सुभद्रा कुमारी चौहान – जीवन परिचय, रचनाएं, भाषा शैली व साहित्य में स्थान

वीररस की कवयित्री श्रीमती सुभद्रा कुमारी चौहान बहुमुखी प्रतिभा की सम्पन्न साहित्यकार एवं उच्चकोटि की लेखिका एवं कवयित्री थी। राष्ट्रीयता की भावनाएँ इनकी रचनाओं का मूल आधार था, तो चलिए आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको सुभद्राकुमारी जी के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे, ताकि आप परीक्षाओं में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकें।

तो दोस्तों, आज के इस लेख में हमने “सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय” (Subhadra Kumari Chauhan biography in Hindi) के बारे में बताया है। इसमें हमने सुभद्राकुमारी चौहान का जीवन परिचय भाव पक्ष कला पक्ष अथवा साहित्यिक परिचय, रचनाएं एवं कृतियां, भाषा शैली, काव्यगत विशेषताएं एवं हिंदी साहित्य में स्थान और सुभद्रा कुमारी चौहान किस युग की कवयित्री है को भी विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाया है।

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इसके अलावा, इसमें हमने सुभद्राकुमारी चौहान जी के जीवन से जुड़े उन सभी प्रश्नों के उत्तर दिए हैं जो अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। यदि आप भी सुभद्राकुमारी जी के जीवन से जुड़े उन सभी प्रश्नों के उत्तर के बारे में जानना चाहते हैं तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें।

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सुभद्रा कुमारी चौहान का संक्षिप्त परिचय

विद्यार्थी ध्यान दें कि इसमें हमने सुभद्राकुमारी जी की जीवनी के बारे में संक्षेप में एक सारणी के माध्यम से समझाया है।
सुभद्रा कुमारी चौहान की जीवनी –

नामसुभद्राकुमारी चौहान
उपनामकाव्य सेनानी, स्वातंत्र्य कोकिला
जन्म तिथि16 अगस्त, 1904 ई. में
जन्म स्थानउत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले के निहालपुर ग्राम में
मृत्यु तिथि15 फरवरी, 1948 ई. में
मृत्यु स्थानसिवनी जिला, मध्य प्रदेश, भारत
मृत्यु का कारणकार दुर्घटना में
पिता का नामश्री रामनाथ सिंह
माता का नामज्ञात नहीं
पति का नामठाकुर लक्ष्मणसिंह चौहान
संतानपांच
पुत्रों के नामअजय चौहान, विजय चौहान, अशोक चौहान
पुत्रियों के नामसुधा चौहान, ममता चौहान
शिक्षाक्राॅस्थवेट गर्ल्स कॉलेज की छात्रा, देश-सेवा में लग जाने के कारण शिक्षा अधूरी रही।
पैशालेखिका, कवयित्री, देश-प्रेमी
साहित्य कालआधुनिक काल (प्रगतिवादी युग)
प्रमुख रसवीर और वात्सल्य रस
काव्य विशेषताकाव्य में दाम्पत्य प्रेम, देश-प्रेम और वात्सल्य प्रेम की विशेषता।
पुरस्कार‘मुकुल’ कृति पर सेकसरिया पुरस्कार
प्रसिद्ध कविताझाॅंसी की रानी
भाषासाहित्यिक खड़ीबोली
शैलीसंगीतात्मकता, भाव प्रवणता
प्रमुख रचनाएंमुकुल, त्रिधारा, सीधे-साधे चित्र, बिखरे मोती, उन्मादिनी, वीरों का कैसा हो वसंत, झाॅंसी की रानी की समाधि पर आदि।
साहित्य में स्थानसुभद्रा जी सच्चे अर्थों में हिंदी की महान साधिका थी। हिन्दी-साहित्य में इनका विशेष स्थान है।

प्रस्तावना— अपने कण्ठ की पुकार से लाखों भारतीय युवक-युवतियों को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित करने वाली राष्ट्रीय चेतना की अमर गायिका श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान (subhadra kumari chauhan in hindi) (1904-1948) हिन्दी कवियों में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं।

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सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय

जीवन-परिचय— क्रान्ति की अमरसाधिका सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म 16 अगस्त, सन् 1904 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (अब प्रयागराज) जिले के निहालपुर नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता रामनाथ सिंह सुशिक्षित, सम्पन्न और प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। इनकी माता का नाम हमें ज्ञात नहीं है। सुभद्रा कुमारी जी की प्रारम्भिक शिक्षा क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज में हुई और 15 वर्ष की उम्र में ही इनका विवाह खण्डवा (मध्य प्रदेश) के ठाकुर लक्ष्मणसिंह चौहान के साथ हुआ। इनके पति ब्रिटिश राज्य के विरुद्ध राष्ट्रीय आन्दोलनों में भाग लेते थे। सुभद्रा कुमारी भी पति के साथ राजनीतिक आन्दोलनों में भाग लेती रहीं, जिसके परिणामस्वरूप ये अनेक बार जेल भी गयीं।

सुभद्रा कुमारी चौहान
सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन परिचय

सुभद्रा कुमारी चौहान का असहयोग आन्दोलन में भाग लेने के कारण इनका अध्ययन क्रम भंग हो गया था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से प्रेरित होकर ये राष्ट्र-प्रेम पर कविताएँ लिखने लगीं। हिन्दी-काव्य-जगत् में ये ही एक ऐसी कवयित्री थीं, जिन्होंने अपनी ओजमय कविता द्वारा लाखों भारतीय तरुण-तरुणियों को स्वतन्त्रता-संग्राम में भाग लेने हेतु प्रेरित किया। ‘झाँसी वाली रानी थी’ तथा ‘वीरों का कैसा हो वसन्त’ कविताएँ तरुण-तरुणियों में क्रान्ति की ज्वाला फूंकती रहीं। इन्हें पं० माखनलाल चतुर्वेदी से भी पर्याप्त प्रोत्साहन मिला, परिणामस्वरूप इनकी देशभक्ति का रंग और भी गहराता गया।

सन् 1931 ई. में ‘मुकुल’ नामक काव्य-संग्रह पर सुभद्रा कुमारी चौहान को “सेकसरिया पारितोषिक पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। तथा ये मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्या भी रहीं। केवल 44 वर्ष की अवस्था में ही 15 फरवरी सन् 1948 ईस्वी में हुई एक वाहन-दुर्घटना में नियति ने एक प्रतिभाशाली कवयित्री को हिन्दी-साहित्य जगत् से असमय ही छीन लिया, अतः इनकी असामयिक मृत्यु हो गयी।

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सुभद्रा कुमारी चौहान का साहित्यिक परिचय

साहित्यिक-परिचय— सुभद्रा जी की काव्य-साधना के पीछे उत्कट देश-प्रेम, अपूर्व साहस तथा आत्मोत्सर्ग की प्रबल कामना है। इनका परिवार एक अच्छा सम्पन्न परिवार था। बाल्यकाल से ही सुभद्रा जी को काव्य से प्रेम था। सुभद्रा जी के साहित्यिक जीवन का प्रारम्भ इनके विवाह के उपरान्त हुआ। आजादी के लिए जेल-जीवन की सम्पूर्ण यातनाओं को इन्होंने हँसते-खेलते सहन किया। इनकी कविता में सच्ची वीरांगना का ओज और शौर्य प्रकट हुआ है। हिन्दी-काव्य जगत् में ये अकेली ऐसी कवयित्री हैं, जिन्होंने अपने कण्ठ की पुकार से लाखों भारतीय युवक-युवतियों को युग-युग की अकर्मण्य उदासी को त्यागकर स्वतन्त्रता-संग्राम में अपने को अर्पित करने के लिए प्रेरित किया। वर्षों तक सुभद्रा जी की ‘झाँसी वाली रानी थी’ और ‘वीरों का कैसा हो वसन्त’ शीर्षक कविताएँ लाखों तरुण-तरुणियों के हृदय में आग फूँकती रहीं ।

सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रमुख रचनाएं

रचनाएं एवं कृतियाँ— सुभद्राकुमारी चौहान की प्रमुख काव्य-कृतियाँ निम्नवत् हैं-
1.मुकुल— इस संग्रह में वीर रस से पूर्ण ‘वीरों का कैसा हो वसन्त’ आदि कविताएँ संग्रहीत हैं। इस काव्य-संग्रह पर इन्हें ‘सेकसरिया’ पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
2.त्रिधारा— इस काव्य-संग्रह में ‘झाँसी की रानी की समाधि पर’ प्रसिद्ध कविता संग्रहीत है। इनके इस संग्रह में देशप्रेम की भावना व्यक्त होती है।
(3). सीधे-सादे चित्र, (4). बिखरे मोती तथा (5). उन्मादिनी। ये तीनों इनके कहानी-संकलन हैं।

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सुभद्रा कुमारी चौहान की काव्यगत विशेषताएँ

काव्यगत विशेषताएँ— सुभद्रा जी मुख्यतः देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना की कवयित्री के रूप में प्रसिद्ध हैं। ‘झाँसी की रानी’, ‘वीरों का कैसा हो बसन्त’ आदि रचनाएँ तो जन-जन को राष्ट्र-प्रेम से उद्वेलित करती रही हैं। इनकी रचनाओं में भाव-प्रवणता होने के कारण ही इनको ‘भाव जगत की रानी’ कहा गया है। इनके काव्य में मातृ हृदय की सुलभ ममता, सुकुमारता एवं वात्सल्य की मधुर व्यंजना हुई है। इनकी कविताओं में दाम्पत्य प्रेम का संयत रूप ही देखने को मिलता है। इन्होंने वीर, शृंगार और वात्सल्य तीनों रसों में सफल काव्य रचनाएँ की हैं।

सुभद्रा कुमारी चौहान की भाषा शैली

भाषा शैली— सुभद्रा जी की भाषा सरल, सरस तथा स्पष्ट एवं आडम्बरहीन खड़ीबोली है। इनकी कविताओं में मुख्यतः दो रस प्रधान हैं- वीर तथा वात्सल्य । अपने काव्य में पारिवारिक जीवन के मोहक चित्र भी इन्होंने अंकित किए हैं, जिनमें वात्सल्य की मधुर व्यंजना हुई है। इनके काव्य में एक ओर नारी-सुलभ ममता तथा सुकुमारता है तो दूसरी ओर पद्मिनी के जौहर की भीषण ज्वाला । अलंकारों अथवा प्रतीकों के मोह में न पड़कर सीधी-सादी स्पष्ट अनुभूति को इन्होंने प्रधानता दी है।
सुभद्रा कुमारी चौहान जी की शैली में संगीतात्मकता, प्रभावोत्पादकता एवं भाव प्रवणता है। अनेक प्रकार के तुकान्त छन्दों का भी प्रयोग इन्होंने अपने काव्य में किया है।

सुभद्रा कुमारी चौहान का साहित्य में स्थान

साहित्य में स्थान— श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान ने अपने काव्य में जिस वीर नारी को प्रदर्शित किया है वह अपने आपमें स्पृहणीय और नारी जगत् के लिए आदर्श है। सुभद्रा जी हृदय की सहज अनुभूतियों को अपनी ओजस्वी सीधी-साधी भाषा में प्रभावपूर्ण ढंग से व्यक्त कर देने वाली एक समर्थ कवयित्री के रूप में हिन्दी-साहित्य में अपना विशेष स्थान रखती हैं।

सुभद्रा कुमारी चौहान के बारे में रामनरेश त्रिपाठी ने क्या लिखा?

पण्डित रामनरेश त्रिपाठी ने सुभद्रा जी के विषय में लिखा है कि- “सुभद्रा जी का नाम हिन्दी की स्त्री कवियों में सदा आदर के साथ लिया जाएगा। इन्होंने अपनी रचनाओं में मानव-प्रेम की जो अजस्रधारा बहायी है, वह अन्त तक इसी प्रकार बहती चली जाएगी। ये सदा के लिए अमर हो चुकी हैं। आपकी कविता, शुद्धभाषा और भाव दोनों दृष्टियों से प्रशंसनीय मानी जाती है ।” सुभद्रा जी सच्चे अर्थों में हिन्दी की महान साधिका थीं।

