प्रशीतित्र क्या है, प्रशीतलन चक्र क्या है, कार्यगुणांक और दक्षता में संबंध | Refrigerator in Hindi

प्रशीतित्र क्या है

“प्रशीतित्र एक ऐसा यंत्र है, जो ठण्डी वस्तु से ऊष्मा लेकर उच्च ताप की वस्तु में स्थानांतरित करता है। जबकि इस वस्तु पर कोई बाह्य ऊर्जा स्त्रोत द्वारा कुछ कार्य किया जाता है। इसलिए इसे प्रशीतित्र (या रेफ्रिजरेटर) कहते हैं।” वास्तव में, प्रशीतित्र विपरीत दिशा में कार्यरत ऊष्मा इंजन ही है।
अतः इसलिए इसे ऊष्मा पम्प या संपिडक भी कहते हैं। इस प्रक्रिया को ‘प्रशीतलन’ कहते हैं। किसी प्रशीतित्र में निम्नलिखित मुख्य 3 भाग होते हैं। जिन्हें चित्र-1 में दिखाया गया है।

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प्रशीतित्र
प्रशीतित्र

1.सिंक (या शीतल वस्तु) – जिस कक्ष को ठण्डा करना होता है, वह सिंक की भांति कार्य करता है।

2.कार्यकारी पदार्थ – प्रशीतित्र में प्रयुक्त होने वाले कार्यकारी पदार्थ को ‘प्रशीतक (refrigerant)’ कहते हैं। यह वह पदार्थ है, जो बाह्य ऊर्जा स्त्रोत द्वारा कार्य किए जाने पर ऊष्मा को सिंक से स्त्रोत में स्थानांतरित करता है। प्रशीतित्र में बाह्य ऊर्जा स्त्रोत के रूप में संपीडित को प्रयुक्त किया जाता है जो वैद्युत ऊर्जा व्यय करके कार्यकारी पदार्थ पर कार्य करता है। तथा कार्यकारी पदार्थ के रूप में ऐसे द्रव को लिया जाता है, जिसके वाष्पन की गुप्त ऊष्मा बहुत अधिक होती है। तथा जो निम्न ताप पर वाष्पीकृत होता है (जैसे- फ्रीऑन) ।

3.स्त्रोत (या तप्त वस्तु) – जिस वस्तु को ऊष्मा देनी होती है, तो वह एक स्त्रोत की तरह कार्य करती है। वायुमंडल को स्त्रोत के तुल्य मान सकते हैं। प्रशीतित्र में कार्यकार्य पदार्थ विकिरण के द्वारा स्त्रोत को ऊष्मा देता है।
इस प्रकार प्रशीतित्र में कार्यकारी पदार्थ निम्न ताप पर सिंक से Q2 ऊष्मा लेता है। तथा संपीडित द्वारा इस पर W कार्य किया जाता है। तथा उच्च ताप पर स्त्रोत को विकिरक की सहायता से Q2 + W ऊष्मा स्थानांतरित करता है। तथा प्रत्येक चक्र में कार्यकारी पदार्थ Q2 + W ऊष्मा वायु मण्डल को देता है जिससे सिंक का ताप गिरता जाता है।

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प्रशीतलन चक्र क्या है

प्रशीतित्र में सिंक को निरंतर ठंडा करने के लिए इसे एक निश्चित क्रम में चलाया जाता है। तथा कार्यकारी पदार्थ के ताप, दाब व आयतन में कुछ परिवर्तन करके इसे प्रारंभिक अवस्था में लाया जाता है।
ताकि कार्यकारी पदार्थ पर पुनः कार्य किया जा सके। इसके लिए कार्यकारी पदार्थ को चार प्रक्रमों में से गुजारा जाता है। जैसे कि चित्र-2 में दिखाया गया है।

प्रशीतलन चक्र
प्रशीतलन चक्र

तथा ये चारों प्रक्रम मिलकर एक चक्र बनाते हैं जिसे ‘प्रशीतलन चक्र’ (Refrigeration cycle in Hindi)’ कहते हैं इसमें चार प्रक्रम निम्नानुसार होते हैं।

1.रुद्धोष्म प्रसार (MN) – इस प्रक्रम में कार्यकारी पदार्थ द्वारा कार्य किया जाता है जिससे उसकी आन्तरिक ऊर्जा घटती है। फलतः कार्यकारी पदार्थ का ताप T1 से गिरकर T2 हो जाता है।

2.समतापी प्रसार (NO) – इस प्रक्रम में कार्यकारी पदार्थ सिंक से Q2 ऊष्मा अवशोषित करता है तथा कार्यकारी पदार्थ का ताप T2 पर नियत बना रहता है।

3.रुद्धोष्म संपीडन (OP) – इस प्रक्रम में कार्यकारी पदार्थ पर कार्य किया जाता है जिससे उसकी आन्तरिक ऊर्जा बढ़ जाती है, फलतः कार्यकारी पदार्थ का ताप T2 से बढ़कर T1 हो जाता है।

4.समतापी संपीडन (PM) – इस प्रक्रम में कार्यकारी पदार्थ स्त्रोत को Q1 ऊष्मा देता है तथा कार्यकारी पदार्थ का ताप T1 पर नियत बना रहता है। इस प्रकार कार्यकारी पदार्थ अपनी प्रारंभिक अवस्था M में वापस लौट आता है।

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प्रशीतित्र की दक्षता (efficiency of a refrigerator in Hindi)

प्रशीतित्र की दक्षता को “निष्पादन गुणांक” द्वारा निरूपित किया जाता है। किसी प्रशीतित्र का निष्पादन गुणांक (β), प्रत्येक चक्र में सिंक से ली गई ऊष्मा तथा बाह्य स्त्रोत द्वारा किए गए कार्य की निष्पत्ति के बराबर होता है। अर्थात्

निष्पादन गुणांक (β) = सिंक से एक चक्र में ली गई ऊष्मा/एक चक्र में प्रशीतित्र पर कृत कार्य

यदि निम्न ताप T2 पर सिंक से अवशोषित ऊष्मा Q2 हो तथा प्रशीतित्र पर कृत कार्य W हो, तब
β = \frac{Q_2}{W}
यदि उच्च ताप T1 पर स्त्रोत को दी गई ऊष्मा Q1 हो, तब
W = Q1 – Q2
अतः
β = \frac{Q_2}{Q_1 - Q_2}
या β = \frac{1}{\frac{Q_1}{Q_2} - 1}
लेकिन उत्क्रमणीय चक्र के लिए
\frac{Q_1}{Q_2} = \frac{T_1}{T_2}
अतः
β = \frac{1}{\frac{T_1}{T_2} - 1}
या
β = \frac{T_2}{T_1-T_2} ….(1)
अर्थात् स्पष्ट है कि T2 के दिए गए मान के लिए T1 – T2 का मान जितना कम होता है, निष्पादन गुणांक β का मान उतना ही अधिक होता है। वास्तविक प्रशीतित्रों के लिए β का मान लगभग 2 से 6 के मध्य होता है।

Note – कार्य गुणांक तथा दक्षता में क्या संबंध है।

निष्पादन गुणांक (β) तथा दक्षता (η) में संबंध

ऊष्मा इंजन की दक्षता
η = 1 – \frac{T_2}{T_1}
या
η = \frac{T_1 -T_2}{T_1} ….(2)
समीकरण (1) व (2) से,
β + 1 = \frac{T_2}{T_1-T_2} + 1
या
β + 1 = \frac{T_1}{T_1-T_2} = \frac{1}{η}
अतः
β = \frac{1}{η} – 1
या
\footnotesize \boxed{β = \frac{1 - η}{η}} ….(3)
“यही निष्पादन गुणांक तथा दक्षता के बीच संबंध है।”

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q.1 प्रशीतित्र क्या है ? इसके प्रमुख भाग क्या है ? प्रशीतलन चक्र का वर्णन कीजिए तथा प्रशीतित्र की दक्षता के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए ?
Q.2 प्रशीतलन क्या है ? इसका कार्य सिद्धांत प्रशीतलन चक्र की सहायता से समझाइए तथा इसके कार्य गुणांक का व्यंजक निगमित कीजिए ?

  1. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  2. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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