एण्डूज वक्र तथा वाण्डर वाल्स वक्र में अंतर है | Comparison of Andrews Curve with Vander Waals Curve in Hindi

एण्डूज वक्र की वाण्डर वाल्स वक्र से तुलना

इसके अनुसार, वाण्डर वाल्स का अवस्था समीकरण से,
(p + \frac{a}{V^2} )(V – b) = RT

या P = \frac{RT}{V - b} \frac{a}{V^2}

तब इस समीकरण में CO2 गैस के लिए प्रयोगों द्वारा ज्ञात होता है कि a, b तथा R के मानों को रखकर विभिन्न स्थिर तापों पर P व V के बीच ग्राफ खींचते हैं। जो कि सैद्धांतिक रूप से समतापी वक्र है। जैसा कि चित्र-1(a) में दिखाया गया है तथा इसमें क्रांतिक बिंदु X के नीचे वाले वक्रों में उच्चिष्ठ व निम्निष्ठ प्राप्त होते हैं। जबकि ऊपर वाले वक्रों में उच्चिष्ठ व निम्निष्ठ प्राप्त नहीं होते हैं। यहां P तथा V के बीच ग्राफों को उन्हीं तापों पर खींचा गया है। जिन पर एण्डूज ने प्रायोगिक वक्र खींचे थे।

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एण्डूज वक्र व वाण्डर वाल्स वक्र
एण्डूज वक्र व वाण्डर वाल्स वक्र

अर्थात् चित्र में क्रांतिक ताप 31.1°C पर तथा इससे ऊपर तापों पर सैद्धांतिक समतापी वक्रों तथा प्रायोगिक समतापी वक्रों में काफी समानता है, परंतु क्रांतिक ताप से नीचे तापों पर इस समतापी वक्रों में काफी अंतर होता है। जैसे कि प्रायोगिक समतापी वक्रों का मध्य भाग क्षैतिज होता है, जबकि सैद्धांतिक वक्रों का मध्य भाग तरंगवत् होता है। जिसमें उच्चिष्ठ व निम्निष्ठ होते हैं।
उदाहरण के लिए- 13.1°C ताप पर प्रयोगिक वक्र का मध्य भाग NO एक क्षैतिज सरल रेखा में है। जबकि सैद्धांतिक वक्र का मध्य भाग भी तरंगवत् होता है। अतः जिसमें N पर उच्चिष्ठ तथा O पर निम्निष्ठ हैं। इस भिन्नता की व्याख्या निम्न प्रकार से की जा सकती है।
सैद्धांतिक वक्र का भाग mno यह दर्शाता है, कि गैस का दाब घटने पर उसका आयतन भी घटना चाहिए। लेकिन यह बात प्रायोगिक अनुभव के विपरीत है। क्योंकि इस भाग में द्रवण होता है। और जब तक यह प्रक्रम चलता है। तब तक दाब स्थिर रहता है। अतः mno भाग एक अत्यंत अस्थायी अवस्था को बताते हैं। जिसे व्यवहार में प्राप्त करना असंभव होता है।

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अर्थात् सैद्धांतिक वक्र का भाग NO प्रावस्था में असंतृप्त को बताता है। तथा ‘टॉमसन के अनुसार, सैद्धांतिक वक्र के सतत भाग Nm तथा oO क्रमशः गैस की “अतिसंतृप्त वाष्प प्रावस्था” तथा “अतितप्त द्रव प्रावस्था” को व्यक्त करते हैं। यह दोनों ही अस्थायी साम्य की प्रावस्थाएं है। जिन्हें “मितस्थायी प्रावस्थाएं” कहते हैं। अतः साधारण परिस्थितियों में इन प्रावस्थाओं को प्रयोग द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता है। क्योंकि एण्डूज के प्रयोग में गैस सदैव स्थायी साम्य में रहती है, अतः प्रायोगिक वक्र में केवल एक क्षैतिज रेखा NO प्राप्त होती है। जिससे उच्चिष्ठ व निम्निष्ठ प्राप्त नहीं होते हैं।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 एण्डूज के प्रायोगिक वक्र की वाण्डर वाल्स के सैद्धांतिक वक्र से तुलना कीजिए ?
Q. 2 वाण्डर वाल्स के सैद्धांतिक वक्र तथा एण्डूज के प्रायोगिक वक्रों में क्या अंतर है स्पष्ट कीजिए ?

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