ब्राउनियन गति क्या है, आइंस्टीन की व्याख्या कीजिए | Brownian Motion in Hindi

ब्राउनियन गति क्या है

वनस्पतिशास्त्री प्रो. ब्राउन में सन् 1827 ई. में उच्च क्षमता वाले सूक्ष्मदर्शी परागकणों के अध्ययन के समय पाया की जल के ऊपर पड़े परागकण विभिन्न दिशाओं में अनियमित रूप से स्वच्छन्द गति कर रहे हैं। कलिल विलयन का अध्ययन करने पर उन्होंने पाया कि कलिल कण भी विलयन में कणों के साथ लगातार इधर-उधर अनियमित गति कर रहे हैं। प्रत्येक कलिल कण भी चक्रण गति करता है। कभी वह विलयन में डूबता है। और कभी तैरता है, किंतु फिर भी कण विरामावस्था में नहीं आ पाता। कण का द्रव्यमान तथा आकार जितना कम होता है। अर्थात् कण जितना सूक्ष्म होता है। उसकी चक्रण व रैखिक गति उतनी ही अधिक होती है। अर्थात् पदार्थ के कणों की इस अनियमित गति को “ब्राउनियन गति (Brownian Motion in Hindi)” कहते हैं।

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ब्राउनियन गति की आइंस्टीन की व्याख्या

आइंस्टीन ने ब्राउनी कणों की चाल को अनियमित माना तथा आइंस्टीन के अनुसार, तरल माध्यम में लटके यह कण अणुओं के ऊष्मीय प्रक्षोभ में भी भाग लेते हैं। यह कण लगातार चारों ओर से अणुओं से टकराते हैं। चूंकि कणों का आकार अतिसूक्ष्म (यधपि अणुओं के आकार से बड़ा) होता है। अतः किसी कण पर प्रतिक्षण एक ओर से टकराने वाले अणुओं की संख्या उसके दूसरे और से टकराने वाले अणुओं की संख्या के ठीक बराबर नहीं हो पाती है। अतः प्रत्येक कण पर हर क्षण एक असंतुलित बल किसी-न-किसी दिशा में कार्य करता रहता है। इसी बल के कारण ब्राउनी कण इधर-उधर अनियमित गति करते रहते हैं।

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ब्राउनियन गति
ब्राउनियन गति

आइंस्टीन के अनुसार, ब्राउनी कण अपनी अनियमित गति के कारण माध्यम में विसरित हो जाते हैं। अतः ब्राउनियन गति का संबंध विसरण गुणांक से होना चाहिए ।
आइंस्टीन ने “विसरण गुणांक” (D) का मान दो प्रकार से ज्ञात किया।
1.ब्राउनी कणों की अनियमित गति के कारण, तथा
2.विलयन के विभिन्न भागों में सान्द्रता के कारण उत्पन्न परासरण दाब के अंतर के कारण।

आइंस्टीन ने उपर्युक्त दोनों प्रकार से प्राप्त विसरण गुणांक को समान रखकर ब्राउनियन गति के नियम अनुसार अध्ययन किया।

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1.ब्राउनियन कणों की अनियमित गति के कारण

माना विलयन में सभी जगह अणुओं की सांद्रता समान नहीं होती है। माना यदि अक्ष के अनुदिश सांद्रण प्रवणता \frac{dn}{dx} है। माना प्रत्येक कण में ι समय में ∆ विस्थापन उत्पन्न हो रहा है। माना अनुप्रस्थ काट ‘A’ के बेलन के दोनों सिरे M व N एक-दूसरे से ∆ दूरी पर स्थित है तथा बेलन के X-अक्ष के अनुदिश है।
माना यदि बेलन के सिरे M व N पर अणुओं की सांद्रता क्रमशः n1 व n2 है। तब सतह M से ι समय में दाई ओर जाने वाले कणों की संख्या = \frac{1}{2} n1.∆A

इसी प्रकार सतह N से ι समय में बाई ओर से जाने वाले कणों की संख्या = \frac{1}{2} n2.∆A

अतः बेलन के मध्य बिंदु से दाई ओर जाने वाले कणों की संख्या = \frac{1}{2} (n1 – n2).∆A

अब यदि विसरण गुणांक की परिभाषा से, मध्य सतह से गुजरने वाले कणों की संख्या = – D. \frac{dn}{dx} ι.A
इसलिए
\frac{1}{2} (n1 – n2).∆A = – D \frac{dn}{dx} ι.A
या \frac{1}{2} (- ∆ \frac{dn}{dx} )∆A = – D \frac{dn}{dx} ι.A
{चूंकि – \frac{dn}{dx} = \frac{(n_1 - n_2)}{∆} }
या D = \frac{∆^2}{2ι} ….(1)

2.विलियन के परासरण दाब के कारण

माना सतह M व N पर परासरण दाब क्रमशः P1 व P2 है। अतः गैस नियम से, P1 = n1kT तथा P2 = n2kT
इस दाबान्तर के कारण बेलन पर X-अक्ष दिशा में कार्यरत बल
(P1 – P2)A = (n1 – n2)kTA
यदि बेलन में कणों की औसत सांद्रता ‘n’ लें, तो यह बल बेलन में nA∆ कणों पर कार्य करेगा। अतः किसी एक कण पर लगने वाला बल
F = ( \frac{(n_1 - n_2)}{n} ) \frac{kT}{∆} = – \frac{kT}{n} ( \frac{dn}{dx} )
यदि प्रत्येक कण को r त्रिज्या का एक गोला मानें लें, तो प्रत्येक कण पर कार्यरत श्यानबल
F = 6πηrv
अतः
6πηrv = – \frac{kT}{n} ( \frac{dn}{dx} )
या nv = – \frac{kT}{6πηr} ( \frac{dn}{dx} )

उपर्युक्त व्यंजक एकांक क्षेत्रफल से प्रतिसेकण्ड दाई और गुजरने वाले कणों की संख्या को प्रदर्शित करता है। अतः विसरण गुणांक की परिभाषा से,
\frac{kT}{6πηr} ( \frac{dn}{dx} ) = – D \frac{dn}{dx}
या D = \frac{kT}{6πηr} = \frac{RT}{N} . \frac{1}{6πηr} ….(2)

अतः समीकरण (1) व (2) की तुलना करने पर,
\frac{∆^2}{2ι} = \frac{RT}{N} . \frac{1}{6πηr}
या ∆2 = \frac{RT}{N} . \frac{1}{3πηr} .ι ….(3)

अर्थात् उपर्युक्त सूत्र की सहायता से पैरीन ने आवोगाद्रो संख्या ‘N’ का मान ज्ञात किया। यहां N का यह मान, अन्य प्रयोगों से प्राप्त मान के तुल्य ही होता है।

Note – सम्बन्धित प्रश्न
Q. 1 ब्राउनियन गति से आप क्या समझते हैं? आवोगाद्रो संख्या प्राप्त करने के लिए आइंस्टीन ने इसकी किस प्रकार व्याख्या की?
Q. 2 ब्राउनियन गति की आइंस्टीन की व्याख्या को स्पष्ट कीजिए? तथा ब्राउनियन गति की परिभाषा भी दीजिए?

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