pnp अथवा npn ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र की विधि समझाइए

pnp अथवा npn ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र

इस परिपथ में आधार (B) और संग्राहक (C) के मध्य निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र और उत्सर्जक (E) से निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र लिया जाता है। यहां ट्रांजिस्टर का संग्राहक (C) निवेशी और निर्गत परिपथों के लिए उभयनिष्ठ होता है। जैसा कि चित्र-1 में p-n-p ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास में परिपथ आरेख दर्शाया गया है।

इसे भी पढ़ें… ट्रांजिस्टर की परिभाषा, प्रकार, कार्यविधि, चित्र, उपयोग व अन्तर समझाइए।

p-n-p ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास
p-n-p ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास

अर्थात् इसी प्रकार, चित्र-2 में n-p-n ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास में परिपथ आरेख को प्रदर्शित किया गया है।

n-p-n ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास
n-p-n ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास

निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र

यदि उत्सर्जक वोल्टता Ve के स्थिर मान पर आधार वोल्टता Vb को शून्य से धीरे-धीरे बढ़ाते हैं, और आधार धारा Ib नापते जाते हैं। तब आधार वोल्टता Vb तथा आधार धारा Ib के मध्य ग्राफ खींच लेते हैं, जिससे निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त होता है। जैसा कि चित्र-3 में दिखाया गया है।

pnp अथवा npn ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास
निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र

निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र

यदि आधार धारा Ib के एक स्थिर मान के लिए यदि उत्सर्जक धारा Ie नापते हैं तब उत्सर्जक वोल्टता Ve व उत्सर्जक धारा Ie के बीच ग्राफ खींच लेते हैं। अतः ऐसे अनेक प्रेक्षणों के सेट से अभिलाक्षणिक वक्रों का एक समूह तैयार हो जाता है। अतः ये ‘निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र’ कहलाते है। जैसा कि चित्र-4 में दिखाया गया है।

pnp अथवा npn ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास
निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र

धारा लाभ γ का मान ज्ञात करना

यदि उभयनिष्ठ संग्राहक परिपथ में निवेशी धारा वास्तव में आधार धारा Ib होती है और निर्गत धारा उत्सर्जक धारा Ie होती है। अतः इस प्रकार, विन्यास में धारा प्रवर्धन उत्सर्जक धारा Ie में परिवर्तन (∆IE) और आधार धारा Ib में परिवर्तन (∆IB) का अनुपात है। इसे γ से व्यक्त करते हैं। अर्थात्
γ = \frac{∆I_E}{∆I_B} तथा α = \frac{∆I_C}{∆I_E}
परन्तु IE = IB + IC या ∆IE = ∆IB + ∆IC अथवा ∆IB = ∆IE – ∆IC

अब γ = \frac{∆I_E}{∆I_E - ∆I_C}
अथवा γ = \frac{∆I_E/∆I_E}{1 - ∆I_C/∆I_E}
अर्थात् \footnotesize \boxed{ γ = \frac{1}{1 - α} }

संग्राहक धारा

हम जानते हैं कि – IC = αIE + ICBO
लेकिन IE = IB + IC = IB + (αIE + ICBO)
इसलिए IE(1 – α) = IB + ICBO
अथवा IE = \frac{I_B}{1 - α} + \frac{I_{CBO}}{1 - α}
अर्थात् \footnotesize \boxed{ I_E = (β + 1)I_B + (β + 1)I_{CBO} }

संबन्धित प्रशन –
Q.1 pnp अथवा npn ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ संग्राहक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र बनाइए तथा ट्रांजिस्टर के निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र भी खींचिए। तथा ट्रांजिस्टर के α और γ गुणांक क्या है? उत्सर्जक-आधार और संग्राहक धाराओं में संबंध लिखिए और α व γ के बीच संबंध भी उत्पन्न कीजिए।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *