तथा जड़त्व आघूर्ण क्या है

Note – एक समान कोणीय त्वरण से घूर्णन गति करती हुई दृढ़ वस्तु के लिए समीकरण का निगमन कीजिए ।

दृढ़ वस्तु की घूर्णन गति के लिए समीकरण

माना कोई वस्तु एक समान कोणीय त्वरण से घूर्णन गति करती हुई एक दृढ़ वस्तु एक स्थित बिंदु O में से होकर गुजरते हुए। अक्ष MN के सापेक्ष कोणीय वेग ω से घूम रही है। कोणीय वेग वेक्टर \overrightarrow{ω} की दिशा घूर्णन अक्ष MN के अनुदिश होगी। वस्तु के प्रत्येक कण MN अक्ष के चारों और वृत्ताकार पथों में गति करेंगे।

दृढ़ पिण्ड के घूर्णन गति
दृढ़ पिण्ड के घूर्णन गति

माना कि किसी समय कण R का स्थिति सदिश \overrightarrow{r} है। तथा अक्ष MN पर डाले गए लम्ब की लंबाई RS = r0 है, तो R द्वारा निर्मित वृत्ताकार पथ का केन्द्र S होगा।

कण R की चाल = ωr0 = ωr sinθ

अतः कण R का वेग \overrightarrow{v} = \overrightarrow{ω} × \overrightarrow{r}

बिन्दु O के सापेक्ष कण R का कोणीय संवेग,
\overrightarrow{J_p} = \overrightarrow{r} × m \overrightarrow{v} …..(1)

अतः किसी बिन्दु O के सापेक्ष पूर्ण पदार्थ का कोणीय संवेग,
\overrightarrow{J} = Σm ( \overrightarrow{r} × \overrightarrow{v} )

\overrightarrow{J} = Σm [ \overrightarrow{r} × ( \overrightarrow{ω} × \overrightarrow{r} )]

अतः जिसकी तरफ सामान्यतः ω की दिशा में नहीं होती हैं।
या
\overrightarrow{J} = Σm( \overrightarrow{r} . \overrightarrow{r} ) \overrightarrow{ω} – ( \overrightarrow{r} . \overrightarrow{ω} ) \overrightarrow{r} …..(2)

\overrightarrow{J} = Σm[r2 \overrightarrow{ω} – rωcosθ \overrightarrow{r} ] .....(3)

यदि जिसमें θ = ∠ROS, वेक्टर \overrightarrow{r} तथा \overrightarrow{ω} के बीच का कोण हैं।

अतः \overrightarrow{r} का ω की दिशा में घटक का मान rCosθ होगा। और तब घूर्णन अक्ष के अनुदिश कोणीय संवेग J के घटक का मान J0 निम्न होगा-

J0 = Σm [r2ω - (rωcosθ) rcosθ]

J0 = Σm mr2ω (1-cos2θ)

J0 = Σm mr2ω sin2θ

J0 = ω Σmr20

(चूंकि r0 = rsinθ)

यहां जो Σmr20 दी हुई घूर्णन अक्ष के सापेक्ष "जड़त्व आघूर्ण" कहते हैं। इसे I से प्रदर्शित करते हैं। यदि कणों के द्रव्यमान m1, m2, .... तथा MN अक्ष से दूरियां r1, r2,... हैं, तो
[I = Σmr20]

[I = m1r21 + m2r22 + .… ] .....(4)

अतः इस तरह पदार्थ का परिणामी कोणीय संवेग J घूर्णन अक्ष की ओर होगा, अर्थात्

J = Iω .....(5)

या कोणीय संवेग = जड़त्व आघूर्ण.कोणीय त्वरण
यदि ω = 1, तब J = 1

अतः" उपरोक्त समीकरणों को दृढ़ पदार्थ के घूर्णन गति के समीकरण कहते हैं। यदि कोणीय वेग का मान एक इकाई होता है। तो किसी पदार्थ का जड़त्व आघूर्ण उस अक्ष के सापेक्ष, कोणीय संवेग के बराबर होता है।"

संबंधित प्रश्न -
Q.1 एक समान कोणीय त्वरण से घूर्णन गति करती एक दृढ़ वस्तु के लिए समीकरणों का निगमन कीजिए? तथा जड़त्व आघूर्ण एवं परिभ्रमण त्रिज्या को ज्ञात कीजिए?
Q.2 सिद्ध कीजिए कि किसी पिण्ड का जड़त्व आघूर्ण निम्न बातों पर निर्भर करता है? तथा दृढ़ पिण्ड की घूर्णन गति के समीकरणों को सिध्द कीजिए?

Q.3 घूर्णन गति क्या है? घूर्णन गति के समीकरणों को सिद्ध कीजिए।

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