तरल माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंग का वेग, गैसों में ध्वनि का वेग | लाप्लास संशोधन क्या है

तरल माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंगों का वेग

जब कोई समतल प्रगामी अनुदैर्ध्य तरंग किसी तरल या गैस माध्यम में चलती है। तो माध्यम के कण तरंग के संचरण की दिशा में सरल आवर्त गति करते हैं। इन कणों के कम्पनों की कला निरन्तर बदलती रहती है। तथा कणों के मध्य दूरी इस प्रकार परिवर्तित होती है। कि कण एक एकांतर क्रम से संपीडित व विरलित होते हैं। तथा माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंग सम्पीडन व विरलन के रूप में संचरित होती है। जिससे माध्यम के प्रत्येक कण का दाब बदलता जाता है। तथा इस तरंग वेग को “तरल या गैस माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंगों का वेग” कहते हैं।

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तरल माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंग का वेग
तरल माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंग का वेग

माना x-अक्ष के अनुदिश एक प्रगामी अनुदैर्ध्य तरंग गति कर रही है। तथा x-अक्ष के अनुदिश तरल या गैस के एक बेलनाकार स्तम्भ की कल्पना करते हैं। जिसका अनुप्रस्थ क्षेत्रफल ‘α’ (एल्फा) है।
माना दो समकोणिक तल M व N सन्तुलन की स्थिति में बहुत पास – पास स्थित है। तथा मूल बिंदु से इनकी दूरियां क्रमशः x व x + δx है। तरंग चलने पर किसी क्षण तल M के कण y-अक्ष दूरी से विस्थापित होकर M’ पर आ जाती है। तथा तल N के कण y + δy दूरी से विस्थापित होकर N’ पर पहुंच जाते हैं। यदि विस्थापन के परिवर्तन कि दर dy/dx है, तो –
y + δy = y + ( \frac{dy}{dx} ). δx

बेलन के MN भाग का प्रारम्भिक आयतन
= α (MN) = α . δx

इसका अन्तिम आयतन
= α (M’N’) = α (δx + δy)

= α [δx + ( \frac{dy}{dx} . δx)]

इसलिए आयतन में परिवर्तन
= α ( \frac{dy}{dx} ) δx

अतः आयतन विकृति
= \frac{α \frac{dy}{dx} δx}{α . δx} = \frac{dy}{dx} ….(1)

यदि तरल या गैसीय माध्यम का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक ‘E’ हो, तो
E = आयतन प्रतिबल/आयतन विकृति
E = दाब में कमी/आयतन विकृति

E = \frac{- p}{dy/dx}

इसलिए, p = – E \frac{dy}{dx} …..(2)

यहां (-) चिन्ह दर्शाता है कि दाब के कम होने पर आयतन विकृति धनात्मक होती है।
तथा यदि समतल तरंगों के समीकरण y = a sin \frac{2π}{λ} (vt – x) से,

\frac{dy}{dx} = – \frac{2πa}{λ} cos \frac{2π}{λ} (vt – x)

इसलिए, p = – E \frac{dy}{dx}
या p = E . \frac{2πa}{λ} cos \frac{2π}{λ} (vt – x)
या p = p0 cos \frac{2π}{λ} (vt – x) ….(3)

यहां v तरंग वेग तथा a तरंग का आयाम है। तथा राशि p0 = \frac{2πaE}{λ} दाब आयाम कहलाती है।

कण का वेग, \frac{dy}{dt} = ( \frac{2πva}{λ} )cos \frac{2π}{λ} (vt – x)
{चूंकि \frac{dy}{dt} = y }

दाब में परिवर्तन, p = \frac{Ey}{v} ….(4)

अर्थात् यदि दाब में परिवर्तन की दर \frac{dp}{dx} है, तो अल्पांश M’N’ के सिरों के बीच दाबान्तर होगा

δp = ( \frac{dp}{dx} ) δx

अतः इस अल्पांश पर बल = δp × α( \frac{dp}{dx} )α δx

= α δx \frac{d}{dx} (- E \frac{dy}{dx} )

= – α δxE \frac{d^2y}{dx^2} ….(5)

अतः यदि गैस का घनत्व ρ है, तो प्रयुक्त किए गए अल्पांश का द्रव्यमान = α δx ρ चूंकि अल्पांश का बल N’M’ दिशा में है। अतः इस बल के कारण कणों का त्वरण – \frac{d^2y}{dx^2} होगा ।
अब न्यूटन के गति के नियम से,

– α δx ρ \frac{d^2y}{dt^2} = – α δx E \frac{d^2y}{dx^2}

\frac{d^2y}{dt^2} = \frac{E}{ρ} \frac{d^2y}{dx^2} ….(6)

अतः यही तरल या गैस में होकर जाने वाली तरंगों के लिए अवकल समीकरण है। इसकी तुलना तरंग गति के मानक अवकल समीकरण \frac{d^2y}{dt^2} = v2 \frac{d^2y}{dx^2} से करने पर,

v2 = \frac{E}{ρ}

या \footnotesize \boxed{v = \sqrt { \frac{E}{ρ}} } …..(7)

“यही तरल या गैस माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंगों के वेग का समीकरण कहलाता है।” इस सूत्र को “न्यूटन का सूत्र” भी कहते हैं।

गैसों में ध्वनि का वेग

न्यूटन के अनुसार, ध्वनि के चलने में किसी गैसीय माध्यम में उत्पन्न हुई सघनता व विरलता इतने धीरे-धीरे होती है। कि सघनता में उत्पन ऊष्मा बाहर चली जाती है। तथा विरलता में ऊष्मा बाहर से अंदर आ जाती है। तथा प्रत्येक दशा में माध्यम का ताप स्थिर रहता है। अतः न्यूटन ने इस परिवर्तन को समतापीय परिवर्तन माना तथा समतापीय परिवर्तन के लिए गैस की आयतन प्रत्यास्थता ET का मान गैस के प्रारम्भिक दाब p के बराबर होती है,

अतः E = P

अर्थात् \footnotesize \boxed{ v = \sqrt{ \frac{P}{ρ}} } …(8)

सामान्य दाब तथा ताप पर वेग
v = \sqrt{ \frac{96 × 13.6 × 980}{0.001293}}

v = 280 मीटर/सेकण्ड के लगभग ।

परंतु प्रयोगों द्वारा प्राप्त किया गया कि ध्वनि का वेग 332 मीटर/सेकण्ड के लगभग है। इसलिए न्यूटन के सूत्र में कोई त्रुटि है। अतः न्यूटन द्वारा प्रतिपादित सूत्र कुछ त्रुटी निहित है। इस त्रुटि का संशोधन लाप्लास ने किया।

लाप्लास संशोधन (Laplace’s Correction in Hindi)

लाप्लास के अनुसार, जब ध्वनि तरंगे हवा में चलती है। तब ताप स्थिर नहीं रहता । माध्यम में सम्पीडन व विरलन इतनी तेजी से होते है। की वायु के किसी पर्त की उष्मा उतनी जल्दी न उससे बाहर जा सकती है। और न ही बाहर से अन्दर आ सकती है। अतः लाप्लास के अनुसार, सूत्र (7) में E का मान रुद्धोष्म अवस्था में लेना चाहिए।
अतः रुध्दोष्म अवस्था में,

E = γ . P

यहां γ = \frac{C_p}{C_v} = 1.41 लगभग (वायु के लिए)
अतः लाप्लास सूत्र से ध्वनि का वेग

\footnotesize \boxed{ v = \sqrt{ \frac{γP}{ρ}} }

v = 280 × \sqrt{1.41}
v = 332.5 मीटर प्रति सेकण्ड ।

अतः N.T.P. पर उपयुक्त सूत्र से वायु में ध्वनि का वेग 332.5 मीटर/सेकण्ड आता है। जो कि प्रयोगिट मान के बराबर है। अतः “लाप्लास संशोधन की पुष्टि होती है।”

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 किसी गैस में अनुदैर्ध्य तरंगों के वेग के लिए सूत्र की स्थापना करो तथा लाप्लास के संशोधन की व्याख्या कीजिए?
Q. 2 किसी तरल माध्यम अनुदैर्ध्य तरंग के वेग के लिए सूत्र स्थापित कीजिए? अब वायु या गैसीय माध्यम में ध्वनि के वेग के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए? लाप्लास के संशोधन की व्याख्या कीजिए?
Q. 3 लाप्लास का संशोधन क्या है? तथा गैसीय माध्यम में ध्वनि की चाल को समझाइए?

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