कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO क्या है, कार्यविधि, चित्र व उपयोग | Cathode Ray Oscilloscope in Hindi

हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में हमनें “कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO” (cathode ray oscilloscope in Hindi) के बारे में जानकारी दी है। इसमें हमनें कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO की परिभाषा, सिद्धांत, कार्यविधि, CRO का ब्लॉक डायग्राम, CRO स्क्रीन पर तरंग रूप चित्रण का बनना एवं CRO के उपयोग को समझाया है। यहां कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO को विस्तार पूर्वक सरल भाषा में समझाया गया है, तो आप इस अध्याय को पूरा जरूर पढ़ें।

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कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO क्या है (what is CRO in Hindi)

यह एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो विभिन्न विद्युत संकेतों को मापने और विश्लेषण को दिखाने के लिए उपयोग होता है। यह इलेक्ट्रॉन विकिरण और इलेक्ट्राॅस्टेटिक प्रभाव के सिद्धांतों पर कार्य करता है।

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO में, एक CRT (कैथोड रे ट्यूब) लगा होता है। इसे CRO का हृदय भी कहा जाता है इससे इलेक्ट्रॉन तरंग (CRT) की मदद से इलेक्ट्रॉन बीम उत्पन्न की जाती है। इस बीम को एक विद्युत क्षेत्र से गुजारा जाता है। विभिन्न विद्युत संकेतों के प्रभाव से बीम में विद्युतीय् बदलाव होता है।

इसके बाद इस बीम को एक वस्तुग्राही स्क्रीन पर प्रकाशित किया जाता है। यह स्क्रीन एक फाॅस्फोर-लेपित स्क्रीन से ढका होता है, जो बीम के संचार के परिणाम स्वरूप प्रकाशित होता है। यह फाॅस्फोर लेपित स्क्रीन प्रकाश को अपनी पिछली स्थिति में स्थानांतरित करता है जिससे एक स्थिर चित्र प्राप्त होता है।

CRO का ब्लॉक डायग्राम (block diagram of CRO in Hindi)

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO का ब्लॉक आरेख चित्र-1 में दर्शाया गया है। इसके मुख्य भाग निम्न प्रकार हैं –
(i). कैथोड किरण नलिका (Cathode Ray Tube) CRT,
(ii). ऊर्ध्वाधर प्रवर्धक (Vertical Amplifier),
(iii). समयाधार परिपथ (Time-Base Circuit),
(iv). क्षैतिज प्रवर्धक (Horizontal Amplifier),
(v). शक्ति पूर्ति परिपथ (Power Supply Circuit)।

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कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO
चित्र-1. Block Diagram of CRO in Hindi

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO के मूल घटकों में CRT के भी मुख्य तीन भाग शामिल होते हैं, जो इस प्रकार हैं –
(i). इलेक्ट्रॉन गन (Electron Gun),
(ii). विक्षेपण प्लेटें (Deflection Plates),
(iii). प्रतिदीप्ति स्क्रीन (Fluorescent Screen)।

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO की संरचना

यह कैथोड किरणों के गुणों पर आधारित एक ऐसा यंत्र है जिसकी सहायता से वैद्युत तरंगों की आकृति पर्दे पर स्पष्ट देखी जा सकती हैं। वैद्युत तरंगों की आकृति को ही लिस्याजु चित्र या लिसाजू आकृति कहते हैं। इसका कार्य सिद्धांत निम्न दो बातों पर निर्भर करता है –
(1). इलेक्ट्रॉन पुंज वैद्युत क्षेत्र में विक्षेपित होता है।
(2). यह इलेक्ट्रॉन पुंज प्रतिदीप्त उत्पन्न करती है।

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO की कार्यविधि (CRO working in Hindi)

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO में शंकु के आकार की एक निर्वात नलिका लगी होती है जिसके किनारे पर एक CRT कैथोड किरण नलिका तन्तु C लगा होता है जिससे वैद्युत धारा द्वारा गर्म करके इलेक्ट्रॉन गन उत्सर्जित कराए जाते हैं तथा इसके चौड़े सिरे पर एक प्रतिदीप्त शील पर्दा (फाॅस्फोर-लेपित स्क्रीन) लगा होता है, जैसे कि चित्र-2 में दिखाया गया है।

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO
चित्र-2. कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO की कार्यविधि

कैथोड तन्तु C के गर्म होने पर इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। ये इलेक्ट्रॉन एक ऋणात्मक विभव वाले परिरक्षक S से गुजरने के कारण एक पतले किरण पुंज के रूप में संकेन्द्रित हो जाते हैं। तथा यह किरण पुंज एक धनात्मक एनोड प्लेट A के द्वारा त्वरित होता है तथा इसके केन्द्र पर बने छिद्र से होकर निकलते हैं।
यह इलेक्ट्रॉन पुंज ऊर्जा व क्षैतिज तलों में स्थित समान्तर पुंजों से होकर गुजरता है। इन्हें विक्षेपक X व Y-प्लेटें कहते हैं। अंत में इलेक्ट्रॉन पुंज पर्दे पर टकराकर एक तीव्र प्रकार बिंदु उत्पन्न करता है।

यदि X-प्लेटों पर एक विशेष परिवर्ती विभव Vx लगाया जाता है, तो इस विभव को समयाधार विभव कहते हैं।

इस प्रकार के विभव के कारण प्रकाश बिन्दु बार-बार क्षैतिज दिशा में एक ओर से दूसरी ओर चला जाता है। तथा तेजी के साथ अपनी प्रारंभिक स्थिति में वापस लौट आता है जिससे पर्दे पर एक क्षैतिज रेखा प्राप्त होती है जिसे ‘समयाधार रेखा’ कहते हैं। जिस वैद्युत विभव का तरंग रूप देखना होता है उसे Y-प्लेटों के मध्य आरोपित करते हैं।

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कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO स्क्रीन पर तरंग रूप चित्रण

उस प्रत्यावर्ती विभव V को जिसका तरंग रूप चित्रण करना होता है उसे CRO की Y-प्लेटों पर लगाया जाता है। विभाग V के प्रभाव से कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO की फाॅस्फोर-लेपित स्क्रीन पर प्रकाश स्पाॅट ऊर्ध्वाधर दिशा में एक सीधी रेखा में ऊपर-नीचे गति करेगा।
विभव V का वास्तविक तरंग रूप पाने के लिए कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO की X-प्लेटों के मध्य एक समयाधार विभव लगाते हैं। समयाधार विभव एक ऐसा विभव है जो समय के साथ एक निश्चित मान तक रेखीय रूप में बढ़ता है तथा फिर अचानक तेजी के साथ घटकर शून्य हो जाता है, जैसे कि चित्र-3 में दर्शाया गया है।

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO
चित्र-3. समयाधार विभव

इस विभव के प्रभाव से कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO में प्रकाश स्पॉट स्क्रीन पर क्षैतिज बाॅंए सिरे से दाॅंए सिरे की ओर जाता है। तथा पुनः बहुत तेजी के साथ अपनी प्रारंभिक स्थिति में वापस आ जाता है। यह क्षैतिज प्रसर्प दृष्टि निर्बन्ध के कारण कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO स्क्रीन पर एक स्थिर क्षैतिज रेखा के रूप में दिखाई देता है।

यदि जब Y-प्लेटों पर प्रत्यावर्ती विभव V तथा X-प्लेटों पर समयाधार विभव एक साथ लगाते हैं तो Y-प्लेटों पर लगे प्रत्यावर्ती विभव V के कारण स्पाॅट की ऊर्ध्वाधर गति X-प्लेटों पर लगे समयाधार विभव के कारण क्षैतिज प्रसर्प से संयुक्त होती है। तथा स्क्रीन पर विभव V का वास्तविक तरंग रूप प्राप्त होता है, जैसा कि चित्र-4 में प्रदर्शित है।

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO

अतः फ्लोरोसेंट स्क्रीन पर विभव के तरंग रूप का ‘स्थिर चित्रण’ करने के लिए समयाधार विभव की आवृत्ति को प्रत्यावर्ती विभव V की आवृत्ति के तुल्य या किसी गुणक के बराबर समायोजित करते हैं। अर्थात् समयाधार विभव को Y-प्लेटों पर लगे विभव के तुल्यकालत्व में रखते हैं।

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO के उपयोग

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO के मुख्य उपयोग निम्नलिखित है –

  • प्रत्यावर्ती विभव व धाराओं के परीक्षण व मापन में।
  • प्रत्यावर्ती सिग्नल की आवृत्तियों व कलाओं की तुलना में।
  • ट्रांजिस्टर के अभिलाक्षणिक वक्रों का पर्दे पर चित्रण करने में।
  • लौह-चुम्बकीय पदार्थों के शैथिल्य वक्रों के चित्रण में।
  • विभिन्न संगीत यन्त्रों की ध्वनि के तरंग रूपों के अध्ययन में।
  • पीजों वैद्युत प्रभाव के उपयोग द्वारा यांत्रिक प्रतिबलों के अध्ययन में।
  • राडार यन्त्र में प्राप्त सिग्नलों के बीच समयान्तराल मापन में।
  • टेलीविजन में।
  • दिष्ट विभव के मापन में।
  • विभिन्न प्रकार के तरंग रूपों के अध्ययन में।

कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO के FAQs –

1. CRO क्या है?

CRO का मतलब ‘कैथोड रे ऑसिलोस्कोप’ है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जिसका उपयोग विभिन्न विद्युत संकेतों को मापने और प्रदर्शित करने के लिए किया जाता है। एक CRO इन संकेतों को एक स्क्रीन पर एक ग्राफ के रूप में प्रदर्शित करता है जिसमें ऊर्ध्वाधर अक्ष पर वोल्टेज और क्षैतिज अक्ष पर समय अंकित होता है।

2. CRO full form in electronics in Hindi?

CRO full form⇒ Cathode Ray Oscilloscope (कैथोड रे ऑसिलोस्कोप) ।
CRO full form in electronics⇒ कैथोड किरण कम्पनदर्शी ।

3. CRT क्या है?

CRT का मतलब ‘कैथोड रे ट्यूब’ है इसे CRO का हृदय भी कहते हैं। इसमें स्थित इलेक्ट्रॉन गन (तरंग) के माध्यम से इलेक्ट्रॉन पुंज उत्पन्न होता है, जो फाॅस्फोर-लेपित स्क्रीन पर आरोपित होकर एक चमकदार बिंदु उत्पन्न करता है जिसके कारण एक सिग्नल आकृति बन जाती है। CRT में अधिकतम वोल्टेज की सप्लाई होती है।

4. CRT full form in Hindi?

CRT full form⇒ Cathode Ray Tube (कैथोड रे ट्यूब)
CRT full form in Hindi⇒ कैथोड किरण नलिका

5. CRO का उपयोग क्या है?

CRO का उपयोग आमतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, चिकित्सा एवं भौतिकी विज्ञान, इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से सीआरओ का उपयोग किया जाता है।

Note – सम्बन्धित प्रशन जोकि परीक्षाओं में पूछे जाते हैं?
Q.1 कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO की कार्यविधि की व्याख्या कीजिए तथा उसका चित्र आरेख बनाइए। तथा इसके उपयोग लिखिए।
Q.2 कैथोड किरण कम्पनदर्शी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए?
Q.3 कैथोड रे ऑसिलोस्कोप CRO का ब्लॉक आरेख खींचिए तथा स्क्रीन पर तरंग रूप बनना समझाइए। CRO के उपयोग भी लिखिए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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