NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में निवेशी व निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करना।

NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र

इस उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में निर्गत व निवेशी परिपथों के अभिलाक्षणिक वक्रों के परिपथ आरेख बनाते समय कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए।
जैसे कि – (1). यदि उभयनिष्ठ उत्सर्जक-आधार (E-B) विन्यास अग्र दिशिक एवं उभयनिष्ठ संग्राहक-उत्सर्जक (C-E) विन्यास पश्च दिशिक होना चाहिए।
(2). NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में इस स्थिति के लिए संग्राहक टर्मिनल का विभव सबसे अधिक तथा उत्सर्जक टर्मिनल का विभव इन तीनों टर्मिनलों के विभव में सबसे कम होना चाहिए।
(3). जबकि आधार टर्मिनल का विभव एक समान तथा संग्राहक टर्मिनल से कम व उत्सर्जक टर्मिनल से अधिक होना चाहिए।

अब NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने के लिए आवश्यक परिपथ आरेख चित्र-1 में प्रदर्शित है।

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NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास
NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास

जैसा कि चित्र-1 में Vbb एक दिष्ट धारा स्त्रोत दिखाया गया है जो उच्च प्रतिरोध R1 के साथ एक विभव व्यवस्था का निर्माण करती हैं। अतः इस व्यवस्था का प्रयोग कर आधार-उत्सर्जक (B-E) टर्मिनलों को आवश्यकतानुसार अभिनत कर सकते हैं।
इन टर्मिनलों के बीच हुए विभव परिवर्तन की व्यवस्था व उत्सर्जक-आधार (E-B) टर्मिनलों के समांतर क्रम में संयोजित वोल्टमीटर Vbe की मदद से किया जा सकता है।

अतः इस विभव परिवर्तन के कारण आधार धारा ib की गणना आधार उत्सर्जक टर्मिनलों के श्रेणी क्रम में एक माइक्रो अमीटर (µA) की सहायता से करते हैं। इसी प्रकार, संग्राहक-उत्सर्जक (C-E) टर्मिनलों के बीच विभवान्तर की गणना समान्तर क्रम में संयोजित वोल्टमीटर Vce की मदद से तथा आधार धारा ib के परिवर्तन से संग्राहक धारा ic एवं संग्राहक-उत्सर्जक (C-E) टर्मिनलों के श्रेणी क्रम में संयोजित मिली अमीटर (mA) की सहायता से करते हैं।

यदि प्रतिरोधों R1 व R2 के सिरों पर स्पर्श उत्सर्जक टर्मिनल का विभव आधार टर्मिनल के विभव से अधिक रहता है, तो उत्सर्जक E टर्मिनल दोनों बैटरियों Vbb व Vcc के ऋणात्मक सिरों से जुड़ा रहता है। अतः उसका विभव ट्रांजिस्टर के अन्य दो टर्मिनलों संग्राहक C व आधार B से कम ही होता है।

अब यदि परिपथ में दो बैटरियों के स्थान पर केवल एक ही बैटरी के विभव का विभाजन करें, तो भिन्न-भिन्न टर्मिनलों को उनकी आवश्यकता के अनुसार विभव प्रदान कर सकते हैं।

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निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र

NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में नियत वोल्टता के लिए आधार धारा ib तथा आधार-उत्सर्जक (B-E) वोल्टता Vbe के बीच खींचा गया ग्राफ ही ‘निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र’ कहलाता है, जो चित्र-2 में प्रदर्शित है।

NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास
निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र

अब इसके लिए Vce = 1 वोल्ट को नियत रखकर Vbe के मान को धीरे-धीरे बढ़ाकर उनके संगत ib का मान पढ़ कर के ही ग्राफ खींचते हैं इससे हमें निम्न निष्कर्ष प्राप्त होते हैं –

  • यदि जब तक Vbe का मान 0.3 वोल्ट से अधिक नहीं होता है। तब तक ib का मान लगभग शून्य ही रहता है जैसे ही Vbe का मान बढ़ता है। वैसे ही ib का मान पहले धीरे-धीरे तथा कुछ देर बाद में बहुत तेजी के साथ बढ़ता है।
  • इन अभिलाक्षणिक वक्रों पर Vce का बहुत ही आंशिक प्रभाव पड़ता है।

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निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र

यदि NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में नियत आधार धारा ib के लिए संग्राहक-उत्सर्जक (C-E) वोल्टता Vce तथा संग्राहक धारा ic के मध्य खींचा गया ग्राफ ही ‘निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र’ कहलाता है। जिसा कि चित्र-3 में दर्शाया गया है।

NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास
निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र

अब यदि आधार धारा ib को 10 µA पर नियत रखते हैं, तो संग्राहक-उत्सर्जक (C-E) वोल्टता Vce को धीरे-धीरे बढ़ाकर संग्राहक धारा ic का मान पढ़कर एक वक्र खींचते हैं जिससे निम्न निष्कर्ष प्राप्त होते है –

  • यदि जैसे-जैसे संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टता Vce का मान बढ़ाते हैं वैसे-वैसे संग्राहक धारा ic का मान बढ़ता जाता है तथा कुछ देर बाद में यह स्थिर हो जाता है। अर्थात् यह संतृप्त हो जाता है।
  • यदि आधार धारा ib = 0 को दिखाने वाली रेखा व संग्राहक-उत्सर्जक (C-E) वोल्टता Vce अक्ष के बीच का भाग संस्तप्ध क्षेत्र भी कहलाता है। इसको प्रवर्धन क्रिया के रूप में प्रयुक्त नहीं किया जाता है।

संबन्धित प्रशन –
Q.1 NPN ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने की विधि का वर्णन कीजिए तथा आवश्यक परिपथ आरेख बनाइए? निवेशी व निर्गत परिपथों के अभिलाक्षणिक वक्रों से प्राप्त निष्कर्षों का उल्लेख कीजिए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
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