टर्मिनल विभवांतर क्या है | टर्मिनल, वि. वा. बल तथा आंतरिक प्रतिरोध में संबंध ज्ञात कीजिए

टर्मिनल विभवांतर क्या है

किसी परिपथ के किन्हीं दो बिन्दुओं के बीच एकांक आवेश को प्रवाहित करने में परिपथ के उन दो बिन्दुओं के बीच व्यय होने वाली ऊर्जा अथवा सेल द्वारा किए गए कार्य को उन दो बिन्दुओं के बीच ‘टर्मिनल विभवांतर’ कहते हैं। इसे V से प्रदर्शित करते हैं।

टर्मिनल विभवांतर के लिए व्यंजक

माना किसी विद्युत परिपथ से जुड़े सेल का विद्युत वाहक बल E है। तथा परिपथ में q आवेश के प्रवाहित होने पर सेल द्वारा दी गई ऊर्जा W हो, तब
E = \frac{W}{q}
अर्थात् परिपथ के सभी भागों में प्रवाहित q आवेश होगा। अतः चित्र-1 के अनुसार,

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टर्मिनल विभवांतर

यदि परिपथ के भिन्न-भिन्न भागों में व्यय होने वाली ऊर्जाएं W1, W2, W3,… हो, तो उनका योग सदैव W ही होता है। अतः
E = \frac{W}{q} = \frac{W_1 + W_2 + W_3 +…}{q}
या E = \frac{W_1}{q} + \frac{W_2}{q} + \frac{W_3}{q} +….
माना कि यदि \frac{W_1}{q} = V1, \frac{W_2}{q} = V2, \frac{W_3}{q} = V3,…. तब
\footnotesize \boxed{ E = V_1 + V_2 + V_3 +… }
अतः स्पष्ट है कि V1, V2, V3,… एकांक आवेश को प्रवाहित करने में परिपथ के विभिन्न भागों में व्यय होने वाली ऊर्जाएं हैं। यही परिपथ के भिन्न-भिन्न भागों के ‘टर्मिनल विभवांतर’ कहलाते हैं।
अर्थात् टर्मिनल विभवांतर की परिभाषा के अनुसार, यदि विद्युत परिपथ के दो बिन्दुओं के बीच q कूलॉम आवेश प्रवाहित करने पर W’ जूल कार्य करना पड़े तो उन बिंदुओं के बीच टर्मिनल विभवांतर V = \frac{W'}{q} वोल्ट होता है। टर्मिनल विभवांतर को वोल्टमीटर से नापते हैं।

विद्युत वाहक बल क्या है

“किसी एकांक वैधुत आवेश को सेल के साथ पूरे परिपथ में प्रवाहित कराने में सेल द्वारा कृत कार्य अथवा सेल द्वारा दी गई ऊर्जा को सेल का ‘विद्युत वाहक बल’ कहते हैं।” इसे E से प्रदर्शित करते हैं।
यदि किसी परिपथ में आवेश q प्रवाहित करने पर सेल द्वारा किया गया कार्य अथवा सेल द्वारा दी गई उर्जा W है तो सेल का विद्युत वाहक बल
E = \frac{W}{q}
अर्थात् इसका मात्रक जूल/कूलाॅम अथवा वोल्ट होता है। विद्युत वाहक बल प्रत्येक सेल का लाक्षणिक गुण होता है जिसका मान सेल में प्रयुक्त इलेक्ट्रोडों तथा वैद्युत-अपघट्य की प्रकृति पर निर्भर करता है। वैद्युत-अपघट्य की मात्रा तथा इलेक्ट्रॉडों के आकार अथवा उनके बीच की दूरी का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

आंतरिक प्रतिरोध क्या है

“किसी बन्द सर्किट में सेल द्वारा विद्युत धारा प्रेषित करते समय सेल के अन्दर उसके घोल में धारा ऋणात्मक प्लेट से धनात्मक प्लेट की ओर बहती है। इस धारा के लिए सेल के घोल के प्रतिरोध को सेल का ‘आंतरिक प्रतिरोध’ कहते हैं।” इसे r से प्रदर्शित करते हैं। इसका मात्रक ‘ओम’ होता है।

सेल के आंतरिक प्रतिरोध का मान निम्न बातों पर निर्भर करता है-

  1. यह सेल की धनात्मक और ऋणात्मक दोनों प्लेटों के बीच की दूरी के अनुक्रमानुपाती होता है।
  2. यह साधन में डूबे प्लेटों के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  3. यह वैद्युत-अपघट्य के घोल की सांद्रता के अनुक्रमानुपाती होता है।
  4. यह वैद्युत-अपघट्य एवं प्लेटों के पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है।

और पढ़ें.. ओम का नियम क्या है परिभाषा सूत्र, इस नियम को विस्तार से समझें।

टर्मिनल, वि. वा. बल तथा आंतरिक प्रतिरोध में संबंध

माना किसी सेल का विद्युत वाहक बल E तथा आंतरिक प्रतिरोध r है। इस सेल को एक कुंजी K, एक प्रतिरोध R तथा एक अमीटर A के साथ श्रेणी क्रम में जोड़ देते हैं। सेल की प्लेटों के बीच एक वोल्टमीटर V लगा देते हैं। जैसा कि चित्र-2 में दिखाया गया है।

टर्मिनल विभवांतर, विद्युत वाहक बल तथा आंतरिक प्रतिरोध में संबंध
टर्मिनल, वि. वा. बल तथा आंतरिक प्रतिरोध में संबंध

यदि जब कुंजी K को निकाल देते हैं तो सेल से कोई भी धारा प्रवाहित नहीं होती तथा उस समय वोल्टमीटर का पाठ्यक्रम सेल के विद्युत वाहक बल E के बताता है। तथा कुंजी K को बंद कर देने से प्रतिरोध R में धारा i बहने लगती है जिसका माना अमीटर A से पढ़ लेते हैं। इस समय बोल्टमीटर सेल की प्लेटों के बीच टर्मिनल विभवांतर को नापता है। माना वोल्टमीटर V है, तब
परिपथ में i एम्पियर की धारा t समय के लिए बहती है तब सेल द्वारा पूरे परिपथ में व्यय ऊर्जा या किया गया कार्य,
W = Eq = Eit
चूंकि सेल के बाहर प्रतिरोध R के सिरों के बीच विभवांतर V है अतः बाह्य परिपथ अर्थात् प्रतिरोध R में व्यय ऊर्जा अथवा कृत कार्य,
Wबाह्य = Vit
यदि सेल का आंतरिक प्रतिरोध r है तो धारा i बहने से सेल के भीतर वैद्युत-अपघट्य में विभव पतन V’ = ir होगा, अतः सेल के भीतर व्यय ऊर्जा या किया गया कार्य,
Wआंतरिक = V’it = i2rt
परन्तु ऊर्जा संरक्षण के नियम के अनुसार, W = Wबाह्य + Wआंतरिक
अतः Eit = Vit + i2rt अथवा E = V + ir
अतः सेल से धारा i लेते समय सेल का टर्मिनल विभवांतर,
\footnotesize \boxed{ V = E - ir }
यदि i = 0 हो तो V = E अर्थात् जब सेल से कोई धारा नहीं ली जाती है तो सेल की प्लेटों के बीच विभवांतर उसके विद्युत वाहक बल के बराबर होता है। इस प्रकार, टर्मिनल विभवांतर, विद्युत वाहक बल तथा आंतरिक प्रतिरोध में संबंध ज्ञात हो जाता है।

Note – संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं
Q.1 टर्मिनल विभवांतर किसे कहते हैं? इसका सूत्र स्थापित कीजिए तथा विद्युत वाहक बल और आंतरिक प्रतिरोध की परिभाषा दीजिए।
Q.2 किसी सेल के विद्युत वाहक बल इसके सिरों के बीच टर्मिनल विभवांतर तथा आंतरिक प्रतिरोध में संबंध बताने वाले सूत्र की विस्थापना कीजिए।
Q.3 सेल के विद्युत वाहक बल से क्या तात्पर्य है? किसी सेल के विद्युत वाहक बल का मान किस पर निर्भर करता है?
Q.4 सेल के आंतरिक प्रतिरोध से क्या तात्पर्य है? यह किन-किन बातों पर निर्भर करता है?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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