सेठ गोविंद दास – जीवन परिचय, साहित्य, रचनाएं, भाषा शैली व साहित्य में स्थान

हेलो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में हमने “सेठ गोविंद दास का जीवन परिचय” (Seth Govind Das biography in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है। इसमें हमने सेठ गोविन्ददास का जीवन परिचय, साहित्यिक अवदान, रचनाएं एवं कृतियां, एकांकी, भाषा शैली, पुरस्कार व साहित्य में स्थान और सेठ गोविन्ददास का राजनीतिक कार्य को भी विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाया गया है, ताकि आप परीक्षाओं में ज्यादा अंक प्राप्त कर सकें। इसके अलावा इसमें हमने सेठ गोविंद दास जी के जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर भी दिए हैं, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें।

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सेठ गोविंद दास का संक्षिप्त परिचय

विद्यार्थी ध्यान दें कि नीचे दी गई सारणी में हमने गोविन्ददास जी की जीवनी के बारे में संक्षेप में समझाया है।
सेठ गोविंद दास की जीवनी –

नामसेठ गोविन्द दास
जन्म16 अक्टूबर, 1896 ई. में
जन्म स्थानमध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में
मृत्यु18 जून, 1974 ई. में
मृत्यु स्थानमहाराष्ट्र, भारत
पिता का नामश्री राजा गोकुल दास
माता का नामज्ञात नहीं
पत्नी का नामश्रीमती गोदावरी बाई
संतानपुत्र- जगमोहन दास, मनमोहन दास,
पुत्रियां- रत्नाकुमारी, पदमा
व्यवसायलेखक, नाटककार, एकांकीकार, उपन्यासकार, राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी
राजनीतिक कार्यकालसन् 1947 ई. से सन् 1974 ई. तक, जबलपुर के “संसद् सदस्य” रहें।
पार्टीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
साहित्य कालआधुनिक काल
लेखन विधाएकांकी, नाटक, उपन्यास
पहला नाटकविश्व-प्रेम
पुरस्कारपद्मभूषण (सन् 1961 ई.)
भाषाहिंदी, अंग्रेजी
प्रमुख रचनाएंविश्व प्रेम, कर्तव्य, चंपावती, कृष्णलता, सप्त रश्मि, अष्टदश, प्रकाश, नवरस, सोमलता, होनहार, चतुष्पथ, पंचभूत आदि।
हिंदी साहित्य में स्थानराष्ट्रभाषा हिंदी के प्रतिष्ठापिता के रूप में

सेठ गोविंद दास (1896 – 1974) भारत के स्वतन्त्रता सेनानी तथा हिन्दी के साहित्यकार थे। इन्हें शिक्षा व साहित्य के क्षेत्र में सन् 1961 ई. में “पद्मभूषण” की उपाधि से सम्मानित किया गया। ये हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभापति भी रहे। इन्होंने राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का प्रबल समर्थन किया। ये एक भारतीय संस्कृति के अनन्य साधक, कला मर्मज्ञ, आदर्श राजनीतिज्ञ, प्रसिद्ध नाट्यकार, उपन्यासकार एवं एकांकीकार थे।

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सेठ गोविंद दास का जीवन परिचय

स्वतन्त्रता सेनानी सेठ गोविन्ददास जी का जन्म 16 अक्टूबर, सन् 1896 ईस्वी को मध्य प्रदेश राज्य के जबलपुर शहर में विजयदशमी के दिन एक प्रतिष्ठित संपन्न धार्मिक परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम राजा गोकुलदास तथा माता का नाम हमें ज्ञात नहीं है। गोविन्ददास जी ने स्वाध्याय से ही हिंदी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान प्राप्त किया। और अपने घर के वातावरण अध्यात्मिकता की भावना से परिपूर्ण रहे। बचपन से ही सेठ जी अपने परिवार के बीच में रहते थे, और फिर वल्लभ संप्रदाय के धार्मिक उत्सवों, रास लीलाओं और नाटकों से ये बहुत प्रभावित हुए। अतः नाटक लिखने की प्रेरणा भी इन्हें यहीं से जागृत हुई। इनका पहला नाटक “विश्व-प्रेम” परिवार द्वारा स्थापित श्री शारदा भवन पुस्तकालय के वार्षिकोत्सव के लिए लिखा गया था।

सेठ गोविंद दास
सेठ गोविंद दास का जीवन परिचय

सेठ गोविंद दास जी की साहित्य में रुचि होने के साथ ही इन्होंने देश के स्वाधीनता आंदोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया और अनेक बार जेल यात्राएं भी करनी पड़ी। सेठ जी ने अधिकांश रचनाएं जेल में ही लिखी। सन् 1947 ई. में देश के स्वतंत्र होने पर ये संसद् सदस्य हुए और जीवन पर्यन्त इसी पद पर बने रहे। और हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित होने के आप पक्षधर रहे। हिंदी के प्रति सेठ जी का लगाव इसलिए था, चूंकि हिंदी भाषा भारत के विस्तृत भू-भाग में बोली जाने वाली ही भाषा नहीं थीं, बल्कि स्वाधीनता आन्दोलन की भाषा थी। सन् 1961 ई. को साहित्य व शिक्षा के क्षेत्र में सेठ गोविंद दास जी को ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था। और ये हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सभापति भी रहे थे। 18 जून, सन् 1974 ईस्वी को इस महान् साहित्यकार का निधन हो गया था।

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सेठ गोविंद दास का साहित्यिक अवदान

सेठ जी ने मुख्यतः नाटक, एकांकी और उपन्यास का ही लेखन कार्य किया है। इनकी एकांकियों के विषय पौराणिक काल से शुरू होकर विभिन्न ऐतिहासिक युगों को पूरा किया है। आधुनिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और राजनैतिक धरातल विस्तृत है। इनके जीवन दर्शन पर गांधीवादी का गहरा असर पड़ा है। सेठ गोविंद दास जी ने लेखन के अलावा सांसद के रूप में भी आजीवन हिंदी की उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया। और इनके एकांकी विचारों को जन्म देने वाले हैं। काल संकलन के प्रति सेठ जी अधिक सजग दिखाई देते हैं। अधिकांश एकांकी अनेक दृश्यों वाले हैं, जिनमें से कुछ में उपसंहार और उपक्रम की व्यवस्था है। सेठ जी की कुछ एकांकी व्यंग्य विनोद प्रधान, तो कुछ पात्रों की अंतर्वृत्तियों का विश्लेषण करते दिखाई पड़ती हैं। इनकी एकांकियों के कथानक जीवन्त एवं प्रभावपूर्ण हैं।

सेठ गोविंद दास की रचनाएं

सेठ जी की प्रसिद्ध रचनाएं एवं एकांकियां कुछ इस प्रकार से हैं-
एकांकी-संग्रह – सप्त रश्मि, अष्टदश, एकादशी, पंचभूत, व्यवहार, चतुष्पथ, आपबीती-जगबीती आदि।
नाटक – प्रकाश, कर्तव्य, नवरस, विश्व प्रेम आदि।
उपन्यास – चंपावती, कृष्णलता, सोमलता आदि।

सेठ गोविंद दास की भाषा शैली

गोविन्ददास जी की भाषा सरल, सहज एवं बोधगम्य हैं। इनकी भाषा में तत्सम, तद्भव एवं देशज आदि शब्दों का भी कहीं-कहीं प्रयोग मिलता है। इन्होंने अपने नाटकों में मुख्यतः नाट्य शैली का प्रयोग किया है। परंतु एकांकी में ‘व्यंग्य-प्रधान-विनोद’ आदि शैली ही देखने को मिलती हैं।

सेठ गोविंद दास का साहित्य में स्थान

सेठ जी एक सफल नाटककार व एकांकीकार के रूप में अपनी विशिष्ट छवि बनाने वाले प्रख्यात साहित्यकार हैं। इन्होंने नाटक, उपन्यास व एकांकी संग्रहों के अतिरिक्त एक सांसद के रूप में जीवन भर हिन्दी के उन्नयन हेतु कार्य किया। राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठापित हिन्दी इनके सत्प्रयत्नों की आभारी रहेगी।

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FAQs. सेठ गोविंद दास जी के जीवन से जुड़े प्रश्न उत्तर

1. सेठ गोविंद दास का जन्म कब और कहां हुआ था?

सेठ गोविंद दास का जन्म 16 अक्टूबर, सन् 1896 ईस्वी को मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में हुआ था।

2. सेठ गोविंद दास की मृत्यु कब हुई थी?

सेठ गोविंद दास की मृत्यु 18 जून, सन् 1974 ईस्वी को मुंबई, महाराष्ट्र में हुई थी।

3. सेठ गोविंद दास द्वारा रचित व्यवहार एकांकी में कुल कितने पात्र हैं?

सेठ गोविंद दास द्वारा रचित व्यवहार एकांकी में कुल 4 पात्र हैं-
(1). रघुराज सिंह : एक जमींदार
(2). नर्मदाशंकर : रघुराज सिंह के स्टेट का मैनेजर
(3). चूरामन : एक किसान
(4). क्रान्तिचन्द्र : चूरामन का पुत्र ।

4. क्या सेठ गोविंद दास महान आलोचक थे?

नहीं, सेठ गोविंद दास एक महान् नाटककार, एकांकीकार एवं उपन्यासकार थे।

5. सेठ गोविंद दास की एकांकी कौन कौन सी हैं?

सेठ गोविंद दास जी के प्रमुख एकांकी-संग्रह निम्नलिखित हैं – सप्त-रश्मि, अष्टदश, एकादशी, पंचभूत, चतुष्पथ, आपबीती जगबीती आदि।

6. व्यवहार एकांकी के अनुसार व्यवहार की उचित परिभाषा क्या है?

‘व्यवहार’ एकांकी सेठ गोविंद दास जी द्वारा रचित एक जमींदार की सामन्तवादी विचारधारा से सुपोषित भावप्रधान सामाजिक उत्कृष्ट एकांकी है। इसमें परिवर्तित परिस्थितियों में विशुद्ध नियन्त्रण को ‘व्यवहार’ अर्जन हेतु दिया हुआ निमन्त्रण कृषक क्रान्तिचन्द्र के तर्कों से प्रभावित होकर उसका पूर्णरूपेण बहिष्कार कर देते हैं। प्रस्तुत एकांकी की कथावस्तु सामाजिक पृष्ठभूमि पर आधारित है।

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