गैसों के अणुभार और वर्ग माध्य मूल चाल में संबंध स्थापित कीजिए – Hindi Topper

अणुभार और वर्ग माध्य मूल चाल में संबंध

माना यदि 1 ग्राम-अणु गैस का घनत्व होता है।
ρ = \frac{M}{V} ….(1)

जहां M गैस का अणुभार (1 ग्राम-अणु, तथा गैस का ग्राम में द्रव्यमान है) तथा V गैस का आयतन है।
अतः 1 ग्राम-अणु गैस के लिए आदर्श गैस के समीकरण से,
PV = RT ….(2)

तथा समीकरण (2) को (1) से भाग देने पर,
\frac{P}{ρ} = \frac{RT}{M} ….(3)

गैसों के अणुगति सिद्धांत के अनुसार,
P = \frac{1}{3} ρ \overline{c^2}
इसलिए,
वर्ग-माध्य-मूल-चाल crms = \sqrt{ \overline{c^2}} = \sqrt{ \frac{3P}{ρ}} …(4)

अतः इसमें समीकरण (3) से \frac{P}{ρ} = \frac{RT}{M} का मान समीकरण (4) में रखने पर,
crms = \sqrt{ \frac{3RT}{M}} ……(5)

अतः समीकरण से स्पष्ट है कि ” किसी आदर्श गैस के अणुओं की वर्ग माध्य मूल चाल उसके अणुभार के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।”
परंतु यदि M = mN, जहां N गैस के 1 ग्राम अणु में अणुओं की संख्या है। अर्थात् आवोगाद्रो संख्या है।
अतः समीकरण (5) में M = mN रखने पर,
crms = \sqrt{ \frac{3RT}{mN}}
या
crms = \sqrt{ \frac{3kT}{m}} …(6)

{चूंकि \frac{R}{N} = k, वोल्टेजमैन नियतांक हैं।} अर्थात् यदि किसी ताप T पर हम लिख सकते हैं।
\footnotesize \boxed{ c_{rms} ∝ \sqrt{ \frac{1}{m}}} …(7)

अतः अब यदि दो गैसों की वर्ग-माध्य-मूल-चालें c1rms व c2rms है, तथा यहऊ m1 व m2 दोनों गैसों के अणुओं के द्रव्यमान हैं।, अतः
\frac{c_{1rms}}{c_{2rms}} = \sqrt{ \frac{m_2}{m_1}} …(8)

अतः स्पष्ट है कि ” एक ही ताप पर दो भिन्न-भिन्न गैसों के अणुओं की वर्ग माध्य मूल चालों का अनुपात उसके द्रव्यमानों के व्युत्क्रम अनुपात के वर्गमूल के समान या बराबर होता है।”

और पढ़ें… वर्ग माध्य मूल चाल क्या है

समस्थानिकों के उपर्युक्त संबंध की उपयोगिता

माना यदि किसी बर्तन की रन्ध्रमय दीवारों में कोई दो विभिन्न गैसों के विसरण के संबंध में समीकरण (8) से अधिक उपयोगी सूचना प्रदान होती है। तथा भारी गैस (कम crms) की तुलना में हल्की गैस (अधिक crms) शीघ्रता से विसरित होती है। अतः किसी पदार्थ में से हल्के समस्थानिकों को अलग करने में विसरण का उपयोग किया जा सकता है।
प्राकृतिक यूरेनियम में हल्का समस्थानिक U235 (0.7 %) तथा भारी समस्थानिक U238 (99.3 %) होता है। तथा परमाणु बम के लिए U235 उपयोगी होता है। क्योंकि इसका नाभिक अपेक्षाकृत सफलता से विखण्डित किया जा सकता है। प्राकृतिक यूरेनियम में से U235 अलग करने के लिए, यूरेनियम के गैसीय योगिक को एक बर्तन की रन्ध्रमय दीवारों से विसरित कराया जाता है। प्रारंभ में प्राप्त विसरित गैस में U235 अधिक होता है। इस प्रक्रम को कई बार दोहराकर U235 की प्रतिशतता काफी बढ़ा ली जाती है। इस संवर्धित (Enriched) यूरेनियम का उपयोग परमाणु बम बनाने में होता है। अतः इस उपर्युक्त संबंध से स्पष्ट होता है। ‘कि संवर्धित यूरेनियम को प्रथम परमाणु बम बनाने में सहायता मिली।’ अर्थात् इसकी सहायता से परमाणु बम का निर्माण किया जाता है।

Note – Important question –

Question – साधारण वायु के सापेक्ष उस वायु में जो किसी निर्वात में लीक कर जाती है। हाइड्रोजन तथा हीलियम की मात्रा अधिक होती है। अणुगति सिद्धांत के आधार पर इसे किस प्रकार समझाया जा सकता है।

Answer – वायु में पाई जाने वाली नाइट्रोजन, ऑक्सीजन आदि गैसों की तुलना में हाइड्रोजन व हीलियम बहुत हल्की होती है। अतः H2 व He की वर्ग – माध्य – मूल – चालें अधिक होती है। जिससे यह जल्दी लीक हो जाती है।

सम्बन्धित प्रश्न
Q.1 सिद्ध कीजिए कि आदर्श गैस की वर्ग माध्य मूल चाल उसके अणुभार के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है। इस संबंध से किस प्रकार प्रथम परमाणु बम की रचना में सहायता मिली ?
Q.2 गैस के अणुभार और वर्ग-माध्य-मूल-चाल में क्या संबंध है? सिद्ध करो ?

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