PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने की विधि समझाइए।

PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र

यदि PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में निवेशी एवं निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र चित्र-1 में दर्शाए गए परिपथ की सहायता से प्राप्त किए जा सकते हैं। इस PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र खींचने के लिए परिपथ आरेख बनाते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए कि उभयनिष्ठ उत्सर्जक आधार परिपथ के अग्र दिशिक एवं उभयनिष्ठ संग्राहक उत्सर्जक परिपथ के पश्च दिशिक रहें। जैसा कि चित्र-1 दिखाया गया है।

इसे भी पढ़ें… ट्रांजिस्टर की परिभाषा, प्रकार, कार्यविधि, चित्र, उपयोग व अन्तर समझाइए।

PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास
PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास

अब यदि आधार B को एक परिवर्ती बैटरी B1 के ऋणात्मक टर्मिनल से जोड़ते हैं तथा धनात्मक टर्मिनल को उत्सर्जक E से जोड़ते हैं। अतः आधार-उत्सर्जक (B-E) वोल्टता VB को एक बोल्ट मीटर (VBE) से तथा आधार धारा IB को एक माइक्रोमीटर (µA) से पढ़ते हैं।

इसी प्रकार, यदि संग्राहक C को एक दूसरी परिवर्ती बैटरी B2 के ऋणात्मक टर्मिनल से जोड़ देते हैं तथा धनात्मक टर्मिनल को उत्सर्जक E से जोड़ते हैं। अतः संग्राहक-उत्सर्जक (C-E) वोल्टता VC को एक दूसरे वोल्ट मीटर (VCE) के द्वारा जोड़ देते हैं तथा संग्राहक धारा IC को एक मिली अमीटर mA से पढ़ते हैं।

नोट – विद्यार्थी ध्यान दें कि इसमें चार प्रकार की चर (Variables) राशियां होती है। तथा निवेशी परिपथ के लिए आधार B वोल्टता VB व आधार धारा IB होते हैं, एवं निर्गत परिपथ के लिए संग्राहक C वोल्टता VC व संग्राहक धारा IC होती है। अर्थात् आधार परिपथ एक माइक्रो एम्पियर की कोटि का अल्प धारा परिपथ होता है। तथा संग्राहक परिपथ अपेक्षाकृत उच्च धारा परिपथ होता है।

और पढ़ें… p-n संधि डायोड क्या है?, pn संधि क्या है, p-n संधि डायोड के उपयोग समझाइए।

और पढ़े… जेनर डायोड क्या है?, परिभाषा, उपयोग, कार्यविधि तथा अभिलाक्षणिक वक्र खींचिए।

अब हम PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में निवेशी व निर्गत परिपथों के अभिलाक्षणिक वक्रों को विस्तार से समझते हैं।

निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र

यदि उभयनिष्ठ संग्राहक वोल्टता VC के स्थिर मान पर आधार वोल्टता VB को शून्य से धीरे-धीरे बढ़ाते जाते हैं। तथा आधार वोल्टता VB को एक वोल्टमीटर (VBE) से तथा आधार धारा IB को एक माइक्रोमीटर (µA) से मापते जाते है।
अब यदि आधार बोल्टता VB तथा आधार धारा IB के बीच एक ग्राफ खींच लेते हैं। जिससे निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त होता है।

PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास
निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र

अब चित्र-2 के अनुसार संग्राहक वोल्टेज VC = 0 तथा VC = 20 वोल्ट के लिए दो वक्र खींचे गए हैं। अतः इन दोनों वक्रों से स्पष्ट होता है कि आधार वोल्टता VB को बढ़ाने पर आधार धारा IB आरेखीय रूप से बढ़ती रहती है।

निवेशी अभिलाक्षणिक वक्र संग्राहक वोल्टता VC पर मामूली रूप से निर्भर करती है और ट्रांजिस्टर का निवेशी प्रतिरोध उभयनिष्ठ आधार विन्यास की तुलना में यह कुछ बड़ा होता है।

निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र

PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने के लिए आधार धारा IB के एक स्थिर मान के लिए संग्राहक बोल्टता VC को बदलते हुए इसके संगत संग्राहक धारा IC मापते जाते हैं।

अब यदि संग्राहक वोल्टेज VC व संग्राहक धारा IC के बीच ग्राफ खींच लेते हैं, तो चित्र-3 के अन्तर्गत दिखाया गया है कि इस प्रकार के अभिलाक्षणिक वक्रों का एक समूह तैयार कर लेते हैं।

PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास
निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र

अतः इन वक्रों से स्पष्ट है कि संग्राहक वोल्टता VC के अति निम्न मान के लिए संग्राहक धारा IC व संग्राहक वोल्टता VC के साथ तेजी से बदलती जाती है। परंतु वोल्टता VC का मान लगभग 0.5 वोल्ट से अधिक हो जाने पर संग्राहक धारा IC द्वारा ही निर्धारित होती है। तथा यह संग्राहक वोल्टता VC पर निर्भर नहीं करती है।

अर्थात् आधार धारा IB के शून्य मान के लिए भी एक क्षीण संग्राहक धारा IC उसमें विधमान रहती है। अतः यह अर्द्धचालक में नैज अर्ध चालन के कारण होती है। तथा यह ताप पर बहुत अधिक निर्भर करती है।

धारा लाभ β का मान प्राप्त करना

उभयनिष्ठ विन्यास के उपरोक्त वक्रों से स्पष्ट होता है कि उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में धारा का प्रवर्धन होता है और निवेशी धारा IB माइक्रोएम्पीयर में तथा निर्गत धारा IC मिली एम्पियर में मापी जाती है।
अतः PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में धारा प्रवर्धन की परिभाषा संग्राहक वोल्टता VC पर संग्राहक धारा IC में परिवर्तन तथा आधार धारा IB में परिवर्तन के अनुपात से दी जाती है। अतः इस प्रकार इसे β से व्यक्त करते हैं।
β = ( \frac{∆I_C}{∆I_B} )VC …(1)
अर्थात् ट्रांजिस्टर के लिए का मान लगभग होता है।

अब यदि तीनों प्रकार के ट्रांजिस्टर परिपथों में से उभयनिष्ठ आधार परिपथ की क्षमता सबसे अधिक होती है। चूंकि ट्रांजिस्टरों के अनुप्रयोग में (90 से 95)% तक इसी परिपथ को प्रयुक्त करते है।

धारा लाभ – अनेक परिपथों की तुलना में इसके लाभ निम्नलिखित हैं –

  • इसमें उच्च धारा लाभ परिसर 20 से 500 तक हो सकता है।
  • इसमें उच्च वोल्टता तथा शक्ति लाभ होता है।
  • इसमें निर्गत प्रतिबाधा एवं निवेशी प्रतिबाधा का अनुपात कम होता है।
    इसी प्रकार, यह विभिन्न क्रमों के बीच युग्मन के लिए इस परिपथ को एक आदर्श परिपथ माना जाता है।

धारा लाभ β तथा α के बीच संबंध

चूंकि हम जानते हैं कि
β = \frac{∆I_C}{∆I_B} तथा α = \frac{∆I_C}{∆I_E}
किन्तु IE = IB + IC या ∆IE = ∆IB + ∆IC
अथवा ∆IB = ∆IE – ∆IC
इस मान को समीकरण (1) में रखने पर,
β = \frac{∆I_C}{∆I_E - ∆I_C}
या β = \frac{∆I_C/∆I_E}{1 - ∆I_C/∆I_E} …(2)
अब \frac{∆I_C}{∆I_E} = α का मान समीकरण (2) में रखने पर,
अर्थात् \footnotesize \boxed{ β = \frac{α}{1 - α} } …(3)

सम्बन्धित प्रशन –
Q.1 किसी PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने की विधि समझाइए? तथा परिपथ आरेख भी खींचिए। तथा उभयनिष्ठ आधार की तुलना में इस परिपथ को क्यों अधिक प्रयुक्त किया जाता है? इन वक्रों से आप धारा लाभ β = \frac{α}{1 - α} को किस प्रकार ज्ञात कर सकते हैं।
Q.2 एक PNP ट्रांजिस्टर के उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में निवेशी तथा निर्गत परिपथों के अभिलाक्षणिक वक्र खींचिए तथा इन्हें सिद्ध कीजिए इसके धारा लाभ भी लिखिए।

  1. यान्त्रिकी एवं तरंग गति नोट्स (Mechanics and Wave Motion)
  2. अणुगति एवं ऊष्मागतिकी नोट्स (Kinetic Theory and Thermodynamics)
  3. मौलिक परिपथ एवं आधारभूत इलेक्ट्रॉनिक्स नोट्स (Circuit Fundamental and Basic Electronics)
Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *