डोरी की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा क्या है | Characteristic Impedence of String in Hindi

डोरी की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा

जब किसी डोरी में अनुप्रस्थ तरंगे उत्पन्न की जाती हैं। तो डोरी का माध्यम उसके संचरण में अवरोध उत्पन्न करता है। डोरी द्वारा तरंगों के संचरण में उत्पन्न अवरोध को ही “डोरी की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा” कहते हैं।

डोरी की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा
डोरी की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा

गणितीय रूप से डोरी में अभिलम्बवत् बल तथा कण के वेग के अनुपात को डोरी की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा कहते हैं। तथा इसे Z से प्रदर्शित करते हैं। अर्थात् अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा,

Z = \frac{अभिलम्बवत् बल}{कण का वेग}

माना कि एक डोरी X-अक्ष दिशा में T तनाव से खींची है। तथा इसके कंपन Y-अक्ष दिशा में है। किसी क्षण डोरी के x बिंदु पर विस्थापन y है, तो

अभिलम्बवत् बल = तनाव का अभिलम्बवत् घटक
fy = – T sinθ

यदि डोरी का ढाल अनन्त से कम हो, तो

sinθ = θ = tanθ = \frac{∂y}{∂x}

fy = – T( \frac{∂y}{∂x} )L

x बिन्दु पर कण का वेग u = \frac{∂y}{∂t}

प्रतिबाधा Z = \frac{T'(∂y/∂x)}{(∂y/∂t)} …(1)

x-अक्ष दिशा में संचरित तरंग के लिए कण के वेग ( \frac{∂y}{∂t} ) तथा तरंग वेग v में सम्बन्ध है तथा

\frac{∂y}{∂t} = – v \frac{∂y}{∂x}
इसलिए, \frac{dy/dx}{dy/dt} = – \frac{1}{v}

अतः अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा Z = \frac{- T}{- v}
या Z = \frac{T}{v} …..(2)

यदि डोरी का रेखीय घनत्व m हो, तो तरंग वेग

v = \sqrt{ \frac{T}{m}}
या T = mv2

यह मान समीकरण (2) में रखने पर,

Z = \frac{mv^2}{v}

\footnotesize \boxed{Z = mv}

अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा = रेखीय घनत्व × तरंग वेग

“यही डोरी की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा के लिए व्यंजक कहलाता है।”

और पढ़ें… अवमन्दित आवर्ती दोलक क्या है

Note – Important point .

अनुदैर्ध्य तरंग में दाब-आधिक्य

माना जब अनुदैर्ध्य तरंग माध्यम में संपीडनों विरलनों के रूप में आगे बढ़ती है। सम्पीडनों पर कण अत्यन्त पास – पास रहते हैं। अतः दाब अधिकतम होता है। जबकि विरलनों पर कण दूर – दूर रहते हैं, अतः दाब न्यूनतम होता है। अर्थात्
यदि समतल प्रगामी तरंग के समीकरण से,
y = a sin(ωt – \frac{x}{v} )

यहां v तरंग चाल है तो दाब – आधिक्य,
p = – E \frac{dy}{dx} ….(1)

अतः जिसमें \frac{dy}{dx} तरंग का ढाल है। तथा E माध्यम की प्रत्यास्थता है।
यदि कण की चाल v हों, तो

u = – v. \frac{dy}{dx}

\frac{dy}{dx} = – \frac{u}{v}
इसलिए,

दाब-आधिक्य p = E. \frac{u}{v} ….(2)

“यही किसी अनुदैर्ध्य तरंग में दाब-आधिक्य का सूत्र कहलाता है।”

Note – सम्बन्धित प्रश्न –
Q. 1 किसी डोरी की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा से क्या अभिप्राय है? इसके लिए डोरी के रेखीय घनत्व के साथ तथा तरंग वेग v के पदों में सूत्र स्थापित कीजिए?
Q. 2 डोरी की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा से क्या तात्पर्य है ? इसकी परिभाषा तथा सूत्र दीजिए ?
Q. 3 किसी अनुदैर्ध्य तरंग में दाब-आधिक्य से क्या अभिप्राय है ? इसका व्यंजक लिखिए ?

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