संरक्षी तथा असंरक्षी बलों में अन्तर, परिभाषा, उदाहरण | Conservative and Non-conservative forces in Hindi

संरक्षी बल क्या है

“माना वह बल जिसके कारण किसी वस्तु या कण को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता तो बल द्वारा किया गया, कार्य कण के पथ पर निर्भर नहीं करता हैं, तो इसे संरक्षी बल (Conservative forces in Hindi) कहते हैं।” अर्थात् किसी वस्तु या कण पर संरक्षी बल द्वारा किया गया कार्य कण के प्रारंभिक व अन्तिम स्थितियों पर ही निर्भर करता हैं। उदाहरण – रेखीय प्रत्यानयन बल, गुरुत्वाकर्षण बल तथा विद्युत् स्थैतिक बल संरक्षी बल के उदाहरण है।

माना एक कण बल F द्वारा M से N बिन्दु तक तीन स्वेच्छ पथ 1, 2, 3 द्वारा ले जाया जाता है। जैसे कि चित्र में दिखाया गया है।

संरक्षी बल
संरक्षी बल

माना यदि बल \overrightarrow{F} संरक्षी है। तो कण को प्रत्येक पथ द्वारा बिंदु M से N तक ले जाने में किया गया कार्य बराबर होना चाहिए।
अतः संरक्षी बल के लिए,
WM-N = \int^N_M \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} = \int^N_M \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} = …, …(1)

तो वह स्थान जिसमें कण संरक्षी बल का अनुभव करता है, संरक्षी बल का क्षेत्र कहलाता है।

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असंरक्षी बल क्या है

यदि किसी वस्तु को एक अवस्था से दूसरी अवस्था में ले जाना हो, तो ऐसे बलों के विरुद्ध बाह्य कारक को सदैव कार्य करने की आवश्यकता होती है। साथ ही साथ इन बलों के विरुद्ध कृत कार्य किसी भी स्थिति में पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता। तो ऐसे बलों को असंरक्षी बल कहते हैं। अर्थात्
दूसरे शब्दों में, यदि कार्य बिन्दुओं के बीच पथ पर निर्भर करता है, तो वह “असंरक्षी बल (Non-conservative force in Hindi)” कहलाता है। अर्थात् असंरक्षी बल में गतिज ऊर्जा में भी परिवर्तन होता है।
उदाहरण – घर्षण, श्यान तथा अन्य वेग पर निर्भर बलों की प्रकृति असंरक्षी होती है।

संरक्षी बल के गुण

  • संरक्षी बल द्वारा किया गया कार्य कण द्वारा तय किए गए पथ पर निर्भर नहीं करता। परंतु पथ के प्रारंभिक तथा अंतिम बिंदु पर निर्भर करता है जैसा कि पहले बताया जा चुका हैं।
  • संरक्षी बल द्वारा किसी बन्द परिपथ में किया गया कार्य शुन्य होता हैं।

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संरक्षी बल द्वारा किया गया कार्य

माना कण का बिंदु M से N तक विस्थापन मार्ग MPN व MQN द्वारा संरक्षी बल द्वारा किया जाता है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

संरक्षी बल के लिए
WMPN = WMQN
\int_{MPN} \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} = \int_{MQN} \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} ….(1)
किसी बन्द पथ में संरक्षी बल द्वारा किया गया कार्य होता हैं,
W = \oint \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} = \int_{MPN} \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} + \int_{MQN} \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r}

संरक्षी बल द्वारा किया गया कार्य

तथा
W = \int_{MPN} \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} \int_{MQN} \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} …….(2)

समीकरण (1) व (2) से,

\footnotesize \boxed{ W = 0 }

अतः स्पष्ट है कि” किसी संरक्षी बल द्वारा एक बन्द पथ के अनुदिश कृत कार्य शुन्य होता हैं।”

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संरक्षी तथा असंरक्षी बलों में अंतर

संरक्षी बलअसंरक्षी बल
1जब किसी कण को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में कार्य किया जाता है तो कार्य पथ की लंबाई पर निर्भर नहीं करता है।जब किसी कण को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में कार्य किया जाता है तो कार्य पथ पर निर्भर करता है।
जैसे – घर्षण बल।
2संरक्षी बल के प्रभाव में किया गया कार्य प्रारंभिक व अंतिम स्थितियों में स्थितिज ऊर्जाओं का अंतर बराबर या समान होता है।असंरक्षी बल के प्रभाव में किया गया कार्य प्रारंभिक व अंतिम स्थितिओं में स्थितिज ऊर्जाओं का अंतर के बराबर नहीं होता है।
3संरक्षी बल के द्वारा एक बन्द पथ के अनुदिश कण पर किया गया कार्य शून्य होता है।असंरक्षी बल के अंतर्गत एक बंद परिपथ के अनुदिश किसी कण पर किया गया कार्य शून्य नहीं होता है।
4कण की यांत्रिक ऊर्जाओं का योग स्थिर रहता है।कण की यांत्रिक ऊर्जाओं का योग स्थिर नहीं रहता है।

Important Questions –

Q.1 क्या लॉरेन्ज बल संरक्षी बल होता है?

लॉरेंज बल वेग पर निर्भर होने पर भी संरक्षी बल ही होता है। क्योंकि चुम्बकीय क्षेत्र में आवेशित कण पर लगने वाले बल की दिशा हमेशा कण के वेग की दिशा के लम्बवत् होती है। अतः
W = \oint \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} = \oint M ( \overrightarrow{v} × \overrightarrow{N} ).d \overrightarrow{r}

W = \oint M ( \overrightarrow{v} × \overrightarrow{N} ). \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} dt

W = \oint M ( \overrightarrow{v} × \overrightarrow{N} ). \overrightarrow{v} dt

W = \oint ( \overrightarrow{F} . \overrightarrow{v} ).dt
{चूंकि θ = 90°}

W = 0

अतः “स्पष्ट है कि लॉरेंज बल संरक्षी बल होता है।”

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Q.2 सिद्ध कीजिए कि संरक्षी बल स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक ग्रेडिएण्ट होता है। अर्थात् \overrightarrow{F} = -∇ \overrightarrow{U} , जहां U स्थितिज ऊर्जा है।

संरक्षी बल स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक ग्रेडिएण्ट

\overrightarrow{F} = – grad U या \overrightarrow{F} = – ∇ \overrightarrow{U}

जब संरक्षी बल के कारण कार्य होता है। तो उसकी स्थितिज ऊर्जा घटती है। तथा उसे इस प्रकार लिखा जाता है।
dW = – dU
कार्य की परिभाषा से,
dW = \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r}
अतः
\overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} = – dU
\overrightarrow{F} तथा d \overrightarrow{r} को घटकों के रूप में लिखने पर,
( \widehat{i} Fx + \widehat{j} Fy + \widehat{k} Fz).( \widehat{i} dx + \widehat{j} dy + \widehat{k} dz) = – dU

या Fxdx + Fydy + Fzdz = – dU
यदि U का आंशिक अवकलन करने पर,

Fx = – \frac{∂U}{∂x} , Fy = – \frac{∂U}{∂y} तथा Fz = – \frac{∂U}{∂z}
अथवा
\overrightarrow{F} = \widehat{i} Fx + \widehat{j} Fy + \widehat{k} Fz

\overrightarrow{F} = – ( \widehat{i} \frac{∂U}{∂x} + \widehat{j} \frac{∂U}{∂y} + \widehat{k} \frac{∂U}{∂z} )
\overrightarrow{F} = – grad U

(चूंकि \overrightarrow{∇} = \widehat{i} \frac{∂}{∂x} + \widehat{j} \frac{∂}{∂y} + \widehat{k} \frac{∂}{∂z} )
अथवा
\overrightarrow{F} = – ∇ \overrightarrow{U}

अतः स्पष्ट है कि “संरक्षी बल स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक ग्रेडिएण्ट होता हैं।”

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Note – केन्द्रीय बल संरक्षी बल होता है। सिद्ध कीजिए?

केन्द्रीय बल क्या है

यदि एक बल एक कण पर इस प्रकार कार्य करता है कि उसकी दिशा हमेशा एक बिंदु की और उस बिंदु से दूर की और रहती है। तो इस बल को केन्द्रीय बल (Central Force in Hindi) कहते हैं। उदाहरण के लिए गुरुत्वाकर्षण बल

केन्द्रीय बल \overrightarrow{F} को गणितीय रूप में लिखने पर,
\overrightarrow{F} = ± f(r) \widehat{r}
यहां f(r) बल के केन्द्र से दूरी \overrightarrow{r} का कोई फलन है तथा \overrightarrow{r} , वेक्टर \overrightarrow{r} की दिशा में एकांक वेक्टर है।
तब यदि किसी बन्द परिपथ में चलने पर, केंद्रीय बल द्वारा किया गया कुल कार्य –
W = \oint \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} = \int^N_M \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} + \int^M_N \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r}
चूंकि
W = \int^M_N ± f(r) \widehat{r} .d \overrightarrow{r} + \int^M_N ± f(r) \widehat{r} .d \overrightarrow{r}
या
W = ± \int^N_M f(r).dr ± \int^N_M f(r).dr
या \footnotesize \boxed{ W = 0 }

अतः केन्द्रीय बल संरक्षी बल होता है।

Note – संरक्षी बल से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं?
Q.1 संरक्षी बल क्या होता हैं? दिखाए कि केन्द्रीय बल संरक्षी बल होता हैं?
Q.2 संरक्षी बल क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए?
Q.3 संरक्षी बल क्या हैं? दिखाए कि किसी बन्द परिपथ में संरक्षी बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता हैं?
Q.4 संरक्षी तथा असंरक्षी बलों में अंतर समझाइए?
Q.5 संरक्षी बल द्वारा एक बन्द पथ के अनुदिश कृत कार्य शुन्य होता हैं। सिद्ध कीजिए?

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