रामनरेश त्रिपाठी: जीवन परिचय, साहित्यिक, रचनाएं, भाषा शैली व साहित्य में स्थान

पण्डित रामनरेश त्रिपाठी बहुमुखी प्रतिभा के सम्पन्न साहित्यकार एवं उच्चकोटि के लेखक, कवि और पत्रकार थे। राष्ट्रीयता की भावनाएँ इनके काव्य का मूलाधार है, तो चलिए आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको राम नरेश त्रिपाठी जी के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे, ताकि आप परीक्षाओं में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकें।

तो दोस्तों, आज के इस लेख में हमने “रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय” (Ram Naresh Tripathi biography in Hindi) के बारे में बताया है। इसमें हमने राम नरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय भाव पक्ष कला पक्ष अथवा साहित्यिक परिचय, रचनाएं एवं कृतियां, भाषा शैली, काव्यगत विशेषताएं एवं हिंदी साहित्य में स्थान और रामनरेश त्रिपाठी किस युग के कवि हैं को भी विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाया है।

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इसके अलावा, इसमें हमने रामनरेश त्रिपाठी जी के जीवन से जुड़े उन सभी प्रश्नों के उत्तर दिए हैं जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। यदि आप भी त्रिपाठी जी के जीवन से जुड़े उन सभी प्रश्नों के उत्तर के बारे में जानना चाहते हैं तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें।

रामनरेश त्रिपाठी का संक्षिप्त परिचय

विद्यार्थी ध्यान दें कि इसमें हमने राम नरेश त्रिपाठी जी की जीवनी के बारे में संक्षेप में एक सारणी के माध्यम से समझाया है।
रामनरेश त्रिपाठी की जीवनी –

पूरा नामपण्डित राम नरेश त्रिपाठी
जन्म तिथि4 मार्च, सन् 1889 ईस्वी में
जन्म स्थानउत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के कोईरीपुर नामक ग्राम में
मृत्यु तिथि16 जनवरी, सन् 1962 ईस्वी में
मृत्यु स्थानप्रयागराज, उत्तर प्रदेश में
पिता का नामपण्डित रामदत्त त्रिपाठी
माता का नामज्ञात नहीं
पैशालेखक, कवि, पत्रकार एवं स्वतन्त्रतासेनानी
साहित्य कलाआधुनिक काल (द्विवेदी युग)
आंदोलनछायावादी कवि
लेखन विधाकाव्य, कहानी, नाटक, निबंध, आलोचना तथा लोकसाहित्य आदि।
भाषासरल, सरस एवं परिष्कृत खड़ीबोली
शैलीवर्णनात्मक और उपदेशात्मक
प्रमुख रचनाएंपथिक, मिलन, स्वप्न, मानसी, ग्राम्यगीत, गोस्वामी तुलसीदास और उनकी कविता आदि।
पुरस्कार‘स्वप्न’ पर हिंदुस्तान अकादमी पुरस्कार
साहित्य में स्थानराष्ट्रीय भावों के उन्नायक के रूप में हिन्दी जगत् में त्रिपाठी जी अपना विशेष स्थान रखते हैं।

प्रस्तावना— रामनरेश त्रिपाठी (Ram Naresh Tripathi) (1889-1962) बहुमुखी प्रतिभा के सम्पन्न साहित्यकार हैं। द्विवेदी युग का आदर्शवादी दृष्टिकोण तथा छायावादी कविता का सूक्ष्म सौन्दर्य इनकी रचनाओं में देखने को मिलता है।

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रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय

जीवन-परिचय— पं० रामनरेश त्रिपाठी का जन्म 04 मार्च, सन् 1889 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के अन्तर्गत कोईरीपुर नामक ग्राम में एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम पं० रामदत्त त्रिपाठी तथा माता का नाम हमें ज्ञात नहीं है। त्रिपाठी जी की आरम्भिक शिक्षा केवल नवीं कक्षा तक स्कूल में हुई किन्तु स्कूल में पढ़ने के पश्चात इनकी पढ़ाई छूट गयी। इसके पश्चात् त्रिपाठी जी ने स्वतन्त्र रूप से अध्ययन किया तथा साहित्य-साधना को ही इन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया था।

रामनरेश त्रिपाठी
रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय

रामनरेश त्रिपाठी जी ने लोकगीतों का संग्रह करके उनके साहित्यिक सौष्ठव तथा महत्त्व की ओर विद्वानों का ध्यान आकृष्ट किया। साहित्य की विविध विधाओं पर लेखनी चलाकर इन्होंने माँ भारती की उल्लेखनीय सेवा की है। 16 जनवरी, सन् 1962 ईस्वी को इनका स्वर्गवास हो गया।

रामनरेश त्रिपाठी का साहित्यिक परिचय

साहित्यिक-परिचय— त्रिपाठी जी उच्चकोटि के लेखक, कवि एवं पत्रकार थे। राष्ट्रीयता की भावनाएँ इनके काव्य का मूलाधार है। इनका रोम-रोम भारतीयता से ओत-प्रोत था। इनकी रचनाओं में प्रकृति प्रेम, भक्ति एवं देशप्रेम की त्रिवेणी प्रवाहित है। चरित्र चित्रण की स्वाभाविकता एवं प्रकृति-चित्रण में इन्हें असाधारण सफलता मिली है।

रामनरेश त्रिपाठी जी मननशील, विद्वान तथा परिश्रमी थे। काव्य, कहानी, नाटक, निबन्ध, आलोचना तथा लोकसाहित्य आदि विषयों पर इनका पूर्ण अधिकार था। त्रिपाठी जी आदर्शवादी कवि थे। इनकी रचनाओं में नवीन ‘आदर्श’ और नवयुग का संकेत है। इनके द्वारा रचित ‘पथिक’ और ‘मिलन’ नामक खण्डकाव्य अत्यन्त लोकप्रिय हुए। इनकी रचनाओं की विशेषता यह है कि उनमें राष्ट्र प्रेम तथा मानव सेवा की उत्कृष्ट भावनाएँ बड़े सुन्दर ढंग से चित्रित हुई हैं। इसके अतिरिक्त भारतवर्ष की प्राकृतिक सुषमा और पवित्र प्रेम के सुन्दर चित्र भी इन्होंने अपनी कविताओं में चित्रित किए हैं।

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रामनरेश त्रिपाठी की प्रमुख रचनाएं

प्रमुख-कृतियाँ— त्रिपाठी जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार थे। काव्य, कहानी, नाटक, निबन्ध, आलोचना तथा लोक साहित्य आदि विषयों पर इनका समुचित अधिकार था।

इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं— ‘पथिक’, ‘मिलन’ और ‘स्वप्न’ (खण्डकाव्य), ‘मानसी’ (कविता संग्रह), ‘कविता-कौमुदी’ और ‘ग्राम्य-गीत’ (सम्पादित), ‘गोस्वामी तुलसीदास और उनकी कविता’ (आलोचना ) आदि।

रामनरेश त्रिपाठी की काव्यगत विशेषताएं

काव्यगत-विशेषताएँ— त्रिपाठी जी साहित्य में आदर्शों को विशेष महत्त्व देते थे। इनके साहित्य में जहाँ एक ओर नवयुग के संकेत मिलते हैं, वहीं आदर्शों का भी पूर्ण समावेश है। गन्होंने अपनी रचनाओं में राष्ट्र-प्रेम की भावना को विशेष महत्त्वपूर्ण स्थान दिया है। यथा-

देश प्रेम वह पुण्य क्षेत्र है, अमल-असीम त्याग से विलसित।
आत्मा के विकास से जिसमें, मनुष्यता होती है विकसित।।

इनकी कविताओं में हमारे देश की प्राकृतिक सुन्दरता का बड़ा ही सजीव चित्रण हुआ है। सूर, तुलसी की भाँति अपने कल्याण के लिए इनका भी एकमात्र भरोसा भगवान पर ही है। कबीर की भाँति त्रिपाठी जी भी अपने ईश्वर को दीन-जनों की भूख-प्यास में देखते हैं–

ना मन्दिर में ना मस्जिद में, ना गिरजे के आस-पास में।
खोज ले कोई राम मिलेंगे, दीन जनों की भूख-प्यास में ॥

रामनरेश त्रिपाठी की भाषा शैली

भाषा-शैली— त्रिपाठी जी की भाषा सरस एवं सरल खड़ी बोली है। उसमें माधुर्य और ओज गुण की प्रधानता है। संस्कृत के तत्सम शब्दों तथा समास सामासिक का भाषा में आधिक्य है। शैली में स्वाभाविकता और संगीतात्मकता है। इनकी शैली उपदेशात्मक और वर्णनात्मक है। इन्होंने सभी रसों का प्रयोग किया है। किन्तु शृंगार, शांत और करुण रस की प्रधानता है। छन्द बन्धन आपको स्वीकार नहीं है। प्राचीन और नवीन दोनों प्रकार के छन्दों में आपने काव्य रचना की है और अनुप्रास, रूपक, उपमा, उत्प्रेक्षा आदि अलंकारों का स्वाभाविक रूप से प्रयोग किया है।

रामनरेश त्रिपाठी का साहित्य में स्थान

साहित्य में स्थान— खड़ी बोली के कवियों में त्रिपाठी जी का प्रमुख स्थान है। राष्ट्रीय भावों के उन्नायक के रूप में हिन्दी जगत् में ये अपना विशेष स्थान रखते हैं। आचार्य शुक्ल के शब्दों में- ‘स्वदेश भक्ति की जो भावना भारतेन्दु के समय से चली आती थी, उसे सुन्द कल्पना द्वारा रमणीय और आकर्षक रूप त्रिपाठी जी ने ही प्रदान किया।’

FAQs. रामनरेश त्रिपाठी जी के जीवन से जुड़े प्रश्न उत्तर

1. राम नरेश त्रिपाठी जी का जन्म कब हुआ था?

पं० रामनरेश त्रिपाठी का जन्म 04 मार्च, सन् 1889 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के निकट कोईरीपुर नामक ग्राम में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।

2. मानसी के लेखक कौन है?

रामनरेश त्रिपाठी जी मानसी रचना के लेखक हैं।

3. रामनरेश त्रिपाठी की रचनाएं कौन कौन सी है?

रामनरेश त्रिपाठी जी की प्रमुख रचनाएं- पथिक, मिलन, स्वप्न, मानसी, ग्राम्यगीत, कविता-कौमुदी, गोस्वामी तुलसीदास और उनकी कविता आदि।

4. रामनरेश त्रिपाठी द्वारा लिखित खंडकाव्य कौन कौन से हैं?

पं. रामनरेश त्रिपाठी जी द्वारा रचित खंडकाव्य- (1) पथिक, (2) स्वप्न और (3) मिलन आदि।

5. राम नरेश त्रिपाठी की मृत्यु कब हुई थी?

रामनरेश त्रिपाठी जी की मृत्यु 16 जनवरी, सन् 1962 ईस्वी को प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में हुई थी।

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