प्रशीतन की ऊष्मागतिकी क्या है, निष्पादन गुणांक का सूत्र | Thermodynamics of Refrigeration in Hindi

प्रशीतन की ऊष्मागतिकी

प्रशीतित्र एक ऐसा यंत्र होता है जो ऊष्मा-इंजन के विपरीत दिशा में कार्य करता है। इसमें कार्यकारी पदार्थ निम्न ताप वाले स्त्रोत से ऊष्मा अवशोषित करता है तब इस पर कुछ बाह्य कार्य किया जाता है। तथा अन्त में यह ऊष्मा को उच्च ताप वाले स्त्रोत को निरस्त कर देता है। अर्थात् इस प्रकार “प्रशीतित्र एक ऐसी युक्ति है, जो किसी बाह्य कार्य की सहायता से निम्न ताप वाले स्त्रोत से उच्च ताप वाले स्त्रोत को ऊष्मा में स्थानांतरित करता है।” प्रशीतित्र में जो कार्यकारी पदार्थ चक्रीय परिवर्तनों में से गुजरता है, तो इसे प्रशीतक तथा इस प्रक्रिया को ‘प्रशीतन या प्रशीतन की ऊष्मागतिकी’ भी कहते हैं।
प्रशीतित्र की व्यवस्था को चित्र में दर्शाया गया है। तथा प्रशीतक द्रव के रूप में द्रव-संग्रह (liquid storage) में संघनित्र (condenser) के ताप पर संचालित रहता है, जिसका ताप तप्त-स्त्रोत के ताप के बराबर होता है।

पढे़… प्रशीतित्र क्या है? प्रशीतलन चक्र क्या होता है? कार्यगुणांक और दक्षता में संबंध (Refrigerator in Hindi)

प्रशीतन की ऊष्मागतिकी
प्रशीतन की ऊष्मागतिकी

द्रव-संग्रह से प्रशीतक उपरोधी वाल्व (throttling valve) से रुध्दोष्म या जूल-टाॅमसन प्रसार को सहते हुए चला जाता है। जिसके कारण इसका ताप गिर जाता है। इसके बाद यह वाष्पित (evaporator) से गुजरता है और स्थिर ताप व दाब पर वाष्पित हो जाता है तथा ठण्डी होने वाली वस्तुओं से आवश्यक गुप्त ऊष्मा अवशोषित करके उसे ठण्डा कर देता है। इसके बाद यह वाष्प एक संपीडक के द्वारा गुजारी जाती है जहां संपीडक पंप के द्वारा इन्हें रुध्दोष्म संपीडित किया जाता है। संघनित्र को निम्न ताप पर रखकर इससे वाष्प गुजारने पर स्थिर दाब पर संपीडक ऊष्मा निरस्त हो जाती है, जिससे कार्यकारी पदार्थ या प्रशीतक संघनित्र को संतृप्त द्रव के रूप में छोड़ता है तथा संक्रियाओं का नया चक्र प्रारंभ हो जाता है।

प्रशीतित्र का निष्पादन गुणांक

प्रशीतित्र में कुछ बाह्य कार्य करके ठंडी वस्तु से बड़ी मात्रा में ऊष्मा का निष्कर्षण वांछनीय है। हम निष्कर्षित ऊष्मा को निर्गत तथा कार्य को निवेश कह सकते हैं। प्रशीतित्र की दक्षता को निष्पादन गुणांक के पदों में व्यक्त किया जाता है। यह शीतल कुंड से अवशोषित ऊष्मा की मात्रा तथा मशीन चलाने में किए गए कार्य की निष्पत्ति द्वारा व्यक्त किया जाता है। अर्थात् निष्पादन गुणांक
η = शीतल कुण्ड से अवशोषित ऊष्मा की मात्र/मशीन चलाने में किया गया कार्य
यदि एक पूर्ण चक्र के अंतर्गत शीतल कुण्ड से अवशोषित ऊष्मा की मात्रा Q2 तथा तप्त कुण्ड की निरस्त ऊष्मा Q1 हो, तो मशीन चलाने में किया गया कार्य होगा
W = Q1 – Q2
निष्पादन गुणांक
β = \frac{Q_2}{W} या β = \frac{Q_2}{Q_1 - Q_2}
लेकिन कार्नो चक्र में,
\frac{Q_1}{Q_2} = \frac{T_1}{T_2}
यहां T2 शीतल कुंड का ताप तथा T1 तप्त कुंड का ताप है।
अतः β = \frac{T_2}{T_1 - T_2}

यदि समान तापों के बीच कार्यरत कार्नो इंजन की दक्षता η हो, तब
η = 1 – \frac{T_2}{T_1} = \frac{T_1 - T_2}{T_1}
या \frac{1}{η} = \frac{T_1}{T_1 - T_2}
अतः दोनों और -1 रखने पर,
\frac{1}{η} – 1 = \frac{T_1}{T_1 - T_2} – 1
या \frac{1 - η}{η} = \frac{T_1 - T_1 + T_2}{T_1 - T_2}
या \frac{1 - η}{η} = \frac{T_2}{T_1 - T_2} = β
इसलिए,
निष्पादन गुणांक β = \frac{1 - η}{η} = \frac{T_2}{T_1 - T_2}

यही ‘निष्पादन गुणांक ‘β’ का व्यंजक है।’ जिस प्रकार कोई भी ऊष्मा-इंजन, कार्नो-इंजन से अधिक दक्ष नहीं हो सकता है ठीक उसी प्रकार दो कुण्डों के बीच कार्यरत किसी प्रशीतित्र का निष्पादन गुणांक कार्नो इंजन के प्रशीतित्र से अधिक हो सकता है। वास्तविक प्रशीतित्रों के निष्पादन गुणांक लगभग 2 से 6 तक परिवर्तित होते हैं।

Note – सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं।
Q. 1 प्रशीतन की ऊष्मागतिकी क्या है ? चित्र की सहायता से समझाइए तथा निष्पादन गुणांक का व्यंजक ज्ञात कीजिए ?
Q. 2 प्रशीतित्र क्या है ? PV आरेख की सहायता से प्रशीतित्र की कार्यविधि समझाइए तथा कार्य गुणांक क्या है ?
Q. 3 ऊष्मागतिकी में प्रशीतित्र को सिद्ध कीजिए ? तथा कार्य गुणांक या निष्पादन गुणांक को भी समझाइए ?

  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  2. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *