भू-स्थिर उपग्रह किसे कहते है, पृथ्वी तल से ऊंचाई ज्ञात कीजिए | Geostationary Satellites in Hindi

भू-स्थिर उपग्रह क्या है

यदि पृथ्वी के किसी कृत्रिम उपग्रह के परिक्रमण काल का मान वही हो जो पृथ्वी का अपनी अक्ष के परितः होता है, तो वह उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर दिखाई देगा। ऐसे उपग्रह को “भू-स्थिर उपग्रह अथवा तुल्यकाली उपग्रह अथवा सिन्क्रोनस उपग्रह” कहते हैं। तथा इसके लिए आवश्यक है कि उपग्रह का परिक्रमण काल, पृथ्वी के परिक्रमण काल के बराबर हो, अर्थात् भू-स्थिर उपग्रह का आवर्तकाल 24 घण्टे का होना चाहिए। अर्थात् भू-स्थिर उपग्रह की गति की दिशा पश्चिम से पूरब की ओर वामावर्त होती है। भू-स्थिर उपग्रह की कक्षा का तल पृथ्वी के केंद्र से गुजरने वाली रेखा के तल में होता है। जैसे – इनसेट – 1B आदि।

इसे भी पढ़े… उपग्रह क्या है पृथ्वी के चारों और चक्कर लगाते उपग्रह

भू-स्थिर उपग्रह की ऊंचाई

पृथ्वी की सतह से h ऊंचाई पर परिक्रमण कर रहे किसी उपग्रह का परिक्रमण काल के लिए सूत्र,
T = 2π \sqrt{ \frac{(R_e + h)^3}{gR^2_e} }
या (Re + h)3 = \frac{gR^2_eT^2}{4π^2}
अथवा (Re + h) = [ \frac{gR^2_eT^2}{4π^2} ]1/3

परन्तु एक भू-स्थिर उपग्रह के लिए T = 24 घण्टे = 24 × 60 × 60 सेकण्ड = 86400 सेकण्ड, Re = 6.37 × 106 मीटर तथा g = 9.8 मीटर/सेकण्ड2 । अर्थात्

Re + h = [ \frac{9.8 × (6.37 × 10^6)^2 × (86400)^2}{4 × (3.14)^2} ]1/3
Re + h = 42.22 × 106 मीटर ≈ 42000 किमी

पृथ्वी तल से भू-स्थिर उपग्रह की ऊंचाई

पृथ्वी के तल से इस उपग्रह की दूरी, h = (Re + h) – Re सूत्र से, तब
h = 42.22 × 106 – 6.37 × 106
अथवा
h = 35.85 × 106 मीटर ≈ 36000 किमी

अर्थात् भू-स्थिर उपग्रह पृथ्वी तल से 35.85 × 106 मीटर दूरी पर रहकर पृथ्वी की परिक्रमा करता है। अतः भू-स्थिर उपग्रह की कक्षा को ‘पार्किंग कक्षा’ कहते हैं।

और पढ़ें.. केप्लर के ग्रहों की गति के नियम लिखिए एवं सिद्ध कीजिए?

पृथ्वी तल से ऊंचाई

पृथ्वी पर खड़े प्रेक्षक को उपग्रह तभी स्थिर दिखाई देगा। जबकि उपग्रह का परिक्रमा काल, पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः परिक्रमण काल के बराबर हो अर्थात्
T = 24 घण्टे = 24 × 60 × 60 सेकण्ड

अब माना यदि उपग्रह की पृथ्वी के तल से ऊंचाई h है, तो
परिक्रमण काल

T = 2π \sqrt{ \frac{(R + h)^3}{GM}} = 2π \sqrt{ \frac{(R + h)^3}{gR^2}}

या T = \frac{2π}{R} \frac{(R + h)^\frac{3}{2}}{\sqrt{g}}

अतः यही T = 24 × 60 × 60 सेकण्ड, R = 6.37× 106 मीटर (पृथ्वी की त्रिज्या) तथा g = 9.8 रखने पर,

24 × 60 × 60 = \frac{2 × 3.14 × (6.37 × 10^6 + h)^\frac{3}{2}}{(6.37 × 10^6 \sqrt{9.8})}

h = [ \frac{24 × 60 × 60 × 6.37 × 10^6 × \sqrt{9.8}}{2 × 3.14} ] \frac{2}{3} – 6.37 × 106

या \footnotesize \boxed{ h \simeq 3.8 × 10^7 } मीटर

पढ़ें.. गुरुत्वाकर्षण का नियम, न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम क्या है?

कृत्रिम उपग्रह क्या है

यदि किसी पिण्ड को पृथ्वी तल से कुछ सौ किलोमीटर ऊपर आकाश में भेजकर उसे लगभग 8 किलोमीटर प्रति सेकंड का क्षैतिज वेग दें, तो वह पिण्ड पृथ्वी के चारों ओर एक निश्चित कक्षा में परिक्रमण करने लगता है। ऐसे पिण्ड को “कृत्रिम उपग्रह” कहते हैं।
अर्थात् चन्द्रमा की तरह कृत्रिम उपग्रह भी पृथ्वी द्वारा आरोपित गुरुत्वाकर्षण बल के अन्तर्गत ही पृथ्वी के परितः एक वृत्तीय कक्षा में घूमता है। उपग्रह पर यह बल सदैव पृथ्वी के केन्द्र की ओर दिष्ट रहता है। अर्थात् यही अभिकेंद्र बल होता है। अतः यहां प्रशन उठता है कि उपग्रह गुरुत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी की ओर क्यों नहीं गिरता है तथा एक निश्चित त्रिज्या के वृत्ताकार पथ पर ही क्यों घूमता रहता है । वास्तव में उपग्रह तो लगातार पृथ्वी के केन्द्र की ओर गिरता है परन्तु पृथ्वी की वक्रता के कारण वह केन्द्र से नियत दूरी पर बना रहता है।

कृत्रिम उपग्रहों के उपयोग

  • वायुमण्डल के ऊपरी क्षेत्रों का अध्ययन किया जा सकता है।
  • पृथ्वी के आकार तथा इसकी आन्तरिक रचना के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
  • ब्रह्मांड से आने वाले विकिरणों का अध्ययन किया जा सकता है।
  • मौसम के बारे में पूर्व सूचना प्राप्त की जा सकती है।
  • टेलीविजन कार्यक्रमों तथा संवादों को दूर-दूर तक संचारित किया जा सकता है।
  • मानव की अन्तरिक्ष उड़ान तथा दूसरे ग्रहों पर पहुंचने का कार्यक्रम इन्हीं कृत्रिम उपग्रह पर आधारित होता है।
  • विमान चालक उपग्रहों का दिशा-निर्देशक के रूप में प्रयोग किया जा सकता हैं।
  • इनका उपयोग युद्ध काल में भी किया जा सकता है।

Note – भू-स्थिर उपग्रह से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं –

Q.1 भूस्थिर उपग्रह से आप क्या समझते हैं ?
Q.2 भू-स्थिर उपग्रह से क्या अभिप्राय है? पृथ्वी के तल से इसकी लगभग दूरी क्या होगी?
Q.3 भू-स्थिर उपग्रह किसे कहते है? तथा पृथ्वी के तल से इसकी ऊंचाई ज्ञात कीजिए?

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *