द्रव्यमान केन्द्र के परितः कणों के निकाय या कोणीय संवेग में संबंध ज्ञात कीजिए |

द्रव्यमान केन्द्र तथा कोणीय संवेग में संबंध

माना एक निकाय में n-कण है। जिसमें i कण का मूल बिंदु O के सापेक्ष \overrightarrow{R_i} तथा \overrightarrow{v_1} है। तथा निकाय में cm का मूल बिंदु O के सापेक्ष क्रमशः \overrightarrow{R_{cm}} तथा \overrightarrow{v_{cm}} है। तब i कण का cm के सापेक्ष तथा \overrightarrow{R_i} \overrightarrow{R_{cm}} तथा \overrightarrow{v_i} \overrightarrow{v_{cm}} होंगे। तब cm के परितः i कण का कोणीय संवेग

= ( \overrightarrow{R_i} \overrightarrow{R_{cm}} ) × mi( \overrightarrow{v_i} \overrightarrow{v_{cm}} )

और पढ़ें.. द्रव्यमान केंद्र क्या है ? बाह्य बलों की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केंद्र का वेग स्थिर रहता है।

सम्पूर्ण निकाय का cm के सापेक्ष कोणीय संवेग

\overrightarrow{J_{cm}} = Σ( \overrightarrow{R_i} \overrightarrow{R_{cm}} ) × mi( \overrightarrow{v_i} \overrightarrow{v_{cm}} )

\overrightarrow{J_{cm}} = Σ \overrightarrow{R_i} × mi \overrightarrow{v_i} – Σ \overrightarrow{R_i} × mi \overrightarrow{v_{cm}} – Σ \overrightarrow{R_{cm}} × mi \overrightarrow{v_i} + Σ \overrightarrow{R_{cm}} + mi \overrightarrow{v_{cm}}

\overrightarrow{J_{cm}} = Σ \overrightarrow{R_i} × \overrightarrow{P_i} – Σmi \overrightarrow{R_i} × \overrightarrow{v_{cm}} \overrightarrow{R_{cm}} × Σmi \overrightarrow{v_i} + \overrightarrow{R_{cm}} × \overrightarrow{v_{cm}} Σmi …(1)

द्रव्यमान केन्द्र
द्रव्यमान केन्द्र

हम जानते है, कि Σmi = M

M \overrightarrow{R_{cm}} = Σmi \overrightarrow{R_i}

समीकरण (1) से,

\overrightarrow{J_{cm}} = \overrightarrow{J} \overrightarrow{R_{cm}} × \overrightarrow{P}

तो \footnotesize \boxed{ \overrightarrow{J} = \overrightarrow{J_{cm}} + \overrightarrow{R_{cm}} × \overrightarrow{P}}

“यही द्रव्यमान केन्द्र के परितः कणों के निकाय का कोणीय संवेग में संबंध है ।”

Note – दृढ़ पिण्ड का द्रव्यमान केन्द्र कैसे ज्ञात करते हैं ?

दृढ़ पिंड का द्रव्यमान केंद्र क्या है

दृढ़ पिण्ड वह पिण्ड होता है जिस पर कितना भी बड़ा बल लगायें, लेकिन पिण्ड की आकृति में कोई परिवर्तन नहीं होता। यदि दृढ़ पिंड किसी बल के अन्तर्गत गतिमान है तो उसके अवयव कण के सापेक्ष स्थितियों में बनें रहते हैं। अर्थात् यदि बाह्य बलों के प्रभाव से पिण्ड के कणों के बीच कोई पारस्परिक विस्थापन नहीं होता है तब इस पिण्ड को दृढ़ पिंड कहते हैं। दृढ़ पिंड के अवयव कण बहुत पास-पास होते हैं। इन कणों की संख्या बहुत अधिक होने से इनके बीच अन्तराल इतना कम होता है कि पिण्ड में द्रव्यमान का वितरण सतत् माना जा सकता है। एक सतत् पिण्ड का द्रव्यमान केंद्र ज्ञात करने के लिए पिण्ड को अनन्त सूक्ष्म अवयवों में विभक्त कर लेते हैं। तथा एक अवयव को जिसका द्रव्यमान dm है, बिन्दु (x, y, z) पर स्थित मान लेते हैं तब द्रव्यमान केंद्र के निर्देशांक निम्न होंगे।

xcm = \frac{\int x dm}{\int dm} , ycm = \frac{\int y dm}{\int dm} , zcm = \frac{\int z dm}{\int dm} .
यहां \int dm = M पिण्ड का कुल द्रव्यमान है। इसलिए
xcm = \frac{1}{M} \int x dm , ycm = \frac{1}{M} \int y dm , zcm = \frac{1}{M} \int z dm .
यह समाकलन चर राशि की उचित सीमाओं के अन्तर्गत लेते हैं।ताकि यह समाकलन सम्पूर्ण पिण्ड के लिए हों। अतः पिण्ड के द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति वेक्टर \overrightarrow{r_{cm}} निम्न सम्बन्ध द्वारा व्यक्त किया जाता है।
\overrightarrow{r_{cm}} = \frac{1}{M} \int \overrightarrow{r} dm
यहां द्रव्यमान dm के अवयव कण का स्थिति वेक्टर \overrightarrow{r} है। अर्थात् इसी प्रकार दृढ़ पिंड का द्रव्यमान केंद्र ज्ञात हो जाता है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q.1 सिद्ध करो – \overrightarrow{J} = \overrightarrow{J_{cm}} + \overrightarrow{R_{cm}} × \overrightarrow{P} , जहाॅ \overrightarrow{J} = कोणीय संवेग, तथा \overrightarrow{J_{cm}} = द्रव्यमान में द्रव के सापेक्ष कोणीय संवेग, \overrightarrow{R_{cm}} = द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति सदिश तथा \overrightarrow{P} = सम्पूर्ण रेखीय संवेग।
Q.2 द्रव्यमान केन्द्र में सापेक्ष कणों के निकाय तथा कोणीय संवेग ज्ञात कीजिए ?

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