महादेवी वर्मा: जीवन परिचय, रचनाएं, पुरस्कार, भाषा शैली व साहित्य में स्थान

महादेवी वर्मा हिन्दी छायावादी कवियों के चार स्तंभों में से एक हैं। महादेवी जी की कविताओं में वेदना का स्वर प्रधान मिलता है और भाव एवं संगीत का संगम है। यद्यपि उनका मुख्य क्षेत्र काव्य रहा है तथापि उन्होंने उच्च कोटि की गद्य रचनाएं भी की है, तो चलिए आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम महादेवी वर्मा जी के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं ताकि परीक्षाओं में हम ज्यादा नम्बर ला सकें।

तो दोस्तों, आज के इस लेख में हमने “महादेवी वर्मा का जीवन परिचय” (Mahadevi Verma Biography in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। इसमें हमने महादेवी वर्मा का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, कृतियां एवं रचनाएं, पुरस्कार, भाषा शैली तथा साहित्य में स्थान के बारे में विस्तारपूर्वक सरल भाषा में समझाया है।

इसके अलावा, इसमें हमने महादेवी जी के जीवन से संबंधित उन सभी प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। यदि आप महादेवी वर्मा जी से जुड़े उन सभी प्रश्नों के उत्तर के बारे में जानना चाहते हैं तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें।

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महादेवी वर्मा का संक्षिप्त परिचय

इसमें महादेवी जी की जीवनी को संक्षेप में एक टेबल के माध्यम से समझाया है।
महादेवी वर्मा की जीवनी –

सामान्य नाममहादेवी वर्मा
अन्य नामआधुनिक युग की मीरा
जन्म26 मार्च 1907 ई.
जन्म स्थानफर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश)
मृत्यु11 सितंबर 1987 ई.
मृत्यु स्थानइलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
पिता का नामश्री गोविंदसहाय वर्मा
माता का नामश्रीमती हेमरानी देवी
पति का नामडॉ रूपनारायण सिंह
व्यवसायकवित्री, लघुकथा लेखिका, उपन्यासकार
शिक्षाएम० ए०, प्रयागराज विश्वविद्यालय
साहित्य आंदोलनछायावाद
अवधि या काल20वीं शताब्दी
पुरस्कारपद्मभूषण, ज्ञानपीठ, मंगलाप्रसाद, सेकसरिया, भारत भारती, द्विवेदी पदक, पद्मविभूषण
प्रमुख रचनाएंहिमालय, निहार, नीरजा, सान्ध्यगीत, रश्मि, दीपशिखा, सप्तपर्णा, यामा।

महादेवी वर्मा जी आधुनिक हिंदी साहित्य के निर्माताओं में महत्वपूर्ण स्थान कि अधिकारिणी हैं। जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला तथा महादेवी वर्मा को छायावादी युग के चार महान कवियों के बृहत् चतुष्ट्य के रूप में जाना जाता है।

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महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

महादेवी वर्मा का जन्म फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश के एक शिक्षित परिवार में 26 मार्च, 1907 ई. में होलिका दहन के दिन हुआ था। इनके पिता श्री गोविंदसहाय वर्मा जो भागलपुर के एक कॉलेज में प्रधानाचार्य थे। एवं इनकी माता श्रीमती हेमरानी देवी परम् विदुषी धार्मिक महिला थी। तथा इनके नाना ब्रजभाषा के एक अच्छे कवि भी थे। महादेवी जी पर इन सभी का काफी गहरा प्रभाव पड़ा है और वे एक प्रसिद्ध कवित्री, प्रकृति एवं परमात्मा की निष्ठावान उपासिका एवं सफल प्रधानाचार्य के रूप में प्रतिष्ठित हुई।

महादेवी वर्मा
महादेवी वर्मा का जीवन परिचय

महादेवी वर्मा की प्रारंभिक शिक्षा इन्दौर में और उच्च शिक्षा प्रयाग में हुई। इन्होंने प्रयाग विश्वविद्यालय से बी० ए० तथा संस्कृत में एम० ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। महादेवी जी ने एम० ए० उत्तीर्ण करने के बाद प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्रधानाचार्य के पद पर कार्य किया। इनका विवाह मात्र 9 वर्ष की अल्पायु में ही हो गया था। इनके पति श्री रूपनारायण सिंह एक डॉक्टर थे, परन्तु इनका दांपत्य जीवन सफल नहीं था। विवाहोपरांत ही इन्होंने एफ० ए०, बी० ए० और एम० ए० परीक्षाएं सम्मान सहित उत्तीर्ण की। महादेवी जी ने घर पर ही चित्रकला तथा संगीत की शिक्षा भी प्राप्त की थी।

इसके बाद, महादेवी वर्मा ने नारी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया परंतु आपने अधिकारों की रक्षा के लिए नारियों का शिक्षित होना भी आवश्यक बताया है। कुछ वर्षों तक ये उत्तर प्रदेश विधान-परिषद् की मनोनीत सदस्य भी रही। भारत के राष्ट्रपति द्वारा इन्हें ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। हिंदी साहित्य सम्मेलन की ओर से महादेवी जी को ‘सेक्सरिया पुरस्कार’ तथा ‘मंगलाप्रसाद पारितोषिक’ पुरस्कार मिले थे। सन् 1943 ई. में ‘भारत-भारती’ तथा सन् 1982 ई. में ‘यामा’ नामक पर आपको ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया था। इसके अलावा महादेवी जी को ‘पद्मविभूषण’ से भी नवाजा गया था। 11 सितम्बर, 1987 ई. को इस महान लेखिका महादेवी वर्मा का स्वर्गवास हो गया था।

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महादेवी वर्मा का साहित्यिक परिचय

श्रीमती महादेवी वर्मा जी ने गद्य-पद्य दोनों ही क्षेत्रों में समान ख्याति प्राप्त की है। गध में महादेवी जी ने आलोचना, निबंध, संस्मरण तथा रेखाचित्र आदि विधाओं पर लिखने की है, लेकिन इनका मुख्य रचना क्षेत्र काव्य ही रहा है। इनकी गणना छायावादी कवियों की वृहत चतुष्ट्यी में होती है, इनके काव्य में वेदना की प्रधानता है।

महादेवी वर्मा जी ने प्रयाग में ‘साहित्यकार संसद’ की स्थापना करके साहित्यकारों का मार्गदर्शन भी किया। इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विधान परिषद् की सदस्यता प्रदान की गई तथा भारत सरकार ने इन्हें ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से अलंकृत किया। ‘कुमायूॅं विश्वविद्यालय’ ने आपको “डी०-लिट्० (डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स) की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया था। आपने “चांद” मासिक पत्रिका का संपादन करके नारी को अपनी स्वतंत्रता और अधिकारों के प्रति सजग किया है इसलिए आपको “आधुनिक युग की मीरा” भी कहा जाता है।

महादेवी वर्मा जी के जीवन पर महात्मा गांधी का तथा कला-साहित्य साधना पर कवींद्र रवींद्र का अधिक प्रभाव पड़ा है। इनका हृदय अत्यंत करुणापूर्ण, संवेदनायुक्त एवं भावुक था। इसलिए इनके साहित्य में भी वेदना का गहरा असर पड़ा है।

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महादेवी वर्मा की रचनाएं

महादेवी जी की प्रमुख काव्य और गध में कृतियां एवं रचनाएं कुछ इस प्रकार से हैं –
(1). निहार – यह महादेवी जी का पहला प्रकाशित काव्य संग्रह है।
(2). नीरजा – इसके गीतों में महादेवी जी के जीवन-दृष्टि का चित्रण होता है।
(3). रश्मि – इसमें आत्मा और परमात्मा का आध्यात्मिक गीत है।
(4). सान्ध्यगीत – इसमें महादेवी जी के श्रृंगार पूरक गीतों को संकलित किया गया है।
(5). दीपशिखा – इसमें महादेवी जी के रहस्य भावना प्रधान गीतों का संग्रह होता है।
(6). यामा – यह महादेवी जी के भाव प्रधान गीतों का संग्रह है।
इसके अतिरिक्त सन्धिनी, आधुनिक कवि तथा सप्तपर्णा इनके अन्य काव्य संग्रह हैं। तथा ‘अतीत के चलचित्र’, ‘स्मृति की रेखाएं’, ‘श्रृंखला की कड़ियां’ महादेवी वर्मा जी की महत्वपूर्ण गद्य रचनाएं हैं।

महादेवी वर्मा की भाषा शैली

महादेवी जी की भाषा खड़ीबोली एवं संस्कृत पूर्ण है फिर भी उसमें शुष्कता तथा दुर्बोधता नहीं है। भावों की अभिव्यक्ति करने में वह पूर्णता सफल एवं समर्थ हैं तथा विषय के अनुरूप अपनी भाषा का परिवर्तन करती रहती हैं। महादेवी जी की भाषा सजीव, प्रवाहयुक्त एवं प्रभावपूर्ण है। चित्रात्मकता महादेवी जी की भाषा की प्रमुख विशेषता है। शब्द चयन एवं वाक्य विन्यास कलात्मक हैं।

महादेवी वर्मा जी की शैली सरल एवं आकर्षक है। इसमें महादेवी जी ने प्रमुख रूप से तीन प्रकार की शैलियों को अपनाया है जैसे – विवेचनात्मक शैली, विवर्णनात्मक शैली तथा ओजमयी विद्रोहात्मक शैली।
नोट – कुल मिलाकर महादेवी वर्मा की शैली सरल, आकर्षक एवं प्रभावोत्पादक है।

महादेवी वर्मा का साहित्य में स्थान

महादेवी वर्मा जी वर्तमान हिंदी साहित्य की सर्वश्रेष्ठ गीताकार हैं। इनके भाव पक्ष और कला पक्ष दोनों ही अति पुष्ट हैं। अपने साहित्यिक व्यक्तित्व एवं अद्वितीय रचनाओं के आधार पर हिंदी साहित्य कोश में महादेवी जी का गरिमय पद ध्रुव तारे की भांति अटल है।

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FAQs. महादेवी वर्मा से संबंधित प्रश्न-उत्तर

1. महादेवी वर्मा का जन्म कब और कहां हुआ था?

महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 ई. में उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद शहर में हुआ था।

2. महादेवी वर्मा के माता-पिता का क्या नाम था?

महादेवी वर्मा की माता का नाम श्रीमती हेमरानी देवी तथा पिता का नाम श्री गोविंदसहाय वर्मा था।

3. महादेवी वर्मा की मृत्यु कब और कहां हुई थी?

महादेवी वर्मा की मृत्यु 11 सितंबर 1987 ई. को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुई थी।

4. महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएं कौन-कौन सी हैं?

महादेवी वर्मा जी की प्रमुख रचनाएं निम्न है – निहार, रश्मि, नीरजा, सान्ध्यगीत, यामा, दीपशिखा, सप्तपर्णा आदि ये इनकी काव्य संग्रह हैं। इसके अतिरिक्त अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएं, श्रृंखला की कड़ियां ये इनकी गध रचनाएं हैं।

5. महादेवी वर्मा को कितने पुरस्कार मिले हैं?

महादेवी वर्मा जी के पुरस्कार इस प्रकार से हैं –
(i). सेक्सरिया पुरस्कार (सन् 1934 ई. में)
(ii). द्विवेदी पदक (सन् 1942 ई. में)
(iii). भारत भारती पुरस्कार (सन् 1943 ई. में)
(iv). मंगला प्रसाद पुरस्कार (सन् 1943 ई. में)
(v). पद्म-भूषण (सन् 1956 ई. में)
(vi). साहित्य अकादमी पुरस्कार (सन् 1971 ई. में)
(vii). ज्ञानपीठ पुरस्कार (सन् 1982 ई. में)
(viii). पद्म-विभूषण (सन् 1988 ई. में) ।

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