पूँजीवादी और औद्योगिक क्रांति, NCERT सार संग्रह | Capitalism and Industrial Revolution in Hindi

हेलो दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको संक्षिप्त इतिहास NCERT सार संग्रह “महेश कुमार वर्णवाल” Book का अध्याय “पूँजीवादी और औद्योगिक क्रांति” (Capitalism and Industrial Revolution in Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। इसमें हम आपको पूंजीवाद एवं औद्योगिक क्रांति क्या है?, औद्योगिक क्रांति में पूंजीवाद ने क्या किया? एवं औद्योगिक क्रांति सर्वप्रथम कब और कहाँ प्रारंभ हुई? को विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाएंगे, तो आप इस आर्टिकल को अंत तक अवश्य पढ़ें।

पूँजीवादी और औद्योगिक क्रांति, पूँजीवाद का उदय

  • 15वीं सदी से यूरोप में जो नई व्यवस्था उभर रही थी, उसे पूँजीवाद कहा जाता है।
  • पूँजीवाद के अन्तर्गत जिन उपकरणों और साधनों से वस्तुओं का उत्पादन होता है उन पर व्यक्तिगत स्वामित्व होता है और उत्पादन लाभ कमाने के लिए होता है।
  • इस व्यवस्था के अंतर्गत मजदूरों के पास कुछ नहीं होता। वे सिर्फ मजदूरी के लिए काम करते हैं।
  • पूँजीवाद के अंतर्गत संपदा के स्वामियों को पूँजीपति कहते हैं। वे अपनी संपदा को केवल जमा या केवल उपभोग में नहीं लाते बल्कि लाभ कमाने के लिए उसका निवेश करते हैं।
  • वस्तुओं का उत्पादन बाजार में बेचकर मुनाफा कमाने के लिए होता है।

औद्योगिक क्रांति

  • अधिक लाभ कमाने के लिए कम लागत पर अधिक माल तैयार करने की आकांक्षा के कारण औद्योगिक क्रांति आरम्भ हुई और पूँजीवाद का अधिक विकास हुआ।
  • इंग्लैण्ड में औद्योगिक क्रांति का प्रारम्भ लगभग सन् 1750 में हो चुकी थी।
    🔺औद्योगिक क्रान्ति के पश्चात् वस्तुओं के उत्पादन में मनुष्यों और जानवरों द्वारा किये जाने वाले काम का कुछ भाग मशीनें करने लगीं। इसलिए हम कह सकते हैं, कि औद्योगिक क्रांति मशीन युग का प्रारंभिक दौर था।
  • सन् 1750 को बाद बहुत तेजी से नए-नए आविष्कार किए गए और इनका स्वरूप ऐसा था, कि इनके कारण लोगों के जीवन शैली में बहुत तेजी से परिवर्तन आया।
  • औद्योगिक क्रांति ने दुनिया भर में जीवन पद्धति और विचार में परिवर्तन कर दिया।
  • 18वीं सदी में घरेलू पद्धति पुरानी पड़ गई। इसकी जगह एक नई व्यवस्था अस्तित्व में आने लगी जिसको कारखाना पद्धति कहा जाता है।
  • साधारण उपकरणों, पशुओं और हाथ की जगह क्रमशः नई मशीनों और भाप की शक्ति का इस्तेमाल होने लगा।
  • कई नए नगरों का आविर्भाव हुआ। कारीगर और बेदखल किसान काम के लिए नगरों में पहुंचे।
  • अब कारखानों में उत्पादन होने लगा (पहले यह घर की कार्यशाला में होता था)। यह उत्पादन मशीनों से हो रहा था।जबकि इसके पहले मशीनों की जगह साधारण उपकरण काम में लाए जाते थे। उत्पादन के साधनों के मालिक और प्रबंधक पूँजीपति लोग थे, ऐसे लोग जिनके पास अधिक उत्पादन में लगाने के लिए पैसा था।

इंग्लैण्ड में क्रांति का प्रारंभ

  • 18वीं सदी में इंग्लैण्ड में औद्योगिक क्रांति के लिए परिस्थितियां बहुत अनुकूल थीं।
  • समुद्र पार के व्यापार के जरिए, जिसमें दासों का व्यापार भी शामिल है, इंग्लैण्ड ने पर्याप्त लाभ कमाया। इस लाभ में उसको आवश्यक पूँजी उपलब्ध हुई।
  • यूरोपीय देशों के व्यापार की प्रतिद्वन्दिता में इंग्लैण्ड ऐसी शक्ति के रूप में उभरा जिसका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं था।
  • 18वीं सदी में बाड़ा आंदोलन आरंभ हो गया था। बड़े जमींदारों ने गाँव में अलग-अलग फैली हुई अपनी सभी भूमि को पट्टियों की चकबंदी इस प्रकार की कि उनकी सभी भूमि एक साथ एकत्रित हो जाए।
  • इस प्रक्रिया में उन्होंने छोटे किसानों की भूमि की टुकड़ियाँ अपनी भूमि में मिला ली थीं और छोटे किसानों को भूमिहीन कर दिया था।
  • इस प्रकार भूमिहीन बेरोजगारों की एक विशाल संख्या हो गई। इस कारण कारखाने में काम करने के लिए मजदूरों की कमी नहीं रही।
  • 17वीं सदी की क्रांति के फलस्वरूप एक स्थायी सरकार की स्थापना हो चुकी थी।
  • इंग्लैण्ड के पास लोहा और कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधन काफी मात्रा में विद्यमान थे जो उद्योगों के विकास के लिए आवश्यक थे।
  • लोहा और कोयला दोनों समीप में उपलब्ध थे। इससे इंग्लैण्ड बहुत-सी कठिनाइयों से बच गया, जिनका सामना अन्य देशों को करना पड़ा।
  • इंग्लैण्ड के जहाज-उद्योग का भी बहुत विकास हो चुका था, इसलिए उसे वस्तुओं के लाने, ले जाने में कोई कठिनाई नहीं हुई।

कपड़ा उद्योग में क्रांति

  • 18वीं सदी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी सूती कपड़ा भारत से इंग्लैण्ड प्रेसित करती थी। शीघ्र ही इसका परिणाम यह हुआ कि इंग्लैण्ड में कालीकट के केलिका कपड़े, ढाका की मलमल और कश्मीर के शालों की माँग बहुत बढ़ गई।
  • हारग्रीब्ज ने एक मशीन का आविष्कार किया, जिससे तेजी से सूत कातना संभव हो गया।
  • आर्कराइट ने इस मशीन में कुछ ऐसे परिवर्तन किए, जिससे इसे पानी की शक्ति से चलाना संभव हो गया।
  • कुछ समय पश्चात् क्रांप्टन ने ऐसी मशीन का आविष्कार किया, जिसमें हारग्रीब्ज और आर्कराहट दोनों मशीनों के लाभ मिलने लगा।
  • 1785 ई. में कार्टराइट ने शक्ति से चलने काले करघे का आविष्कार किया। इस मशीन के लिए घोड़े और बैल का प्रयोग किया जा सकता था।
    🔺सन् 1793 में एली व्हिटनी नाम के एक अमेरीकी ने कपास ओटने की मशीन का आविष्कार किया। इस मशीन की मदद से उतने ही समय में हाथ की तुलना में तीन सौ गुना ज्यादा मात्रा में कपास ओट कर रुई तैयार की जा सकती थी।

भाप से चलने वाला इंजन

  • सन् 1760 में इंग्लैण्ड में लगभग 20 लाख किलोग्राम कपास का आयात किया, सन् 1815 में 5 करोड़ किलोग्राम, सन् 1840 में 25 करोड़ किलोग्राम कपास आयात किया गया।
  • कपास के आयात में इतनी जबर्दस्त बढ़ोत्तरी संभव नहीं हुई होती यदि सन् 1769 में जेम्स वाट भाप के इंजन का आविष्कार न करते। इस आविष्कार ने उत्पादन के क्षेत्र में क्रांति ला दी।

यातायात में सुधार

  • सन् 1814 में जॉर्ज स्टीफेंसन ने भाप से चलने वाले इंजन का विकास किया। इस इंजन का प्रयोग खानों से बंदरगाहों तक रेलमार्ग से कोयला पहुँचाने के लिए किया गया।
  • सन् 1830 में पहली रेलगाड़ी यात्रियों तथा सामानों को लेकर लिवरपूल में मैनचेस्टर आने-जाने लगी।
  • लॉर्ड डलहौजी के समय में 1853 ई. में भारत में पहली रेल लाइन बिछाई गई। कच्चे माल और कारखाने में बने माल को ढोने की जरूरत के कारण, इंग्लैण्ड और दूसरे देशों में नहरें बनाई गई और सड़‌कों का विकास किया गया। पक्की सड़कें बनाने की प्रणाली मैकएडम ने निकाली।
  • जलमार्गों से यातायात की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए जो अपेक्षाकृत काफी सस्ता पड़ता था, इंग्लैण्ड ने नदियों और झीलों को नहरों से जोड़‌ना आरंभ किया। यातायात के साधनों में सुधार होने से मनुष्य, सामान और संदेश सबको लाने व ले जाने में बहुत आसानी हो गई।

कृषि में क्रांति

  • खेती के नए उपकरणों, जैसे जमीन तोड़ने के लिए इस्पात का हल और हेंगी, बीज बोने एवं नाली खोदने की मशीन निर्मित की गई और कुदाली का स्थान घोड़े से खींची जाने वाली मशीन ने ले लिया। फसल काटने और दौनी करने के लिए भी मशीनों का आविष्कार किया गया।
  • किसान जमीन में पहले की अपेक्षा अधिक मात्रा में खाद का प्रयोग करने लगे और भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए फसलों को अदल-बदल कर बोने लगे।
  • इस पद्धति के अंतर्गत भूमि के किसी टुकड़े पर फसलें अदल-बदल कर लगाई जाती हैं, जैसे कि पहले गेहूँ और जौ, फिर तिनपतिया घास या मक्का-ज्वार, फिर गेहूँ। फसल बदलना बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुआ, क्योंकि भिन्न-भिन्न फसलें भूमि से भिन्न-भिन्न प्रकार की खुराक लेती हैं।
  • इंग्लैंड के भूस्वामी भी अपने फार्मों का आकार बढ़ाने लगे। बाड़ा आंदोलन के फलस्वरूप पहले ही भूमि की चकबंदी हो चुकी थी।

✴️ औद्योगिक क्रान्ति के दौरान हुए अविष्कार

अविष्कारअविष्कारकवर्ष
तेज चलने वाला शटलजॉन1733 ई.
स्पिनिंग जेनीजेम्स हरग्रीब्ज1765 ई.
स्पिनिंग जेनी (पानी की शक्ति में चालित)रिचर्ड आर्कराइट1767 ई.
स्पिनिंग म्यूलक्राम्पटन1776 ई.
घोड़ा द्वारा चलाए जाने वाले करघाकार्ट राइट…..
सेफ्टी लैम्पहम्फ्री डेवी1815 ई.

औद्योगीकरण के परिणाम

✴️ गाॅंव से शहर की और -• औद्योगिक क्रांति से पहले संसार की अधिकांश जनता गाँवों में रहती थी और कृषि पर निर्भर थी। औद्योगीकरण के विकास के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई।

  • शहर आर्थिक जीवन के केन्द्र बन गए। जो नए शहर या कस्बे बसे वे राजनीतिक और प्रशासनिक केन्द्र होने की अपेक्षा उद्योगों के केंद्र के रूप में अधिक महत्व रखते थे।
  • अब जनता बड़ी संख्या में शहरों में रहने लगी। इन शहरों में हजारों मनुष्य औद्योगिक कारखानों में काम करते थे। नगरों में अधिकांश जनसंख्या के एकत्र हो जाने के कारण मकान, स्वास्थ्य और सफाई की समस्याएँ पैदा हुई।
  • इंग्लैण्ड में औद्योगीकरण की तेज गति के कारण जीवन की स्थितियों में गिरावट आई। शहर में गंदी बस्तियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई।
  • औद्योगिक क्रांति के कारण विभिन्न देश और उनके लोग एक-दूसरे के करीब आए।
  • इन सब के बावजूद औद्योगिक क्रांति की वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोगों में जागरूकता पैदा हुई, क्योंकि एक देश में होने वाले विकास का असर दूसरे देश में भी होने लगा।

औद्योगिक पूँजीवाद तथा औद्योगिक मजदूर

  • औद्योगिक क्रांति के बाद जो समाज व्यवस्था बनी, उसको औद्योगिक पूँजीवाद कहा जाता है। इस समाज के मुख्य वर्ग थे पूँजीपति अर्थात् उत्पादन के साधनों के मालिक और मजदूर, जो मजदूरी लेकर काम करते थे।
  • पूँजीपतियों के एक छोटे से तबके का, न केवल बड़ी संख्या में उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों के जीवन पर नियंत्रण हो गया बल्कि परोक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से ये लोग समूचे समाज के आर्थिक जीवन को नियंत्रित करने लगे।
  • कुछ लोगों के हाथ में आर्थिक शक्ति केन्द्रित हो जाने के कारण समाज में अत्यधिक असमानता पैदा हुई एवं पूँजीपतियों और बाकी आबादी के बीच गहरी खाई पैदा हुई।
  • औद्योगिक क्रांति ने बड़ी संख्या में ऐसे मजदूरों को जन्म दिया जिनके पास न तो अपनी भूमि थी, न काम करने के लिए अपने उपकरण।
  • ये लोग पूरी तरह मालिक पर निर्भर थे। मालिक की ओर से जो मजदूरी मिलती थी, उनको वह स्वीकार करनी पड़‌ती थी। इसका कारण यह था कि रोजगार की तुलना में मज़दूरों की संख्या प्रायः अधिक थी। यहाँ तक कि खानों में स्त्रियों और बच्चों को काम पर लगाया जाता था, क्योंकि वे कम मजदूरी पर उपलब्ध थे।
  • अक्सर इन लोगों को लगातार 15 से 18 घण्टे काम करना पड़ता था और इसके बीच कोई अवकाश नहीं मिलता था।
  • यदि कोई मालिक किसी कारण किसी मजदूर से नाखुश हो जाए तो वह उसे चाहे तो नौकरी से निष्कासित कर सकता था।
  • मजदूर के सामने और कोई चारा न था। उसे मालिक की शर्तें माननी पड़ती थीं, नहीं तो बेरोजगार होकर उसे घर पर बैठना पड़ता था।
  • यदि काम करते समय किसी दुर्घटना में चोट लग जाती तो मालिक उसे किसी प्रकार की सहायता नहीं देता था। मजदूरों के पास ऐसे समय में जीवन यापन के कोई साधन नहीं होता था।

✴️ उद्योगों में काम करने वाले मजूदरों की स्थिति सुधारने के प्रयत्न -• इंग्लैंड में पहला कारखाना कानून अधिनियम 1802 ई. में पारित हुआ। इसके अंतर्गत बालकों के लिए काम करने का अधिकतम समय बाहर घंटे प्रतिदिन निश्चित किया गया।

  • सन् 1819 ई. के कानून के अंतर्गत 9 वर्ष से कम उम्र के बालकों को कारखानों में काम करने पर रोक लगा दी गई। कुछ समय बाद अन्य कानून पारित हुए, जिनके अंतर्गत खानों में स्त्रियों और बालकों के काम करने पर नियंत्रण लगाया गया।
    🔺इंग्लैण्ड में उधोगों में काम करने वाले मजदूरों को वोट देने का अधिकार नहीं था। 19वीं सदी के चौथे और पांचवें दशकों के दौरान मजदूरों को वोट देने का अधिकार दिलाने के लिए एक महान जन आंदोलन, आरंभ हुआ जिसे चार्टिस्ट आंदोलन कहा जाता है।
  • 1867, 1882, 1918 और 1929 ई. के कानूनों के अंतर्गत इंग्लैंड के सभी नागरिकों को मताधिकार मिल गया।
  • इंग्लैंड के मजदूरों को मजदूर संघ बनाने का ही नहीं, अपितु अपनी माँगे मनवाने के लिए मालिकों को हड़ताल द्वारा विवश करने का भी अधिकार मिल गया था।
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *