आयाम मॉडुलन का सिद्धांत क्या है, इसका व्यंजक व दोष लिखिए | Amplitude Modulation in Hindi

आयाम मॉडुलन का सिद्धांत

आयाम मॉडुलेशन वह प्रक्रिया है जिसमें निम्न आवृत्ति की मॉडुलक तरंगों के साथ उच्च आवृत्ति की वाहक तरंगों को इस प्रकार अध्यारोपित किया जाता है कि वाहक तरंगों का आयाम मॉडुलक तरंगों के आयाम के अनुसार बदले लेकिन माॅडुलित तरंग की आवृत्ति एवं कला वाहक तरंग की आवृत्ति एवं कला के समान रहे, तो इस प्रकार के सिद्धांत को ‘आयाम मॉडुलन का मूल सिद्धांत’ कहते हैं।

इसे भी पढ़ें… मॉडुलन की परिभाषा, प्रकार, आवश्यकता व आयाम मॉडुलेशन व्यंजक प्राप्त कीजिए।

आयाम मॉडुलन का व्यंजक

माना आयाम मॉडुलन सिग्नल em = Em cosωmt है यहां ωm मॉडुलक सिग्नल की कोणीय आवृत्ति है तथा वाहक सिग्नल ec = Ec cosωct है, यहां ωct वाहक सिग्नल की कोणीय आवृत्ति है।
तब किसी भी क्षण t पर आयाम माॅडुलित वाहक तरंग सिग्नल का आयाम निम्न होगा।
Et = Ec + kaem या Et = Ec + kaEm cosωmt …(1)

यहां ka एक अनुक्रमानुपाती नियतांक है जिसका मान मॉडुलेशन परिपथ पर निर्भर करता है। अतः आयाम माॅडुलित तरंग का समीकरण,
(ec)AM = Et cosωct
या (ec)AM = (Ec + kaem) cosωct
या (ec)AM = [Ec + kaEmcosωmt]cosωct
या (ec)AM = Ec[1 + ( \frac{k_aE_m}{E_c} )cosωmt]cosωct

चूंकि ma = \frac{k_aE_m}{E_c} को मॉडुलन की गहराई या माॅडुलन सूचकांक कहते हैं। अर्थात्
(ec)AM = Ec(1 + macosωmt)cosωct …(2)
“यही आयाम मॉडुलन का अभीष्ट व्यंजक है।”

और पढ़ें… आयाम मॉडुलित तरंगों में शक्ति का व्यंजक, माॅडुलेशन में पाशर्व बैण्ड क्या है?

और पढ़ें… ट्रांजिस्टर का आयाम माॅडुलेटर के रूप में उपयोग क्यों किया जाता है?

आयाम मॉडुलन के दोष (demerits of amplitude modulation in Hindi)

आयाम मॉडुलन के दोष निम्नलिखित हैं –
(i). शोर ⇒ वक्ता द्वारा उत्पन्न की जाने वाली ध्वनि में विद्युतीय आयाम के परिवर्तन के कारण माॅडुलक सिग्नल में शोर भी उपस्थित होता है जिसके कारण मॉडुलित तरंग के पाशर्व अवयवों में भी यह शोर उपस्थित रहता है।

(ii). श्रव्य गुणता की कमी ⇒ उच्च कोटि की श्रव्य गुणता के लिए आवश्यक है कि 15kHz तक की सभी श्रव्य आवृतियों का पुनरूत्पादन हो। इसकी प्रक्रिया के लिए चैनल चौड़ाई इसकी दोगुनी अर्थात् 30kHz होनी चाहिए, परंतु व्यवहार में इसे प्रसारण स्टेशन 15kHz चैनल चौड़ाई का ही उपयोग करते हैं जिससे श्रव्य आवृत्ति की सीमा केवल 7.5kHz ही होती है, जो कि उच्च कोटि की श्रव्य गुणता के लिए काफी नहीं है।

(iii). दक्षता की कमी ⇒ चूंकि आयाम मॉडुलित तरंग में उपयोगी शक्ति पाशर्व बैण्डों में ही निहित है तथा शत-प्रतिशत मॉडुलन के लिए भी पाशर्व बैण्ड में उपयोगी शक्ति कुल शक्ति की केवल 1/3 ही होती है। अतः आयाम मॉडुलन की दक्षता बहुत कम होती है।

(iv). अल्प परास ⇒ दक्षता कम होने के कारण सिग्नल को दूर स्थानों तक प्रेषित नहीं किया जा सकता है। अतः इसकी परास कम होती है।

Note – सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 आयाम मॉडुलन का मूल सिद्धांत क्या है?
Q.2 आयाम मॉडुलन के दोष बताइए।
Q.3 आयाम मॉडुलन को परिभाषित कीजिए। इसका मूल सिद्धांत क्या है? इसका व्यंजक प्राप्त कीजिए। तथा इसके दोषों का भी उल्लेख कीजिए।

Read More –

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
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  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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