निम्न तापों के उत्पादन पर निबंध लिखिए | Production of Low Temperature in Hindi

निम्न तापों का उत्पादन

जब 0°C से नीचे के तापों के उत्पादन की विधियों मैं बहुत तेजी से उन्नति हुई है। क्योंकि अतिसूक्ष्म निम्न तापों पर पदार्थों में नवीन गुण जैसे अतिचालकता पाए जाते हैं। अब ऐसी विधियां उपलब्ध हैं जिनसे 10-6k तक ताप उत्पन्न किया जा सकते है। विभिन्न प्रयुक्त विधियो में मुख्यता निम्न सिद्धांत प्रयोग में आते हैं।

1.हिमकारी मिश्रण (freezing mixture in Hindi)

यदि जब बर्फ में कोई घुलनशील लवण डालते हैं, तो बर्फ लवण से ऊष्मा लेकर पिघलने लगता है। तथा थोड़ी सी बर्फ पिघलने पर जो जल बनता है। उसमें लवण घुलता है। तथा आवश्यक ‘विलयन ऊष्मा’ मिश्रण से प्राप्त कर लेता है अतः लवण और बर्फ के मिश्रण का ताप गिरने लगता है।
उदाहरण के लिए- बर्फ में साधारण नमक मिलाने पर मिश्रण का ताप -22°C तक, नौसादर मिलाने पर -55°C तक तथा कास्टिक पोटाश मिलाने पर -65°C तक गिर जाता है। तो इन मिश्रणों को ‘हिमकारी मिश्रण’ कहते हैं।

और पढ़ें.. रुद्धोष्म विचुम्बकन क्या है

2.निम्न दाब पर द्रवों का वाष्पीकरण

यदि जब द्रव वाष्पित होती है। तो वह आवश्यक गुप्त स्वयं अपने से तथा आसपास की वस्तुओं से लेता है। जिससे कि शीतलन उत्पन्न होता है। द्रव की गुप्त ऊष्मा जितनी अधिक होगी, शीतलन भी उतना ही अधिक होगा। यदि द्रव के तल पर दाब कम कर दें, तो द्रव का वाष्पीकरण तीव्र हो जाता है। इसी सिद्धांत पर बर्फ के कारखानों में बर्फ का निर्माण किया जाता है। इसके लिए किसी अधिक गुप्त ऊष्मा वाले द्रव (जैसे- द्रव-मिथाइल क्लोराइड, द्रव-अमोनिया, इत्यादि) को निम्न दाब पर वाष्पित किया जाता है।

3.जूल-टाॅमसन प्रसार

यदि जब किसी संपीडित गैस को जिसका ताप व्युत्क्रमण ताप से नीचे होता है। तथा एक पतले नोक में से ऊंचे दाब से नीचे दाब की ओर प्रवाहित करते हैं, तो गैस का ताप गिर जाता है। गैस के ताप में कमी नोक के दोनों ओर के दावों के अंतर के अनुक्रमानुपाती होती है। इस ‘जूल-टाॅमसन’ प्रसार में गैस का प्रारंभिक ताप जितना कम होगा, गैस उतनी ही अधिक ठंडी होगी। जूल-टाॅमसन प्रसार को गैसों के द्रवण में उपयोग किया जाता है।

4.गैसों का रुध्दोष्म प्रसार

यदि किसी संपीडित गैस को अचानक वायुमंडल में प्रसारित करते हैं, तो गैस को बाहरी दाब के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। जिससे उसकी आन्तरिक ऊर्जा कम हो जाती है। और प्रशीतन की इस क्रिया में उतनी ठंड उत्पन्न हो जाती है कि गैस जमकर ठोस बन जाती है। माना यदि लोहे के सिलिण्डर में ऊंचे दाब पर भरी कार्बन डाइ-ऑक्साइड की टोंटी एकदम खोल दी जाए, और गैस की फुहार के सामने कपड़ा लटका दिया जाए, तो कपड़े पर गैस सफेद बर्फ के रूप में जम जाती है।
इस विधि का उपयोग कैलीटेंट तथा पिक्टे ने ऑक्सीजन को तथा ऑल्सज्यूस्की ने हाइड्रोजन को द्रवित करने में किया। साइमन ने इस विधि के द्वारा सबसे कठिन गैस हीलियम को द्रवित किया।

5.रुध्दोष्म विशोषण (adiabatic desorption in Hindi)

यह विधि बहुत ठंडी वस्तु को थोड़ा और ठंडा करने में उपयोग होती है ठंडा कोयला अनेक गैसों को अवशोषित कर सकता है। यदि रुद्धोष्म अवस्था में कोयले के तल पर पंप द्वारा दाब घटा दें, तो यह अवशोषित गैसें बाहर निकलने लगती हैं। तथा और अधिक ठंडी हो जाती हैं। साइमन ने 5k वायुमंडलीय दाब पर 10k तक ठंडी की हुई हीलियम गैस को कोयले में अवशोषित होने दिया। इस कोयले का 1 मिमी दाब पर विशोषण कराने पर इसका ताप 4k तक गिर जाता है। तथा हीलियम गैस द्रवित हो जाती है।

और पढ़ें.. जूल प्रसार, रुद्धोष्म प्रसार व जूल-थॉमसन प्रसार में अंतर

6.रुद्धोष्म विचुम्बकन (adiabatic demagnetisation in Hindi)

जब किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ को अत्यंत निम्न ताप पर चुंबकीत किया जाता है। तो पदार्थ के अणु घूम कर चुम्बकन क्षेत्र के समांतर हो जाते हैं। चुम्बकन में किया गया कार्य पदार्थ की आंतरिक ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। जिससे पदार्थ का ताप कुछ बढ़ जाता है। अब यदि चुंबकीय पदार्थ को अनुचुंबकीय पदार्थ को ठंडा होने पर रुध्दोष्म दशा में विचुम्बकित किया जाए तो उसका ताप बहुत गिर जाता है। इस विधि का उपयोग करके 0.0014k तक निम्न ताप प्राप्त किया जा सकता है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 निम्न तापों के उत्पादन पर निबंध लिखिए?
Q. 2 निम्न तापों के उत्पादन के आधार पर निम्न नियमों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए?
Q. 3 तापों के उत्पादन जैसे हिमकारी मिश्रण, निम्न दाब पर द्रवों का वाष्पीकरण, गैसों का रुद्धोष्म प्रसार, जूल-टाॅमसन प्रसार, रुध्दोष्म विशोषण तथा रुद्धोष्म विचुम्बकन नियमों पर टिप्पणी लिखिए?
Q. 4 दिखाइए कि गैसों का रुध्दोष्म प्रसार, जूल-टाॅमसन प्रसार तथा रुद्धोष्म विशोषण पर टिप्पणी किस प्रकार ज्ञात कर सकते हैं?

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