बरखौसेन कसौटी क्या है, दोलन के लिए बार्कहाउजेन की शर्तें क्या है | Barkhausen Criterion in Hindi

बरखौसेन कसौटी क्या है?

बरखौसेन कसौटी एक सिद्धांत है जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में निरंतर दीर्घकालिक दोलनों के लिए आवश्यक शर्तों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। इसका निर्माण जर्मन वैज्ञानिक हेनरिक जॉर्ज बरखौसेन ने किया था। इसमें विशेष रूप से फीडबैक एमप्लीफायरों और ऑक्सिलेटर्स में होता है‌।

यदि एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के निरंतर दोलनों के लिए सर्किट के लूप लाभ के चारों ओर कुल चरण 360° डिग्री (या 2π रेडियन) के एक पुर्णांक गुणक के बराबर होना चाहिए और लूप लाभ एक के बराबर या उससे अधिक होना चाहिए।

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निरंतर दोलनों के लिए बरखौसेन मानदंड क्या है?

यदि दीर्घकालिक दोलनों के लिए बरखौसेन कसौटी की इन शर्तों को पूरा किया जाता है तो इलेक्ट्रॉनिक सर्किट की विशेषताओं द्वारा निर्धारित विशिष्ट आवृत्ति पर निरंतर दोलनों का उत्पादन करेगा। तथा यह बरखौसेन कसौटी इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के डिजाइन और विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण दिशा निर्धारित करता है और फीडबैक एम्पलीफायरों व ऑक्सिलेटर्स की स्थिरता एवं विश्वसनीय संचालन को सुनिश्चित करने में मदद करता है।

दीर्घकालिक दोलनों की शर्त (बरखौसेन कसौटी)

यदि एक पुनः निविष्ट प्रवर्धक पर विचार करते हैं जिसका बिना फीडबैक प्रवर्धक पुनः निविष्ट के प्रवर्धन A है।
अब माना कि पुनः निविष्ट सिग्नल वोल्टेज Eg है और प्रवर्धन की पुनः निविष्ट के साथ निर्गत वोल्टेज E0 है जैसा कि चित्र-1 में दिखाया गया है।

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बरखौसेन कसौटी

माना निर्गत वोल्टेज E0 की भिन्न β को पुनः निविष्ट वोल्टेज पर लगाया जाता है। यदि पुनः निविष्ट धनात्मक है तो प्रवर्धक की वास्तविक पुनः निविष्ट वोल्टेज Eg + βE0 होगी। अतः इस प्रकार पुनः निविष्ट को एम्पलीफायर द्वारा (A) गुना एम्पलीफायर करने के पश्चात प्राप्त निर्गत वोल्टेज है। अर्थात्
(Eg + βE0)A = E0
या AEg + βAE0 = E0
या AEg = E0 – βAE0
या AEg= E0(1 – βA)
अथवा Eg = \frac{E_0(1 - βA)}{A}
यदि βA = 1 हो, तो
\footnotesize \boxed{ E_g = 0 }

अर्थात् बिना फीडबैक एम्पलीफायर बाह्य प्रत्यावर्ती पुनः निविष्ट वोल्टेज के कार्य करेगा। इस प्रकार यह प्रक्रम स्व-दीर्घकालिक बन जाता है और एम्पलीफायर एक दोलित्र की भांति कार्य करता है।

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दोलन के लिए बरखौसेन की शर्तें क्या है?

दीर्घकालिक दोलनों के लिए बरखौसेन कसौटी की शर्तें निम्न है – माना यदि βA = 1 हो, तो
β = \frac{1}{A} अथवा βA = 1
यहां βA को लूट लाभ अथवा पुनः निविष्ट गुणक कहते हैं।

यदि पुनः निविष्ट रूप इस प्रकार लगाया जाता है कि पुनः निविष्ट सिग्नल बाह्य रूप से लगाए गए निविष्ट सिग्नल से विपरीत कला में है, तो
Eg = \frac{E_0(1 + βA)}{A}
अर्थात् लूप लाभ (βA = 1) के एकांक होने का प्रतिबंध को “बरखौसेन कसौटी (Barkhausen Criterion in Hindi)” कहलाता है। अतः इस प्रतिबंध का अर्थ यह है कि |βA| = 1 और βA की कला में शून्य है या 360° का कोई पूर्णांक है।

इस प्रकार, पुनः निविष्ट एम्पलीफायर में दोलनों के लिए मौलिक प्रतिबंध निम्नलिखित है –
(i). लूप लाभ का परिमाण एक होना चाहिए।
(ii). पुनः निविष्ट (फीडबैक) एम्पलीफायर पुनरूत्पादन प्रकार का होना चाहिए।

इलेक्ट्रॉनिक दोलित्र क्या होता है (electronic oscillator in Hindi)

यह एक ऐसी विद्युत युक्ति है जो दिष्ट विद्युत शक्ति को इच्छित आवृत्ति की प्रत्यवर्ती वोल्टेज (अथवा धारा) में बदल देती है। सैद्धांतिक रूप में दोलित्र एक धनात्मक फीडबैक प्रवर्धक है जिसका वोल्टेज लाभ अनन्त होता है।

स्थायी दोलनों के लिए बरखौसेन कसौटी

धनात्मक फीडबैक के साथ किसी प्रवर्धक का वोल्टेज लाभ होता है।
Afb = \frac{A}{1 - Aβ} …(1)
यहां A बिना फीडबैक वोल्टेज लाभ तथा β फीडबैक निष्पत्ति है।
यदि Aβ = 1 तब Afb = ∞ (अनन्त) …(2)
अर्थात् प्रवर्धक बिना बाह्य प्रत्यावर्ती इनपुट वोल्टेज के ही कार्य करता रहता है। यह प्रक्रिया स्वतः कार्य करती रहती है। तथा प्रवर्धक दोलित्र की भांति कार्य करने लगता है। अतः स्थायी दोलनों के लिए आवश्यक प्रतिबन्ध,
Aβ = 1 अथवा β = \frac{1}{A} …(3)
यही “स्थायी दोलनों के लिए बरखौसेन कसौटी है।” इसमें यह प्रतिबंध संलग्न है कि प्रवर्धक तथा फीडबैक परिपथ द्वारा उत्पन्न नेट कला परिवर्तन ‘शून्य’ रहना चाहिए।

Note – सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 दीर्घकालिक दोलनों के लिए क्या शर्तें हैं? दीर्घकालिक दोलनों के लिए बरखौसेन कसौटी की व्याख्या कीजिए।
Q.2 बरखौसेन कसौटी क्यों महत्वपूर्ण है? दीर्घकालिक दोलनों के लिए बरखौसेन कसौटी की शर्तें क्या है? समझाइए।
Q.3 इलेक्ट्रॉनिक दोलित्र क्या होता है? स्थायी दोलनों के लिए बरखौसेन कसौटी की विवेचना कीजिए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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