कैण्टीलीवर क्या है, स्वतन्त्र सिरे पर अवनमन का व्यंजक ज्ञात करों | cantilever in Hindi

कैण्टीलीवर क्या है

“यदि एक क्षैतिज दण्ड जिसका एक सिरा कसा हो और दूसरा स्वतंत्र सिरा भारित किया गया हो, तो वह कैण्टीलीवर (Cantilever in Hindi) कहलाता है।” अर्थात्

जैसा की चित्र में दिखाया गया है कि एक क्षैतिज दण्ड GH का सिरा G कसा हुआ है तथा दूसरे सिरे H पर बल भार के रूप में W = Mg लगाया गया है। उपर्युक्त बल के कारण दण्ड का सिरा नीचे झुक जाता है तथा दण्ड में बंकन उत्पन्न हो जाता है जिसके कारण छड़ में वक्रता आ जाती है। अतः चित्र से स्पष्ट है कि वक्रता क्लैम्प सिरे पर शून्य तथा स्वतंत्र सिरे पर अधिकतम होती है।

इसे भी पढ़ें.. सिरों पर आधारित व मध्य में भारित दण्ड

कैण्टीलीवर
कैण्टीलीवर

कैण्टीलीवर के स्थिर सिरे पर अवनमन का व्यंजक

माना कि एक क्षैतिज दण्ड GH है। जिसकी लंबाई l है। इसका एक सिरा कसा है। और दण्ड के स्वतंत्र सिरे पर भार Mg लटकाया गया है। जिससे H सिर झुककर H’ पर आ जाता है। माना कि दण्ड के तल पर स्थित बिंदु P, G से x दूरी पर है। तथा यहां पर ‘y दण्ड का अवनमन’ है। अतः इस पर भार W के कारण लगने वाला आघूर्ण = W(l – x) होगा।
सन्तुलन की अवस्था में, बंकन-आघूर्ण बाहरी बल युग्म के आघूर्ण के बराबर होगा। अर्थात्
\frac{YI_g}{R} = W(l – x) ….(1)

यहां पर ‘Ig‘ ज्यामितीय जड़त्व आघूर्ण तथा R झुकी हुई दण्ड की वक्रता त्रिज्या है। R का मान निम्न सूत्र से दिया जा सकता है।

R = \frac{[1 + (dy/dx)^2]^3/2}{(d^2y/dx^2)}

यह क्षैतिज से दण्ड का झुकाव \frac{dy}{dx} बहुत कम है, तो
\frac{dy}{dx} << 1
अर्थात् \frac{1}{R} = \frac{d^2y}{dx^2} ….(2)

समीकरण (1) व (2) से,
YIg \frac{d^2y}{dx^2} = W(l – x)

अर्थात् \frac{d^2y}{dx^2} = \frac{W}{YI_g} (l – x) ….(3)

अतः समीकरण (3) का समाकलन करने पर,

\frac{dy}{dx} = \frac{W}{YI_g} (lx – \frac{x^2}{2} ) + C1 ….(4)

यहां C1 समाकलन नियतांक है।
यदि कसे सिरे G पर y = 0, x = 0 तथा \frac{dy}{dx} = 0 हैं। तो अतः समीकरण (4) से,

0 = \frac{W}{YI} (0 – 0) + C1 या C1 = 0

अतः समीकरण (4) से,
\frac{dy}{dx} = \frac{W}{YI_g} (lx – \frac{x^2}{2} ) ….(5)

अतः समीकरण (6) का दोबारा समाकलन करने पर,
y = \frac{W}{YI_g} ( \frac{lx^2}{2} \frac{x^2}{6} ) + C2 ….(6)

यहां C2 एक अन्य समाकलन का स्थिरांक है। यदि कसे सिरे G पर x = 0, y = 0 हैं, तो W = Mg रखने पर,
अतः समीकरण (6) से,

0 = \frac{Mg}{YI_g} (0 – 0) + C2 या C2 = 0, अतः

\footnotesize \boxed{ y = \frac{Mg}{YI_g} ( \frac{lx^2}{2} - \frac{x^3}{6})} ….(7

यही ” कैण्टीलीवर के स्थिर सिरे से x दूरी पर अवनमन का व्यंजक कहलाता है।

और पढ़ें.. भौतिक नियमों की प्रकृति क्या है

और पढ़ें.. दृढ़ पिण्डों का सन्तुलन क्या है

कैण्टीलीवर के स्वतंत्र सिरे पर अवनमन का व्यंजक

अब यदि दण्ड के स्वतंत्र सिरे पर x = l , तो y = δ अतः

δ = \frac{Mg}{YI_g} ( \frac{l^3}{2} \frac{l^3}{6} )

\footnotesize \boxed{ δ = \frac{Mgl^3}{3YI_g}} ….(8)

“यही कैण्टीलीवर के स्वतंत्र सिरे पर अवनमन का व्यंजक कहलाता है।

1.यदि दण्ड आयताकार है तो उसके लिए अवनमन –
Ig = \frac{bd^3}{12}

अर्थात् समीकरण (8) में Ig का मान रखने पर,

\footnotesize \boxed{ δ = \frac{4Mgl^3}{Ybd^3}} ….(9)

जहां b तथा d दण्ड की चोड़ाई तथा मोटाई है।

2.यदि दण्ड बेलनाकार है। तो अवनमन –

Ig = \frac{πr^4}{4}

अर्थात् समीकरण (8) में Ig का मान रखने पर,

\footnotesize \boxed{ δ = \frac{4Mgl^3}{3Yπr^4}} ….(10)

Note – कैण्टीलीवर संबंधित प्रश्न –
Q.1 एक सिरे पर कसी हुई तथा दूसरे सिरे पर भार लटकाने में किसी समान क्षैतिज छड़ के अवनमन के लिए व्यंजक स्थापित करो?
Q.2 स्वतंत्र सिरे पर भारित कैण्टीलीवर के स्थिर सिरे से ‘x’ दूरी पर अवनमन का व्यंजक, कैण्टीलीवर के द्रव्यमान को नगण्य मानते हुए ज्ञात कीजिए?
Q.3 कैण्टीलीवर क्या है। कैण्टीलीवर के स्वतंत्र सिरे पर अवनमन के लिए व्यंजक स्थापित कीजिए?

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *