दृढ़ पिण्ड क्या है, स्थानान्तरीय व घूर्णन गति को समझाइए | Rigid Body in Hindi

दृढ़ पिण्ड क्या है

माना “प्रत्येक पिण्ड छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होते हैं। तथा कणों के बीच पारस्परिक बल कार्य करते रहते हैं। जो कि कणों की बीच की दूरी पर निर्भर करते हैं। यदि पिण्ड पर बाहरी बल लगाया जाए तो कणों के बीच विस्थापन न्यूनतम होता है, ऐसे पिण्डों को ‘दृढ़ पिण्ड’ (Rigid Body in Hindi) कहते हैं।”
जब किसी दृढ़ पिण्ड पर बाह्य बल लगाया जाता है। तो दो प्रकार की गतियां होती हैं।

  • पिण्ड की सरल रेखा में गति या स्थानान्तरीय गति ।
  • पिण्ड की किसी अक्ष के परितः घूर्णन गति ।

इसे भी पढ़ें.. दृढ़ पिण्डों का सन्तुलन

दृढ़ पिण्ड की स्थानान्तरीय गति

माना किसी पिण्ड पर कोई बाह्य बल लगाने पर गति इस प्रकार होती है। कि सभी कणों का वेग तथा विस्थापन समान होता है, तो पिण्ड की गति ‘स्थानान्तरीय गति’ (Translation motion in Hindi) कहलाती है। उदाहरण के लिए – ट्रेन के डिब्बे की गति स्थानान्तरीय गति होती हैं।

दृढ़ पिण्ड की घूर्णन गति

यदि कोई पिण्ड किसी स्थिर अक्ष पर इस प्रकार टिका है कि पिण्ड उस अक्ष के चारों और स्वतंत्रता पूर्वक घूम सकें तो बाह्य बल के आघूर्ण के कारण घूमना प्रारंभ कर देता है। पिण्ड की इस गति को ‘घूर्णन गति’ (Rotational Motion in Hindi) कहते हैं। तथा जिस अक्ष के सापेक्ष पिण्ड घूर्णन गति करता है उसे घूर्णन अक्ष कहते हैं। उदाहरण के लिए – लट्टू का नाचना, बिजली के पंखे के घूमती ब्लेड आदि घूर्णन गति के उदाहरण हैं।

और पढ़ें.. संरक्षी तथा असंरक्षी बलों में अन्तर, परिभाषा, उदाहरण

रेखीय वेग तथा कोणीय वेग में संबंध

घूर्णन गति में पिण्ड के किसी भी कण द्वारा एकांक समय में घूमा गया कोण उस पिण्ड का कोणीय वेग (ω) कहलाता हैं। इस प्रकार की गति में प्रत्येक कण का कोणीय वेग समान तथा रेखीय वेग भिन्न – भिन्न होते हैं।

घूर्णन गति
घूर्णन गति

माना यदि पिण्ड का एक कण A, जो घूर्णन अक्ष से r दूरी पर है, t सेकंड में θ कोण घूमकर बिंदु B पर पहुंचता है। तो कण का कोणीय विस्थापन = θ
कण का कोणीय वेग ω = \frac{कोणीय विस्थापन}{समयांतर} = \frac{θ}{t}
तथा रेखीय वेग = \frac{रेखीय विस्थापन}{समयांतर} = \frac{दूरी AB}{t}
या θ = \frac{AB}{r} , या AB = rθ

रेखीय वेग v = \frac{rθ}{t}

{चूंकि ( \frac{θ}{t} = ω)}

\footnotesize \boxed{v = rω} …(1)

अत: यही “रेखीय वेग तथा कोणीय वेग के बीच संबंध है।”

और पढ़ें.. रेखीय संवेग संरक्षण का सिद्धांत

रेखीय त्वरण तथा कोणीय त्वरण में संबंध

घूर्णन गति में समय के साथ कोणीय वेग परिवर्तन की दर को कोणीय त्वरण (α) कहते हैं।
α = \frac{ω_2 - ω_1}{t}
t = \frac{ω_2 - ω_1}{α}

यदि कण A जिसकी घूर्णन अक्ष से दूरी r है। का पहला रेखिय वेग v1 तथा t समय बाद रेखीय वेग v2 है, तो

ω1 = \frac{v_1}{r}
तथा ω2 = \frac{v_2}{r}

α = \frac{(v_2/r) - (v_1/r)}{t}

α = \frac{v_2 - v_1}{t} × \frac{1}{r} = \frac{a}{r}

α = \frac{a}{r}

{चूंकि a = रेखीय त्वरण }
\footnotesize \boxed{a = αr} ….(2)

या कण का रेखीय त्वरण = कण की घूर्णन अक्ष से दूरी × कोणीय त्वरण

यही “रेखीय त्वरण तथा कोणीय त्वरण के बीच संबंध है।”

और पढ़ें..घूर्णन गति के समीकरण

बल-आघूर्ण तथा कोणीय त्वरण में संबंध

माना कि कोई पिण्ड जिस पर बल-आघूर्ण ι लगा है, एक स्थिर बिन्दु O में को गुजरने वाली अक्ष के परितः घूम रहा है। तथा पिण्ड में एक नियत कोणीय त्वरण α है। पिण्ड के सभी कणों का कोणीय त्वरण α ही होगा। परन्तु इनके रेखीय त्वरण भिन्न-भिन्न होंगे। माना कि पिण्ड के एक कण का द्रव्यमान m1 है तथा इसकी घूर्णन-अक्ष से दूरी r1 है। तब इस कण का रेखीय त्वरण
a1 = r1α
यदि इस कण पर कार्य करने वाला बल F1 हो, तो
F1 = द्रव्यमान × त्वरण
F1 = m1a1 = m1r1α.
इस बल का बिन्दु O में से गुजरने वाली घूर्णन-अक्ष के परितः आघूर्ण
= बल (F1) × दूरी (r1)
= m1r1α × r1 = m1r21α
इसी प्रकार, यदि अन्य कणों के द्रव्यमान m2, m3… हों तथा उनकी घूर्णन-अक्ष से दूरियां क्रमशः r2, r3… हों, तो उन पर कार्य करने वाले बल-आघूर्ण क्रमशः m2r22α, m3r23α,… होंगे। अतः पूरे पिण्ड पर कार्य करने वाला बल-आघूर्ण ι पिण्ड के सभी कणों पर कार्य करने वाले बलों के आघूर्णों के योग के बराबर होगा। अतः
ι = m1r21α + m2r22α, m3r23α + …
ι = (m1r21 + m2r22 + m3r23 + …) α
ι = Σmr2 α
परन्तु Σmr2 पिण्ड का घूर्णन-अक्ष परितः जड़त्व-आघूर्ण I है । अतः
\footnotesize \boxed{ ι = I × α }
या बल-आघूर्ण = जड़त्व-आघूर्ण × कोणीय त्वरण

अतः स्पष्ट है कि किसी पिण्ड का घूर्णन-अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण, पिण्ड में उस अक्ष के परितः एकांक कोणीय त्वरण उत्पन्न करने के लिए आवश्यक बल-आघूर्ण के बराबर होता है।
“यही बल-आघूर्ण तथा कोणीय त्वरण में संबंध है।”

पढ़ें…कोणीय संवेग तथा बल आघूर्ण में संबंध

Note – संबंधित प्रशन-

Q.1 दृढ़ पिण्ड से क्या तात्पर्य हैं ? दृढ़ पिण्ड की घूर्णन गति का अर्थ समझाइए ?
Q.2 दृढ़ पिंड से आप क्या समझते हैं ? दृढ़ पिंड की घूर्णन गति के समीकरणों को समझाइए ?
Q.3 सिद्ध कीजिए कि दृढ़ पिंड की स्थानांतरण गति तथा घूर्णन गति में क्या संबंध है ?
Q 4 दृढ़ पिंड को समझाइए तथा रेखीय वेग तथा कोणीय वेग में संबंध स्थापित कीजिए ?

Q.5 बल-आघूर्ण तथा कोणीय त्वरण में संबंध स्थापित कीजिए ?
Q.6 कोणीय त्वरण तथा रेखीय त्वरण में संबंध स्थापित कीजिए ?

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *