पुनर्जागरण, मुख्य पांच कारण, NCERT सार संग्रह | Renaissance in Hindi

हेलो दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको संक्षिप्त इतिहास NCERT सार संग्रह “महेश कुमार वर्णवाल” Book का अध्याय “पुनर्जागरण” (Renaissance in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। इसमें हम आपको रेनेसां का अर्थ in hindi, पुनर्जागरण की शुरुआत कहाँ से मानी जाती है?, पुनर्जागरण के पांच कारणों को विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाएंगे, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें।

पुनर्जागरण

  • रेनेसां का शाब्दिक अर्थ है पुनर्जन्म, सीमित अर्थ में इस शब्द का प्रयोग यूनान और रोम को प्राचीन सभ्यता के ज्ञान-विज्ञान के प्रति पुनः पैदा हुई रुचि के लिए होता है।
  • शास्त्रीय ग्रंथों के अध्ययन तथा यूनान और रोम की सभ्यताओं की अन्य उपलब्धियों ने यूरोपवासियों को बहुत प्रभावित किया।
  • पुनर्जागरण मात्र प्राचीन ज्ञान, प्राचीन यूनान और रोम की उपलब्धियों की बढ़ती जानकारी तक सीमित नहीं था अपितु इसका सम्बंध कला, साहित्य, धर्म, दर्शन, विज्ञान और राजनीति के क्षेत्र में हुए परिवर्तन से भी है।
  • पुनर्जागरण का प्रारंभ इटली में हुआ। इसका एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारण यह था कि यूरोप और पूर्व के देशों के मध्य हुए व्यापार के पुनरूत्थान ने इटली के शहरों को सर्वाधिक सम्पन्न बना दिया था। यह संपूर्ण व्यापार लगभग पूर्णतः इटली के शहरों के नियंत्रण में था।
  • 16वीं सदी में इटली के अधिकांश भाग पर पाँच प्रमुख राज्यों का नियंत्रण था। ये पाँच राज्य थे-मिलान, वेनिस, फ्लोरेंस, नेपल्स और चर्च का राज्य।
  • इटली के शहरों का विकास सामंती नियंत्रण से मुक्त वातावरण में हुआ था। इस आजादी ने चिंतन और साहस की भावना को प्रोत्साहन दिया था। इटली के इन राज्यों के शासक ज्ञान-विज्ञान और कला के संरक्षक थे।
  • यूरोप के बौद्धिक और सांस्कृतिक जीवन पर सदियों तक कैथोलिक चर्च का प्रभुत्व रहा। पुनर्जागरण ने चर्च के इस प्रभुत्व को कमजोर बना दिया।

मानवतावाद (Humanism)

  • पुनर्जागरण की विचारधारा को मुख्य विशेषता मानवतावाद थी। यह पुनर्जागरण का केन्द्र बिंदु था। बुनियादी तौर पर इसने दैवीय और पारलौकिक के स्थान पर मानवीय तथा प्राकृतिक सत्ता को महत्व प्रदान किया।
  • मानवतावाद एक ऐसी विचारधारा थी, जिसमें मानव का गुणगान किया गया, उसकी सारभूत मान-मर्यादा पर बल दिया गया, उसकी अपार सृजन-शक्ति में अटूट आस्था व्यक्त की गई तथा व्यक्ति के स्वातंत्र्य व व्यक्ति के अधिकारों की घोषणा की गई।
  • इसका सरोकार सभी तरह के सांसारिक सुख-दुःख भोगने वाले हाड़-मांस के मानव से था।
  • इसने धार्मिक आडम्बरों का विरोध किया और मानव के सुख-भोग के अधिकार व सांसारिक इच्छाओं एवं आवश्यकताओं की पूर्ति किए जाने को अत्यधिक समर्थन दिया।
  • इसने दैवीय तथा पारलौकिक तत्वों के स्थान पर मानवीय और इहलौकिक तत्वों को महत्व दिया। इसने मानव से आग्रह किया, कि वह चर्च द्वारा प्रतिपादित परलोक की चिंता छोड़‌कर इसी धरती पर सुख प्राप्त करने का प्रयास करे।
    🔺15वीं सदी के इटालवी मानवतावादी पिको डेल्ला मरांतदोला ने अपने लेखन में पुनर्जागरण के इस विश्वास को व्यक्त किया, कि मानव एक महान चमत्कार है। उन्होंने लिखा है कि मनुष्य से अधिक अद्भुत कुछ भी नहीं है।
  • पुनर्जागरण काल के व्यक्ति ज्ञान के भूखे थे। उन्होंने अनुभव किया कि मनुष्य का जीवन महत्वपूर्ण है।
  • साहित्य और इतिहास को अब मानविकी कहा जाने लगा। इनका उद्देश्य मुख्य रूप से मानव के इस संसार के क्रियाकलापों को समझना था, न कि मृत्यु के उपरांत के जीवन को।
  • पुनर्जागरण काल के कलाकारों ने अपने विषय तो बाइबिल से लिए, परन्तु मानव का चित्रण समस्त पार्थिव सौंदर्य और ओज के साथ किया।

कला और स्थापत्य (Art and Architecture)

  • पुनर्जागरण काल के कलाकारों ने बाइबिल के विषयों का तो उपयोग किया, परन्तु इन विषयों की उन्होंने जो व्याख्या की उसमें परंपरागत धार्मिक दृष्टिकोण को नहीं अपनाया।
  • कला ने अब एक ऐसी स्वतंत्र गतिविधि का स्वरूप प्राप्त किया जो मध्य युग में कहीं दिखाई नहीं देती।
  • पुनर्जागरण काल में कलाकार की अपनी स्वतंत्र पहचान बनी, उसको अपनी शैली थी और उसे समाज में अत्यधिक सम्मान मिला। पुनर्जागरण काल के सभी कला-रूपों में सबसे ज्यादा विकास चित्रकला का हुआ।

✴️ चित्रकला और मूर्तिकला (Painting and Sculpture)

नामव्यवसायकृतिविस्तार
1.लियोनार्डो द विन्चीमूर्तिकार, चित्रकार, कलाकारद लास्ट सपर, मोनालिसाचित्रकला प्रकृति की नकल थी। कलाकार एक प्रेरित रचनाकार थाI
2.माइकल एंजेलोमूर्तिकार, चित्रकारडेविड, पियेता, सिस्टीन चापेल में चित्रमानवीय रूप की उपस्थिति, शक्ति और विलक्षणता को बता रही थी।
3.राफेलचित्रकारसिस्टीन, चापेल में चित्र मैडोना, चिर्गीपोप की सेवा में कार्य, यह चित्र बुद्धि और प्रतिष्ठा को प्रदर्शित करता है।
4.लोरेंजो घिवर्टीमूर्तिकारफ्लोरेंस स्थित बैपटिस्टरी के लिए दो कांस्य दरवाजेयह दरवाजा स्वर्ग द्वार के समान था।
5.डोनेटेलोमूर्तिकारडेविड की कांस्य प्रतिमा, सेलिन ग्लोएथ के शरीर के ऊपर विजय चिन्हकला के क्षेत्र में प्रथम नग्न मूर्ति जो 13 फुट लंबी थी तथा जो मानवीय रूप की सुंदरता को दर्शाती है।
  • पुनर्जागरण काल के कलाकार कला को जीवन का प्रतिरूप समझते थे। इसके लिए प्रकृति व मानव, पर्वतों, पेड़-पौधों, पशुओं और मानव की शरीर-संरचना का गहराई से अवलोकन करना आवश्यक था।
  • कलाकारों ने प्रकाशिकी तथा ज्यामिति का अध्ययन किया और अपने चित्रों में प्रक्षेपों का भी प्रयोग किया। उन्होंने मानव के हाव-भाव की आंतरिक व्यवस्था को समझने के लिए शरीर रचना विज्ञान का अध्ययन किया।
  • संसार की महानतम प्रतिभा लियोनार्डो दि विंची ने, न केवल मानव शरीर की रचना का गहन अध्ययन किया, बल्कि हलचलों को व्यक्त करने के लिए यह जानने का प्रयास किया कि हलचलों के दौरान शरीर के विभिन्न अवयव किस तरह का आकार ग्रहण करते हैं।
  • कला से इंद्रिय-सुख प्राप्त करना कला का न्यायोचित उद्देश्य माना गया। पुनर्जागरण के कलाकारों ने मानव के धार्मिक पहलुओं की बजाय उसके भौतिक पहलुओं पर ध्यान दिया। पुनर्जागरण काल के कलाकारों की कृतियों में जो परिपूर्णता थी, वह महज दैवीय नहीं थी बल्कि मानवीय भी थी।
  • पुनर्जागरण की चेतना की पूर्ण अभिव्यक्ति इटली के तीन कलाकारों की कृतियों में देखने को मिलती है। वे हैं- लियोनार्डो द विंची, माइकेल एंजिलो और राफोल।
    🔺लियोनार्डो दि विंची की प्रतिभा बहुमुखी थी। वह चित्रकार, मूर्तिकार, यंत्रविद्, वैज्ञानिक, दार्शनिक, कवि और गायक आदि अनुभवों से परिपूर्ण था। उन्होंने एक हवाई जहाज का मॉडल भी बनाया था।
  • उनके दो सर्वाधिक प्रसिद्ध चित्र हैं- द लास्ट सपर (अंतिम भोज) और मोनालिसा।
  • एक मूर्तिकार के रूप में माइकेल एंजिलो की प्रतिभा यूनानी मूर्तिकारों के टक्कर की थी। वे एक श्रेष्ठ चित्रकार और वास्तुविद् थे। उनके सर्वश्रेष्ठ चित्र वेटिकन (रोम) के सिस्तीन गिरजाघर की छत पर अंकित हैं।
  • इन चित्रों में जैसे कि द लास्ट जजमेंट (अंतिम न्याय) और द फाल ऑफ मैन (मानव का पतन) की गणना संसार की सर्वाधिक प्रसिद्ध कृतियों में की जाती है।
  • राफेल भी इटली के चित्रकार थे तथा लियोनार्डो दि विंची और माइकेल एंजिलो के समकालीन थे। उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति यीशू मसीह की माँ मरियम का चित्र है। राफेल की गणना संसार के सर्वश्रेष्ठ चित्रकारों में की जाती है।
  • पुनर्जागरण काल की मूर्तिकला में मोटे तौर पर वैसा ही परिवर्तन हुआ, जैसा कि चित्रकला में हुआ। पुनर्जागरण काल की मूर्तिकला की मुख्य विशेषता यह है, कि अब मुक्त रूप से खड़ी मूर्तियाँ बनने लगीं।
  • चित्रकला की तरह शारीरिक रचना से त्वचा सम्बधित नए ज्ञान ने और सौंदर्य के नए मानदंडों ने मूर्तिकला को प्रभावित किया।

