प्रताप नारायण मिश्र: जीवन परिचय, रचनाएं, पत्रिकाएं, नाटक व भाषा-शैली

हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में हमनें “पंडित प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय” (Pratap Narayan Mishra ki biography in Hindi) के बारे में जानकारी दी है। इसमें हमनें प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएं, पत्रिकाएं, नाटक, निबंध, भाषा शैली एवं कवि परिचय के बारे में विस्तारपूर्वक सरल भाषा में समझाया है और इसमें प्रताप नारायण मिश्र जी के पिता व माता का नाम भी बताया गया है।

विद्यार्थी ध्यान दें कि प्रताप नारायण मिश्र से संबंधित परीक्षाओं में कुछ प्रशन भी पूछें जाते हैं जैसे- प्रताप नारायण मिश्र का जन्म कब और कहां हुआ था?, प्रताप नारायण मिश्र के माता-पिता का नाम क्या है?, पंडित प्रताप नारायण मिश्र किस युग के लेखक हैं?, प्रताप नारायण मिश्र की प्रमुख रचनाएं एवं कृतियां क्या है?, प्रताप नारायण मिश्र का साहित्य में क्या स्थान है?, प्रताप नारायण मिश्र की मृत्यु कब हुई थी? । इन सभी प्रशनों के उत्तर आपको इस आर्टिकल में मिल जाएंगे, तो आप इस आर्टिकल को बहुत ध्यान से पूरा जरूर पढ़ें। चलिए शुरू करते हैं।

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प्रताप नारायण मिश्र का संक्षिप्त परिचय

यहां हमनें पंडित प्रताप नारायण मिश्र की जीवनी के बारे में संक्षेप में एक टेबल के माध्यम से समझाया है।
प्रताप नारायण मिश्र की जीवनी –

प्रताप नारायण मिश्र का पूरा नामपंडित प्रताप नारायण मिश्र
जन्म24 सितंबर, 1856
जन्म स्थानगाॅंव बैजे पोस्ट बेथर जिला उन्नाव (उत्तर प्रदेश)
मृत्यु06 जुलाई, 1894
मृत्यु स्थानकानपुर, उत्तर प्रदेश
मृत्यु के समय आयुलगभग 38 वर्ष
पिता का नामपंडित संकटा प्रसाद मिश्र
माता का नामज्ञात नहीं
व्यवसायलेखक
गुरुभारतेन्दु हरिश्चन्द्र
भाषाहिंदी, उर्दू, बॅंगला, संस्कृत एवं अंग्रेजी
शैलीहास्य-व्यंग-प्रधान, हास्य-विनोदात्मक
साहित्य कालभारतेन्दु युग
विधाएंनिबंध, नाटक व कविता
सम्पादनब्राह्मण (मासिक पत्रिका)
साहित्य में स्थानभारतेन्दु युग के प्रमुख लेखक
प्रमुख रचनाएं – निबंधनिबन्ध-नवनीत, बात, प्रताप-समीक्षा और प्रताप-पीयूष
नाटकभारत-दुर्दशा, गौ-संकट, कलि-कौतुक, हठी-हम्मीर और कलि-प्रभाव
अनुवादितनीतिरत्नावली, पंचामृत और इन्दिरा
कवितामन की लहर, राधारानी और दंगल खण्ड

प्रताप नारायण मिश्र भी आधुनिक हिंदी साहित्यकार के हिंदी रचनाकारों की वृहत्त्रयी में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र और बालकृष्ण भट्ट की तरह इनकी भी गणना होती है। प्रताप नारायण मिश्र जी को भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जैसे ना तो कोई साधन मिले और ना ही बालकृष्ण भट्ट की तरह लंबी आयु मिली। फिर भी प्रताप नारायण मिश्र जी ने खुद से ही मेहनत करके अपनी लगन और प्रतिभा के बल पर ही ‘भारतेन्दु युग’ में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बनाया था।

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प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय

प्रताप नारायण मिश्र का जन्म सन् 1856 ई. में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के एक बैजे नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता संकटाप्रसाद मिश्र एक विख्यात ज्योतिषी थे, जिसके चलते ये अपने पूरे परिवार के साथ कानपुर में आकर रहने लगे थे। यहीं पर मिश्र जी की शिक्षा-दीक्षा हुई थी ।

