केन्द्रीय बल या केंद्रीय बल किसे कहते हैं, परिभाषा, सूत्र, उदाहरण | Central Force in Hindi

केन्द्रीय बल क्या है

किसी कण पर लगने वाला बाह्य बल जिसकी क्रिया रेखा सदैव एक स्थिर बिन्दु से होकर जाती है। तथा जिसका परिमाण केवल उस बिन्दु से कण की दूरी पर निर्भर करता है। तो वह बल ‘केन्द्रीय बल (Central Force in Hindi)’ कहलाता है।

माना यदि किसी मूल बिन्दु से कण का स्थिति वेक्टर \overrightarrow{F} है, तो उस वस्तु पर कार्य करने वाला केन्द्रीय बल होगा

\overrightarrow{F} = \overrightarrow{F} (r) = F(r) \widehat{r} = F(r) \frac{ \overrightarrow{r}}{r} ….(1)

यहाॅं F(r), दूरी r का कोई फलन है। यदि F(r) धनात्मक है। अर्थात् F(r) > 0 तो बल प्रतिकर्षणात्मक तथा यदि F(r) < 0 तो बल आकर्षणात्मक होगा।

और पढ़ें.. द्वि-पिण्ड समस्या का एक पिण्ड समस्या में लघुकरण

केंद्रीय बल के अंतर्गत गति

यदि कोई कण केंद्रीय बल के अंतर्गत गति करता है तो उस कण पर लगने वाला बल आघूर्ण \overrightarrow{ι} = \overrightarrow{r} × \overrightarrow{F} = \overrightarrow{r} × F(r) \widehat{r} = F(r) \overrightarrow{r} × \widehat{r} = 0 लेकिन बल आघूर्ण,
\overrightarrow{ι} = \frac{ \overrightarrow{d}l}{dt}
यहां \overrightarrow{F} कण का स्थिर बिन्दु के सापेक्ष कोणीय संवेग है।
\frac{ \overrightarrow{d}l}{dt} = 0 या \overrightarrow{l} = नियतांक …(2)

अर्थात् यदि कोई कण एक केंद्रीय बल के अन्तर्गत गति करता है तो केंद्रीय बल का स्थिर बिन्दु के सापेक्ष बल आघूर्ण शून्य होता है। अतः कण का कोणीय संवेग अचर रहते हैं। अर्थात् कोणीय संवेग का परिमाण व दिशा एक ही रहती है।

चूंकि \overrightarrow{l} = \overrightarrow{r} × \overrightarrow{p} , यहां \overrightarrow{p} कण का रेखीय संवेग है। इसलिए,
\overrightarrow{r} . \overrightarrow{l} = \overrightarrow{r} .( \overrightarrow{r} × \overrightarrow{p} ) = ( \overrightarrow{r} × \overrightarrow{r} ). \overrightarrow{p} = 0 …(3)

अतः स्थिति वेक्टर \overrightarrow{r} , कोणीय संवेग वेक्टर \overrightarrow{l} के लम्बवत् होता है। अर्थात् “केंद्रीय बल के अंतर्गत कण की गति एक ही तल में होती है।”

इसे भी पढ़ें…संरक्षी तथा असंरक्षी बल क्या है

केंद्रीय बल के अंतर्गत कण की स्थितिज ऊर्जा

केंद्रीय बल के अंतर्गत कण की स्थितिज ऊर्जा U भी दूरी पर निर्भर करती है अर्थात् U = U(r)। केंद्रीय बल एक संरक्षी बल है अर्थात् यह स्थितिज ऊर्जा का ऋणात्मक ग्रेडिएण्ट होता है अर्थात्

\overrightarrow{F} = – grad U = – \overrightarrow{∇} U …(4)

अर्थात् यदि आकर्षणात्मक केन्द्रीय बल, जो दूरी की n-वीं घात के व्युत्क्रमानुपाती होता है। तो यह इस प्रकार व्यक्त किया जाता है।

\overrightarrow{F} = – \frac{K}{r^n} \widehat{r} …(5)

अतः केन्द्रीय बल एक संरक्षी बल होता है। अतः उपर्युक्त केन्द्रीय बल के अन्तर्गत कण की स्थितिज ऊर्जा

U = \int^r_∞ \overrightarrow{F} .d \overrightarrow{r} = – \int^r_∞ \frac{K}{r^n} \widehat{r} .d \overrightarrow{r}

या U = – \int^r_∞ \frac{K}{r^n} a ….(6)

या U = – \frac{K}{(n - 1)} . \frac{1}{(r^n - 1)}

अतः समीकरण (5) व (6) से स्पष्ट है, की

1.यदि n = – 1 हों, तो \overrightarrow{F} = – Kr \widehat{r} तथा U = \frac{1}{2} Kr2 अर्थात् कण की गति सरल आवर्त गति होगी।

2.यदि n = 2 हो, तो \overrightarrow{F} = – \frac{K}{r^2} \widehat{r} तथा U = – \frac{K}{r}

इसे व्युत्क्रम वर्ग नियम बल कहते हैं। इस बल के अन्तर्गत यदि K > 0 अर्थात् बल आकर्षणात्मक है। तो कण की गति वृत्तीय अथवा दीर्घवृत्त कक्ष में होगी। तथा यदि K < 0 अर्थात् बल प्रतिकर्षणात्मक है। तो कण की गति अतिपरवलयाकार मार्ग में होगी।

और पढ़ें…न्यूटन के गति के नियम

उदाहरण – केन्द्रीय बलों के उदाहरण ।

  • यदि दोनों पिंडों के बीच में लगने वाला गुरुत्वा केन्द्र बल,
  • यदि दो आवेशित कणों के बीच लगने वाला स्थिर वैद्युत बल, तथा
  • यदि एक सिरे पर रूका हुआ स्प्रिंग के दूसरे सिरे पर लटके पिण्ड की सरल आवर्त गति में लगने वाला प्रत्यानयन बल।

केन्द्रीय बल के कारण कोणीय संवेग संरक्षित रहता है

यदि कोई केन्द्रीय बल सदैव एक स्थिर बिन्दु की और अथवा उससे दूर की ओर लक्षित रहता है। अतः इसका उस बिन्दु के परितः आघूर्ण नहीं हो सकता। इस प्रकार जब कोई कण केन्द्रीय बल के अंतर्गत गति करता है। तो उस पर कोई बल आघूर्ण नहीं लगता है। अतः “कण का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है।”

उदाहरण के लिए – सूर्य के कारण पृथ्वी का कोणीय संवेग एंव हाइड्रोजन परमाणु में नाभिक के कारण इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग संरक्षित (नियत) रहता है।

माना कोई कण केन्द्रीय बल के अन्तर्गत गतिमान है। तो
\overrightarrow{F} = F(r) \widehat{r}

कण पर लगने वाला बल आघूर्ण
\overrightarrow{ι} = \overrightarrow{r} × \overrightarrow{F}
\overrightarrow{ι} = \overrightarrow{r} × F(r) \widehat{r}

\overrightarrow{ι} = \overrightarrow{r} × F(r)( \frac{ \overrightarrow{r}}{r} ) = 0

{चूंकि \overrightarrow{r} × \overrightarrow{r} = 0}

यदि कण का कोणीय संवेग J लें, तो
\overrightarrow{ι} = \frac{d \overrightarrow{J}}{dt} = 0

या \footnotesize \boxed{ \overrightarrow{J} = नियतांक}

अतः इस प्रकार “केंद्रीय बल के कारण कण का कोणीय संवेग संरक्षित (नियत) रहता है”

Note – सम्बन्धित प्रश्न पूछे जाते हैं –
Q.1 केन्द्रीय बल के अंतर्गत किसी कण की गति को समझाइए?
Q.2 समझाइए कि केन्द्रीय बल के कारण कोणीय संवेग संरक्षित (नियत) रहता हैं?
Q.3 सिद्ध कीजिए कि यदि केवल केन्द्र लक्षित बल हो, तो कोणीय संवेग सुरक्षित रहता है। उदाहरण दीजिए?
Q.4 केंद्रीय बल की परिभाषा दीजिए? तथा उदाहरण सहित समझाइए कि केंद्रीय बल के अंतर्गत कोणीय संवेग संरक्षित रहता है?

“आशा करते हैं यह लेख आपको पसन्द आया होगा तो इसे अपने दोस्तों में शेयर करें और यदि कोई सवाल या क्योरी हो, तो आप हमें कमेंट्स के माध्यम से बता सकते हैं। हम जल्द ही उसका हल दें देंगे।”

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *