कूलाॅम का नियम क्या है, कूलाम का सदिश रूप क्या है | Coulomb’s Law in Hindi

कूलाॅम का नियम

कूलाम का नियम

हमने पढ़ा है कि दो समान प्रकार के आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं तथा विपरीत प्रकार के आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। इससे यह पता चलता है कि दो आवेशों के बीच एक बल कार्य करता है जिसे “वैद्युत बल” कहते हैं। अर्थात् समान आवेशों के बीच वैद्युत बल प्रतिकर्षण-बल होता है तथा विपरीत आवेशों के बीच यह आकर्षण-बल होता है। यदि वैद्युत आवेश निर्वात् या वायु में स्थित हों, तो उनके बीच वैद्युत बल लगता है, तब
फ्रांसीसी वैज्ञानिक ‘चार्ल्स आगस्टिन कूलाॅम’ ने एक नियम प्रतिपादित किया जिसे “कूलाॅम का नियम” कहते हैं। इस नियम के अनुसार, “दो स्थिर बिन्दु आवेशों के मध्य लगने वाला वैद्युत बल इन दोनों आवेशों की मात्राओं q1 व q2 के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी r के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।” अर्थात् ये बल इन दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखाओं के अनुदिश होता है‌। अतः
माना यदि दो बिन्दु-आवेश q1 व q2 एक-दूसरे से r दूरी पर स्थित हैं जैसा कि चित्र-1 में दिखाया गया है।

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कूलाॅम का नियम
कूलाॅम का नियम

तब इन दोनों के बीच लगने वाला बल,
F ∝ \frac{q_1q_2}{r^2}
अथवा
\footnotesize \boxed{ F = k \frac{q_1q_2}{r^2} } …(1)
जहां k अनुक्रमानुपाती नियतांक है जिसका मान दोनों आवेशों के बीच के माध्यम तथा आवेश, दूरी व बल के मात्रकों पर निर्भर करता है। यहां k का मान 9.0 × 109 न्यूटन-मीटर2/कूलाॅम2 होता है। अतः निर्वात् या वायु में रखें दो बिन्दु-आवेशों के बीच लगने वाला बल,
F = (9.0 × 109) \frac{q_1q_2}{r^2} न्यूटन
माना यदि इस समीकरण में q1 व q2 = 1 कूलाॅम तथा r = 1 मीटर रखें, तो F = 9.0 × 109 न्यूटन होगा। अतः
“एक कूलाॅम वह आवेश होता है जो अपने से 1 मीटर की दूरी पर वायु में रखें अपने बराबर के समान आवेश को 9.0 × 109 न्यूटन के बल से प्रतिकर्षित करता है।” कूलाॅम (C), आवेश का बहुत बड़ा मात्रक है। इसे व्यवहार में हम माइक्रोकूलाॅम (µC) का उपयोग करते हैं।
1 माइक्रोकूलाॅम = 10-6 कूलाॅम
यदि बिन्दु आवेश वायु में स्थित हो तब समीकरण (1) में k के स्थान पर \frac{1}{4πε_o} लिखने पर,
\footnotesize \boxed{ F = \frac{1}{4πε_o} \frac{q_1q_2}{r^2} } न्यूटन
“यही कूलॉम के नियम का सूत्र है।” यहां \frac{1}{4πε_o} का मान 9.0 × 109 न्यूटन-मीटर2/कूलाॅम2 होता है। तथा नियतांक εo को ‘निर्वात् की वैद्युतशीलता’ कहते हैं।

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εo का मान तथा मात्रक

εo को वायु अथवा निर्वात् की वैद्युतशीलता कहते हैं। तथा इसका मान,
εo = 8.85 × 10-12 कूलाॅम2/न्यूटन-मीटर2

εo का विमीय सूत्र

इसका विमीय सूत्र कूलाॅम के नियम के सूत्र से ज्ञात करने पर,
εo का विमीय सूत्र = [M-1L-3T4A2]
तब M.K.S. पद्धति में εo का मात्रक किग्रा -1-मीटर -3-सेकण्ड 4-एम्पियर 2 है।

कूलाॅम के नियम का सदिश रूप

माना q1 व q2 दो बिन्दु आवेश है जो कि दो बिन्दु M व N पर रखे हैं इनके बीच दूरी r है जैसा कि चित्र-2 में दिखाया गया है।

कूलाॅम का सदिश रूप
कूलाॅम का सदिश रूप

अब माना q1 के कारण q2 पर लगने वाला बल \overrightarrow{F_{21}} तथा q2 के कारण q1 पर लगने वाला बल \overrightarrow{F_{12}} है, तब
\overrightarrow{F_{21}} = \frac{1}{4πε_o} \frac{q_1q_2}{r^2} \widehat{r_{12}} …(1)
यहां \widehat{r_{12}} , q1 से q2 की ओर संकेत करने वाला एकांक वेक्टर है।
तथा इसी प्रकार,
\overrightarrow{F_{12}} = \frac{1}{4πε_o} \frac{q_1q_2}{r^2} \widehat{r_{21}} …(2)
यहां \widehat{r_{21}} , q2 से q1 की ओर संकेत करने वाला एकांक वेक्टर है।
इस प्रकार, समीकरण (1) व (2), कूलाॅम के नियम को सदिश रूप में व्यक्त करती है। “यही कूलाॅम के नियम का सदिश स्वरूप कहलाता है।”

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कूलाॅम के नियम का महत्व

कूलाॅम का नियम परमाण्विक दूरी (≈ 10-11 मीटर) तथा नाभिकीय दूरी (≈ 10-15 मीटर) अर्थात् यह नियम बहुत बड़ी दूरियों से लेकर बहुत छोटी दूरीयों तक के लिए सत्य है। अतः इस नियम की सहायता से आवेशित वस्तुओं के बीच कार्य करने वाले बलों तथा परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन उसके नाभिक के साथ बंधकर परमाणु की व्याख्या करने में भी सहायता प्रदान करते है। अर्थात् दो या दो से अधिक परमाणु परस्पर बंधकर अणु की रचना करते हैं तथा अनेक परमाणु या अणु परस्पर बंधकर ठोसों तथा द्रवों की रचना करते हैं। परमाणु के नाभिक के भीतर स्थित कणों जैसे- प्रोटॉनों व न्यूट्राॅनों के बीच एक अन्य अति तीव्र आकर्षण बल कार्य करता है जो कि इन कणों को परस्पर बांधे रहता है। इसे ‘नाभिकीय बल’ कहते हैं। यह बल कणों के आवेशित अथवा अनावेशित होने पर निर्भर नहीं करता और न ही इसका कूलॉम के नियम से कोई संबंध होता है।

कूलॉम के सदिश रूप में महत्व

कूलाॅम के नियम को सदिश रूप में निम्नलिखित सूचनाओं द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता हैं।

  • चूंकि \widehat{r_{12}} तथा \widehat{r_{21}} विपरीत दिशाओं में एकांक वेक्टर हैं। अतः \widehat{r_{21}} = – \widehat{r_{12}} तब समीकरण (1) व (2) से स्पष्ट है कि \overrightarrow{F_{21}} = – \overrightarrow{F_{12}} अर्थात् दोनों आवेशों द्वारा एक-दूसरे पर लगने वाला बल के बराबर तथा विपरीत है। इस प्रकार कूलाॅम का नियम न्यूटन के तृतीय नियम का पालन करता हैं।
  • अब पुनः समीकरणों से दोनों आवेशों q1 व q2 को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश लगने वाले बल \overrightarrow{F_{12}} \overrightarrow{F_{21}} परस्पर विपरीत है। अर्थात् स्थिर वैद्युत बल केन्द्रीय बल होते हैं।

Note – कूलॉम के नियम से संबंधित प्रशन –
Q.1 दो बिन्दु-आवेशों के मध्य लगने वाले आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल के लिए कूलाॅम का वैधुत बल संबंधित नियम तथा सूत्र लिखिए?
Q.2 कूलॉम के नियम से आप क्या समझते हैं? इसे सिद्ध कीजिए तथा इस नियम को सदिश रूप में किस प्रकार व्यक्त किया जाता है।

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