पुनर्जागरण काल का साहित्य

  • इस काल में जनता की क्षेत्रीय अथवा देशी भाषाओं का साहित्य-लेखन में उपयोग होने लगा। सदियों तक शास्त्रीय और साहित्यिक ग्रंथ लैटिन भाषा में लिखे जाते रहे।
  • पुनर्जागरण काल में यूरोपीय भाषाओं का साहित्यिक भाषाओं के रूप में उदय हुआ और इन भाषाओं का विकास आरंभ हुआ। पुनर्जागरण काल के लेखकों को लैटिन पर और यूरोप की दूसरी शास्त्रीय भाषा ग्रीक पर अधिकार प्राप्त था।

✴️ साहित्य (Literature)

नामव्यवसायकृतिविस्तार
1.मैकियावेलीराजनीतिक लेखकद प्रिंस (The Prince)शासकों के निर्देश के लिए राजनीतिक अवधारणा।
2.दांते (Dante)कविडिवाइन कॉमेडीएक महाकाव्यात्मक कविता जिसमें देश के प्रति प्रेम तथा समकालीन इटली के सामाजिक और धार्मिक जीवन का वर्णन मिलता है।
3.पेट्रार्क (Petrareh)विद्वान मानवतावाद का जनककैन्जोनीरेजीवन के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं का वर्णन
4.बोकासियोगद्य लेखक इटालियन गद्य का जनकडिकैमरुनएक से उपन्यासों का संग्रह, जिनमें नैतिकता एवं गुणों को उजागर किया गया है।
5.जियोफेरी चाॅसरकवि अंग्रेजी पद्य का जनकद कैन्टवरी टेल्सकेन्द्रीय चरित्र के द्वारा सामाजिक, धार्मिक एवं नैतिक मुद्दों को उजागर किया जो उसने अपनी लंबी यात्रा में प्राप्त किया था।
6.थाॅमस मूरगद्य लेखकयूटोपियाएक आदर्श समाज, जहां कोई शोषण और वर्ग भिन्नता न हो।
7.विलियम शेक्सपीयरनाटककार, रंगकर्मी, कविजूलियस सीजर, मैकबेथ, हेमलेटमानवीय संबंधों, विरोधों और निदानों पर आधारित नाटकों की रचना
8.जाॅन मिल्टनकविपैराडाइज लाॅस्टशैतान का पतन और ईश्वर के साथ उसका संघर्ष
9.मांटेग्यूनिबन्धकारएशेज (निबंध)प्राधिकार के विरुद्ध लेखन जिसमें अतीत के दुःख और मानव के वास्तविक जीवन का अनुभव शामिल।
10.सर्वेन्टीजलेखकडाॅन क्यूजेटसाहसी मूल्यों/सामंती मूल्यों का उपहास और उपलब्धियों के संबंध में चर्चा।

🔺यूरोप की एक आधुनिक भाषा में लिखी गई पहली महत्वपूर्ण कृति दांते की डिवाइन कॉमेडी है।

  • इस काल में ईसाई कहानियों एवं धर्मशालाओं की काफी चर्चा है। महान लेखक पेट्रार्क ने भी दांते का अनुसरण किया। इतिहासकार उन्हें मानवतावाद का संस्थापक मानते हैं।
  • पुनर्जागरण के उत्तरी यूरोप के लेखकों में एक प्रमुख लेखक हॉलैंड निवासी इरास्मस थे, जिन्होंने चर्च की बुराईयों की आलोचना की।
  • फ्लोरेंस के इतिहासकार मैकियावेली को आधुनिक राजनीति दर्शन का पिता कहा जाता है। उसने अपनी कृति द प्रिंस में उस राज्य को नई धारणा प्रस्तुत की जो यूरोप में उदित हो रहा था।
  • मैकियावेली ने राज्य को स्वतंत्र और सर्वसत्ता सम्पन्न माना और कहा कि धार्मिक मामले राजनीतिक मामलों से अलग रखे जाने चाहिए।
  • अंग्रेज कवि और नाटककार विलियम शेक्सपीयर ने अपनी कृतियों में मानव के सभी संभव भावों और उसकी क्षमताओं व दुर्बलताओं का विवेचन किया है।
  • फ्रांस के लेखक रैबेल ने धर्मशास्त्र और चिकित्साशास्त्र का अध्ययन किया था। उसने अपनी बुद्धि और अपने व्यंग्य का प्रयोग फलित-ज्योतिष की मान्यताओं तथा अंधविश्वासों के विरुद्ध किया। उनके दो प्रसिद्ध ग्रंथों के नाम पैंटाग्रुअल एवं गर्गातुआ है, जो वस्तुतः मध्ययुगीन आख्यानों के दो दैत्यों के नाम है।

मुद्रण कला का आविष्कार

  • 15वीं सदी के पूर्वाद्ध में हुए इस आविष्कार का श्रेय गुटेनबर्ग और कैस्टर को दिया जाता है। अत्यधिक छपाई के कारण पुस्तकें पर्याप्त मात्रा में लोगों के लिए उपलब्ध हो गई।
    🔺पहली मुद्रित पुस्तक गुटेनबर्ग की बाइबिल थी, जो 1456 ई. में प्रकाशित हुई थी।
  • मुद्रण के आविष्कार के पहले पुस्तकें हस्तलिपियों के रूप में होती थीं। पढ़ने वाले लोग इन हस्तलिपियों को बड़ी कठिनाई से प्राप्त कर सकते थे।
  • अनुमान लगाया गया है कि 15वीं सदी के पूर्वार्द्ध में यूरोप में करीब कुल 1,00,000 हस्तलिपियाँ उपलब्ध थी।
  • मुद्रण के आविष्कार के बाद पचास साल की अवधि में पुस्तकों की संख्या 90 लाख पर पहुँच गई। यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन था।
  • 15वीं शताब्दी के मध्य में जर्मनी में गुटेन-की नामक व्यक्ति ने एक ऐसी टाइप मशीन का आविष्कार किया जिसने छपाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया।

आधुनिक विज्ञान का आरंभ

  • पुनर्जागरण के साथ आधुनिक विज्ञान का आरंभ हुआ। मध्ययुगीन यूरोप के बौद्धिक जीवन पर चर्च का आधिपत्य था। मध्ययुगीन यूरोप की मान्यताओं के अनुसार, किसी भी विचार को तब तक सत्य नहीं माना जा सकता था, जब तक वह धर्मग्रंथों से या चर्च से अथवा चर्च द्वारा स्वीकृत प्राचीन दार्शनिकों के विचारों से समर्थित न हो।
  • पुनर्जागरण काल के विचारकों ने ऐसे प्राधिकार में आँख बन्द करके विश्वास करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि बाहर निकल कर और प्रकृति की पुस्तक का अध्ययन तथा अन्वेषण करके ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है, न कि महज चिंतन करने से।
  • पुनर्जागरण काल की आरंभिक वैज्ञानिक उपलब्धियाँ खगोल-विज्ञान के क्षेत्र से सम्बधित है।
    🔺पोलैंडवासी विद्वान कॉपरनिकस ने, जो अनेक वर्षों तक इटली में रहा, प्रातिपादित किया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर चक्कर लगाती है और सूर्य की परिक्रमा करती है।
  • यह पुरानी परंपरा से एकदम भिन्न विचार था। एक हजार से भी अधिक साल तक यह मान्यता प्रचलित थी, कि पृथ्वी विश्व के केन्द्र में स्थित है। कॉपरनिकस का ग्रंथ खगोलीय पिंडों के परिभ्रमण पर विचार 1543 ई. में प्रकाशित हुआ और उसी वर्ष उनकी मृत्यु हुई।
  • कॉपरनिकस को सिद्धांत की पुष्टि बाद में गैलीलियो ने की। कॉपरनिकस के ग्रंथ के प्रकाशन के लगभग आधी सदी के बाद 1600 ई. में, ज्यार्दानो ब्रूनो को धर्म-विरोध के आरोप में खूँटे से बाँधकर जिंदा जला दिया गया।
  • विश्व सम्बंधी नई धारणा की निर्णायक पुष्टि दूरबीन के आविष्कार से सम्भव हुई। दूरबीन को उस युग का महानतम् वैज्ञानिक उपकरण माना जाता है।
  • गैलीलियो ने अपनी दूरबीन से आकाश के पिंडों का अवलोकन किया। उसके अवलोकनों से कॉपरनिकस के सिद्धांत की पुष्टि हुई। रुढ़िवादी विचारों के खण्डित करने के आरोप में बुढ़ापे में गैलीलियो पर मुकदमा चलाया गया और उसे धर्म-विरोधी घोषित किया गया।
  • जर्मनी के वैज्ञानिक केपलर ने गणित की सहायता से स्पष्ट किया कि ग्रह किस प्रकार सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
  • सर आइजेक न्यूटन ने केपलर के कार्य को आगे बढ़ाया। गणित की सहायता से न्यूटन ने सिद्ध किया कि सभी खगोलीय पिंड गुरुत्वाकर्षण के नियमों के अंतर्गत यात्रा करते हैं।
  • 1543 ई. में बेल्जियमवासी वैज्ञानिक वेसोलियस ने अपना सचित्र ग्रंथ द ह्यूमनी कार्पोरिस फाब्रिका प्रकाशित किया।
  • यह ग्रंथ मानव शरीर के उसके विच्छेदन कार्य पर आधारित था। इस ग्रंथ में पहली बार मानव शरीर की रचना-क्रिया के बारे में पूर्ण जानकारी देखने को मिलती है।
    🔺वेसोलियस को आधुनिक मानव शरीर का पिता स्वीकार किया।
  • स्पेनवासी वैज्ञानिक सर्वेन्टीज ने एक ग्रंथ प्रकाशित करके उसमें रक्त-परिसंचरण के बारे में जानकारी दी।
  • रक्त-परिसंचरण की सतत प्रक्रिया (रक्त का हृदय से शरीर के सभी अंगों में पहुँचना और फिर वापस लौटना) का पूर्ण वितरण 1610 ई. में हॉलैण्ड वैज्ञानिक विलियम हार्वे ने प्रस्तुत किया।

✴️ विज्ञान और गणित (Scince and Mathematics)

नामव्यवसायअन्वेषण
1.निकोलस कॉपरनिकसवैज्ञानिकइन्होंने साबित किया कि पृथ्वी गोल है पृथ्वी, चन्द्रमा और ग्रह अन्य सूर्य की परिक्रमा करते हैं।
2.जोहान्स केप्लरवैज्ञानिकइसने साबित किया कि पृथ्वी और दूसरे ग्रह सूर्य के चारों ओर वृत्ताकार पथ में नहीं बल्कि अंडाकार (दीर्घ वृत्ताकार) पथ में परिक्रमा करते हैं।
3.गैलीलियो गैलिलीवैज्ञानिकइन्होने सिद्ध किया कि गिरते हुए वस्तुओं की गति उसकी दूरी पर निर्भर करती है, न कि उसके वजन पर। इसने थर्मामीटर और हाइड्रोस्टैस्कि संतुलन की खोज की।
4.सर आइजैक न्यूटनवैज्ञानिकइसने सार्वभौमिक गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
5.विलियम हार्वेजीव वैज्ञानिकमानव शरीर में रक्त परिसंचरण का विस्तार से वर्णन किया।
6.एडमंड हिलेरीखगोल शास्त्रीधूमकेतु के कक्ष की गणना की, साथ ही इसकी वापसी के वर्षों की भी गणना की। इनके बाद इनके द्वारा खोजे गए धूमकेतु को हेली नाम दिया गया।
7.रेने डिसकार्टेजगणितज्ञविश्लेषणात्मक ज्यामिति का प्रतिपादन किया।
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