द्रव्यमान केंद्र क्या हैं, बाह्य बलों की अनुपस्थिति में वेग नियत | Centre of Mass in Hindi

द्रव्यमान केन्द्र क्या है

“किसी वस्तु या निकाय का द्रव्यमान केन्द्र वह बिंदु होता है। जिस पर वस्तु का सम्पूर्ण द्रव्यमान एकत्रित या निहित माना जा सकें ।” यह निकाय का प्रतिनिधि बिन्दु होता है अतः यह “द्रव्यमान-केन्द्र (Center of Mass in Hindi)” कहलाता है। अर्थात्
प्रत्येक भौतिक निकाय से एक ऐसा निश्चित बिन्दु सम्बध्द होता है जिसकी गति सम्पूर्ण निकाय की गति को अभिलक्षित करती है। जब निकाय किसी बाह्य बल के अन्तर्गत गति करता है तो यह बिन्दु पर इस प्रकार गति करता है जैसे मानों निकाय का समस्त द्रव्यमान इस बिन्दु पर केन्द्रित हो तथा बाह्य बल भी इसी बिन्दु पर आरोपित हों। इस बिन्दु को निकाय का “द्रव्यमान-केन्द्र” कहते हैं। अर्थात् किसी भी निकाय की गति उस निकाय के द्रव्यमान केन्द्र की गति से व्यक्त की जा सकती है।

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दो कणों के निकाय का द्रव्यमान (या संहति) केन्द्र

माना कि दो कणों के एक निकाय में कणों के द्रव्यमान m1 तथा m2 हैं जोकि बिन्दुओं तथा पर स्थित है। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

द्रव्यमान केंद्र
द्रव्यमान केंद्र

अब माना यदि मूल बिंदु O के सापेक्ष कणों के स्थिति सदिश क्रमशः \overrightarrow{r_1} तथा \overrightarrow{r_2} हैं। तब निकाय के द्रव्यमान केन्द्र C का मूल बिंदु O के सापेक्ष स्थिति सदिश होगा।
\footnotesize \boxed{ \overrightarrow{R_{cm}} = \frac{m_1 \overrightarrow{r_1} + m_2 \overrightarrow{r_2}}{m_1 + m_2} }
अथवा
(m1 + m2) \overrightarrow{R_{cm}} = m1 \overrightarrow{R_{cm}} + m2 \overrightarrow{R_{cm}}
स्पष्ट है कि निकाय के कुल द्रव्यमान की तथा द्रव्यमान केंद्र के स्थिति सदिश की गुणा दोनों कणों के द्रव्यमानों की उनके स्थिति सदिशों के गुणनफलों के योग के बराबर होती है।

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n-कणों के निकाय का द्रव्यमान केन्द्र

यदि किसी कणों के निकाय में n-कण है। तो द्रव्यमान केन्द्र वह बिंदु है। जिसका स्थिति सदिश \overrightarrow{R} निम्न होगा।

M \overrightarrow{R} = m1 \overrightarrow{r_1} + m2 \overrightarrow{r_2} +….+ mn \overrightarrow{r_n} ….(1)

जिसमें M कणों का सम्पूर्ण द्रव्यमान है, अर्थात्
M = m1 + m2 +….+ mn

यहाॅ \overrightarrow{r_1} , \overrightarrow{r_2} , ….आदि कणों के स्थिति सदिश हैं। अतः

\overrightarrow{R} = \frac{Σm_nr_n}{Σm_n} ….(2)

अतः n-कणों के निकाय के लिए,
\overrightarrow{R} = \frac{m_1 \overrightarrow{r_1} + m_2 \overrightarrow{r_2} +…+ m_n \overrightarrow{r_n}}{m_1 + m_2 +….+ m_n} ….(3)

यदि X, Y, Z निकाय के द्रव्यमान केंद्र O के सापेक्ष नियतांक है। तथा (x1, y1, z1) निकाय के अन्य कणों O के सापेक्ष नियतांक है, तो

X = \frac{m_1x_1 + m_2x_2 +....+ m_nx_n}{m_1 + m_2 +….+ m_n}

= \frac{Σm_nx_n}{Σx_n} ….(4)

Y = \frac{m_1y_1 + m_2y_2 +……+ m_ny_n}{m_1 + m_2 +….+ m_n}

= \frac{Σm_ny_n}{Σy_n} ….(5)

Z = \frac{m_1z_1 + m_2z_2 +……+ m_nz_n}{m_1 + m_2 +….+ m_n}

= \frac{Σm_nz_n}{Σz_n} …..(6)

अतः
X = \frac{ \int xdx}{ \int dx} , Y = \frac{ \int ydx}{ \int dx} , Z = \frac{ \int zdx}{ \int dx} ….(7)

अतः समीकरण (1) का t के सापेक्ष अवकलन करने पर,
M \frac{d \overrightarrow{R}}{dt} = m1 \frac{d \overrightarrow{r_1}}{dt} + m2 \frac{d \overrightarrow{r_2}}{dt} +…

अतः \frac{d \overrightarrow{R}}{dt} , \overrightarrow{V} के बराबर द्रव्यमान केन्द्र का वेग हैं। अतः अन्य कणों के वेग V1, V2, …. आदि होंगे

M \overrightarrow{V} = m1 \overrightarrow{V_1} + m2 \overrightarrow{V_2} +….

\footnotesize \boxed{M \overrightarrow{V} = Σm_nV_n} ….(8)

या \footnotesize \boxed{ Σm_nV_n = 0 }

अतः समीकरण (8) से स्पष्ट है। कि सभी राशियों का योग सभी कणों के संवेगों का सम्पूर्ण योग है। परन्तु रेखीय संवेग संरक्षण के नियम के अनुसार, बाह्य बलों की अनुपस्थिति में सम्पूर्ण संवेग नियत रहता है।
अतः \footnotesize \boxed{ \overrightarrow{V} = एक स्थिरांक }

इसलिए हम कह सकते हैं कि बाह्य बलों की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केंद्र का वेग नियत रहता है। यह द्रव्यमान केंद्र का विशेष गुण है।
उदाहरण के लिए – जब कोई स्थिर वेग से गति करता हुऐ रेडियोएक्टिव न्यूक्लियर भिन्न-भिन्न कणों में टूटता है तो कण भिन्न भिन्न दिशाओं में भिन्न भिन्न वेगों से गति करते हैं किन्तु उनके द्रव्यमान केंद्र का वेग स्थिर हो जाता है।

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बाह्य बलों की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केंद्र का वेग नियत रहता है

यदि किसी निकाय के विभिन्न कणों के द्रव्यमान m1, m2, m3,—- आदि है। तथा उनकी स्थितियां \overrightarrow{r_1} , \overrightarrow{r_2} , \overrightarrow{r_3} , ….आदि है, तो उस निकाय के द्रव्यमान केन्द्र का स्थिति वेक्टर \overrightarrow{R} है।

\overrightarrow{R} = \frac{m_1 \overrightarrow{r_1} + m_2 \overrightarrow{r_2} + m_3 \overrightarrow{r_3} +...}{m_1 + m_2 + m_3 +...} ….(1)

अर्थात् \overrightarrow{R} = \frac{Σm \overrightarrow{r}}{Σm} ….(2)

पूरी वस्तु का द्रव्यमान Σm = M लेने पर,

\overrightarrow{R} = \frac{Σm \overrightarrow{r}}{M} ….(3)

समीकरण(3) का अवकलन करने पर,

\overrightarrow{V} = \frac{d \overrightarrow{R}}{dt} = \frac{1}{M} (m1 \frac{d \overrightarrow{r_1}}{dt} + m2 \frac{d \overrightarrow{r}}{dt} +…)
\overrightarrow{V} = \frac{1}{M} (m1 \overrightarrow{v_1} + m2 \overrightarrow{v} +….)
या \overrightarrow{V} = \frac{1}{M} ( \overrightarrow{P_1} + \overrightarrow{P_2} +…) = \frac{ΣP}{M}

अर्थात् \overrightarrow{V} = \frac{ \overrightarrow{P}}{M} या \overrightarrow{P} = M \overrightarrow{V}

या निकाय का संवेग = द्रव्यमान केन्द्र का संवेग

अर्थात् चूंकि बाह्य बलों की अनुपस्थिति में संपूर्ण संवेग स्थिर रहता है। अतः
PV = एक स्थिरांक या \footnotesize \boxed{ \overrightarrow{V} = स्थिरांक} ….(4)

अतः “बाह्य बलों की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केन्द्र का वेग स्थिर रहता हैं।”

द्रव्यमान केन्द्र का निर्देश फ्रेम क्या है

द्रव्यमान केन्द्र से सम्बन्ध निर्देश तन्त्र में द्रव्यमान केन्द्र का वेग शून्य होता है। अतः द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष कणों के निकाय का कुल रेखीय संवेग भी शून्य होगा, क्योंकि यह निर्देश फ्रेम द्रव्यमान केन्द्र के सापेक्ष विरामावस्था में रहता है।
\overrightarrow{P} = M \overrightarrow{V} = 0

\footnotesize \boxed{ \overrightarrow{V} = 0}

चाहे तो संस्था के कणों के वेग कुछ भी क्यों ना दिए हों।

Note – द्रव्यमान केन्द्र से सम्बन्धित प्रश्न –
Q 1 द्रव्यमान केन्द्र किसे कहते हैं? दर्शाइए कि बाह्य बलों की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केन्द्र का वेग स्थिर रहता है?
Q 2 द्रव्यमान केंद्र क्या होता है? सिद्ध करो कि बाह्य बलों की अनुपस्थिति में द्रव्यमान केंद्र का वेग स्थिर रहता है। तथा कणों के समूह का कुल रैखिक संवेग द्रव्यमान केंद्र के सापेक्ष शून्य रहता है?
Q.3 द्रव्यमान केंद्र किसे कहते हैं। द्रव्यमान केंद्र का सूत्र तथा किसी निकाय के संहति केंद्र की गति कैसी होती है समझाइए?

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