पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली व साहित्य में स्थान

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हमने “पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय” (Padumlal Pannalal Bakshi biography in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है। इसमें हमने पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएं एवं कृतियां, निबंध, भाषा शैली, पुरस्कार व साहित्य में स्थान आदि को विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि आप परीक्षाओं में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकें। इसके अलावा इसमें हमने पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर भी दिए हैं, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

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पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का संक्षिप्त परिचय

विद्यार्थी ध्यान दें कि नीचे दी गई सारणी में हमने बख्शी जी की जीवनी के बारे में संक्षेप में समझाया है।
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की जीवनी –

नामपदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
जन्म तिथि27 मई, 1894 ई. में
जन्म स्थानछत्तीसगढ़ के जबलपुर जिले के खैरागढ़ नामक ग्राम में
मृत्यु तिथि28 दिसम्बर, 1971 ई. में
मृत्यु स्थानछत्तीसगढ़ के रायपुर में
पिता का नामश्री पुन्नालाल बख्शी
माता का नामश्रीमती मनोरमा देवी
दादा का नामश्री उमराव बख्शी
पत्नी का नामश्रीमती लक्ष्मी देवी
पैशालेखक, पत्रकार, संपादक, अध्यापक
शिक्षाबी० ए०, बनारस हिन्दू कॉलेज से
साहित्य कालआधुनिक काल (द्विवेदी युग)
सम्पादनसरस्वती एवं छाया पत्रिका
लेखन विधाकाव्य, निबंध, कहानी, आलोचना, नाटक, अनुवाद
साहित्य में पहचाननिबन्धकार एवं आलोचना के रूप में
भाषासंस्कृतनिष्ठ शुद्ध परिमार्जित खड़ीबोली
शैलीभावात्मक, व्याख्यात्मक एवं विचारात्मक
प्रमुख रचनाएंपंचपात्र, पद्मवन्, विश्व साहित्य, साहित्य शिक्षा, शतदल, अश्रुदल, बख्शी ग्रन्थावली, कुछ बिखरे पन्ने, प्रबन्ध पारिजात आदि।
पुरस्कारसाहित्य वाचस्पति, डी०-लिट्०
हिंदी साहित्य में स्थानद्विवेदी युग के प्रमुख साहित्यकार के रूप में महत्वपूर्ण स्थान
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की जीवनी

हिन्दी साहित्य के आकाश में समय-समय पर ऐसे ज्योतिपुंज उदित होते रहे हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा के आलोक से हिन्दी जगत् को समृद्ध किया है। उनमें एक श्री पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (27 मई, 1894 – 28 दिसंबर, 1971) भी हिन्दी गद्य के एक ऐसे ही प्रथा पुंज थे।

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पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय

हिंदी के श्रेष्ठ पत्रकार श्री पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म 27 मई, सन् 1894 ईस्वी को छत्तीसगढ़ के जबलपुर जिले के खैरागढ़ नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री पुन्नालाल बख्शी तथा बाबा का नाम उमराव बख्शी था, जो साहित्य प्रेमी और कवि थे। बख्शी जी की माता का नाम श्रीमती मनोरमा देवी था, इनकी माता को भी हिंदी साहित्य से प्रेम था। परिवार के साहित्यिक वातावरण में पालन-पोषण के कारण इन्हें बचपन से ही हिंदी साहित्य से प्रेम हो गया था और ये विद्यार्थी जीवन काल से ही कविता रचने लगे थे। बी० ए० की परीक्षा उत्तीर्ण करते ही इनकी कविताएं पहले “सरस्वती” में और फिर अन्य पत्रिकाओं में भी प्रकाशित होने लगी। इनकी कविताएं स्वच्छंदतावादी थी जिन पर अंग्रेजी कवि वर्ड्सवर्थ का स्पष्ट प्रभाव परिलक्षित होता है।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की प्रसिद्धि का मुख्य आधार आलोचना और निबन्ध लेखन है। इन्होंने सन् 1920 से लेकर सन् 1927 ई. तक ‘सरस्वती’ पत्रिका का तथा कुछ वर्षों तक ‘छाया’ नामक मासिक पत्रिका का संपादन किया। आचार्य द्विवेदी जी के इस अन्यतम् शिष्य ने कुछ समय तक खैरागढ़ के अध्यापन कार्य भी किया। सन् 1949 ई. में हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा इन्हें ‘साहित्य वाचस्पति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया और सन् 1969 ई. में डी०-लिट्० (डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स) की उपाधि से भी विभूषित किया गया था। बख्शी जी अदम्य साहित्य-सृजन तथा साहित्य सेवा करते हुए 28 दिसंबर, सन् 1971 ईस्वी को इस संसार से परलोक सिधार गए।

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पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का साहित्यिक परिचय

बख्शी जी की गणना द्विवेदी युगीन के प्रमुख साहित्यकारों में होती है ‘हिंदी साहित्य विमर्श’ और ‘विश्व साहित्य’ इनकी दो आलोचनात्मक पुस्तकें हैं। बख्शी जी अपने ललित निबन्धों के लिए स्मरण किए जाते हैं। ये एक विशेष शैलीकार के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। इन्होंने जीवन, समाज, धर्म, संस्कृति और साहित्य आदि विषयों में उच्च कोटि के निबंध लिखे हैं। यत्र-तत्र शिष्ट हास्य-व्यंग्य के कारण इनके निबन्ध अति रोचक बने हुए हैं।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी ने सन् 1920 ई. से 1927 ई. तक बड़ी कुशलता से “सरस्वती” मासिक पत्रिका का संपादन किया। तथा कुछ वर्षों तक इन्होंने “छाया” मासिक पत्रिका का भी संपादन बड़ी योग्यता से किया। इन्होंने स्वतन्त्रतावादी काव्य एवं समीक्षात्मक कृतियों का सृजन किया। निबंधों, आलोचनाओं, कहानियों, कविताओं और अनुवादों में इनके गहन अध्ययन और व्यापक दृष्टिकोण की स्पष्ट छाप है। इन्हें हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा 1949 में “साहित्य वाचस्पति” की उपाधि से अलंकृत किया गया था।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के निबन्धों की प्रमुख विशेषताएं

बख्शी जी का ‘क्या लिखूं?’ एक ललित निबंध है जिसके विषय प्रतिपादन, प्रस्तुतीकरण एवं भाषा शैली में बख्शी जी की सभी विशेषताएं समाहित हैं। इस निबंध की उत्कृष्टता के दर्शन उस समन्वित रचना कौशल में होते हैं जिसके अंतर्गत लेखक ने दो विषयों पर निबंध की विषय सामग्री प्रस्तुति आदि का संकेत ही नहीं किया है, बल्कि संक्षिप्त रूप में उन्हें प्रस्तुत भी कर दिया है। इस निबंध को पढ़कर निबंध के संबंध में जॉनसन की उक्ति का स्मरण हो आता है- “निबंध मन का आकस्मिक और उच्छृंखल आवेग है- असंबद्ध और चिंतनहीन बुद्धि विलास मात्र।”

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पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी की रचनाएं

बख्शी जी की साहित्य साधना का क्षेत्र बहुमुखी एवं व्यापक है इनकी रचनाएं एवं कृतियों का विवरण कुछ इस प्रकार से है-
(1). निबन्ध-संग्रह – प्रबन्ध पारिजात, पंचपात्र, पद्मवान, मकरंद बिंदु, कुछ बिखरे पन्ने, मेरा देश, क्या लिखूॅं आदि।
(2). कहानी-संग्रह – झलमला, अञ्जलि ।
(3). आलोचना – विश्व साहित्य, हिन्दी साहित्य विमर्श, साहित्य शिक्षा, हिंदी उपन्यास साहित्य, हिंदी कहानी साहित्य, विश्व साहित्य, प्रदीप (प्राचीन तथा अर्वाचीन कविताओं का आलोचनात्मक अध्ययन), समस्या, समस्या और समाधान, पंचपात्र, पंचरात्र, नवरात्र, यदि मैं लिखता आदि।
(4). अनुवाद – अन्नपूर्णा का अनुवाद (मॉरिस मेटरलिंक के नाटक ‘सिस्टर बीट्रिस’ का अनुवाद) ‘उन्मुक्ति का बंधन’ (मोरिस मैटरलिंक के नाटक ‘दी यूजलेस डेलिवरेन्स’ का अनुवाद), प्रायश्चित आदि।
(5). काव्य-संग्रह – शतदल और अश्रुदल आदि।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की भाषा शैली

भाषा – बख्शी जी की भाषा सरल, सुबोध, शुद्ध, व्यवाहारिक और प्रवाहमयी खड़ीबोली है, इनकी भाषा में शब्दों की प्रधानता है। भाषा में व्यवाहारिक शब्दों तथा मुहावरों एवं लोकोक्तियों का अनेक स्थलों पर प्रयोग किया गया है।

शैली – पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के साहित्य का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इन्होंने मुख्य रूप से भावात्मक, व्याख्यात्मक तथा विचारात्मक शैलियों को अपनाया है। इन तीनों शैलियों का संक्षिप्त परिचय निम्नवत् है-

  • भावात्मक शैली – बख्शी जी ने कथात्मक निबंधों में भावात्मक शैली को अपनाया है। इनकी भावात्मक शैली में सरसता तथा सरलता के गुण विद्यमान हैं।
  • व्याख्यात्मक शैली – कुछ आलोचनात्मक निबंधों में बख्शी जी ने व्याख्यात्मक शैली को अपनाया है। गंभीर विषयों को प्रतिपादित करते समय कहीं कहीं यह शैली कुछ किलष्ट भी हो गई है।
  • विचारात्मक शैली – बख्शी जी के कुछ निबन्धों में विचारात्मक शैली भी देखी जा सकती है। इस शैली में छोटे-छोटे वाक्य हैं, जो श्रृंखलाबद्ध तथा भावपूर्ण हैं।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के पुरस्कार

  1. सन् 1949 ईस्वी में हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा इन्हें साहित्य वाचस्पति की उपाधि से अलंकृत किया गया।
  2. सन् 1951 ईस्वी में इन्हें डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी जी की अध्यक्षता से जबलपुर में मास्टर जी का सार्वजनिक अभिनंदन एवं सम्मानित किया गया।
  3. सन् 1969 ईस्वी में सागर विश्वविद्यालय से द्वारिका प्रसाद मिश्र (मुख्यमंत्री) द्वारा इन्हें डी० लिट्० की उपाधि से विभूषित किया गया।
  4. इसके अतिरिक्त, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति भी निर्वाचित किए गए।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का साहित्य में स्थान

बख्शी जी द्विवेदी युग के प्रमुख साहित्यकार हैं। काव्य, आलोचना, निबन्ध लेखन तथा सम्पादन के क्षेत्र में उनका सराहनीय योगदान है। अपने ललित निबन्धों के कारण बख्शी जी का हिन्दी साहित्य में विशेष महत्त्वपूर्ण स्थान है। विभिन्न प्रतिकूल एवं संघर्षपूर्ण परिस्थितियों के होते हुए भी वे एक मौन तपस्वी की भाँति जीवन पर्यन्त साहित्य सेवा में संलग्न रहे।

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FAQs. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के जीवन से जुड़े प्रश्न उत्तर

1. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी का जन्म कब हुआ था?

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म 27 मई सन् 1894 ईस्वी को छत्तीसगढ़ के जबलपुर जिले के खैरागढ़ नामक ग्राम में हुआ था।

2. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के पिता का क्या नाम था?

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी के पिता का नाम श्री पुन्नालाल बख्शी तथा माता का नाम श्रीमती मनोरमा देवी था।

3. क्या लिखूं पाठ के लेखक कौन हैं?

डॉ० पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी ‘क्या लिखूं’ पाठ के लेखक हैं।

4. तीर्थ स्थल किसकी रचना है?

तीर्थ स्थल ‘पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी’ की रचना है।

5. कुछ बिखरे पन्ने के लेखक कौन हैं?

कुछ बिखरे पन्ने के लेखक ‘पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी’ है।

6. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी किस युग के लेखक हैं?

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी द्विवेदी युग के लेखक हैं।

7. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबंध संग्रह कौन कौन से हैं?

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबंध संग्रह – प्रबन्ध पारिजात, पंचपात्र, पद्मवान, मकरंद बिंदु, कुछ बिखरे पन्ने, मेरा देश, क्या लिखूॅं आदि।

8. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की मृत्यु कब हुई थी?

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की मृत्यु 28 दिसम्बर सन् 1971 ईस्वी को छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुई थी।

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