सुभद्राकुमारी चौहान की कविता

झाँसी की रानी की समाधि पर

[प्रस्तुत पंक्तियां ‘झाॅंसी की रानी की समाधि पर’ शीर्षक “त्रिधारा” नामक कविता से संकलित की गई हैं।]
“इस समाधि में छिपी हुई है, एक राख की ढेरी।
जल कर जिसने स्वतन्त्रता की, दिव्य आरती फेरी॥
यह समाधि, यह लघु-समाधि है, झाँसी की रानी की।
अंतिम लीलास्थली यही है, लक्ष्मी-मरदानी की॥
यहीं कहीं पर बिखर गयी वह, भग्न विजय-माला-सी।
उसके फूल यहाँ संचित हैं, है यह स्मृति-शाला-सी।।
सहे वार पर वार अंत तक, लड़ी वीर बाला-सी।
आहुति-सी गिर पड़ी चिता पर, चमक उठी ज्वाला-सी।।
बढ़ जाता है मान वीर का, रण में बलि होने से।
मूल्यवती होती सोने की, भस्म यथा सोने से।।
रानी से भी अधिक हमें अब, यह समाधि है प्यारी।
यहाँ निहित है स्वतन्त्रता की, आशा की चिनगारी।।
इससे भी सुन्दर समाधियाँ, हम जग में हैं पाते।
उनकी गाथा पर निशीथ में, क्षुद्र जंतु ही गाते।।
पर कवियों की अमर गिरा में, इसकी अमिट कहानी।
स्नेह और श्रद्धा से गाती है, वीरों की बानी॥
बुंदेले हरबोलों के मुख, हमने सुनी कहानी।
खूब लडी मर्दानी वह थी, झाँसी वाली रानी॥
यह समाधि, यह चिर-समाधि है झाँसी की रानी की।
अंतिम लीलास्थली यही है, लक्ष्मी मरदानी की॥”
“(‘त्रिधारा‘ से)”

FAQs. सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन से जुड़े प्रश्न उत्तर

1. सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म कब और कहां हुआ था?

सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म 16 अगस्त, सन् 1904 ईस्वी को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) जिले के निहालपुर नामक ग्राम में एक अच्छे सम्पन्न परिवार में हुआ था।

2. सुभद्रा कुमारी चौहान का उपनाम क्या है?

हिन्दी की प्रसिद्ध लेखिका एवं कवयित्री सुभद्राकुमारी चौहान ‘काव्य सेनानी’ और ‘स्वातंत्र्य कोकिला’ के उपनामों से प्रसिद्ध है।

3. सुभद्रा कुमारी चौहान की लिखी कविता कौन कौन सी है?

सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएं – झाँसी की रानी, स्वदेश के प्रति, झाँसी की रानी की समाधि पर, वीरों का कैसा हो वसंत, मातृमंदिर में, राखी की चुनौती, सेनानी का स्वागत, राखी की चुनौती, विजयदशमी, जलियांवाला बाग में बसंत, मेरा नया बचपन, मेरे पथिक, मेरे प्रियतम आदि।

4. सुभद्रा कुमारी चौहान का पहला कहानी संग्रह कौन सा था?

सुभद्राकुमारी चौहान का पहला काव्य-संग्रह ‘मुकुल’ था जो सन् 1930 ई. में प्रकाशित हुआ। इनकी चुनी हुई कविताएँ ‘त्रिधारा’ में प्रकाशित हुई हैं।

5. सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध रचना कौन सी है?

‘झाँसी की रानी’ सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध रचना है।

6. 9 सुभद्रा कुमारी चौहान के पति का क्या नाम था?

सुभद्राकुमारी चौहान के पति (जीवनसाथी) का नाम ठाकुर लक्ष्मण सिंह चौहान था।

7. सुभद्रा कुमारी चौहान के कितने बच्चे थे?

सन् 1919 इ. में इनका विवाह मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के ठाकुर लक्ष्मणसिंह चौहान के साथ हुआ। विवाह के बाद ये मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में रहने लगे। सुभद्रा कुमारी चौहान जी के पाँच बच्चे हुए, जिनमें दो पुत्रियां- सुधा चौहान, ममता चौहान और तीन पुत्र- अजय चौहान, विजय चौहान, अशोक चौहान थे।

8. सुभद्रा कुमारी चौहान की मृत्यु कहाँ हुई थी?

15 फरवरी, सन् 1948 ईस्वी को मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में एक कार दुर्घटना में सुभद्रा कुमारी चौहान का निधन हो गया था।

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