भगवती चरण वर्मा: जीवन परिचय, साहित्यिक, रचनाएं, भाषा शैली व साहित्य में स्थान

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हमने “भगवती चरण वर्मा का जीवन परिचय” (bhagwati charan verma biography in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है। इसमें हमने भगवतीचरण वर्मा का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएं एवं कृतियां, उपन्यास, भाषा शैली एवं साहित्य में स्थान और भगवतीचरण वर्मा के प्रसिद्ध उपन्यास का एक पात्र आदि को भी विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि आप परीक्षाओं में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकें। इसके अलावा इसमें हमने वर्मा जी के जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर भी दिए हैं, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

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भगवती चरण वर्मा का संक्षिप्त परिचय

विद्यार्थी ध्यान दें कि इसमें हमने वर्मा जी की जीवनी के बारे में संक्षेप में एक सारणी के माध्यम से समझाया है।
भगवती चरण वर्मा की जीवनी –

नामभगवतीचरण वर्मा
जन्म30 अगस्त, 1903 ई०
जन्म स्थानउत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के शफीपुर ग्राम में
मृत्यु05 अक्टूबर, 1981 ई०
मृत्यु स्थानलखनऊ
पिता का नामश्री देवीचरण वर्मा
शिक्षाबी०ए०, एल०एल०बी०
पैशालेखक, उपन्यासकार, कहानीकार, नाटककार, साहित्यकार
साहित्य कालआधुनिक काल
पुरस्कारपद्मभूषण, साहित्य अकादमी पुरस्कार
प्रमुख रचनाएंचित्रलेखा, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, तीन वर्ष, सीधी सच्ची बातें, रेखा, प्रायश्चित, काश मैं कह सकता आदि।

भगवती चरण वर्मा का जीवन परिचय

भगवतीचरण वर्मा का जन्म 30 अगस्त, सन् 1903 ईस्वी को उन्नाव जिले के शफीपुर गाॅंव में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री देवीचरण वर्मा था। वर्मा जी ने प्रयाग विश्वविद्यालय से बी०ए०, एल-एल०बी० तक की शिक्षा प्राप्त की। और इन्होंने प्रायः सभी विधाओं में साहित्य सर्जना की है। हिन्दी साहित्य में वर्मा जी का पदार्पण छायावाद की नवीन धारा के कवि के रूप में हुआ था तथा प्रगतिशील कवियों में भी इन्होंने अपना विशिष्ट स्थान बनाया।

भगवती चरण वर्मा
भगवती चरण वर्मा का जीवन परिचय

भगवती चरण वर्माजी एक सफल उपन्यासकार तो थे ही साथ ही उच्चकोटि के व्यंग्यात्मक कहानीकार के रूप में भी आप प्रतिष्ठित हुए। फिल्म तथा आकाशवाणी कार्यक्रमों में भी आपने नाम कमाया। जिसके लिए आपको साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया तथा भारत सरकार ने आपको पद्मभूषण की मानद उपाधि से सम्मानित किया था। 05 अक्टूबर, सन् 1981 ईस्वी को लखनऊ में आपका देहावसान हो गया था।

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भगवती चरण वर्मा का साहित्यिक परिचय

वर्माजी की गणना अपने युग के शीर्षस्थ कहानीकारों में की जाती है। आपकी कहानियों में कला की सजीवता पाठक को मुग्ध कर देती हैं। सरलता, स्पष्टता, सहजता एवं व्यंग्यात्मक अभिव्यंजना आपकी कहानियों की प्रमुख विशेषताएँ हैं। आपकी कहानियों में अधिकतर सामाजिक परिवेशों तथा पारिवारिक प्रसंगों को कथानक के रूप में लिया गया है। कथानक लघु किन्तु कलापूर्ण एवं सव्यंग्य हैं। नगण्य एवं सामान्य घटनाओं का मार्मिक तथा चुटीला प्रस्तुतीकरण आपकी विशेषता है। शीर्षक आकर्षक एवं कुतूहलवर्धक होते हैं।

भगवती चरण वर्मा जी ने मुख्यतः चरित्रप्रधान, समस्याप्रधान अथवा विचारप्रधान कहानियाँ लिखी हैं। कहानियों के पात्र समाज के विभिन्न वर्गों से चुने गये हैं। वर्गीय पात्रों के चरित्र-चित्रण में आपने मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर उन्हें सजीव बना दिया है। पात्रों के मनोगत भावों को स्पष्ट करने तथा उनकी मनोग्रन्थियों को खोलने में आपका कौशल देखते ही बनता है। आपकी कहानियों में कथोपकथनों की योजना मनोरंजक ढंग से की गयी है। कथोपकथन संक्षिप्त एवं सार्थक हैं। तथा पात्रों के मनोगत भावों को व्यक्त करने में समर्थ हैं। लेखक ने नाटकीयता का पुट देकर संवादों को अत्यन्त सजीव तथा वातावरणपरक बना दिया है।

भगवती चरण वर्मा की प्रमुख रचनाएं

वर्माजी की प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित है-
कहानी संग्रह – इन्स्टालमेण्ट, दो बाँके तथा राख और चिनगारी।
उपन्यास – पतन, चित्रलेखा, तीन वर्ष, टेढ़े-मेढ़े रास्ते, सामर्थ्य और सीमा रेखा, सीधी-सच्ची बातें, सबहिं नचावत राम गुसाई, प्रश्न और मारीचिका आदि आपने कविताएँ, रेडियो- रूपक तथा नाटक भी लिखे हैं।

इसके अतिरिक्त – ‘दो बाँके’, ‘मुगलों ने सल्तनत बख्श दी’, ‘प्रायश्चित’, ‘काश मैं कह सकता’, ‘विक्टोरिया क्रास’ आदि आपकी प्रसिद्ध कहानियाँ हैं।

भगवती चरण वर्मा की भाषा शैली

वर्मा जी की भाषा-शैली सरल, सहज एवं व्यावहारिक है। शैली में व्यंग्य के साथ-साथ प्रवाह है तथा वह पात्रों के अनुकूल एवं परिस्थिति के अनुसार बदलती है। आपकी अधिकतर कहानियों में शिष्ट हास्य एवं परिमार्जित व्यंग्य पाठक को प्रभावित करते रहते हैं।

परिस्थिति एवं प्रसंग के उपयुक्त, रोचक एवं प्रभावशाली वातावरण चित्रित करने में वर्मा जी सिद्धहस्त थे। आपकी कहानियाँ जीवन की विकृतियों और विसंगतियों को पाठक के समक्ष न केवल उद्घाटित करती हैं, अपितु यथार्थ अनुभव के प्रति पाठक को संवेदनशील भी बनाती हैं।

भगवती चरण वर्मा का साहित्य में स्थान

वर्मा जी ने हिंदी साहित्य की लगभग सभी विधाओं में रचनाएँ कीं। उपन्यास के क्षेत्र इनका सराहनीय योगदान रहा है। साहित्य जगत् में उत्कृष्ट उपन्यासकार व्यंग्यकार के रूप में इन्हें ख्याति प्राप्त हुई। वर्मा जी आकाशवाणी तथा हिंदी साहित्य जगत् से लम्बे समय तक जुड़े रहे।

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FAQs. भगवती चरण वर्मा जी के जीवन से जुड़े प्रश्न उत्तर

1. भगवती चरण वर्मा का जन्म कब और कहां हुआ था?

भगवतीचरण वर्मा का जन्म 30 अगस्त, सन् 1903 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के शफीपुर गाॅंव में हुआ था।

2. भगवती चरण वर्मा को साहित्य अकादमी कब मिला?

सन् 1961 ई० में साहित्य साधना के लिए भगवती चरण वर्मा जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सन् 1969 ई० में इन्हें साहित्य वाचस्पति की उपाधि से विभूषित किया गया। और सन् 1978 ई० में वर्मा जी को राज्यसभा के लिए भी चुना गया था।

3. चित्रलेखा का पहला संस्करण कब निकला था?

सन् 1934 ई० में प्रकाशित ‘चित्रलेखा’ के प्रथम संस्करण ने लोकप्रियता के कई पुराने कीर्तिमान बनाए थे।

4. भगवती चरण वर्मा के प्रथम उपन्यास का नाम क्या था?

‘टेढ़े-मेढ़े रास्ते’ जो सन् 1948 ई० में प्रकाशित भगवती चरण वर्मा जी का प्रथम वृहत उपन्यास था जिसे हिन्दी साहित्य के प्रथम राजनीतिक उपन्यास का दर्जा मिला। टेढ़े-मेढ़े रास्ते को इन्होंने अपनी प्रथम शुद्ध बौद्धिक गद्य-रचना माना है।

5. भगवती चरण वर्मा की मृत्यु कब और कहां हुई थी?

भगवतीचरण वर्मा जी की मृत्यु 05 अक्टूबर, सन् 1981 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुई थी।

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