प्रत्यावर्ती धारा सेतु क्या है, सेतु की सन्तुलित अवस्था का व्यंजक लिखिए | Alternating Current Bridge in Hindi

प्रत्यावर्ती धारा सेतु

प्रत्यावर्ती धारा सेतु, व्हीटस्टोन सेतु का ही एक व्यापक रूप है जिसकी सहायता से प्रेरकत्व (L), धारिता (C) तथा स्त्रोत की आवृत्ति (n) का मापन किया जा सकता है।

प्रत्यावर्ती धारा सेतु की संतुलित अवस्था

हम जानते हैं कि दिष्ट धारा नेटवर्क तथा व्हीटस्टोन सेतु की संतुलित अवस्था के लिए किरचाॅफ के नियमों का प्रयोग किया जाता है। इन नियमों को प्रत्यावर्ती धारा नेटवर्क में भी प्रयोग किया जाता है। यदि हम प्रतिरोध (R) तथा प्रेरकत्व (L) के स्थान पर प्रतिबाधा (Z) मान लेते हैं।

इसके साथ यह भी आवश्यक है कि कला के समान अर्थात् सन्तुलन अवस्था में हों। इन ब्रिजों के लिए 1000 चक्र/सेकंड की प्रत्यावर्ती धारा सेतु सूचक कार्य करता है, जबकि सन्तुलन की अवस्था में हम “हैडफोन या संसूचक (D)” का इस्तेमाल करते हैं जिनमें सन्तुलन की अवस्था में न्यूनतम ध्वनि सुनाई देती है। सभी प्रतिरोध बॉक्स अन- प्रेरकत्वीय होने चाहिए।

प्रत्यावर्ती धारा सेतु का सिद्धांत

माना MNOP एक व्हीटस्टोन सेतु है जिसकी भुजाओं में Z1, Z2, Z3 व Z4 प्रतिबाधाएं जुड़ी हैं। अतः M व O के बीच एक प्रत्यावर्ती धारा स्त्रोत जुड़ा है तथा N व P के बीच हैडफोन या कम्पन्न धारामापी या (धारा संसूचक) ‘D’ जुड़ा है। जैसा कि चित्र-1 में दिखाया गया है।

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प्रत्यावर्ती धारा सेतु
प्रत्यावर्ती धारा सेतु

अर्थात् प्रत्यावर्ती धारा सेतु को इस प्रकार समायोजित करते हैं कि स्त्रोत द्वारा धारा (I) प्रवाहित करने पर संसूचक में कोई धारा प्रवाहित न हो । अर्थात् संसूचक में धारा का मान शून्य हो, तब प्रत्यावर्ती धारा सेतु की स्थिति को प्रत्यावर्ती धारा सेतु की सन्तुलन अवस्था या स्थिति कहा जाता है। इस प्रकार, सन्तुलन की स्थिति में
Z1/Z2 = Z3/Z4

उपपत्ति (Proof)

यदि बन्द परिपथ MNPM में किरचाॅफ का द्वितीय नियम लगाने पर,
I1Z1 – I2Z3 = 0
या I1Z1 = I2Z3 …(1)
तथा दोबारा बन्द परिपथ NOPN में किरचाॅफ का द्वितीय नियम लगाने पर,
I1Z2 – I2Z4 = 0
या I1Z2 = I2Z4 …(2)
अब समीकरण (1) व (2) से भाग देने पर,
\frac{I_1 Z_1}{I_1 Z_2} = \frac{I_2 Z_3}{I_2Z_4}
अर्थात्
\footnotesize \boxed{ \frac{Z_1}{Z_2} = \frac{Z_3}{Z_4} }
“यही व्हीटस्टोन प्रत्यावर्ती धारा सेतु के सन्तुलन के लिए व्यापक प्रतिबन्ध है।”

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प्रत्यावर्ती धारा सेतु के सन्तुलन की शर्ते

प्रत्यावर्ती धारा सेतु के लिए निम्न दो सन्तुलन की शर्ते हैं।
(1). दो विपरीत भुजाओं की प्रतिबाधाओं का गुणनफल बराबर होना चाहिए। तथा
(2). दो विपरीत भुजाओं के कला कोणों का योग बराबर होना चाहिए ।
अर्थात्
(1). Z1Z4 = Z2Z3 ,
(2). φ1 + φ4 = φ2 + φ3

यहां φ1, φ2, φ3 व φ4 प्रतिबाधा Z1, Z2, Z3 व Z4 की क्रमशः कलायें हैं।
“यही सन्तुलन की व्यापक शर्ते हैं।” अतः प्रत्यावर्ती धारा सेतु में सन्तुलन की दो शर्ते जोकि एक साथ प्रत्यावर्ती प्रतिबाधा सेतु के लिए सन्तुष्ट होती हैं।

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नोट :- ए.सी. सेतु तथा डी.सी. सेतु के सन्तुलन प्रतिबन्धों में क्या अन्तर है तथा क्यों?

ए.सी. सेतु व डी.सी. सेतु के सन्तुलन प्रतिबन्धों में अन्तर

  • डी.सी. सेतु (D.C. bridge in Hindi) – डी.सी. सेतु के लिए सन्तुलन प्रतिबन्ध निम्न है
    R1/R2 = R3/R4 या R1R4 = R2R3 …(1)
    यहां R1, R2, R3 व R4 क्रमशः समांतर चतुर्भुज की चार भुजाओं में लगे हुए प्रतिरोध हैं।
  • ए.सी. सेतु (A.C. bridge in Hindi) – ए.सी. सेतु के लिए सन्तुलन प्रतिबन्ध निम्न है
    Z1/Z2 = Z3/Z4 या Z1Z4 = Z2Z3 …(2)
    यहां Z1, Z2, Z3 व Z4 क्रमशः समांतर चतुर्भुज की चार भुजाओं में लगी प्रतिबाधाएं हैं।
    अर्थात् व्यवहार में सभी प्रतिबाधाएं सम्मिश्र होती हैं, जिनमें प्रतिरोध, प्रेरकत्व व संधारित्र लगे होते हैं। अतः
    प्रतिबाधा, Z = R + jX
    (जहां R प्रतिरोध व X प्रतिघात है।)

Note – प्रत्यावर्ती धारा सेतु से सम्बन्धित प्रशन परीक्षाओं में पूछें जाते हैं।
Q.1 प्रत्यावर्ती धारा सेतु क्या है? इसमें दो सन्तुलन अवस्थाओं का स्पष्टीकरण आप कैसे करेंगे ।
Q.2 प्रत्यावर्ती धारा सेतु के सन्तुलन की शर्ते प्राप्त कीजिए?
Q.3 प्रत्यावर्ती धारा सेतु का सूत्र व सिद्धांत क्या है? इसकी सन्तुलित अवस्था की शर्तो का उल्लेख कीजिए।

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