रवींद्रनाथ टैगोर: जीवन परिचय, साहित्यिक, रचनाएं, कविताएं, भाषा शैली, पुरस्कार

प्रथम भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ (Ravindranath Tagore), जिन्हें गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। एक प्रमुख भारतीय कवि, लेखक, संगीतकार, नाटककार, साहित्यकार, दार्शनिक, शिक्षाप्रदाता और बहुज्ञ थे। हिंदी साहित्य, संगीत और कला के क्षेत्र में टैगोर जी के योगदान ने उन्हें 19वीं सदी की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक बना दिया था, तो चलिए आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको रवींद्रनाथ टैगोर जी के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे, ताकि आप परीक्षाओं में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकें।

तो दोस्तों, आज के इस लेख में हमने “रवींद्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय” (Ravindranath Tagore biography in Hindi) के बारे में बताया है। इसमें हमने रविंद्र नाथ टैगोर का जीवन परिचय, साहित्यिक परिचय, रचनाएं एवं कृतियां, कविताएं, किताबें, भाषा शैली, सामाजिक योगदान, उपलब्धियां एवं हिंदी साहित्य में स्थान और रवीन्द्रनाथ टैगोर के शैक्षिक विचार को भी विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाया है।

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इसके अलावा इसमें हमने रवींद्रनाथ टैगोर जी के जीवन से जुड़े उन सभी प्रश्नों के उत्तर दिए हैं जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं। यदि आप टैगोर जी के जीवन से जुड़े उन सभी प्रश्नों के उत्तर के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें, चलिए शुरू करते हैं।

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रवींद्रनाथ टैगोर का संक्षिप्त परिचय

विद्यार्थी ध्यान दें कि इसमें हमने रविंद्र नाथ टैगोर जी की जीवनी के बारे में संक्षेप में एक सारणी के माध्यम से समझाया है।
रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी –

नामरवीन्द्रनाथ टैगोर
बचपन का नामरबी
असली नामरवीन्द्र नाथ ठाकुर
उपनामगुरुदेव, विश्वकवि, भानुसिंघा
जन्म तिथि07 मई, 1861 ई. में
जन्म स्थानकोलकाता, पश्चिम बंगाल में
मृत्यु तिथि07 अगस्त, 1941 ई. में
मृत्यु स्थानकोलकाता, पश्चिम बंगाल में
पिता का नामश्री देवेन्द्रनाथ टैगोर
माता का नामश्रीमती शारदा देवी
पत्नी का नाममृणालिनी देवी
संतानरथींद्रनाथ टैगोर, शमींद्रनाथ टैगोर, मधुरिलता देवी, मीरा देवी, रेणुका देवी
व्यवसायकवि, लेखक, कथाकार, संगीतकार, नाटककार निबन्धकार एवं चित्रकार
नागरिकताभारतीय
विशेष योगदानराष्ट्रगान के रचयिता
स्थापनाविश्व भारती विश्वविद्यालय
पुरस्कारनोबल पुरस्कार (सन् 1913 ई. में)
भाषाहिंदी, बांग्ला, अंग्रेजी
प्रमुख रचनाएंगीतांजलि, दूज का चांद, बलिदान, डाकघर, बागवान, गोरा, राजर्षि, राजा और रानी, भारत का राष्ट्रगान (जन-गण-मन) आदि।
हिंदी साहित्य में स्थानकथाकार, नाटककार, निबंधकार एवं कवि के रूप में महत्वपूर्ण स्थान
रवींद्रनाथ टैगोर की जीवनी

रवींद्रनाथ टैगोर (7 मई 1861 – 7 अगस्त 1941) एक भारतीय कवि, लेखक, गीतकार, संगीतकार, नाटककार, कथाकार, निबंधकार, दार्शनिक, शिक्षाविद् और सामाजिक सुधारक थे। इन्हें आधुनिक बंगाली साहित्य के पिता के रूप में माना जाता है और इन्हें बांग्ला और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कविता और परियोजना लिखने के लिए जाना जाता है। इन्होंने 1913 में नोबेल पुरस्कार जीता था, जिसे वे पहले भारतीय के रूप में इस सम्मान को प्राप्त करने वाले व्यक्ति थे।

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रवींद्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय

रवीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 07 मई, सन् 1861 ईस्वी को कलकत्ता (कोलकाता), पश्चिम बंगाल में हुआ था। इन्हें ‘गुरुदेव’ के नाम से भी जाना जाता है। टैगोर जी एक प्रतिष्ठित बंगाली ब्राह्मण परिवार से थे। इनके पिता का नाम देवेन्द्रनाथ टैगोर था जो एक दार्शनिक और धार्मिक सुधारक थे। तथा इनकी माता का नाम शारदा देवी था जो एक ग्रहणी थी। टैगोर जी अपने माता-पिता की 14 संतानों में सबसे छोटे थे। कम उम्र से ही इन्होंने साहित्य और कला में गहरी रुचि दिखाई।

रवींद्रनाथ टैगोर
रवींद्रनाथ टैगोर का जीवन परिचय

रवींद्रनाथ टैगोर जी की प्रारंभिक शिक्षा प्रतिष्ठित सेंट जेवियर स्कूल में हुई। 11 वर्ष तक की उम्र में उपनयन संस्कार के बाद ये अपने पिता देवेन्द्रनाथ जी के साथ हिमालय यात्रा पर निकले थे। सितम्बर, सन् 1877 ई. में ये अपने भाई के साथ इंग्लैंड चले गए। वहां इन्होंने अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन करते हुए पश्चिमी संगीत सीखा। इंग्लैंड से वापस लौटकर इन्होंने साहित्य के क्षेत्र में प्रवेश किया।

सन् 1914 ई. में कोलकाता विश्वविद्यालय द्वारा इन्हें ‘डॉक्टर’ की मानद उपाधि प्रदान की गई। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा भी इन्हें डी०-लिट्० की उपाधि दी गई। सन् 1913 ई. में इनकी कविता “गीतांजलि” के लिए इन्हें “नोबल पुरस्कार” से सम्मानित किया गया था। 07 अगस्त, सन् 1941 ईस्वी में इस महान् कवि डॉ रवींद्रनाथ टैगोर जी का 80 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया था।

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रवींद्रनाथ टैगोर का साहित्यिक परिचय

रविन्द्र नाथ टैगोर भारतीय हिंदी साहित्य में एक प्रसिद्ध कवि, देशभक्त तथा दार्शनिक थे। ये बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। इन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक तथा कविताओं की रचना की। इन्होंने अपनी स्वयं की कविताओं के लिए अत्यंत कर्णप्रिय संगीत का सृजन किया। ये हमारे देश के एक महान चित्रकार तथा शिक्षाविद् थे। सन् 1901 ई. में इन्होंने शान्ति-निकेतन में एक ललित कला स्कूल की स्थापना की, जिसने कालान्तर में विश्व भारती का रूप ग्रहण किया। यह एक ऐसा विश्वविद्यालय रहा जिसमें सारे विश्व की रुचियों तथा महान आदर्शों को स्थान मिला तथा भिन्न-भिन्न सभ्यताओं एवं परंपराओं के व्यक्तियों को एक साथ जीवन यापन करने की शिक्षा प्राप्त हो सकी।

रवींद्रनाथ टैगोर ने सर्वप्रथम अपनी मातृभाषा बंगला में अपनी कृतियों की रचना की। जब इन्होंने अपनी रचनाओं का अनुवाद अंग्रेजी में किया तो इन्हें सारे संसार में बहुत ख्याति प्राप्त हुई। सन् 1913 ई. में इन्हें नोबल पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। जो कि इनकी अमर कृति ‘गीतांजलि’ के लिए दिया गया था। गीतांजलि का अर्थ होता है गीतों की अंजली अथवा गीतों की भेंट। यह रचना इनकी कविताओं का मुक्त काव्य में अनुवाद है जो स्वयं टैगोर ने मौलिक बंगला से किया तथा यह प्रसिद्ध आयरिश कवि डब्ल्यू. बी. येट्स के प्राक्कथन के साथ प्रकाशित हुई। यह रचना भक्ति गीतों की है उन प्रार्थनाओं का संकलन है जो टैगोर ने परमपिता परमेश्वर के प्रति अर्पित की थी।

रवींद्रनाथ टैगोर का सामाजिक योगदान

ब्रिटिश सरकार द्वारा टैगोर जी को “सर” की उपाधि से सम्मानित किया गया, परंतु इन्होंने सन् 1919 ई. में जलियांवाला नरसंहार के प्रतिकार स्वरूप इस सम्मान का परित्याग कर दिया।
रवींद्रनाथ टैगोर की कविता गहन धार्मिक भावना, देशभक्ति और अपने देशवासियों के प्रति प्रेम से ओत-प्रोत है। टैगोर जी सारे संसार में अति प्रसिद्ध तथा सम्मानित भारतीयों में से एक हैं। हम इन्हें अत्यधिक सम्मान पूर्वक गुरुदेव कहकर संबोधित करते हैं। यह एक विचारक, अध्यापक तथा संगीतज्ञ रहे। इन्होंने अपने स्वयं के गीतों को संगीत दिया उनका गायन किया और अपने अनेक रंगकर्मी शिष्यों को शिक्षित करने के साथ ही अपने नाटकों में अभिनय भी किया। आज के संगीत जगत् में इनके रवीन्द्र संगीत को अद्वितीय स्थान प्राप्त है।

रवींद्रनाथ टैगोर एक समाजिक योद्धा के गहरे धार्मिक व्यक्ति थी लेकिन अपने धर्म को ‘मानवता का धर्म’ के नाम से वर्णित करना पसंद करते थे। यह पूर्ण रूप से एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। इन्होंने अपने शिष्यों के मस्तिष्क में सच्चाई का भाव भरा। और प्रकृति, संगीत तथा कविता के निकट संपर्क के माध्यम से इन्होंने स्वयं समाज में अपनी तथा शिष्यों की कल्पना शक्ति को सौंदर्य, अच्छाई तथा विस्तृत सहानुभूति के प्रति जागृत किया।

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रविंद्र नाथ टैगोर की प्रमुख रचनाएं

रवींद्रनाथ टैगोर की प्रमुख रचनाएं एवं कृतियां इस प्रकार से हैं- गीतांजलि, गितिमाल्य, पूर्वी प्रवाहिन, वन वाणी, महुआ, क्षणिका चोखेरवाली, परिशेष, The Religion of Man, Nationalism और शिशु भोलानाथ आदि। टैगोर जी ने लगभग 2000 से अधिक गीतों की रचना की है। इनके गीत बांग्ला और संस्कृति का अभिन्न अंग है।

रवीन्द्रनाथ टैगोर की कविताएं

  • भारत का राष्ट्रगान (जन-गण-मन)
  • दूज का चांद
  • बागवान
  • मानसी
  • सोनार तारी
  • गीतांजलि
  • गितिमय
  • बलक ।

रवीन्द्रनाथ टैगोर की कहानियां

  • हंगरी स्टोंस
  • काबुलीवाला
  • माई लॉर्ड
  • दि बेबी
  • नयनजोड़ के बाबू
  • भिखारिन
  • जिन्दा अथवा मुर्दा
  • अनधिकार प्रवेश
  • घर वापिसी
  • मास्टर साहब और पोस्टमास्टर ।

रवीन्द्रनाथ टैगोर के उपन्यास

  • गोरा
  • नाव दुर्घटना
  • दि होम एण्ड दी वर्ल्ड
  • आंख की किरकिरी
  • राजर्षि
  • चोखेर वाली ।

रवीन्द्रनाथ टैगोर के नाटक

  • पोस्ट ऑफिस
  • बलिदान
  • प्रकृति का प्रतिशोध
  • मुक्त धारा
  • नातिर-पूजा
  • चाण्डालिका
  • फाल्गुनी
  • वाल्मीकि प्रतिभा
  • राजा और रानी
  • रूद्रचण्द
  • विसर्जन
  • चित्रांगदा ।

रवीन्द्रनाथ टैगोर के आत्मजीवन चरित

  • मेरे बचपन के दिन ।

रवीन्द्रनाथ टैगोर के निबंध व भाषण

  • मानवता की आवाज ।

रवीन्द्रनाथ टैगोर की किताबें

  • गीतांजलि (सन् 1910 ई.)
  • गाने की पेशकश (सन् 1910 ई.)
  • माली (सन् 1913 ई.)
  • आवारा-पंक्षी (सन् 1916 ई.)
  • टैगोर की कहानियां (सन् 1918 ई.)
  • बंगाल की झलक (सन् 1921 ई.)
  • रचनात्मक एकता (सन् 1922 ई.)
  • शेशेर कविता (सन् 1929 ई.)
  • मनुष्य का धर्म (सन् 1931 ई.)
  • गीता-बितान (सन् 1932 ई.) आदि।

रवींद्रनाथ टैगोर की भाषा शैली

टैगोर जी की भाषा सहज, सरल, प्रवाहपूर्ण एवं प्रभावशाली है। यह अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे इसलिए इनकी रचनाओं में अनेक भाषाओं के शब्द देखने को मिलते हैं। विषय और प्रसंग के अनुरूप इन्होंने परिचयात्मक, विवेचनात्मक, आत्मकथात्मक, निबंधात्मक आदि शैलियां अपनायी है।

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रवींद्रनाथ टैगोर के पुरस्कार

  1. सन् 1913 ई. में टैगोर जी की कविता ‘गीतांजलि’ के लिए इन्हें ‘नोबल पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।
  2. सन् 1914 ई. में कोलकाता विश्वविद्यालय द्वारा इन्हें ‘डॉक्टर’ की मानद उपाधि प्रदान की गई।
  3. सन् 1915 ई. में ब्रिटिश सरकार द्वारा टैगोर जी को ‘सर’ (नाइटहुड) की उपाधि से सम्मानित किया गया, परंतु इन्होंने 1919 ई. में जलियांवाला बाग नरसंहार के प्रति इस सम्मान का परित्याग कर दिया था।
  4. रवींद्रनाथ टैगोर जी ने भारत और बांग्लादेश को उनकी सबसे बड़ी अमानत के रूप में राष्ट्रगान प्रदान किया, जो कि एक अमरता का प्रतीक है। इन्होंने भारत को ‘जन-गण-मन’ और बांग्लादेश को ‘अमार सोनार बांग्ला’ दिया।
  5. रवींद्रनाथ टैगोर जी अपने जीवन काल में तीन बार अल्बर्ट आइंस्टीन से मिलकर आ चुके थे वह इन्हें रब्बी टैगोर कहकर पुकारते थे।
  6. सन् 1940 ई. में रवींद्रनाथ टैगोर जी को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा डी०-लिट्० की उपाधि से भी सम्मानित किया गया था।

रवींद्रनाथ टैगोर का भारतीय कला में योगदान

साहित्य, संगीत और सामाजिक सुधार के साथ-साथ कला के क्षेत्र में भी रवींद्रनाथ टैगोर के योगदान ने इन्हें भारत और विदेश दोनों में बहुत सम्मान और प्रशंसा दिलाई। इनके कार्यों को उनकी कलात्मक प्रतिभा और मानवीय स्थिति में गहन अंतर्दृष्टि के लिए मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति पर टैगोर का प्रभाव और एक वैश्विक साहित्यकार के रूप में उनका प्रभाव आज भी महत्वपूर्ण है।

1901 में, टैगोर ने शांतिनिकेतन नामक एक प्रायोगिक स्कूल की स्थापना की, जो बाद में विश्व-भारती विश्वविद्यालय में विकसित हुआ। उनका लक्ष्य एक ऐसा शैक्षणिक संस्थान बनाना था, जो बौद्धिक और कलात्मक दोनों गतिविधियों के महत्व पर जोर देते हुए पश्चिमी और भारतीय परंपराओं का सर्वोत्तम संयोजन करे। टैगोर व्यक्तियों के समग्र विकास में विश्वास करते थे और रचनात्मकता, स्वतंत्रता और प्रकृति के साथ गहरे संबंध को प्रोत्साहित करते थे।

रवींद्रनाथ टैगोर का कलात्मक योगदान साहित्य से भी आगे तक फैला हुआ था। इन्होंने लगभग 2,000 से अधिक गीतों की रचना की, जिन्हें सामूहिक रूप से “रवीन्द्र संगीत” के नाम से जाना जाता है। ये गीत बंगाल में बेहद लोकप्रिय हैं और क्षेत्र के सांस्कृतिक ताने-बाने का अभिन्न अंग बन गए हैं। इन्होंने कई नाटक भी लिखे, जिनमें प्रसिद्ध “द पोस्ट ऑफिस” और “रेड ओलियंडर्स” शामिल हैं और उनकी पेंटिंग्स और चित्रों को कला जगत में पहचान मिली।

रवींद्रनाथ टैगोर का शिक्षा में योगदान

टैगोर के साहित्यिक योगदान के अलावा, ये एक सामाजिक सुधारक भी थे और इन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में नवीनीकरण के लिए कार्य किया। इन्होंने विश्वभर में अनेक विद्यालय और संस्थानों की स्थापना की, जिनमें शांतिनिकेतन (बांगलादेश के विश्वविद्यालय संगठन का एक भाग), विश्वभारती विद्यालय (भारत में) और ब्रत्त्य निकेतन (भारतीय महिला शिक्षा संस्थान) शामिल हैं।

टैगोर ने महिला शिक्षा को प्रोत्साहित किया और उन्होंने स्त्रियों के उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों की स्थापना की। उनका उद्देश्य था कि महिलाएं स्वतंत्र रूप से अपनी शिक्षा और करियर में प्रगति कर सकें। उन्होंने विवाह के लिए बाल विवाह और सती प्रथा के खिलाफ आवाज उठाया और नारी सम्मान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कार्य किया। टैगोर ने सामाजिक अंधविश्वास, जातिवाद और उपेक्षा के खिलाफ भी अपनी आवाज बुलंद की। इन्होंने अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़ों के अधिकारों की रक्षा की और सामाजिक उचितता के लिए संघर्ष किया।

टैगोर के बारे में यह भी महत्वपूर्ण है कि इन्होंने स्वदेशी आन्दोलन का समर्थन किया, जिसमें उनके बंगाली समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान था। वह ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय साम्राज्यवाद के विरोध में सक्रिय रहे और देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर काम किया।

रवींद्रनाथ टैगोर का साहित्य में स्थान

साहित्य, कला और शिक्षा में रवींद्रनाथ टैगोर के योगदान ने इन्हें न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर भी अपार सम्मान और पहचान दिलाई। इनके कार्यों का कई भाषाओं में अनुवाद किया गया है और वे दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करते रहे हैं। आज, इन्हें भारत में एक राष्ट्रीय कवि और सांस्कृतिक प्रतीक माना जाता है, और इनके जन्मदिन को रवीन्द्र जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो बंगाल में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम है। इन्हें बंगाली साहित्य का सबसे महान कवि और लेखक माना जाता है।

FAQs. रवींद्रनाथ टैगोर जी के जीवन से जुड़े प्रश्न उत्तर

1. रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म कब और कहां हुआ था?

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, सन् 1861 ईस्वी को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ था।

2. रवींद्रनाथ टैगोर के माता पिता का नाम क्या था?

रवींद्रनाथ टैगोर के पिता का नाम श्री देवेन्द्रनाथ टैगोर तथा माता का नाम श्रीमती शारदा देवी था।

3. रवींद्रनाथ टैगोर की मृत्यु कब और कहां हुई थी?

रवींद्रनाथ टैगोर की मृत्यु 7 अगस्त, सन् 1941 ई. में कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुई थी।

4. रवींद्रनाथ टैगोर को बचपन में किस नाम से बुलाते थे?

रवींद्रनाथ टैगोर को बचपन में प्यार से सब ‘रबी’ नाम से बुलाते थे।

5. विश्व भारती की स्थापना कब और किसने की?

सन् 1921 ई. में रवींद्रनाथ टैगोर ने पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन नगर में स्थित, विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।

6. जन गण मन के रचयिता कौन हैं?

रवींद्रनाथ टैगोर भारत के राष्ट्रगान (जन-गण-मन) के रचयिता हैं।

7. रवींद्रनाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार क्यों मिला?

कवि रवींद्रनाथ नाथ टैगोर ने सन् 1912 ई. में अपनी काव्य रचना गीतांजलि का अंग्रेजी में अनुवाद किया, तो इन्हें सारे संसार में बहुत ख्याति प्राप्त हुई। सन् 1913 ई. में इन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

8. रवींद्रनाथ टैगोर की प्रमुख रचनाएं कौन कौन सी हैं?

रवींद्रनाथ टैगोर की प्रमुख रचनाएं – गीतांजलि, भारत का राष्ट्रगान (जन-गण-मन), दूज का चांद, मानसी, सोनार तारी, माई लॉर्ड, नयनजोड़ के बाबू, जिन्दा अथवा मुर्दा, मास्टर साहब और पोस्टमास्टर, गोरा, दि होम एण्ड दी वर्ल्ड, राजर्षि, बलिदान, नातिर-पूजा, चाण्डालिका, राजा और रानी तथा चित्रांगदा आदि।

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