वास्तविक गैसों के व्यवहार से विचलन की व्याख्या | व्युत्क्रमण और बाॅयल ताप में संबंध

वास्तविक गैसों की व्याख्या

अणुगति सिद्धांत में गैस के अणुओं का आकार अत्यंत सूक्ष्म तथा इनके बीच आकर्षण बल शून्य माना गया है। परंतु ऐसा होने पर सभी गैसें बॉयल के नियम का पूर्णतः पालन करती हैं। तथा वास्तविक गैसों के लिए यह सच नहीं है। क्योंकि इन गैसों के अणुओं का एक परिमित आकार होता है। तथा अणु एक-दूसरे को आकर्षित भी करते हैं। इसलिए ये गैसें बॉयल के नियम का पूर्णतः पालन नहीं करती हैं।
अपने परिमित आकारों के कारण गैसों के अणु स्वयं कुछ आयतन घेरते हैं। किसी भी दाब P पर गैस का प्रेक्षित आयतन V गैस के उस आयतन से अधिक पाया जाता है। जिसमें गैस के अणु गति करते रहते हैं। इसलिए PV का ‘प्रेक्षित मान इसके वास्तविक मान से अधिक आता है।’ इसी प्रकार किसी गैस में जब दाब P बढ़ाया जाता है, तो उसका आयतन घटने लगता है। और सभी अणु समीप आने लगते हैं। चूंकि अणुओं के बीच आकर्षण-बल होता है। अतः जैसे-जैसे अणु समीप आते हैं। बल और भी बढ़ता रहता है। तथा अणुओं को समीप लाने में सहायता करता है, इसका अर्थ है कि किसी दी गई दाब-वृद्धि के कारण आयतन में होने वाली कमी, आण्विक-आकर्षण बल की अनुपस्थिति में होने वाली कमी से अधिक होगी। इसलिए दाब P के बढ़ने पर PV का गुणनफल स्थिर रहने की बजाय घटना शुरू हो जाता है।

और पढ़ें.. आदर्श गैस क्या है, आदर्श गैस और वास्तविक गैस में अंतर

बॉयल ताप से नीचे

यदि बॉयल ताप से नीचे गुणनफल PV का मान न्यूनतम होने के पश्चात दाब P के साथ-साथ बढ़ता जाता है। इसका मुख्य कारण है, कि कम दाबों पर गैस का आयतन अधिक हो जाता है। जिससे अणुओं के परिमित आकार का प्रभाव कम होने लगता है। तथा आण्विक-आकर्षण के प्रभाव के कारण PV का मान दाब P के बढ़ने पर कम होकर न्यूनतम हो जाता है। परंतु दाब के अधिक हो जाने पर अणुओं का आकार भी अपना प्रभाव डालता है। और आण्विक-आकर्षण के प्रभाव को दबा देता है।

बॉयल ताप पर

यदि जब बाॅयल ताप पर गैस बाॅयल के नियम का पालन करती है। अर्थात् वक्र में दाब P का काफी परास तक गुणनफल PV स्थिर बना रहता है। अतः इसका कारण है, कि इस ताप पर दोनों प्रभाव (आण्विक-आकर्षण तथा परिमित आकार) PV पर विपरीत प्रभाव की वजह से एक-दूसरे को निष्फल कर देते हैं।

बॉयल ताप से ऊपर

यदि इस ताप से ऊपर, अणुओं के परिमित आकार का प्रभाव सभी दाबों पर पर्याप्त रूप से रहता है। तथा शुरू से ही PV का मान दाब P के साथ-साथ बढ़ता जाता है। क्योंकि ताप अधिक होने पर अणुओं की औसत गति तेज हो जाती है। जिससे आण्विक-आकर्षण का प्रभाव कम तथा अणुओं द्वारा घेरे गए आयतन का प्रभावी मान अधिक हो जाता है।

Note – दर्शाइए कि जूल-थॉमसन प्रभाव में व्युत्क्रमण ताप, बाॅयल ताप का दोगुना होता है?

व्युत्क्रमण ताप तथा बॉयल ताप में संबंध

इस संबंध के बारे में हमने पिछले अध्याय में पड़ा होगा। तथा इसमें हम इसके बारे में संक्षेप में वर्णन करेंगे।
जैसा कि हम जानते हैं, कि जूल-थॉमसन प्रभाव में व्युत्क्रमण ताप –
TM = \frac{2a}{R.b} …..(1)
तथा बाॅयल ताप –
TN = \frac{a}{R.b} …..(2)

अतः समीकरण (1) ब (2) से भाग करने पर,

\frac{T_M}{T_N} = \frac{2a}{R.b} × \frac{R.b}{a}
या \frac{T_M}{T_N} = 2
या \footnotesize \boxed{ T_M = 2 . T_N } …(3)

अर्थात् समीकरण (3) से स्पष्ट है कि “जूल-थॉमसन प्रभाव में व्युक्रमण ताप, बॉयल ताप का दोगुना होता है।”

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 अणुगति सिद्धांत के आधार पर वास्तविक गैसों के व्यवहार को समझाइए ?
Q. 2 वास्तविक गैसों के व्यवहार से विचलन को अणुगति सिद्धांत के द्वारा सिद्ध कीजिए ?
Q. 3 सिद्ध कीजिए कि जूल-थॉमसन अभाव में व्युक्रमण ताप, बॉयल ताप का दोगुना होता है ?
Q. 4 बॉयल ताप और व्युत्क्रमण ताप में संबंध लिखिए? तथा सिद्ध कीजिए कि जूल-थॉमसन प्रभाव में व्युक्रमण ताप, बॉयल ताप का दोगुना क्यों होता है?

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