स्वातंत्र्य कोटि से क्या तात्पर्य है, परिभाषा सूत्र तथा उदाहरण | Degrees of freedom in Hindi

स्वातंत्र्य कोटि क्या है

यदि किसी गतिकीय निकाय के विन्यास को पूर्णतः विनिर्दिष्ट करने के लिए आवश्यक स्वतंत्र निर्देशांकों की कुल संख्या को उस निकाय की स्वातंत्र्य कोटियाॅं ” कहते हैं। इसे f से प्रदर्शित करते हैं।
अर्थात् माना किसी कण की स्वातंत्र कोटि उन स्वतंत्र दिशाओं की संख्या है। जिनमें वह गति कर सकता है। उदाहरण के लिए

एक-परमाणुक गैस (A-nuclear gas in Hindi)

एक-परमाणुक गैस के अणु में केवल एक परमाणु होता है। जोकि दिक् स्थान में किसी भी दिशा में स्थानांतरण गति कर सकता है। तथा इस गति को तीन परस्पर लंबवत अक्षों के समांतर वियोजित किया जा सकता है। जैसे कि चित्र-1 में दिखाया गया है। तथा अणु के वेग v को X-अक्ष, Y-अक्ष तथा Z-अक्ष के समांतर घटकों a, b व c में वियोजित किया गया है। तथा (v2 = a2 + b2 + c2) है। इस प्रकार यह तीन स्वतंत्र दिशाओं में गति कर सकता है। अर्थात् इसकी स्वातंत्र्य कोटियाॅं 3 है।
चूंकि “एक परमाणुक गैस के अणु का अपने अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण बहुत कम होता है। अतः इसकी घूर्णन गतिज ऊर्जा उपेक्षीणिय होती है।” इस प्रकार, एक-परमाणुक गैस के अणु की घूर्णन गति की कोई स्वतंत्र्य कोटियाॅं नहीं होती है।

स्वातंत्र्य कोटि
स्वातंत्र्य कोटि- एक-परमाणुक गैस

द्वि-परमाणुक गैस (Double-atomic gas in Hindi)

यदि “द्वि-परमाणुक गैस का अणु दोनों परमाणुओं को मिलाने वाली रेखा के परितः भी घूर्णन गति कर सकता है। परंतु इस अक्ष के परितः अणु का जड़त्व आघूर्ण बहुत कम होता है। जिससे इस अक्ष के परितः घूर्णन गतिज ऊर्जा उपेक्षीणिय होती है।” अतः

स्वातंत्र्य कोटि
स्वातंत्र्य कोटि-द्वि-परमाणुक गैस

द्वि-परमाणुक गैस (जैसे- Cl2, O2, N2, H2 आदि) के अणु में दो परमाणु डम्बल की तरह आपस में बंधे रहते हैं। ऐसे अणु दिक् स्थान में स्थानांतरण गति के साथ-साथ दो स्वतंत्र अक्षों के परितः गति भी कर सकता है‌। ये दोनों अक्ष परमाणुओं को जोड़ने वाली रेखा के तथा एक-दूसरे के लम्बवत् होते है। जैसे कि चित्र-2a में दिखाया गया है। कि इस प्रकार द्वि-परमाणुक अणु की स्थानांतरण गति के लिए 3 स्वातंत्र्य कोटियां (एक-परमाणुक गैस के अणु की तरह) तथा घूर्णन गति के लिए 2 स्वातंत्र्य कोटियां है। अतः द्वि-परमाणुक गैस के अणुओं की कुल 5 स्वातंत्र्य कोटियाॅं होती है।

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बहु-परमाणुक गैस (Multi-atomic gas in Hindi)

यदि जब किसी बहु-परमाणुक गैस (जैसे- CH4, O3, H2O आदि) के अणु (जिसके सभी परमाणु एक ही सरल रेखा में स्थित नहीं होते) तथा दिक् स्थान में स्थानांतरण गति के साथ-साथ तीन परस्पर लम्बवत् अक्षों के सापेक्ष घूर्णन गति कर सकता है। जैसा कि चित्र-2b में दिखाया गया है। तथा इस प्रकार,

बहु-परमाणुक गैस के अणु की स्वातंत्र्य कोटियां 6 हो जाती हैं। जिनमें से 3 को स्थानांतरण गति के लिए हैं। तथा 3 घूर्णन गति के लिए हैं। अर्थात् यदि द्वि-परमाणुक और बहु-परमाणुक अणुओं के परमाणु एक-दूसरे के सापेक्ष कम्पन भी कर सकते हैं। तब इन अणुओं की कम्पनिक गति के लिए स्वातंत्र्य कोटियों की संख्या बढ़ जाती है। अतः इस प्रकार ‘ स्वातंत्र्य कोटि’ की व्याख्या को स्पष्ट किया जा सकता है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 स्वातंत्र्य कोटि का क्या अर्थ है ?
Q. 2 स्वातंत्र कोटि की व्याख्या कीजिए ?
Q. 3 स्वातंत्र्य कोटियाॅं किसे कहते हैं। चित्र की सहायता से इसकी व्याख्या को स्पष्ट कीजिए ?

Q. 4 स्वातंत्र्य कोटि के घटक और प्रावस्था को समझाइए ?

Q. 5 स्वतंत्रता की कोटि क्या है ? किसी अणु की स्वातंत्र्य कोटि से क्या तात्पर्य है ?

Q. 6 स्वतंत्रता की कोटि का उदाहरण, प्रावस्था घटक एवं स्वतंत्रता की कोटि से आप क्या समझते हैं ?

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