प्रताप नारायण मिश्र
प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय

इनके पिता संकटा प्रसाद इन्हें ज्योतिषी विधा पढ़ाकर अपने पैतृक व्यवसाय में लगाना चाहते थे। लेकिन स्वभाव मनमौजी होने के कारण इसमें इनका मन नहीं लगा, फिर प्रताप नारायण मिश्र जी ने अंग्रेजी भाषा सीखने के लिए एक स्कूल में दाखिला कराया था। किंतु कोई भी कार्य अनुशासन और निष्ठा के साथ करा जाए, तो उस कार्य में नीरसता के साथ प्रतिबद्धता भी आवश्यक होनी चाहिए। परंतु इनका मनमौजी और फक्कड़ स्वभाव होने के कारण ये यहां पर भी नहीं पढ़ सके।

इसके बाद प्रताप नारायण मिश्र जी ने घर पर रहकर ही हिंदी, उर्दू, बंगला, संस्कृत व अंग्रेजी भाषाओं का अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया था। और जब ईश्वरचंद विद्यासागर प्रताप नारायण मिश्र से मिलने आए थे, तब इन्होंने उनसे बंगला भाषा में ही बात की थी। प्रताप नारायण मिश्र जी ने स्वाध्याय एवं सुसंगती से जो ज्ञान प्राप्त किया था उसे इन्होंने साहित्य गद्य, काव्य और नाटक आदि के माध्यम से समाज को समर्पित कर दिया था। और मात्र 38 वर्ष की कम उम्र में ही सन् 1894 ई. को कानपुर में इनका निधन हो गया था।

प्रताप नारायण मिश्र का साहित्यिक परिचय

मिश्र जी ने साहित्यिक जीवन का प्रारंभ ख्याल और लावनियों से किया था। उन दिनों जब कानपुर लावणी बाजो का केंद्र होता था, तब से ही प्रताप नारायण मिश्र जी लावणी बाजों के सम्पर्क में आकर वहीं से इन्होंने लावनियां और ख्याल लिखनी शुरू कर दिया। यहीं से इनके कवि और लेखक बनने का जीवन प्रारंभ हुआ था।

प्रताप नारायण मिश्र भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी के व्यक्तित्व से अत्यधिक प्रभावित थे और उन्हें अपना गुरु मानते थे। उनकी जैसी व्यवहारिक भाषा-शैली अपनाकर मिश्र जी ने अनेक मौलिक एवं अद्भुत रचनाएं लिखी हैं। तथा ब्राह्मण और हिंदुस्तान नामक पत्रिकाओं का भी संपादन किया। मिश्र जी ने कई कहानियां भी लिखी हैं।

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प्रताप नारायण मिश्र का सामाजिक जीवन

मिश्र जी साहित्यकार होने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों से भी जुड़े हुए थे। मिश्र जी का संबंध राजनीतिक, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से भी निकट का संपर्क रहा है और देश में जब नवजागरण की लहर आई थी, तब उसके प्रति भी मिश्र जी ने वास्तव में नवजागरण का संदेश समाज तक पहुंचाने के लिए साहित्य सेवा का व्रत लिया और ‘ब्राह्मण’ पत्र के आजीवन संपादक रहे।

प्रताप नारायण मिश्र एक बहुमुखी प्रतिभा और विविध रुचियों के धनी व्यक्ति थे और कानपुर में इन्होंने नाटक सभा नाम की एक संस्था की भी स्थापना की थी। उसके माध्यम से ही ये पारसी थिएटर के द्वारा हिंदी का अपना रंगमंच खड़ा करना चाहते थे। और बांगला के कई ग्रंथों का हिंदी में अनुवाद करके इन्होंने हिंदी साहित्य का सृजन किया। मिश्र जी स्वयं ही भारतेन्दु जी की तरह कुशल अभिनय करते थे।

प्रताप नारायण मिश्र की प्रमुख रचनाएं

मिश्रा जी ने इतनी कम आयु में भी अनेक रचनाएं लिखकर हिंदी साहित्य में एक अलग पहचान बनाई है। प्रताप नारायण मिश्र जी ने हिंदी साहित्य में लगभग 40 पुस्तकों की रचना की थी। इनमें अनेक कविताएं, नाटक, निबंध एवं आलोचना शामिल हैं।

  • निबन्ध – ‘प्रताप पीयूष’, ‘निबन्ध नवनीत’, ‘प्रताप समीक्षा’ ।
  • नाटक – ‘हठी हम्मीर’, ‘भारत दुर्दशा’, ‘गौ संकट’, ‘कलि प्रभाव’, ‘कलि कोतुक’ ।
  • संपादक – ‘ब्राह्मण’, ‘हिंदुस्तान’ ।
  • अनुवादित – ‘पंचामृत’, ‘इन्दिरा’, ‘नीति रत्नावली’, ‘राधारानी’, ‘राज सिंह’ ।

इसके अलावा मिश्र जी ने लगभग 10 उपन्यासों कहानी, जीवन चरित्र व नीति का अनुवाद किया था। जैसे- राधारानी, इंदिरा, कथा माला ।

काव्य – प्रताप लहरी, दंगल खण्ड, मन की लहर, श्रृंगार विलास, मानस विनोद, प्रेम पुष्पावली।

भाषा

हिंदी गद्य के खड़ीबोली निर्माताओं में प्रताप नारायण मिश्र का प्रमुख स्थान रहा है। इनकी भाषा सुबोध एवं प्रवाहयुक्त होती है। मिश्र जी ने साधारण एवं गंभीर दोनों विषयों पर निबंध लिखे हैं, जैसे- बात, धोखा, बुढ़ापा, दांत, रिश्वत, मुच्छ, भौं एवं बंदरों की सभा आदि साधारण विषयों के निबंध है। इसके अतिरिक्त मिश्र जी ने मुहावरों पर भी निबंध लिखे हैं जैसे- मरे को मारे शाहमदार एवं समझदार की मौत।
इसके अलावा प्रताप नारायण मिश्र जी ने सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक जैसे विषयों पर भी गंभीर निबंध लिखे हैं। मिश्र जी के निबंधों में हास्य एवं व्यंग का पुट रहता है।

शैली

प्रताप नारायण मिश्र जी की शैली दो रूपों में मिलती है –
(i). हास्य विनोदात्मक शैली,
(ii). गम्भीर विवेचनात्मक या विचारात्मक शैली ।

नोट – प्रताप नारायण मिश्र जी का प्रसिद्ध निबंध “बात” हास्य-व्यंग्य-प्रधान शैली में लिखा गया निबंध है।

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FAQs. प्रताप नारायण मिश्र जी से संबंधित प्रशन-उत्तर

1. पंडित प्रताप नारायण मिश्र का जन्म कब हुआ था?

24 सितंबर, 1856

2. प्रताप नारायण मिश्र की प्रमुख रचनाएं कौन-कौन सी हैं?

प्रताप नारायण मिश्र की प्रमुख रचनाएं- बात, निबंध नवनीत, प्रताप समीक्षा, प्रताप पीयूष, भारत दुर्दशा, गौ संकट, कलि प्रभाव, कलि कौतुक, हठी हम्मीर, नीतिरत्नावली, इन्दिरा, पंचामृत।
पंडित प्रताप नारायण मिश्र कौन से युग के लेखक हैं?

3. पंडित प्रताप नारायण मिश्र कौन से युग के लेखक हैं?

भारतेन्दु युग

4. प्रताप नारायण मिश्र की मृत्यु कितने वर्ष की अवस्था में हुई थी?

37 वर्ष 9 माह (1856 से 1894)

5. पंडित प्रताप नारायण मिश्र द्वारा संपादित पत्रिका कौन-सी है?

ब्राह्मण

6. प्रताप नारायण मिश्र के गुरु कौन थे?

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र

7. प्रताप नारायण मिश्र ने कौन सा नारा दिया था?

‘हिंदी हिंदू हिंदुस्तान’

8. पंडित प्रताप नारायण मिश्र का निधन कब हुआ था?

06 जुलाई, 1894

9. धोखा निबंध के लेखक कौन हैं?

प्रताप नारायण मिश्र

10. बात पाठ के लेखक कौन हैं?

प्रताप नारायण मिश्र

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