आवोगाद्रो संख्या क्या है, परिभाषा, सूत्र तथा अनुप्रयोग लिखिए | Avogadro’s Law in Hindi

आवोगाद्रो संख्या क्या है

यदि किसी द्रव में लटके कोलाॅइडी कण गैस के समान व्यवहार करते हैं जो कि गुरुत्वीय प्रभाव के अंतर्गत संतुलन की अवस्था में हैं‌। अतः द्रव में उनका घनत्व ऊंचाई के साथ उसी प्रकार बदलता है। जैसे कि वायुमंडल का दाब तुंगता के साथ बदलता है, अर्थात् “यदि किसी गैसों के 1 ग्राम-मोल में अणुओं की संख्या को ही ‘आवोगाद्रो संख्या’ तथा इस नियम को ‘आवोगाद्रो का नियम’ (Avogadro’s Law in Hindi) भी कहते हैं।”

ब्राउनी गति क्या है

वैज्ञानिक ब्राउन ने सन् 1827 में सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा कि द्रव पर पड़े अत्यंत सूक्ष्म कण जैसे परागकण निरंतर अनियमित गति करते रहते हैं। यह प्रयोग द्रव के अणुओं द्वारा आण्विक टक्करों का दृश्य प्रदर्शन है। अतः कणों कि इस गति को ‘ब्राउनीय गति’ (Brownian Motion in Hindi) कहते हैं।

और पढ़ें… ब्राउनियन गति क्या है? आइंस्टीन की व्याख्या कीजिए। (Brownian Motion in Hindi)

आवोगाद्रो संख्या ज्ञात करना

माना कि किसी गैस का एक छोटा सा अवयव तली से ऊंचाई h पर है, जैसे कि चित्र में दर्शाया गया है।

और पढ़ें.. पुनर्योजी शीतलन का सिद्धांत क्या है? लिण्डे का वायु द्रवित्र क्या है। (Regenerative Cooling in Hindi)

आवोगाद्रो संख्या
आवोगाद्रो संख्या

माना कि इसके तल का क्षेत्रफल A है तथा मोटाई dh है तब इस अवयव का द्रव्यमान ρAdh तथा भार ρgAdh होगा, जहां ρ गैस का घनत्व ऊंचाई h पर है।
माना किसी गैस-अवयव के निचले तल पर ऊर्ध्वमुखी दाब P है तथा उपरी तल पर अधोमुखी दाब (P + dP) है। तब अवयव पर लगने वाला ऊर्ध्वमुखी बल PA है। जोकि अधोमुखी बल (P + dP)A तथा अवयव के भार ρgAdh के योग के बराबर है। चूंकि अवयव संतुलन की अवस्था में है।

अतः इस प्रकार परिणामी बल शून्य होना चाहिए, अर्थात्
PA = (P + dP)A + ρgAdh
अथवा
dP = – ρgdh ….(1)
आदर्श गैस के एक ग्राम अणु के लिए, अवस्था समीकरण है,
PV = RT
परंतु V = \frac{1}{ρ} , यहां M गैस का अणु-भार है। यदि गैस के एक अणु का द्रव्यमान m हो तथा आवोगाद्रो संख्या N हो, तब M = mN अतः V = \frac{mN}{ρ} , इसलिए
P \frac{mN}{ρ} = RT
अथवा
P = \frac{ρRT}{mN} ….(2)
अब समीकरण (1) व (2) से,
\frac{dP}{P} = – \frac{mNg}{RT} dh
यदि द्रव के प्रति एकांक आयतन में अणुओं की संख्या n हो, तो
\frac{dn}{n} = \frac{dP}{P} = – \frac{mNg}{RT} dh

अतः तली पर प्रति एकांक आयतन में कणों की संख्या n0 है, अर्थात् h = 0 पर n = n0 । तब उपर्युक्त समीकरण की सीमाओं n = n0 व n = n तथा h = 0 व h = h के बीच समाकलित करने पर,
\int^{n}_{n_0} \frac{dn}{n} = – \frac{mNg}{RT} \int^h_0 dh
अथवा
loge \frac{n}{n_0} = – \frac{mNg}{RT} h
अथवा
\frac{n}{n_0} = e \frac{mNgh}{RT}
इसलिए
n = n0e \frac{mNgh}{RT} ….(3)

तथा द्रव में लटके कणों पर उत्प्लावन प्रभाव भी विचार में लेकर कण का प्रभावी द्रव्यमान m = V(ρ – ρ’) होगा। यहां V कण का आयतन है, कण ρ का घनत्व है तथा ρ’ द्रव का घनत्व है।
तब समीकरण (3) में m का मान रखने पर,
n = n0e \frac{NV(ρ - ρ')gh}{RT} ….(4)

पेरिन ने इस समीकरण का परीक्षण किया तथा इसका उपयोग आवोगाद्रो संख्या N को ज्ञात करने में किया। इससे
N = \frac{RT}{NV(ρ - ρ')gh} loge \frac{n_0}{n}

पेरिन ने एक द्रव की बूंद में विभिन्न ऊंचाइयों पर लटके कणों कि संख्या को गिना तथा कणों के द्रव्यमान व घनत्व को ज्ञात किया। उन्होंने N का मान 6.8 × 1023 कण/ग्राम-अणु प्राप्त किया ।

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q.1 विवेचना कीजिए कि ब्राउनी गति के प्रायोगिक अध्ययन से किस प्रकार आवोगाद्रो संख्या प्राप्त होती है ?
Q.2 आवोगाद्रो संख्या क्या है ? इसको ज्ञात करने की विधि को समझाइए तथा ब्राउनी गति को भी लिखिए ?

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *