मैथिलीशरण गुप्त – जीवन परिचय, साहित्य, रचनाएं, भाषा शैली व साहित्य में स्थान

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको “मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय” (Maithili Sharan Gupt biography in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं। इसमें हम आपको मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएं एवं कृतियां और उनकी भाषा शैली तथा साहित्य में स्थान को विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाएंगे, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें।

इसे भी पढ़ें… कबीरदास का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

विषय-सूची show

मैथिलीशरण गुप्त का संक्षिप्त परिचय

विद्यार्थी ध्यान दें कि इसमें हमने मैथिली शरण गुप्त जी की जीवनी के बारे में संक्षेप में एक सारणी के माध्यम से समझाया है।
मैथिलीशरण गुप्त की जीवनी –

नाममैथिलीशरण गुप्त
जन्म03 अगस्त, 1886 ई. में
जन्मस्थानचिरगाॅंव, झाॅंसी, उत्तर प्रदेश
मृत्यु12 दिसम्बर, 1964 ई. में
मृत्युस्थानझाॅंसी, उत्तर प्रदेश
पिता का नामसेठ रामचरण गुप्त
माता का नामश्रीमती काशीबाई देवी
पत्नी का नामश्रीमती सरजू देवी
संतानउर्मिलचरण गुप्त
व्यवसायकवि, नाटककार, अनुवादक, राजनीतिज्ञ
शिक्षाप्राथमिक चिरगाॅंव, मैकडॉनल्ड हाई स्कूल झाॅंसी (उत्तर प्रदेश)
गुरुआचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी
अवधि/कालआधुनिक काल के द्विवेदी युग के प्रमुख कवि
भाषाखड़ीबोली
प्रमुख रचनाएंसाकेत, भारत भारती, जयद्रथ वध, पंचवटी, यशोधरा, विष्णुप्रिया, नहुष, द्वापर, जय भारत और वीरांगना आदि।
पुरस्कारपद्मभूषण, मंगलाप्रसाद पारितोषिक, डी० लिट्० उपाधि, हिन्दुस्तान अकादमी पुरस्कार, साहित्य वाचस्पति।
हिन्दी साहित्य में स्थानराष्ट्रकवि, आधुनिक हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि

मैथिलीशरण गुप्त (1886 – 1964) एक प्रसिद्ध हिंदी कवि, नाटककार और निबंधकार थे। उन्होंने 20वीं सदी की शुरुआत में हिंदी साहित्य में एक रोमांटिक साहित्य आंदोलन, छायावाद आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गुप्त जी को आधुनिक हिंदी साहित्य के अग्रदूतों में से एक माना जाता है और उन्हें “राष्ट्र कवि” या भारत के ‘राष्ट्रीय कवि’ के रूप में भी जाना जाता है।
गुप्त जी की कविताएं भारतीय पौराणिक कथाओं, इतिहास और राष्ट्रवादी उत्साह से गहराई से प्रभावित थी। उन्होंने देशभक्ति, सामाजिक सुधार और आध्यात्मिक ज्ञान से संबंधित विषयों पर विस्तार से लिखा है।

और पढ़ें… भारतेंदु हरिश्चंद्र का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त हिंदी काव्य जगत के अनुपम रतन है। इनका जन्म 03 अगस्त, सन् 1886 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के झाॅंसी जिले के चिरगाॅंव नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता सेठ रामचरण गुप्त रामभक्त और काव्यप्रेमी थे। गुप्त जी पर अपने पिता के काव्य संस्कारों का पूर्ण प्रभाव पड़ा। गुप्त जी की माता का नाम श्रीमती काशीबाई था। गुप्त जी ने प्रारंभ में कक्षा 9 तक ही विद्यालयीय शिक्षा प्राप्त की थी, फिर इन्हें अंग्रेजी पढ़ने के लिए झाॅंसी भेजा गया, किंतु वहां पर इनका मन नहीं लगा। अतः स्वाध्याय से ही गुप्तजी ने अनेक भाषाओं जैसे हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत का ज्ञान प्राप्त किया। काव्य रचना की और बाल्यावस्था से ही गुप्त जी का झुकाव था। आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी से भी इन्हों बहुत प्रेरणा मिली। ये द्विवेदी जी को अपना गुरु मानते थे।

मैथिलीशरण गुप्त
मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय

मैथिलीशरण गुप्त जी ने हिंदी काव्य की नवीन धारा को पुष्ट कर उसमें अपना विशेष स्थान बना लिया। गुप्त जी की कविताओं में देश-भक्ति एवं राष्ट्र-प्रेम की भावना होने के कारण इन्हें हिंदी-संसार ने “राष्ट्र-कवि” का सम्मान दिया। महात्मा गांधी जी से प्रभावित होकर गुप्तजी ने स्वाधीनता आंदोलन में भाग लिया और कई बार जेल की यात्राएं भी करनी पड़ी। गुप्तजी ने समाज सुधार, राजनीति, स्वदेश प्रेम, धर्म और भक्ति आदि विषयों पर रचनाएं की। राष्ट्रीय विषयों पर लिखने के कारण ये ‘राष्ट्रकवि’ कहलाए।

मैथिलीशरण गुप्त जी को हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग से “साकेत” नामक महाकाव्य पर “मंगलाप्रसाद पारितोषिक” पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। सन् 1948 ई. में आगरा विश्वविद्यालय ने तथा सन् 1958 ई. में इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने गुप्त जी को डी० लिट्० (डॉक्टर ऑफ़ लेटर्स) की मानद उपाधि से सम्मानित किया। सन् 1954 ई. में भारत सरकार ने गुप्त जी को “पद्मभूषण” की उपाधि से भी अलंकृत किया था।
इसके अलावा, गुप्त जी को हिन्दुस्तान अकादमी पुरस्कार और साहित्य वाचस्पति पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। और दो बार ये राज्यसभा के सदस्य भी मनोनीत हुए। जीवन के अन्तिम क्षणों में भी ये निरंतर साहित्य सृजन करते रहे। 12 दिसम्बर, सन् 1964 ईस्वी को माॅं भारती का यह महान् साधक डॉ. मैथिलीशरण गुप्त जी का देहावसान हो गया था।

पढ़ें… रहीम दास का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

मैथिलीशरण गुप्त का साहित्यिक परिचय

गुप्त जी आधुनिक युग के श्रेष्ठ कवियों में से एक हैं। इनकी प्रारंभिक रचनाएं कोलकाता से ‘वैश्योपकारक’ पत्रिका में प्रकाशित होती थी। तथा महावीर प्रसाद द्विवेदी जी के संपर्क में आने के बाद इनकी रचनाएं ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित होने लगी। तथा सन् 1909 ई. में गुप्त जी की सबसे पहली पुस्तक ‘रंग में भंग’ का प्रकाशन हुआ। इसके बाद सन् 1912 ई. में “भारत भारती” के प्रकाशित होने से इन्हें अपार ख्याति प्राप्त हुई। हिंदी के आधुनिक युग की समस्त काव्य धाराओं को गुप्त जी ने अपने साहित्य ने अपनाया है जैसे- प्रबंध-काव्य, खण्ड-काव्य, गीतिनाट्य और छायावादी शैली के गीत।

मैथिलीशरण गुप्त जी खड़ीबोली के उन्नायकों में प्रधान है। इन्होंने खड़ीबोली को काव्य के अनुकूल भी बनाया और जनरुचि को भी उसकी और प्रवृत किया। भारतीय संस्कृति, भारत का गौरव, राष्ट्रप्रेम तथा कर्तव्य का कठोर संदेश इनकी रचनाओं के विषय रहे हैं।

गुप्त जी श्रीराम के अनन्य भक्त थे। इन्होंने राम के आदर्श चरित्र का अंकन किया है। और उनके राम स्नेह सहानुभूति, सहनशीलता एवं विश्व प्रेम की साक्षात प्रतिमा है। इनका काव्य भाव एवं कला दोनों ही दृष्टियों से समृद्ध है। पात्रों के मनोवैज्ञानिक चित्रण में गुप्त जी को अभूतपूर्व सफलता मिली है। प्रकृति-चित्रण काव्य में सजीव एवं सरस हैं।
मैथिलीशरण गुप्त जी भारतीय संस्कृति के अमर गायक, उद्भर प्रस्तोता और सामाजिक चेतना के प्रतिनिधि कवि थे। और इन्हें राष्ट्रकवि होने का गौरव प्राप्त है।

पढ़ें… जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

पढ़ें… मीराबाई का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएं

गुप्त जी की रचनाओं का विवरण विशाल है। इनकी विशेष ख्याति रामचरित पर आधारित है जिसका विवरण इस प्रकार से है –
महाकाव्य – साकेत, यशोधरा ।
खण्डकाव्य – भारत भारती, जयद्रथ वध, पंचवटी, द्वापर, सिद्धराज, नहुष, अंजलि और अर्घ्य, अजित, अर्जन और विसर्जन, काबा और कर्बला, किसान, कुणाल गीत, गुरु तेग बहादुर, गुरुकुल, जय भारत, युद्ध, झंकार, पृथ्वी पुत्र, वक् संहार, शकुंतला, विश्व वेदना, राजा प्रजा, विष्णुप्रिया, उर्मिला, लीला, प्रदक्षिणा, दिवोदास, भूमि-भाग आदि।
नाटक – रंग में भंग, विरहिणी, राजा-प्रजा, वन वैभव, विकट भट, वैतालिक, शक्ति, सैरन्ध्री, स्वदेश संगीत, हिडिम्बा, हिन्दू, चंद्रहास आदि।
कविता-संग्रह – उच्छ्वास ।
पत्र-संग्रह – पत्रावली ।

मैथिलीशरण गुप्त जी के नाटक

गुप्त जी के अनूदित नाटक जो भास के नाटकों पर आधारित हैं। कुछ इस प्रकार से हैं –
गुप्त जी के नाटक – अनघ, चरणदास, तिलोत्तमा, निष्क्रिय प्रतिरोध।
भास के अनूदित नाटक – स्वप्नवासवदत्ता, प्रतिमा, अभिषेक, आविमारक।
कुछ अनूदित रचनाएं – रत्नावली – (हर्षवर्ध्दन)। मेघनाथ वध, विरहिणी, वज्रांगना (वीरांगना), पलासी का युद्ध, रूबाइयात उमर खय्याम, वृत्र संहार आदि।

मैथिलीशरण गुप्त की भाषा शैली

गुप्त जी खड़ी बोली को हिंदी काव्य के क्षेत्र में प्रतिष्ठित करने वाले समर्थ कवि के रूप में विशेष महत्व रखते हैं। गुप्त जी ने शुद्ध, साहित्यिक एवं परिमार्जित खड़ीबोली में रचनाएं की हैं। इनकी भाषा सुगठित तथा ओज एवं प्रसाद गुण से युक्त है। इन्होंने अपने काव्य में संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू एवं प्रचलित विदेशी शब्दों के भी प्रयोग किए हैं। भाषा को सरल, शुद्ध और परिष्कृत करने के लिए लोकोक्तियों और मुहावरों का भी बीच-बीच में प्रयोग किया गया है।
गुप्त जी द्वारा प्रयुक्त शैलियों हैं – उपदेशात्मक, प्रबन्धात्मक, विवरणात्मक, गीति तथा नाट्य आदि शैलियों का प्रयोग किया है। इसके अतिरिक्त आधुनिक युग में प्रचलित अधिकांश शैलियों को भी गुप्त जी ने अपनाया है।

मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य में स्थान

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक हिंदी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि रहे हैं। इन्होंने खड़ीबोली को काव्य के सांचे में ढालकर परिष्कृत करने का जो असाधारण कौशल दिखाया है वह अविस्मरणीय रहेगा। गुप्त जी ने राष्ट्र को जगाया और उसकी चेतना को वाणी दी है। ये भारतीय संस्कृति के यशस्वी उद्गाता एवं परम् वैष्णव होते हुए भी विश्व बंधुत्व की भावना से ओतप्रोत थे। गुप्त जी सच्चे अर्थों में इस राष्ट्र के मानवीय मूल्यों के प्रतीक और आधुनिक भारत के एक सच्चे राष्ट्रकवि रहे थे।

पढ़ें… सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

पढ़ें… सोहनलाल द्विवेदी का जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली

FAQs. मैथिलीशरण गुप्त जी के जीवन से जुड़े प्रश्न उत्तर

1. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कब और कहां हुआ था?

मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त, सन् 1886 ई. में चिरगाॅंव (झाॅंसी), उत्तर प्रदेश में हुआ था।

2. मैथिलीशरण गुप्त के माता पिता का क्या नाम था?

मैथिलीशरण गुप्त के पिता का नाम सेठ रामचरण गुप्त तथा माता का नाम श्रीमती काशीबाई था।

3. मैथिलीशरण गुप्त की मृत्यु कब और कहां हुई थी?

मैथिलीशरण गुप्त की मृत्यु 12 दिसंबर, सन् 1964 ई. में झाॅंसी, उत्तर प्रदेश में हुई थी।

4. मैथिलीशरण गुप्त के महाकाव्य का नाम क्या है?

मैथिलीशरण गुप्त जी के द्वारा रचित महाकाव्य का नाम ‘साकेत’ है।

5. भारत के प्रथम राष्ट्र कवि कौन है?

भारत के प्रथम राष्ट्र कवि मैथिलीशरण गुप्त जी को माना जाता हैं।

6. मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख रचनाएं कौन कौन सी हैं?

मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख रचनाएं – साकेत, भारत भारती, जयद्रथ वध, पंचवटी, यशोधरा, विष्णुप्रिया, नहुष, द्वापर, जय भारत और वीरांगना आदि।

7. मैथिलीशरण गुप्त को कौन कौन से पुरस्कार मिले थे?

मैथिलीशरण गुप्त को पद्मभूषण, मंगलाप्रसाद पारितोषिक, डी० लिट्० उपाधि, हिन्दुस्तान अकादमी पुरस्कार, साहित्य वाचस्पति आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *